शुक्रवार, 1 जून 2012

गेहूँ की लदाई, तुलाई, भराई आदि की मजदूरी देने की नीति यथावत रखे केन्द्र सरकार

गेहूँ की लदाई, तुलाई, भराई आदि की मजदूरी देने की नीति यथावत रखे केन्द्र सरकार
(दीप्ति)
भोपाल (साई)। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्री के.वी. थॉमस को पत्र लिखकर वर्तमान नीति को बरकरार रखते हुए किसानों को भुगतान किए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य से गेहूँ की लदाई, तुलाई, भराई आदि की मजदूरी की कटौती न करने का अनुरोध किया है। ऐसा न करने से किसानों पर 76 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार आयेगा।
मुख्यमंत्री श्री सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि मध्यप्रदेश में उपार्जन प्रक्रिया में बिचौलियों या ‘आढ़तियों’ की कोई भूमिका नहीं होती। यहाँ उपार्जन की सम्पूर्ण प्रक्रिया सहकारी समितियों के माध्यम से सम्पन्न होती है। लम्बे समय से यह प्रथा चली आ रही है कि समर्थन मूल्य पर उपार्जन प्रक्रिया में बेचे जाने वाले खाद्यान्न की हम्माली में लगने वाला पैसा सहकारी समितियाँ खर्च करती हैं। अनाज की लदान, तुलाई, बोरे में भराई तथा पैकेजिंग आदि का पैसा उपार्जन केन्द्र पर सहकारी समितियाँ स्वयं भुगतान कर देती हैं। राज्य की उपार्जन एजेंसियाँ सहकारी समितियों को इस खर्चे की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार कर देती थी और यह पैसा भारत सरकार से लेती हैं। भारत सरकार ने अभी तक इस प्रथा को जारी रखा, क्योंकि यह खर्च प्रावधिक रूप से निर्धारित दर से ज्यादा नहीं था।
बहरहाल, भारत सरकार ने अपनी नीति को बदलते हुए यह खर्च देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि यह खर्च स्वयं किसानों द्वारा उठाया जाना चाहिये था। इससे किसानों पर 76 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार आयेगा। धान और मोटे अनाज पर आने वाला खर्च इसके अतिरिक्त होगा।
मुख्यमंत्री ने पत्र में श्री थामस का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि पंजाब में भारतीय खाद्य निगम द्वारा यह खर्च किसानों पर नहीं डाला जाता। उन्होंने श्री थॉमस से आग्रह किया है कि वे किसानों के हित में उपार्जन पर आने वाले उपरोक्त व्यय की प्रतिपूर्ति की नीति पुनः लागू करवाने में सहयोग करें।

कॉल सेन्टर में प्राप्त हुए 26 लाख कॉल्स

कॉल सेन्टर में प्राप्त हुए 26 लाख कॉल्स
(शिल्‍पा) 
भोपाल (साई)।आम लोगों की शिकायतें दर्ज करने और शासन की योजनाओं तथा कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए भोपाल में स्थापित कॉल सेन्टर में अभी तक 27 लाख 7 हजार से अधिक कॉल्स प्राप्त हुए हैं। इनमें से एक लाख 3 हजार से अधिक कॉल्स शिकायत निवारण के संबंध में तथा शेष कॉल्स जानकारी प्राप्त करने के लिए हैं। कॉल्स से प्राप्त शिकायतों में से 91 हजार 454 का निराकरण हो गया है।
शासन स्तर पर निर्णय लिया गया है कि कॉल सेन्टर परियोजना की समीक्षा प्रतिमाह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नियमित विषय के रूप में की जाएगी।
कॉल सेन्टर की स्थापना सितंबर 2008 में की गयी थी। टोल फ्री नंबर पर फोन कर किसी भी स्थान से किसी के भी द्वारा काल सेन्टर में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है और शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
भोपाल स्थित इस कॉल सेन्टर की क्षमता 45 सीट की है। सेन्टर रोजाना सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक काम करता है। इसकी वेबसाइट का यूआरएल http://www.telesamadhan.mp.gov.in/ है। इस पर मध्यप्रदेश के किसी भी जिले से टोल फ्री नंबर 155343 एवं 1800-233-5343 पर किसी भी टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी के नेटवर्क से निःशुल्क फोन लगाया जा सकता है।
वर्तमान में कॉल सेन्टर के माध्यम से राज्य शासन के 20 विभाग/कार्यालय की 325 सेवाओं के संबंध में जानकारी देने तथा शिकायत निवारण का कार्य किया जा रहा है। शिकायत संबंधी कॉल्स के प्रभावी निराकरण के लिए संबंधित विभाग में चार स्तर पर चिन्हित अधिकारियों को सक्षम अधिकारी बनाया गया है। प्रत्येक स्तर पर शिकायत निवारण के लिए समय-सीमा निर्धारित है। कॉल सेन्टर के माध्यम से दर्ज की गयी शिकायतों का पूरा विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है।
कॉल सेन्टर परियोजना से जुड़े सभी विभागों से विभाग स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है। विभागों से कहा गया है कि वे शिकायतों का निराकरण यथासंभव अपने ही स्तर पर कर लें। यदि शिकायत चौथे स्तर तक पहुँच भी गई हो तो उसका समय-सीमा में निराकरण हो जाए। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जिले में पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को संपूर्ण जिले का नोडल अधिकारी बनाएँ। उनसे कहा गया है कि वे यथासंभव प्रथम या द्वितीय स्तर पर ही शिकायत का निराकरण कर लें। तृतीय और चतुर्थ स्तर पर शिकायत पहुँच भी जाए, तो उसका समय-सीमा में निराकरण किया जाए।

खतरे में है खुर्शीद की नौकरी!


खतरे में है खुर्शीद की नौकरी!

विधि अफसरों ने किनारा किया सेवाओं से

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के लिए अटार्नी जनरल वाहनवती इस समय मुसीबत का सबब बने हुए हैं। वाहनवती के रवैए के चलते विधि विशेषज्ञों ने अघोषित तौर पर कलम बंद हड़ताल कर रखी है। सरकार इस समय कानूनी राय को लेकर बेहद संकट में है। एक तरफ कानूनविद और कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी सीडी कांड में उलझे हुए हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस के राज में विधि विशेषज्ञ वाहनवती का विरोध कर काम बंद किए हुए हैं।
भारत गणराज्य के सालीसिटर जनरल गोपाल सुुब्रहाम्यणम, एडीशनल सालीसिटर जनरल पराग त्रिपाठी पहले ही अपनी नाराजगी जता चुके हैं। इसके उपरांत एडीशनल सालीसिटर जनरल मोहन परासरन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। कहा जाता है कि पारसरन के पिता की गांधी परिवार से नजदीकी के चलते उन्हें एएसजी की कुर्सी मिली थी। आटर्नी जनरल के कार्यालय में इन दिनों कौए उड़ते दिख रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान एमपी के वित्त मंत्री रहे कर्नल अजय नारायण मुशरान के दमाद और अतिरिक्त सालीसिटर जनरल विवेक तन्खा भी वाहनवती के नेतृत्व में काम करने में अपने आप को असहज ही महसूस कर रहे हैं।
पिछले दिनों अपने ससुर की जयंती मनाने जनरल विजय कुमार सिंह के साथ मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर गए विवेक तन्खा के इर्द गिर्द से इसी तरह की बातें सामने आ रही थीं कि वे भी वाहनवती के साथ काम नहीं कर सकते हैं। अब केंद्रीय विधि मंत्री सलमान खुर्शीद के सामने संकट आ खड़ा हुआ है। अगर यह मामला राजमाता श्रीमति सोनिया या युवराज राहुल के दरबार पहुंचा तो खुर्शीद की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

कोल आवंटन में गड़बड़ी नहीं: केंद्र


कोल आवंटन में गड़बड़ी नहीं: केंद्र
(प्रियंका श्रीवास्तव)
नई दिल्ली (साई)। टीम अण्णा और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच अब कोल ब्लाक को लेकर तकरार तेज हो गई है। टीम अण्णा पीएम को इस मामले में घेर रही है तो पीएमओ अब बचाव की मुद्रा में आता दिख रहा है। पीएम के सन्यास लेने की बात पर भी कहा जाने लगा है कि अगर यह हुआ तो हर भ्रष्टाचारी पकड़े जाने या साबित होने पर सन्यास लेकर अपनी खाल बचा लेगा।
केन्द्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। टीम अन्ना ने आरोप लगाया था कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का प्रभार था उन दिनों यह कथित गड़बड़ी हुई । कोयला मंत्रालय ने एक-एक करके इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि आवंटन की प्रक्रिया में पूरी तरह ईमानदारी बरती गई थी। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को इस तरह का एक बयान प्राप्त हुआ है।
मंत्रालय द्वारा जारी सात सूत्री बयान में कहा गया है कि १९९३ में कोयला खदान राष्ट्रीयकरण अधिनियम १९७३ में संशोधन के बाद निजी कंपनियों द्वारा अपने इस्तेमाल के लिए कोयला ब्लॉकों का आवंटन शुरू हुआ था और इसका उद्देश्य विशिष्ट उपयोगों के लिए निजी निवेश को आकर्षित करना था।जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था विकसित हुई, कोयले की मांग भी बढ़ी और यह  महसूस किया गया कि केवल कोल इंडिया लिमिटेड की इस मांग को पूरा नहीं कर सकेगी इसलिए निजी क्षेत्र की भूमिका पर गौर किया गया।

पेट्रोलियम कंपनियों के लिए समीति गठित


पेट्रोलियम कंपनियों के लिए समीति गठित
(महेश रावलानी)
नई दिल्ली (साई)। सरकार ने देश में पेट्रोलियम सेवा कंपनियों के काम-काज की समीक्षा के लिए समिति गठित की है। प्रधानमंत्री के र्थिक सलाहकार डा० सी रंगराजन की  अध्यक्षता वाली समिति, वर्तमान कंपनियों के कर-पूर्व निवेश और मौजूदा लाभ में भागीदारी की व्यवस्था का जायजा लेगी और भावी कंपनियों के लिए जरूरी संशोधनों की सिफारिश भी करेगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गठित ये समिति कंपनियों के अनुबंधों के कार्यान्वयन के प्रबंधन के  लिए उचित तरीका भी सुझाएगी। घरेलू स्तर पर उत्पादित होने वाली गैस और वास्तविक मूल्य निर्धारण की निगरानी के लिए फॉर्मूला तय करने के वास्ते  दिशानिर्देशों के स्वरूप और अंगों की समीक्षा करेगी। समिति इस साल अगस्त के आखिर में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

सेना को मिला नया सिंह


सेना को मिला नया सिंह

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। भारतीय सेना को जनरल वी.के.सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद अब जनरल बिक्रम ंिसंह के रूप में नया सेनाध्यक्ष मिल रहा है। आज नये थल सेना अध्यक्ष सिहं अपना कार्यभार संभालेंगे। वे जनरल वी के सिंह का स्थान लेंगें जो आज अवकाश ग्रहण कर रहे हैं।
गौरतलब है कि जनरल वी के सिंह ने कहा कि वे चाहते हैं उन्हें एक ऐसे सैनिक के रूप में याद किया जाए जिसने सेना की मर्यादा और प्रतिष्ठा बरकरार रखने की कोशिश की। पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में कल उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय और उनके बीच कोई गलतफहमी नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि देश की सेना हर चुनौती के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि देश की तीनों सेनाएं जिस भी स्थिति में है वो किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है और से-जैसे आधुनिकीकरण होता जाएगा उनकी क्षमता और बढ़ती जाएगी। इसके साथ ही साथ उन्होंने कहा कि उसी तरह से वे अपने सेना के बारे में कह सकता हैं कि थल सेना जो है किसी भी तरह के चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
उधर, एयर मार्शल डी सी कुमारिया कल वायु सेना के उप प्रमुख का कार्यभर संभालेंगे। इस समय वे वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख हैं।

विकास के नाम पर पर्यावरण की चढ़ाई जा रही बली


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  93

विकास के नाम पर पर्यावरण की चढ़ाई जा रही बली

पावर प्लांट के प्रदूषण के होंगे अनेक दुष्प्रभाव

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। पुण्य सलिला जीवन दायनी मां नर्मदा के नाम पर सामाजिक कुंभ भरवाकर, करोड़ों रूपए पानी में बहाने, घर घर जाकर चंदा और अनाज मांगने का स्वांग करने वाली देश के हृदय प्रदेश में शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा विकास के नाम पर पर्यावरण को छलनी करने के मार्ग प्रशस्त किए जा रहे हैं। भाजपा द्वारा अपने पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मंशाओं पर भी पानी फेरने से गुरेज नहीं किया जा रहा है।
उस मां नर्मदा को प्रदूषण का शिकार बनाने का जतन किया जा रहा है जिस मां नर्मदा की जयंती पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने परिवार के साथ जाकर हजारों मीटर की चुनरी को अर्पित किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी के असंगठित मजदूर संगठन के नेशनल प्रेजीडेंट प्रहलाद सिंह पटेल के साथ ही साथ संसद सदस्य अनिल माधव दवे द्वारा मां नर्मदा की यात्रा की जाती है, बावजूद इसके भाजपा सरकार द्वारा नर्मदा को प्रदूषण की गोद में भेजने की तैयारी कर ही ली गई है।
गौरतलब है कि जब रानी अवंती बाई सागर परियोजना अर्थात बरगी बांध की आधार शिला रखी गई थी तब मध्य प्रदेश के किसानों के चेहरों पर गजब का तेज नजर आया था। किसानों को लगा था कि इसके बनने से अथाह जलराशि एकत्र होगी जो साल भर खेती किसानी के काम आएगी। वस्तुतः हुआ भी यही, नर्मदा के तीरे बसे शहर, कस्बे, गांव, मजरे टोले आदि में खेती किसानी के साथ ही साथ दिनचर्या के लिए पानी सुलभ हो गया।
कालांतर में नर्मदा का जल प्रदूषित होना आरंभ हुआ। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि जीवनदायनी मां नर्मदा अमरकंटक से निकलने के कुछ किलोमीटर बाद ही प्रदूषित होना आरंभ हो गई। जबलपुर के उपरांत कई स्थानों पर इसका पानी पीने योग्य भी नहीं बचा।
विडम्बना देखिए, एमपी पीसीबी द्वारा खुद सर्वेक्षण करवाया गया और अब एमपी पीसीबी द्वारा खुद ही मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड को नर्मदा नदी के मुहाने पर कोल आधारित पावर प्लांट लगाने की अनुमति प्रदाय की जा रही है। इस पावर प्लांट की लगभग एक हजार फुट उंची चिमनी से उड़ने वाली राख जब बरगी बांध में समाएगी तो रानी अवंती बाई सागर परियोजना का पानी जहरीला होने से कोई नहीं रोक सकेगा।
कुल मिलाकर सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में पर्यावरण बिगड़े, प्रदूषण फैले, क्षेत्र झुलसे या आदिवासियों के साथ अन्याय हो इस बात से मध्य प्रदेश सरकार के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को कुछ लेना देना नहीं है। यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के।डी।देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)