0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर
प्लांट . . . 09
किसके इशारे पर सिंधिया के राह में शूल
बिछा रहे थापर!
(एस.के.खरे)
सिवनी (साई)। केंद्रीय उर्जा राज्य
मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद मध्य प्रदेश में निर्विवाद रूप से तेजी से
बढ़ता दिख रहा है, किन्तु उनकी राह में शूल भी नजर आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ
के प्रभाव वाले महाकौशल के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में
आदिवासियों के साथ अन्याय करने के आरोपों के साथ स्थापित होने वाले अवंथा समूह के
स्वामी गौतम थापर के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट
से सिंधिया की इमेज पर धक्का लगता प्रतीत हो रहा है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2009 से घंसौर में अवंथा समूह के सहयोगी
प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा 600 मेगावाट के दो पावर प्लांट एक ही स्थान
पर प्रस्तावित थे। बाद में एक छः सौ तो दूसरा 660 का कर दिया गया। 600 का 660 कैसे हुआ क्यों हुआ इस बारे में
संयंत्र प्रबंधन के जबड़े सिले हुए हैं।
बहरहाल इस संयंत्र की स्थापना के साथ ही
यहां स्थानीय स्तर पर आदिवासियों के शोषण, जमीनों में गफलत, मंदिर की जमीन का अधिग्रहण, खेती और पीने के लिए बनाए गए बरगी बांध
से व्यवसायिक उपयोग के लिए पानी लेना, सिवनी जिले को इसका लाभ ना मिल पाने
जैसी गंभीर शिकायतों की भरमार मीडिया में उछलीं थीं। बताया जाता है कि उस वक्त
तत्कालीन उर्जा मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के कारण ये
शिकायतें ठण्डे बस्ते के हवाले कर दी गई थीं।
अब जबकि उर्जा मंत्रालय का स्वतंत्र
प्रभार युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है और मध्य प्रदेश में यह चुनावी
साल है तब एक बार फिर ये शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। जानकारों का कहना है
कि संभवतः किसी क्षत्रप के इशारे पर ही मशहूर उद्योगपति गौतम थापर द्वारा जानबूझकर
इन शिकायतों के उछलने के बाद भी संज्ञान नहीं लिया जा रहा है ताकि मध्य प्रदेश में
कांग्रेस और सिंधिया के आदिवासी विरोधी होने पर मुहर लग सके।
(क्रमशः जारी)
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