शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

आजाद मुल्क के छियासठ साल, क्या खोया क्या पाया

आजाद मुल्क के छियासठ साल, क्या खोया क्या पाया

(लिमटी खरे)

भारत देश 1947 में 14 और 15 अगस्त की दर्मयानी रात को आजाद हुआ था। भारत देश को आजाद कराने में आजादी के मतवालों ने क्या क्या जुल्म नहीं सहे। फिरंगियों ने भारत के शूरवीरों पर क्या क्या सितम नहीं ढाए। आज जवान हो चुकी पीढ़ी को इस बात का इल्म नहीं होगा कि आजादी कितनी मुश्किल से हमें मिल सकी है। दरअसल शिक्षा को लेकर नित नए प्रयोगों से आज की युवा पीढ़ी इस बात से अनिभिज्ञ है कि आजादी किस कीमत पर हमें मिली है।
आज 15 अगस्त (स्वाधीनता दिवस) या 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) या 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के मायने अवकाश का और ड्राय डे (जिस दिन मदिरा का विक्रय प्रतिबंधित होता है) के रूप में जाना जाने लगा है। संजय दत्त अभिनीत लगे रहो मुन्ना भाईमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर जमकर प्रहार किया गया था, बावजूद इसके हुक्मरान चेत नहीं सके हैं। आज की युवा पीढ़ी मुन्ना भाई के सर्किट की तरह दो अक्टूबर पर ड्राय डे है कहकर मदिरा का स्टाक करने में जुट जाता है।
सिवनी की अगर बात की जाए तो सिवनी में आजादी के 66 सालों में से आधे समय अर्थात 33 साल ही महत्व के माने जा सकते हैं। इन 33 सालों अर्थात अस्सी के दशक के आगाज तक ही सिवनी में मूल्य आधारित राजनीति होती आई है। इसी दौरान सिवनी के विकास का ताना बाना बुना गया। सिवनी के लिए अगर किसी ने कुछ किया है तो वे हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा। कायस्थ कुल में जन्मीं सुश्री वर्मा ने अपना सारा जीवन सिवनी को न्योछावर किया है।
सिवनी में आयुर्विज्ञान संस्थान (मेडीकल कालेज) की क्षमता वाला जिला चिकित्सालय हो, एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध, संजय सरोवर परियोजना का भीमगढ़ डेम हो, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय हो, सिंचाई विभाग का मुख्य अभियंता कार्यालय हो, लोक कर्म विभाग का अधीक्षण यंत्री कार्यालय हो, राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्यपालन यंत्री कार्यालय हो (जो कुछ सालों पहले यहां से उठकर चला गया है), दूध डेरी हो, सब कुछ सुश्री विमला वर्मा की देन है।
सुश्री विमला वर्मा को उनके इर्द गिर्द घूमने वालों ने ही षणयंत्र के तहत घर बिठा दिया। जैसे ही सुश्री वर्मा ने सक्रिय राजनीति से किनारा किया वैसे ही कांग्रेस के मौका परस्त लोगों ने शहनाई बजाई, उत्सव का आयोजन किया, राग मल्हार गए, और फिर हुई हरवंश सिंह ठाकुर की ताजपोशी। हरवंश सिंह ठाकुर के हाथों जैसे ही सिवनी में कांग्रेस की कमान आई, उसके बाद से सिवनी में सियासी अवमूल्यन आरंभ हो गया।
कहते हैं कि हरवंश सिंह के तबले की थाप पर ना केवल कांग्रेस वरन् भाजपा का संगठन भी कत्थक करता आया है। वरना क्या कारण है कि आमानाला जैसे काण्ड में हरवंश सिंह के खिलाफ भाजपा की पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक बंडोल थाने से चालान कोर्ट में पेश नहीं करवा सकीं। अंततः नाटकीय तरीके से हरवंश सिंह को ही इस प्रकरण की समयसीमा समाप्त होने के चलते खात्मा का आवेदन देना पड़ा। यह भाजपा संगठन के मुंह पर एक जबर्दस्त तमाचे से कम नहीं है, जिसकी गूंज गत दिवस सिवनी के कार्यकर्ता सम्मेलन में नरेश नीता हटाओ, भाजपा बचाओनारे के रूप में सुनाई दी गई है।
हरवंश सिंह को काफी साल पहले मनराखनलालनाम दिया गया था। हरवंश सिंह ने दिग्विजय सिंह, अर्जुन सिंह, कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुंदर लाल पटवा, उमा भारती, बाबू लाल गौर, शिवराज सिंह चौहान सहित कांग्रेस और भाजपा के ना जाने कितने क्षत्रपों को साधा था। उनकी अंतिम यात्रा में कांग्रेस के नेता तो रस्म अदायगी कर रवाना हो गए पर भाजपा के नेता अंत तक रूके रहे, यह जीता जागता प्रमाण था हरवंश सिंह की लोकप्रियता का।
हरवंश सिंह ठाकुर ने लगभग 25 सालों तक सिवनी में कांग्रेस की कमान परोक्ष तौर पर संभाली और सिवनी में सत्ता की धुरी बने रहे। हरवंश सिंह ठाकुर का मीडिया प्रबंधन कौशल गजब का था। यह प्रबंधन कौशल सिवनी को छोड़कर अन्य जिलों के लिए तारीफे काबिल था। सिवनी में तो उनके चंद गुलामकथित मीडिया मुगलोंने हरवंश सिंह को भगवान बनाने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी थी। आज वे ही कथित मीडिया मुगलहरवंश सिंह के पुत्र का कुछ नेता नुमा ठेकेदारों के चाहने पर विरोध करते नजर आ रहे हैं।
हरवंश सिंह के खाते में सिवनी में एसटीडी सुविधा के अलावा और कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। हरवंश सिंह ने सिवनी को जलावर्धन योजना की सौगात दी है। करोड़ों अरबों रूपए खर्च करने के बाद भी आज सिवनी के नागरिकों को एक वक्त भी साफ शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है जबकि यह दो वक्त पानी देने के लिए बनी थी। इस मामले में उस समय के विधायक नरेश दिवाकर, उर्मिला सिंह, बेनी परते, शशि ठाकुर, डॉ.ढाल सिंह बिसेन, कमल मस्कोले, श्रीमति नीता पटेरिया ने कभी आवाज नहीं उठाई। आज किस मुंह से ये नेता जनता का सामना करने का साहस जुटा पा रहे हैं, जबकि ये कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह का विरोध ही नहीं कर पाते थे।
आज यह सोचना बेहद जरूरी हो गया है कि आजादी के इन 66 सालों में हमने क्या पाया? क्या खोया है? जो मिला है वह सुश्री विमला वर्मा ने दिया है पर उसे भी आज के नेता संभाल कर नहीं रख पा रहे हैं। सिवनी में कांग्रेस भाजपा के नेता स्थानीय समस्याओं से विमुख हैं। देश और प्रदेश सरकार पर तोहमत लगाना उनका प्रिय शगल बनकर रह गया है। स्थानीय समस्याओं पर एक शब्द भी बोलना उनकी शान के खिलाफ है।
अगर देश प्रदेश की सरकारों की इतनी ही चिंता है तो हमारी निजी राय में बेहतर होगा कि वे दिल्ली या भोपाल में जाकर बयानबाजी करें। सिवनी की जनता को स्थानीय समस्याओं से मुक्त कराने में आखिर इन नेताओं की जान क्यों निकल जाती है। जाहिर है हर कोई किसी ना किसी से कहीं ना कहीं उपकृत है। अगर विधायक के खिलाफ बोला तो हमारी . . . बंद हो जाएगी? अध्यक्ष अपना वाला है, हमें क्या करना है, उसकी पूंछ पर क्यों पैर रखें, क्यों खुजाएं जबरन? जैसे जुमलों में ही इन नेताओं की जनसेवा हो जाती है। अंततः ये नेता अपना पूरा हुनर केंद्र की कांग्रेस और प्रदेश की भाजपा सरकार पर दिखाते नजर आते हैं।
आज अगर आप जहां खड़े हैं वहां से देखें तो सियासी बियावान में नैतिक मूल्यों का पतन साफ तौर पर पाएंगे। सिवनी के विकास के मामले में विज्ञप्तिवीर प्रवक्ता और नेताओं ने जिले की जनता को भरमाने का कुत्सित प्रयास किया है, जिसकी निंदा की जानी चाहिए। इन नेताओं को इस बात से सबक लेना चाहिए कि आज हरवंश ंिसंह ठाकुर जैसे कद्दावर क्षत्रप के अवसान के बाद कुंवर शक्ति सिंह और राजा बघेल जैसे नेता प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर उनकी मिट्टी खराब करने से नहीं चूक रहे हैं। आज जो स्थिति का निर्माण हुआ है उससे निश्चित तौर पर हरवंश सिंह से दिल से जुड़े लोग अवश्य आहत हो रहे होंगे।

इसी बात को समझना जरूरी है कि हम आज चंद सिक्कों की खनक के लिए अपना दीन ईमान पैसा ना बनाएं, आने वाली पीढ़ी आपको कोसेगी या पूजा करेगी यह बात सिवनी में ही साफ हो रही है। एक ओर जीते जी सुश्री विमला वर्मा की तारीफों में कशीदे गढ़े जा रहे हैं वहीं, दूसरी और अवसान के बाद भी हरवंश सिंह की मिट्टी पलीत की जा रही है। सोचना सिवनी के सियासी बियावान में विचरण करने वाले नेताओं को है, कि वे आने वाले समय में अपनी छवि किस तरह की बनाना चाहते हैं? आज समय है हम अपने आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत, आशावादी, पढ़ी लिखी बनाना चाह रहे हैं, या उसके हाथ में माउजरदेकर उसे सट्टा विशेषकर क्रिकेट सट्टा किंग, जुंए की फड़ का संचालक, रंडी नचाने वाला, आतंक बरपाने वाला बनाना चाह रहे हैं?

सद्भाव पर किया कलेक्टर ने ढाई करोड़ का जुर्माना

सद्भाव पर किया कलेक्टर ने ढाई करोड़ का जुर्माना

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी भरत य्ाादव ने शासकीय्ा भूमि पर गौण खनिज गिट्टी के अवैध भंडारण के लिय्ो मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी तहसील व जिला सिवनी पर २ करोड ४१ लाख ५0 हजार रूपय्ो का जुर्माना लगाय्ाा है।
जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा द्वारा १४ अगस्त को इस आशय्ा का आदेश पारित किय्ाा गय्ाा है। मध्य्ाप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) निय्ाम २00६ के अंतर्गत मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी, तहसील व जिला सिवनी पर लगाय्ाा गय्ाा य्ाह जुर्माना इस कंपनी द्वारा शासकीय्ा भूमि पर अवैध रूप से भंडारित एवं जब्त की गई ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी के बाजार मूल्य्ा २४,१५,000 रूपय्ो के ठीक दस गुना के बराबर है।
कंपनी द्वारा अर्थदंड की राशि शासकीय्ा कोष में जमा करने के उपरांत ही प्रकरण में जब्त की गई गौण खनिज गिट्टी जब्ती से मुक्त कर कंपनी को सौंपने के आदेश जारी किय्ो गय्ो है। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर जब्त गौण खनिज ६९00 घनमीटर गिट्टी शासन के पक्ष में राजसात कर ली जाय्ोगी।
प्रकरण कुछ य्ाूं है कि खनिज निरीक्षक सिवनी द्वारा ७ जुलाई २0११ को ग्राम फुलारा, तहसील व जिला सिवनी स्थित शासकीय्ा भूमि खसरा नंबर १८७ का निरीक्षण किय्ाा गय्ाा था। इस भूमि पर मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी द्वारा ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी अवैध रूप से संग्रहित/भंडारित करना पाय्ाा गय्ाा। खनिज निरीक्षक ने जांच प्रतिवेदन तैय्ाार कर प्रकरण जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा सिवनी में लगा दिय्ाा। प्रतिवेदन/प्रकरण के आधार कंपनी को ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी के बाजार मूल्य्ा २४,१५,000 रूपय्ो की दो गुना राशि अर्थात ४८,0,000 का अर्थदंड लगाने के लिय्ो २२ नवंबर २0११ को शोकॉज नोटिस जारी किय्ाा गय्ाा।
कंपनी द्वारा नोटिस का लिखित उत्तर एक मार्च २0१२ को प्रस्तुत किय्ाा गय्ाा। जिसमें कंपनी ने जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा में गौण खनिज के भंडारण के लिय्ो अनुमति देने का आवेदन दिय्ाा, जो कि सुनवाई के उपरान्त तत्कालीन पीठासीन अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिय्ाा गय्ाा। भंडारण की अनुमति प्राप्त न होने के बावजूद भी कम्पनी द्वारा शासकीय्ा भूमि पर अवैध भंडारण के लिय्ो की गई स्वीकारोक्ति के आधार पर अधिरोपित अर्थदंड की राशि जमा न करने और अवैधानिक रूप से गौण खनिज का भंडारण किय्ाा जाना प्रमाणित होने पर जिला दंडाधिकारी भरत य्ाादव द्वारा जब्त खनिज के बाजार मूल्य्ा की दुगनी राशि के स्थान पर बाजार मूल्य्ा की दस गुनी राशि का अर्थदंड लगाय्ाा गय्ाा है।

भाजपा का हुआ कांग्रेसीकरण

भाजपा का हुआ कांग्रेसीकरण

पदलोलुपता ने दिलाई संघ और भाजपा के सारे सिंद्धांतो को तिलांजलि

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। पार्टी विद डिफरेंस और स्वयं को कथित रूप से रा.स्व.संघ के अनुशासन और सिद्धांतों का ध्वजवाहक प्रचारित करने वाली भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों की पोल सरे राह 13 अगस्त को सड़को पर खुलती दिखाई दी।
अवसर था प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर तीसरी बार सरकार बनाने के प्रयास में कार्यकर्ताओं में उर्जा भरने के आशय से विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री अरविदं मेनन और प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री तथा पड़ौसी जबलपुर जिले की पाटन जो परिसीमन के पूर्व तक इसी सिवनी संसदीय क्षेत्र का अंग था के विधायक अजय विश्नोई को पंहुचना था किंतु परिस्थितियों को भांप कर अरविंद मैनन तो अपना कार्यक्रम निरस्त कर गये किंतु पूर्व से सिवनी से परिचित और किसी समय प्रदेश मंत्री के रूप में सिवनी जिले के प्रभारी रहे विश्नोई को इस मंशा से सिवनी भेज दिये कि शायद पूर्व परिचय के आधार पर वे जिले के कार्यकर्ताओं को समझाने में सफल हो जाायेंगे।
कहा जा रहा है कि नेताद्वय का वह पूर्वानुमान सार्थक नहीं हो पाया। लगातार कार्यक्रम बनाकर उसे तीन चार बार निरस्त कर चुके अरविंद मेनन की कार्यशैली और स्थानीय नेताओं की कार्यप्रणाली से कथित रूप से त्रस्त सिद्धांतवादी भाजपा के कार्यकर्ता इतने आक्रोशित हुए कि अपने ही नेताओं के हटाओं और मुर्दाबाद के नारे सड़को पर लगाने लगे।
जब से स्थानीय कार्यकर्तााओं का इस बात की भनक लगी है कि प्रदेश के संगठन महामंत्री के नाते टिकट वितरण के सर्वाधिक शक्तिसंपन्न अरविंद मैनन ने छिंदवाड़स में सिवनी विधानसभा के तीनों संभावित सवर्ण वर्र्गीय प्रत्याशियों को इस बार शंात रहने की फटकार लगाई है और प्रदेश के नेतृत्व इस बार किसी पिछड़ा वर्ग के नेता को सिवनी से उम्मीदवार बनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है तब से ही समूचे जिले के पिछ़ा वर्ग के तमाम नेता अपना पूरा ध्यान सिवनी पर केंद्रित कर चुके हैं।
माना जा रहा है कि उस की ही एक झलक गत 13 अगस्त को पैराडाइज लॉन में दिखाई दी थी। यद्यपि पिछड़ा वर्ग के नेताओं के प्रयासों और महत्वाकांक्षाओं को अनुचित नही कहा जा सकता किंतु अभिव्यक्ति का तरीका किसी भी द्रष्टि से सही नहीं माना जा सकता।
राजनीति में महत्वाकांक्षा एक अच्छा लक्षण माना जाता है किंतु उसे प्राप्त करने के लिये सीमाओं का उल्लंघन किसी भी सभ्य समाज विशेषकर सिद्धांतों पर आधारित राजनीति करने का दम भरने व वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं को शोभ नहीं देता। 13 अगस्त की घटना से यह तो कुछ हद तक सामने आ गया है कि सत्ता के तामझाम के वशीभूत होकर बड़ी संख्या में ऐसे लोग भाजपा के परिवार में शामिल होते जा रहे हैं जिन्हे पार्टी के सिद्धांतों की न तो जानकारी है और न ही वे उसे समझना चाहते है।
इसके साथ ही पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों को भी इस बात पर गहन चिंतन करना नितांत आवष्यक है कि परिवार के विस्तार की अंधीदौड़ में वे ऐसे लोगों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं जो किसी भी समय स्वयं उनके लिये ही भस्मासुर बनने से नहीं चूकते हैं।
पार्टी के प्रति समर्पित और निःस्वार्थ रूप से सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर अवसरवादी तत्वों को प्रोत्साहित करने का ऐसा खमियाजा तो नेताओं को भोगना ही पड़ता है और उसका प्रदर्शन 13 अगस्त की भंाति हो तो उसके लिये स्वयं नेताओं को ही आत्मावलोकन करना चाहिये।

कारण और परिणाम चाहे जो भी हों कितंु 13 अगस्त की घटनाये जिला विशेषकर सिवनी विधानसभा क्षेत्र कि लिये शुभ लक्षण नहीं मानी जा सकती। जिला मुख्यालय से चलने वाली बयार यदि जिले भर में फैल गई तो ऐसा न हो कि 1978 का इतिहास दोहरा जाये जब प्रदेश में तो जनता पार्टी की सरकार थी किंतु जिले की सभी पाचं सीटों पर कांग्रेस का परचम फहराया था, यदि जिले के लिये ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण समय आया तो जिले के विकास का जो अपूर्णनीय नुकसान होगा उसके के लिये जिले की जनता सत्ताधारी दल के पदाधिकारयिां ओर कथित रूप से अपना अधिकार मांगने वाले नेतओं को कभी माफ नहीं करेगी।

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

जिले के लिए नासूर बन गया है बरेला का पावर प्लांट!

जिले के लिए नासूर बन गया है बरेला का पावर प्लांट!

(प्रेम कुमार जैन)

घंसौर (साई)। लखनादौन विधानसभा के अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड के ग्राम बरेला में लगने वाले देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान् मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का पावर प्लांट काम आरंभ करने के पहले ही सिवनी जिले के लोगों को करंट के झटके दे रहा है। कथित तौर पर घंसौर क्षेत्र के कुछ ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों के कब्जे में संयंत्र प्रबंधन पूरी तरह बेबस ही नजर आने लगा है।
बताया जाता है कि घंसौर क्षेत्र के कुछ ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा क्षेत्र के भोले भाले आदिवासियों को जब चाहे तब गुमराह कर संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन पर बिठा दिया जाता हैं। बताया जाता है कि उक्त ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा बाद में पावर प्लांट प्रबंधन से इन आदिवासियों को शांत कराने के एवज में लंबी रकम ऐंठ ली जाती है।
पिछले दिनों झाबुआ पावर लिमिटेड के इस पावर प्लांट को पानी प्रदाय करने के लिए बरगी बांध में गड़ाघाट से बरेला तक खींची जाने वाली पाईप लाईन के रास्ते में पड़ने वाले एक मंदिर को हटाने के लिए आदिवासी तैयार नहीं थे। संयंत्र के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस मंदिर को हटाने के एवज में किसी बिचौलिए द्वारा एक करोड़ की राशि की मांग रखी गई थी।
सूत्रों ने आगे बताया कि जब मामला नहीं सुलटा तब संयंत्र प्रबंधन ने थक हार कर ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों की शरण में अपने आप को ले जाया गया। चर्चा है कि उक्त ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों को इस काम के लिए पच्चीस लाख और आंदोलन करने वालों को पांच लाख रूपए की राशि दी गई है। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह बात तो संयंत्र प्रबंधन जाने या नेता नुमा ठेकेदार, पर जबसे बरेला में यह पावर प्लांट संस्थापित होना आरंभ हुआ है घंसौर क्षेत्र का अमन चैन छिन गया है।
2009 में पहली लोकसुनवाई के समय संयंत्र प्रबंधन ने क्षेत्र के लोगों के लिए लोक लुभावने वायदे किए थे। उस वक्त कहा गया था कि संयंत्र की संस्थापना का काम आरंभ होते ही क्षेत्र में खुशहाली आ जाएगी। लोगों को रोजगार मिलेगा, बच्चों की पढ़ाई के लिए संयंत्र प्रबंधन द्वारा स्कूल खोले जाएंगे, बेहतर इलाज के लिए चिकित्सालय खोले जाएंगे।
जबसे काम आरंभ हुआ उसके बाद से घंसौर क्षेत्र के लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि क्षेत्र के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों ने संयंत्र प्रबंधन के साथ सांठगांठ कर आदिवासियों को छलना आरंभ कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा ग्रामीणों की भावनाएं भड़काकर उन्हें संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ खड़ा कर दिया जाता है, और बाद में ग्रामीण जब आंदोलन करने लगते हैं तो ये लोग पीछे से हट जाते हैं और संयंत्र प्रबंधन से हाथ मिलकार अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं।
ग्रामीणों में संयंत्र प्रबंधन और इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों के प्रति रोष और असंतोष जमकर पनप रहा है। अप्रैल माह में संयंत्र के एक कर्मचारी फिरोज द्वारा चार साल की मासूम बाला के साथ किए गए दुराचार के उपरांत उसकी मौत हो गई थी। मासूम गुडिया की मौत पर भी इन ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों ने दुख नहीं जताया और एक बार फिर जाकर संयंत्र प्रबंधन के साथ खड़े होकर अपना उल्लू सीधा किया।

हाल ही में संयंत्र के एक सुरक्षा कर्मी ने आठवीं की एक कोमलांगी बाला को न केवल अश्लील इशारे किए वरन् उसके सामने सड़क पर नग्न भी हो गया था। इस मामले में भी घंसौर क्षेत्र में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन को साध कर रखा गया है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन द्वारा गौतम थापर के स्वामित्व वाले इस पावर प्लांट के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। इसी के चलते शांति का टापू घंसौर क्षेत्र अब आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बनकर रह गया है।

एक दूसरे का दौना लुढ़काने में लगे भाजपाई

एक दूसरे का दौना लुढ़काने में लगे भाजपाई

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन मंगलवार को सिवनी आ रहे हैं, वे कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। भाजपा के बीच चल रही है चर्चाओं के अनुसार अरविंद मेनन 13 अगस्त को प्राथमिक तौर पर सिवनी के चारों विधानसभा क्षेत्र के कुछ उम्मीदवारों की टिकिट लेकर आ रहे हैं।
अरविंद मेनन के सिवनी आगमन को लेकर भाजपा में दो दिनों से सुगबुगाहट व्याप्त है। दो दिनों से जिला मुख्यालय सिवनी वाली विधानसभा के उम्मीदवारों के बीच रस्साकशी तेज हो गई है। सिवनी सीट के लिए मुख्य रूप से वर्तमान विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, जिला भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर, नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, पूर्व जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन आदि के नाम सामने आ रहे हैं।
इन सभी संभावित दावेदारों के बीच अब एक नया प्रयोग चल रहा है जो सबसे अधिक चर्चित हो रहा है। इस प्रयोग में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए अब भाजपा के क्षत्रपों ने मीडिया मैनेजमेंट आरंभ कर दिया है। मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ खबरें प्लांट कर उसकी कटिंग के सहारे अपनी दावेदारी की फाईल मोटी करने के स्थान पर वे विरोधियों की दावेदारी ना हो पाए इसकी चिंता में तेजी से काम कर रहे हैं।
पिछले दिनों मीडिया में नीता पटेरिया, नरेश दिवाकर, राजेश त्रिवेदी आदि के कारनामे सुर्खियों में रहे हैं। रोजाना प्रदेश कार्यालय से लेकर दिल्ली कार्यालय में बैठे अपने आकाओं को अखबारों की इन कतरनों से आवगत कराया जा रहा है। साथ ही साथ यह अवश्य ही कहा जा रहा है कि भाई साहब भले ही हमारी टिकिट पक्की ना हो पर फलां की टिकिट कटना जरूरी है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पिछले दिनों सिवनी के एक प्रतिनिधि मण्डल से चर्चा के दौरान अरविंद मेनन सिवनी में भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी राय दे चुके हैं। सूत्रों ने कहा कि अरविंद मेनन का कहना था कि जिला भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर ने उनके द्वारा भेजे गए बी फार्म पर शंका जाहिर की है।
सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा वर्तमान विधायक श्रीमति नीता पटेरिया के बारे मे अरविंद मेनन का कहना था कि उनका ‘‘कमिटमेंट‘‘ पूरा हो चुका है, अब उनसे कुछ लेना देना बाकी नहीं रह गया है। रही बात राजेश त्रिवेदी की तो अरविंद मेनन ने राजेश त्रिवेदी को अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल निरूपित किया है। इतना ही नहीं अरविंद मेनन का मानना है कि जितनी देर में वे सिवनी में झगड़े सुलझाएंगे उतनी देर में तो वे कम से कम तीन जिलों का काम निपटा लेंगे।
इन बातों में सच्चाई कितनी है यह बात तो अरविंद मेनन ही जानते होंगे या फिर भाजपा का यह त्रिफला। पर भाजपा संगठन के लोगों की जुबान पर इस वाक्ये की चर्चाएं तेजी से हो रही हैं। भाजपा के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह के अवसान के साथ ही भाजपा जिले में दिशा भ्रमित हो गई है। चर्चा तो यहां तक भी है कि सिवनी में भाजपा के संगठन को सालों साल तक हरवंश सिंह ने अपने हिसाब से हांका है।
वहीं, अब यह चर्चा भी तेज हो रही है कि सिवनी में भाजपाईयों की आपसी सर फटव्वल से आजिज आकर हो सकता है कि शीर्ष नेतृत्व सिवनी में नए चेहरे को उतारने का मन बना लें। नए चेहरे की संभावनाओं पर अरविंद मेनन के करीबी सूत्रों का कहना है कि सिवनी से निर्दलीय प्रत्याशी रहे दिनेश राय उर्फ मुनमुन उनकी नजरों में सबसे मुफीद प्रत्याशी हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार मनी पावरएण्ड मसल पावरदोनों ही में दिनेश राय सिवनी के भाजपा नेताओं पर बीस बैठ रहे हैं। 13 जून को केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के सिवनी आगमन के उपरांत कांग्रेस के दरवाजे दिनेश राय के लिए बंद हो गए बताए जा रहे हैं। इसके पूर्व भाजपा के एक युवा नेता के साथ दिनेश राय के दिल्ली में अनेक नेताओं की देहरी पर मत्था टेकने की चर्चाएं भी सिवनी के सियासी गलियारों में चल रही हैं।

एक वरिष्ठ भाजपाई ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दिनेश राय को अगर भाजपा में लाया जाता है तो उनका विरोध करने का दावा करने वाले ही उनके आगे पीछे घूमते नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीता पटेरिया को टिकिट मिलने पर भाजपा के अनेक नेताओं ने दिनेश राय के चुनाव चिन्ह कप प्लेट का काम किया था। नीता पटेरिया का विरोध जबर्दस्त था पर वे चुनाव जीत गईं। अब दिनेश राय अगर भाजपा में आते हैं और उनका विरोध होता है तो उसका ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। दिनेश राय भाजपा से सिवनी विधानसभा का चुनाव आराम से जीत जाएंगे।

जिले में शिक्षा का दयनीय स्तर

जिले में शिक्षा का दयनीय स्तर

(शरद खरे)

शिक्षा के क्षेत्र में सिवनी जिले की स्थिति बेहद ही दयनीय प्रतीत हो रही है। मामला चाहे सरकारी स्तर पर संचालित शालाओं का हो या निजी तौर पर संचालित शालाओं का, हर जगह गफलत ही गफलत नजर आ रही है। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा जिले में शिक्षा के स्तर को उंचा उठाने के लिए लगातार कठोर कदमउठाने की बात कहकर कड़े निर्देशजारी किए जा रहे हैं, पर शिक्षा विभाग के कारिंदे हैं कि जिले के प्रशासनिक प्रमुख के निर्देशों को ही धता बताने से नहीं चूक रहे हैं।
जिले में कहीं भी चले जाएं वहां बच्चों विशेषकर प्राथमिक शाला के बच्चों के अध्ययन कक्षों को देखकर आपकी रूह कांप उठेगी। जर्जर शाला भवनों में कहीं पानी टपक रहा है, कहीं सीलन भरी है तो कहीं कंबल कीड़े बच्चों पर गिर रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी शालाओं में न तो खेल मैदान हैं न प्रयोगशालाएं और न ही कंप्यूटर लैब से सुसज्जित है स्कूल। कहने को शाला है, पर यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों से पूछिए कि वे किस कदर नारकीय पीड़ा के बीच अध्ययन् ग्रहण कर रहे हैं।
एक समय था जब अध्ययन् अध्यापन के स्थान को गुरूकुलकी संज्ञा दी जाती थी। इस गुरूकुल में बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ ही साथ संस्कार आधारित व्यवहारिक शिक्षा भी दी जाती थी। उस वक्त राजा हो या रंक अगर उसका पुत्र शिक्षा ग्रहण करने गुरूकुल गया है तो उसे गुरूकुल के नियम कायदों को मानना ही होता था। उस समय बच्चों को जंगल से लकड़ी काटना, गाय दुहना, दहलान लीपना, भोजन बनाना आदि अनिवार्य होता था, ताकि वे व्यवहारिक शिक्षा ले सकें। उस समय यह आवश्यक था।
समय बदलता गया गुरूकुलों का स्थान अंग्रेजी स्कूलों ने ले लिया। मूल्य आधारित व्यवहारिक शिक्षा हाशिए में ही चली गई। अब तो आम आदमी एक ही बात सोचता है कि वह अगर पैसा कमा रहा है तो बस दो बातों के लिए। एक तो हारी बीमारी में चिकित्सक को देने के लिए और दूसरा बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए। आज के समय में बच्चों की पढ़ाई एक मिशन है। कल तक मकान बनाना और बच्ची की शादी करना एक मिशन माना जाता था, आज इसके मायने बदल चुके हैं।
जिले भर में संचालित सरकारी और गैर सरकारी स्कूल में दुकान विशेषसे कॉपी किताबें या यूनीफॉर्म खरीदने के लिए बच्चों को बाध्य किया जाता है। अब तो शालाओं में बच्चों को हाउस, समूह या ग्रुप में बांटकर उनकी पोशाक भी प्रथक रंग की कर दी गई है। इस पोषाक का लोअर बाजार में तीन से पांच सौ रूपए तथा टी शर्ट दो से पांच सौ रूपए में मिल पाती है। इस पर उस शाला का मोनो चस्पा होता है। इन टी शर्ट और लोअर की कीमत जालंधर या दिल्ली में महज तीस से पचास रूपए होती है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें यूनीफॉर्म बेचने के लिए शाला प्रबंधन को मोटी रिश्वत देनी होती है तो वे भला कहां से निकालेंगे पैसे? जाहिर है जेब पालक की ही कटनी है।
मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता तो बस मत पूछिए। जिला कलेक्टर खुद कई स्थानों पर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता चेक कर चुके हैं। आखिर क्या कारण है कि मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार सरकारी मुलाज़िम अपने कर्त्तव्यों के बजाए पैसा कमाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। ग्राम पंचायत, जनपद या जिला पंचायत के नुमाईंदे, यहां तक कि सांसद विधायक आखिर मौन क्यों हैं? क्या सांसद विधायक बता पाएंगे कि आज तक उन्होंने कितनी शालाओं में जाकर मध्यान्ह भोजन का निरीक्षण किया।
कांग्रेस भाजपा के संगठन प्रमुखों से लेकर मंत्री सांसद विधायक भी साल में दो तीन बार बच्चों के बीच बैठकर लज़ीजमध्यान्ह भोजन का लुत्फ उठाते हुए फोटो में मीडिया की सुर्खी बन जाते हैं पर क्या वे अपने दिल पर हाथ रखकर इस बात को बता सकते हैं कि कितनी मर्तबा उन्होंने शालाओं में जाकर बन रहे मध्यान्ह भोजन का औचक निरीक्षण किया। क्या जिला पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य नुर्माइंंदे, जनपद या ग्राम पंचायत के लोग कभी शाला जाकर इसके निरीक्षण का समय निकाल पाए?
जिले में सरकारी शालाओं में शिक्षकों की कमी साफ दिखाई पड़ती है। ग्रामीण अंचलों में पदस्थ सिवनी में रहने वाले शिक्षक रोज आना जाना करते हैं, क्या आदेगांव या शिकारा में पदस्थ शिक्षक सिवनी से बस का सफर तय कर वहां पहुंचने के बाद इस काबिल बचता होगा कि वह बच्चों को पढ़ा सके। शाम ढलते ही आखिरी बस का टाईम मिलाने के चक्कर में वह बच्चों को पढ़ाने के बजाए बार बार घड़ी ही देखता नजर आता है।
शालाओं में इंटरनेट और कंप्यूटर लेब होना जरूरी है। जिला मुख्यालय में ही इंटरनेट पार्लर्स में बच्चे प्रोजेक्ट की चीजें पार्लर संचालक से मांगते नजर आते हैं। एक बार पुनः अभिभावक की ही जेब तराशी होती है। क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने कभी शालाओं विशेषकर निजी शालाओं में जाकर इस बात की जानकारी ली है कि निर्धारित मापदण्डों के हिसाब से उनकी कंप्यूटर लेब और इंटरनेट काम कर रहा है या नहीं। जब इस मद में निजी शिक्षण संस्थाएं अभिभावकों से शुल्क लेती हैं तो इसका उपयोग बच्चों को करने देने के बजाए उन्हें प्राजेक्ट के लिए बाहर क्यों भेजा जाता है?

जिले के प्रभारी मंत्री नाना भाऊ माहोड़ के पास स्कूल शिक्षा विभाग है। जिले का सौभाग्य है कि संवेदनशील कलेक्टर भरत यादव की तैनाती यहां हुई है, नियम कायदों पर चलने वाले जिला शिक्षा अधिकारी रवि बघेल यहां पदस्थ हैं तब तो कम से कम जिले में शिक्षा का स्तर रसातल में नहीं जाना चाहिए। अगर यह हो रहा है तो जरूरत है आत्म मंथन की . . .।

सोमवार, 12 अगस्त 2013

सरकारी संपत्ति से छेड़छाड़, मौन हैं अधिकारी नेता

सरकारी संपत्ति से छेड़छाड़, मौन हैं अधिकारी नेता

एग्रीमेंट हुआ नहीं, तो किसने खोदी लखनादौन की मुख्य सड़क!, गोंगपा कराएगी प्राथमिकी दर्ज, अरविंद मेनन के सामने भाजपाई उठा सकते हैं संगठन के लचीले रवैये का मामला!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। लखन कुंवर की नगरी लखनादौन में सरकारी संपत्ति के साथ सरेआम छेड़छाड़ हो रही है और अधिकारी तथा नेता हाथ पर हाथ रखे चुपचाप सब देख रहे हैं। नगर परिषद् में मुंह की खाने के बाद भी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का मौन आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। वहीं, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा इस मामले की सच्चाई सोमवार को पता कर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही गयी है।
बताया जाता है कि लखनादौन शहर में नगर परिषद् द्वारा सब्जी मण्डी का निर्माण करवाया जा रहा है। इस मण्डी के निर्माण में अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा स्थगन दिए जाने की खबर है। इसके बावजूद भी इस मण्डी का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इस संबंध में लखनादौन मण्डल अध्यक्ष और पार्षद नरेश सेन का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में लिखित तौर पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी लखनादौन, जिला कलेक्टर सिवनी यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर के संज्ञान में यह बात लाई थी। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद भी अब तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

कांग्रेस रणछोड़दास, भाजपा को लेना चाहिए हार का बदला!
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि नगर पंचायत लखनादौन के अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी ने बी फॉर्म जमा करने के पहले ही मैदान छोड़ दिया था। वहीं निर्दलीय सुधा राय ने भाजपा की प्रत्याशी को चारों खाने चित् कर दिया था। लखनादौन और सिवनी में चल रही चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस तो रणछोड़दास अपने आप को साबित करने में लगी ही है पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा तो कम से अपनी सरकार और पराजय की लाज बचाने के लिए इस संबंध में संज्ञान लेकर कार्यवाही की जानी थी।

बारिश में भी सुस्सुप्तावस्था में कांग्रेस!
लखनादौन के प्रकरण में कांग्रेस के मौन रवैए को देखकर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि वैसे तो बारिश में मेंढक भी अपनी सुस्सुप्तावस्था त्याग देता है पर कांग्रेस है कि चुनावों को देखकर भी अपनी तंद्रा नहीं तोड़ रही है। कांग्रेस के नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि अगर मामला शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सिवनी छोड़कर प्रदेश में कहीं भी घटा होता तो कांग्रेस के प्रवक्ताओं की फौज अब तक पूरी तरह चार्ज होकर गोलीबारी आरंभ कर चुकी होती, पर स्थानीय मामलों में सदा ही बोलने से बचने वाली कांग्रेस इस बार भी अपने चिरपरिचित अंदाज में खामोश ही नजर आ रही है। यही आलम जनपद अध्यक्ष कंचन डोंगरे की गिरफ्तारी के समय कांग्रेस का था। कांग्रेस द्वारा भाजपा के भ्रष्टाचारी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास तक नहीं किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।

व्हीव्हीआईपीज रहते हैं इस सड़क पर!
वहीं, दूसरी ओर लखनादौन शहर के अंदर जिस मार्ग पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक, विधायक श्रीमती शशि ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठ लोगों के आवास हैं उस मार्ग का ठेका अनुबंध किए बिना ही उस पर काम आरंभ करवा दिया गया है। इस मार्ग में सड़क की खुदाई आरंभ हो चुकी है। यह सरकारी संपत्ति के नुकसान का मामला है।
यह माना जा सकता है कि जिस ठेकेदार को काम मिला है वह इस पर काम कर सकता है, किन्तु नियमानुसार ठेका अनुबंध होने के उपरांत पांच परसेंट परफार्मेंस गारंटी राशि जमा करने के उपरांत ही इस सड़क पर ठेकेदार हाथ लगा सकता है। चर्चा है कि नगर परिषद् लखनादौन में अब सरकारी टकसाल के सिक्कों के बजाए चमड़े के सिक्केचल रहे हैं।

नेता विशेष से भयाक्रांत हैं लोग
वहीं यह चर्चा भी जोरों पर है कि नगर परिषद् द्वारा किए जा रहे नियम विरूद्ध काम करने के खिलाफ आवाज बुलंद करने का साहस किसी में नहीं है। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि नेता विशेष की दबंगई के चलते लखनादौन में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता और नेता जो बाहर तो शेर बने घूमते हैं पर नगर परिषद् के मामलों में अपनी पूंछ दबाकर भीगी बिल्ली बन जाते हैं।

गोंगपा ने लिया संज्ञान
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष हरीश चंद उईके ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आ गई है और वे लखनादौन के नेताओं को निर्देश दे रहे हैं कि अगर इस काम का अनुबंध नहीं हुआ है और कोई काम कर रहा है तो उसके खिलाफ लखनादौन थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई जाए। वहीं लखनादौन के निवासी तथा गोंगपा के जिला उपाध्यक्ष सुरेश पंद्रे ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि वे अभी लखनादौन से बाहर हैं और अगर नियम विरूद्ध किसी ने भी काम किया है तो वे वस्तु स्थिति का पता लगाने के उपरांत अगर गलत मिलता है तो इसके खिलाफ कार्यवाही अवश्य करेंगे, यहां तक कि वे कोतवाली लखनादौन में प्राथमिकी दर्ज करवाने से भी नहीं चूकेंगे।
माना जा रहा है कि सोमवार को लखनादौन थाने में इस काम की प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। वहीं गोंगपा प्रवक्ता विवेक डहेेरिया ने आज हिन्द गजट कार्यालय में चर्चा के दौरान कहा कि सोमवार को वे स्वयं लखनादौन जाएंगे और अगर इस काम का एग्रीमेंट नहीं हुआ है तो वे भी इस संबंध में कार्यवाही करेंगे।

मेनन के सामने उठ सकता है मामला!

13 अगस्त को भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन सिवनी आ रहे हैं। माना जा रहा है कि लखनादौन में नगर परिषद् द्वारा सरेआम नियम विरूद्ध किए जाने वाले कामों की फेहरिस्त बनाकर कुछ भाजपाई इसे अरविंद मेनन के समक्ष रख सकते हैं। एक भाजपा नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह भी कहा कि एक निर्दलीय ने पहले विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी नीता पटेरिया को नाकों चने चबवाए। उस समय जिला संगठन पर भाजपा की मुखालफत के आरोप लगे थे। इसके उपरांत उक्त निर्दलीय प्रत्याशी की माताजी ने लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष के चुनावों में भाजपा को चारों खाने चित् कर दिया। अब जबकि नगर परिषद् के खिलाफ भाजपा के हाथ कोई मामला आया है तब भाजपा खामोश बैठी है। इस मामले को निश्चित तौर पर संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के समक्ष रखा ही जाना चाहिए।

नकली खाद बीज और किसान!

नकली खाद बीज और किसान!

(शरद खरे)

किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है इस बात को आजादी के पहले से नेता कहते आए हैं। किसान असली अन्नदाता है। अगर किसान मेहनत करना छोड़ दे तो लोग भूखे मर जाएं। किसानों की बदहाली भी आजादी के उपरांत किसी से छिपी नहीं है। किसानों की दुर्दशा पर आंसू बहाने की फुर्सत किसी को नहीं है। किसानों के हित की बातें राजनेताओं के भाषणों में तो स्थान पा जाती हैं, पर जब अमली जामा पहनाने की बारी आती है तो मामला ठंडे बस्ते के हवाले हो जाता है।
सिवनी जिले में नकली खाद बीज बिकने की खबरें सालों से सुनी जाती रही हैं। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि प्रदेश सरकार की ओर से नकली खाद बीज रोकने की जवाबदेही जिन सरकारी अमलों पर आहूत होती है उन्हीं के द्वारा नकली खाद बीज प्रदाय किया जाए। पिछले दिनों छपारा में नकली खाद बीज बिकने की खबर आई वह भी सरकारी सिस्टम से। जैसे ही यह बात सामने आई वैसे ही देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ किसान की रूह कांप गई। अगर बीज ही नकली और घटिया क्वालिटी का होगा तो भला किसान को उपज का पूरा पैसा कैसे मिल सकेगा?
यह सब तब हो रहा है जबकि जिला कलेक्टर भरत यादव पूरी तरह संवदेनशील हैं और वे कई बार स्पष्ट निर्देश दे चुकेे हैं कि घटिया खाद बीज अगर बेचा गया तो अधिकारियों की खैर नहीं। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधितों की टीम बनाकर भी जांच की जाने की बातें प्रकाश में आई हैं।
वहीं, शिकायतें यह भी हैं कि एफ वन क्वालिटी की गुणवत्ता वाले बीजों के स्थान पर एफ टू क्वालिटी की गुणवत्ता के बीज किसानों को बांटे जा रहे हैं। किसानों को बीज की क्वालिटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है पर अधिकारी जो इसके विशेषज्ञ हैं वे तो हर बात से वाकिफ हैं, फिर आखिर इस धांधली को कैसे अंजाम दिया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि सालों से किसानों को सरकारी नुमाईंदे छलते आ रहे हैं। किसानों का हक मारा जा रहा है और जिला प्रशासन भी मूक दर्शक बना ही बैठा है। वैसे यह बात संतोषजनक मानी जाएगी कि युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर इसे रोकने की बात कही है।
जिला कलेक्टर खुद तो एक एक सोसायटी में जाकर इसे देख नहीं सकते हैं। इसे देखने का काम तो जमीनी स्तर के अधिकारी कर्मचारियों को ही करना है। पर जब सारे कुंए में ही भांग घुली हो तो किया भी क्या जा सकता है। कलेक्टर के अधीन अनुविभागीय दण्डाधिकारी होते हैं।
एसडीएम के पास काम का बोझ होता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु एसडीएम के मातहत तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी आदि तो इस काम को अंजाम दे सकते हैं, पर वे भी नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहे हैं मानो कुछ हुआ ही नहीं हो।
सुरसा की तरह बढ़ती मंहगाई के चलते किसानों की कमर पहले से ही टूटी पड़ी है। किसान किसी तरह जोड़ तगाड़ कर अपना घर चलाते हुए पैदावार बढ़ाने का जतन कर रहे हैं। किसानों को पानी के अभाव का सामना करना पड़ता है उपर से दूबरे पर दो आषाढ़ की कहावत चरितार्थ कर उन्हें नकली खाद और बीज टिकाया जाए तो उनकी पैदावार कैसे बढ़ेगी?
वैसे भी किसानों का ज्यादातर पैसा साहूकारों की तिजोरियों में ही ब्याज़ भरते भरते चला जाता है। प्राकृतिक आपदाएं भी किसानों की रीढ़ तोड़कर रख देती हैं। आपदाओं के चलते शासन द्वारा तय की जाने वाली आनावारी भी किसानों के बीच की लागत तक नहीं निकाल पाती है। इन परिस्थितियों में किसान आखिर जाए तो जाए कहां?
एक ओर तो प्रदेश और केंद्र सरकार अपने बड़े बड़े विज्ञापनों में अपने आप को किसान हितैषी बताने से नहीं चूक रही है वहीं दूसरी ओर उनके ही कारिंदे अगर थाली में छेद पर आमादा हैं तो फिर गलती तो निश्चित तौर पर निज़ामों की ही मानी जाएगी, क्योंकि उनके राज में कसावट का अभाव है।
बहरहाल, किसानों के साथ सिवनी जिले में होने वाले इस छल के लिए जवाबदेह अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन समयसीमा में कठोर कार्यवाही करे ताकि आने वाले समय में कोई भी सरकारी नुमाईंदा किसानों को छलने की बात सपने में भी न सोच सके।

लगता है सिवनी में राजनीति अब प्रशासन पर भारी पड़ चुकी है। वरना क्या कारण है कि जिले का प्रशासनिक प्रमुख स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करे और उनके मातहत उनकी हुकुम उदूली करें। किसान हैरान परेशान है बीज तो जैसे तैसे उसने बो दिया है, पर बारिश की मार से फसल चौपट होने की आशंका सता रही है। जिनकी फसलें बची हैं वे खाद के नकली होने पर आशंकित हैं। कुल मिलाकर देश के अन्नदाता किसान की सुध लेने की फुर्सत न तो प्रशासन के अमले को है और न ही चुने हुए जनसेवकों को। अब इन परिस्थितियों में किसान अपनी पीड़ा का इजहार करे तो किससे?