मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

कहीं प्रायोजित तो नहीं था गनपत प्रसंग!

कहीं प्रायोजित तो नहीं था गनपत प्रसंग!

प्रभारी मंत्री नाना भाऊ झाड़ते रहे बार बार अपना आसन!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। दशहरा मैदान में आज आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक विकलांग युवक को न केवल अपनी कुर्सी पर बिठाया वरन् उसे पचास हजार रूपए का चेक भी प्रदान किया। भाजपाई खेमें में चल रही चर्चा को अगर सच माना जाए तो यह कार्यक्रम सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया द्वारा प्रायोजित ही था।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि अपने दोनों पैरों से विकलांग उगली पठार निवासी गनपत धुर्वे, बीती रात्रि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने आया था, परंतु भाजपा के टाईट शैड्यूलके कारण वह सीएम शिवराज सिंह चौहान से नहीं मिल सका।
आज जब मुख्यमंत्री दशहरा मैदान पहुंचे और उनकी नजर नीचे बैठे गनपत पर पड़ी तो उन्होंने उसे न केवल मंच पर बुलाया वरन् जिला कलेक्टर को तत्काल आदेशित कर उसे पचास हजार रूपए की राशि का धनादेश (चेक) प्रदाय किया गया। सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान की सहृदयता और पारखी नजर मीडिया की सुर्खियां बन सकती हैं, किन्तु अनेक सवाल अभी अनुत्तरित ही हैं।
उक्त पदाधिकारी ने बताया कि इसके पूर्व उज्जैन में भी मुख्यमंत्री ने सभा मंच से एक वृद्धा को मंच पर बुलाकर बिठाया और उसे आर्थिक इमदाद भी दी थी। बाद में पता चला था कि वह महिला प्रायोजित तरीके से भीड़ का हिस्सा बनाई गई थी। उक्त पदाधिकारी का कहना है कि कुछ लोगों ने जब उससे पूछा कि वह कहां का रहने वाला है, तो उसने छूटते ही नीता पटेरिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसके बारे में पटेरिया मेडम को सब कुछ पता है।

प्रभारी मंत्री झाड़ते रहे आसनी
मुख्यमंत्री ने गनपत को नीचे से बुलवाकर अपने आसन पर बिठा दिया था। वहीं बाजू में प्रभारी मंत्री नाना भाऊ सफेद झक कपड़ों में बैठे थे। गनपत के बैठने के उपरांत प्रभारी मंत्री बार बार उठकर रूमाल से अपनी कुर्सी झाड़ते देखे गए। मंच पर मौजूद भाजपा के एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि दरअसल, गनपत नीचे बैठा था अतः धूल मिट्टी, घास फूस चिपककर उसके कपड़ों के जरिए कुर्सी पर आन पड़ी थी, संभवतः उसे ही साफ करने की गरज से प्रभारी मंत्री बार बार अपनी कुर्सी साफ कर रहे थे।

मीडिया से बनाई दूरी
गत दिवस दशहरा मैदान में आयोजित सभा में सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया के लोगों से मुखातिब होकर कहा था कि वे मीडिया में आज और कल सिवनी में हैं। आज वे सिवनी से बिदा हो गए पर मीडिया से चर्चा का समय उन्हें नहीं मिल पाया। कल मीडिया के लोगों को सीएम के कार्यक्रम के लिए जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा चुन चुन कर बुलाये जाने पर भी मीडिया के लोगों में नाराजगी का आलम था। बताया जाता है कि रविवार को सीएम के आगमन के पूर्व जिला जनसंपर्क कार्यालय में, मीडिया के चुनिंदा प्रतिनिधियों के लिए भोज की व्यवस्था भी रखी गई थी।

मिलती है पांच हजार रूपए की राशि
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से सोनल सूर्यवंशी ने बाणगंगा स्थित जनसंपर्क संचालनालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि जब भी सूबे के निज़ाम किसी भी जिले के प्रवास पर होते हैं, उस समय संबंधित जनसंपर्क अधिकारी को पांच हजार रूपए की राशि तत्काल ही मीडिया मैनेजमेंट के लिए आवंटित कर दी जाती है। अब तक सीएम के सिवनी आगमन पर यह राशि हर बार जारी हुई होगी। इस राशि को किसके उपर खर्च किया गया, यह भी शोध का ही विषय बना हुआ है।

प्रेस क्लबने सौंपा ज्ञापन
जिला प्रशासन और भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री के आगमन पर मीडिया के साथ किए गए दोयम दर्जे के व्यवहार से क्षुब्ध होकर प्रेस क्लब (पत्रकार हितों के लिए संघर्ष का दावा करने वाले शेष पत्रकार संगठन, पत्रकारों की उपेक्षा के बावजूद भी सदा की ही भांति मौन रहे) द्वारा लिखित रूप में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में इस बात को रेखांकित किया गया कि चुनावों के मद्देनजर भी सिवनी के मीडिया को मुख्यमंत्री के 29 एवं 30 सितम्बर की जन आर्शीवाद यात्रा के बारे में जानकारी से महरूम रखा गया।
प्रेस क्लब के सक्रिय सदस्य काबिज खान ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नाराज मीडिया कर्मियों ने अपने अपने कैमरे और कलब आज के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बंद कर दिए गए थे। काबिज खान ने बताया कि सीएम ने प्रेस क्लब के ज्ञापन को पूरा पढ़ा और जिला प्रशासन ने मीडिया के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बकौल अब्दुल काबिज खान, सीएम ने ज्ञापन को पढ़कर अपनी जेब के हवाले कर दिया और मंच से उतरकर मीडिया से रूबरू हुए एवं इन मामलों को संज्ञान में लेकर कार्यवाही की बात भी कही गई।

अपनी सुनाई, पर मीडिया से रखा परहेज
शिवराज सिंह चौहान सिर्फ अपनी बात सुनाना चाहते हैं, अन्य किसी की बात वह सुनने को तैयार नहीं, तभी तो अक्सर वह स्थानीय मीडिया से परहेज करते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने रात्रि विश्राम सिवनी में ही किया और सुबह 10.30 बजे ही वह यहां से निकल गये, लेकिन इस बीच वह मीडिया से बचते रहे। मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार शिवराज सिंह चौहान सिवनी में मीडिया से इसलिए बचते रहे क्योंकि अगर मीडिया उनके पहले कार्यकाल से लेकर अब तक की घोषणाओं की बखिया उधेड़ना आरंभ कर देता तो शायद ही शिवराज सिंह चौहान उसका जवाब दे पाते!

कांग्रेस ने खोया उम्दा मौका!
वहीं दूसरी ओर विपक्ष में बैठकर लगातार शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश की भाजपा सरकार को कोसने वाली कांग्रेस ने भी एक बेहतर मौका गंवा दिया है जो उसके लिए आगामी चुनावों में बेहतरीन प्लेटफार्म दे जाता। कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान के आगमन के पूर्व ही अगर कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणाओं की फेहरिस्त बनाकर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर लिया जाता तो बात ही कुछ ओर होती। इतना ही नहीं अगर आज सीएम के जाने के उपरांत भी मीडिया से रूबरू होकर कांग्रेस के नेता सीएम के आने के प्रयोजन को जनता से पूछ लेते तो भी भाजपा की किरकिरी हो जाती।

वहीं कांग्रेस के अंदर यह चर्चा तेज हो चुकी है कि आखिर क्या कारण है कि लगातार शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सरकार के खिलाफ विष उगलने वाले कांग्रेस के प्रवक्ता शिवराज के सिवनी आगमन पर मौन धारित कर गए? शिवराज सिंह चौहान के जाने के उपरांत अब एक बार फिर कांग्रेस के प्रवक्ताओं की तोपें अगर भाजपा (जिला स्तर नहीं, प्रदेश स्तर पर) गरजीं तो लोग यही मान लेंगे कि यह विरोध छद्म है, कांग्रेस विरोध के बजाए विज्ञप्तियां जारी कर जनता को भरमाना ही चाहती है।

आखिर क्यों आए शिवराज!

आखिर क्यों आए शिवराज!

(शरद खरे)

प्रदेश के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान 29 सितम्बर को सिवनी आए और रात्रि विश्राम कर 30 सितम्बर को वापस चले गए। सिवनी के हर व्यक्ति के दिलो दिमाग में यही प्रश्न कौंध रहा है कि आखिर शिवराज सिवनी आए तो आए क्यों? उनके सिवनी आने की वजह क्या थी। न वे सिवनी को कुछ देकर गए न कुछ लेकर गए। हां सिवनी के भाजपाई नेताओं की बेनर पोस्टर्स, होर्डिंंग्स, विज्ञापन में जेबें जरूर ढीली हुई हैं।
आदि अनादि काल से जब घर का मुखिया घर आता रहा है, घर के हर सदस्य को उससे कुछ न कुछ उपहार की अपेक्षा रही ही है। यही मानव स्वभाव भी है। पिता या पालक जब परदेस में नौकरी कर, अवकाश में घर आता है तो पूरे परिवार के लिए कुछ न कुछ लाता ही है। छोटे बच्चे के लिए भले ही वह अठन्नी की एक पेंसिल ही लाता रहा हो पर वह किसी की भावनाएं कतई आहत नहीं करता रहा है।
शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के निज़ाम हैं, प्रदेश के मुखिया हैं। वे समूचे प्रदेश में घूम रहे हैं। जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व के धन से संग्रहित सरकारी कोष में से बेदर्दी के साथ निकाली गई राशि से शिवराज सिंह चौहान का भ्रमण जारी है। यह भ्रमण क्यों और किसलिए हो रहा है, इस बात का शायद ही कोई उत्तर दे पाए! शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के मुखिया हैं, इस नाते वे जिस भी जिले में जा रहे हैं वहां की जनता उनसे आस लगाए बैठी है। शिवराज कह रहे हैं कि वे घोषणा इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि आचार संहिता कभी भी लग सकती है, और आचार संहिता के लगने के बाद उनकी घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहनाया जा सकता है।
शिवराज सिंह चौहान सुलझे हुए राजनेता हैं, उनका कहना वाजिब है कि अब की गई घोषणाएं चुनावी ही मानी जाएंगी। पर प्रदेश के बच्चों के शिवराज मामा आप शायद भूल रहे हैं कि सिवनी जिले को आपने सदा घोषणाओं से ही लादा है। आचार संहिता पिछले चार सालों से नहीं लगी है, पर घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है! आखिर क्या कारण है इसका। क्या आपने कभी भाजपा के सिवनी के विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले सहित भाजपा के संगठन से पूछने की जहमत उठाई है कि सिवनी जिले में क्या चल रहा है? क्या सिवनी की जनता शिव के राज में सुखी है? क्या सिवनी की जनता के समक्ष की गई उनकी घोषणाएं पूरी कर दी गई हैं?
शिवराज जी, आपकी हरी झंडी के अभाव में जिले की हॉकी प्रतिभाओं को हॉकी के मैदान के तैयार होने के बाद भी 22 माह तक इंतजार करना पड़ा। अगर आपको इसका फीता नहीं ही काटना था तो पहले ही बता दिया होता, कम से कम सिवनी की हॉकी प्रतिभाएं तो बाईस माह पहले से ही निखरना आरंभ हो जातीं। ‘‘शिव‘‘ मामा, सिवनी भी आपके ही ‘‘राज‘‘ में है, और यहां के निवासी भी आपकी रियाया ही है।
पहली पारी खेलते हुए 02 फरवरी 2008 को आपने ही लखनादौन अस्पताल के उन्नयन, कान्हीवाड़ा को उप तहसील का दर्जा, 27 अप्रेल को सिवनी आने पर आकाशवाणी केंद्र खोले जाने की घोषणा, इसके अलावा 2008 में ही केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा, पलारी को उप तहसील, कान्हीवाड़ा को पूर्ण तहसील और विकास खण्ड की घोषणा की थी। सिवनी के भाजपा और कांग्रेस के नेता अवश्य इन घोषणाओं को पांच साल तक भूले रहे हों, पर सिवनी की जनता को आज भी शिवराज मामा की इन कोरी घोषणाओं के बारे में सब कुछ शब्दशः याद है। मामा ने कहा था कि अगर उन्हें जिताया गया तो ये घोषणाएं अमली जामा पहन सकेंगी। इस बार भी शिवराज मामा ने कुछ इसी तरह की बात कही है। मतलब साफ है कि अगर वे जीते तो 2018 के विधानसभा चुनावों तक भी सिवनी के लोग विकास को तरसते ही रह जाएंगे।
चुनाव जीतने के उपरांत शिवराज फिर सिवनी आए और घोषणाओं के अंबार लगा गए। सिवनी में दलसागर को महत्वपूर्ण स्थान बताकर उन्होंने कहा था कि यह सिवनी के लिए गर्व का कारक है। एक करोड़ नौ लाख रूपए पानी में बहाने के बाद भी दलसागर गर्व के कारक की बजाए शर्म का विषय अवश्य बन गया है। लीजिए पौने दो करोड़ फिर आ गए इस तालाब के पानी में डुबाने के लिए। शिवराज ने कहा था कि सूरज भले ही पश्चिम से निकल जाए पर फोरलेन सिवनी से ही होकर जाएगा! शिव गर्जना भी चार साल बाद बिल्ली की म्याऊं साबित हो रही है। सूरज पूर्व से ही निकल रहा है और फोरलेन . . .। कांग्रेस को भी शिवराज की घोषणाओं से लेना देना नहीं है, वह भी अपनी मदमस्त चाल में ही मस्त है।
कुल मिलाकर अब सिवनी के लोग यह सोचने पर मजबूर होंगे कि आखिर सरकारी धन की होली खेलकर शिवराज मामा सिवनी क्यों आए? उन्हें आना था तो पहले आकर सिंथेटिक हॉकी मैदान का लोकार्पण कर जाते। जितने लोकार्पण या पत्थर लगाए गए हैं वे तो प्रभारी मंत्री ही लगा देते। रही बात शिवराज के सुशासन का ढिंढोरा पीटने की, तो उसके लिए सिवनी में भाजपा का संगठन और तीन तीन विधायक मौजूद हैं। लगता है शिवराज को न तो संगठन पर ही भरोसा बचा है और न ही अपने विधायकों पर! तभी तो उनके सहारे अपने कामों की वाहवाही लूटने के बजाए शिवराज ने खुद ही सरकारी धन की होली खेलकर जनता के बीच जाने की कवायद की है। शिवराज का आना और जाना तो ठीक है, पर सिवनी के निवासियों जिनमें भाजपा के कार्यकर्ता भी शामिल हैं यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर शिवराज सिवनी आए तो आए किस गरज से थे?

सोमवार, 30 सितंबर 2013

प्राचार्य बोरकर ने किया भगत सिंह का अपमान!

प्राचार्य बोरकर ने किया भगत सिंह का अपमान!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सीसी टीवी केमरे की निगरानी वाले जिला मुख्यालय के पहले स्कूल उत्कृष्ठ विद्यालय के प्राचार्य द्वारा शहीद भगत सिंह के अपमान का एक मामला प्रकाश में आया है। मामला शहीद भगत सिंह की जयंती समारोह से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गत 28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह की जयंती उत्कृष्ठ विद्यालय में मनाई गई। इस समारोह में शहीद भगत सिंह की प्रतिमा का माल्यार्पण प्रातः ग्याहर बजे प्रार्थना मंच पर शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमा का माल्यार्पण एवं अन्य कार्यक्रम संपन्न किया गया।

बताया जाता है कि उक्त समारोह में मंच पर शहीदे आजम भगत सिंह के माल्यार्पण के वक्त उत्कृष्ठ विद्यालय के प्राचार्य आर.बी.बोरकर द्वारा जूते उतारे बिना किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों सहित शिक्षकों ने इस बात का पुरजोर विरोध किया। जिला प्रशासन से इस संबंध में उचित कार्यवाही की जनापेक्षा है।

लखनादौन मण्डल के लिए समय नहीं है सीएम के पास!

लखनादौन मण्डल के लिए समय नहीं है सीएम के पास!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की पीड़ा सुनने के लिए सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान के पास समय नहीं है। जी हां, यह सच है। कुछ इसी तरह की चर्चाएं लखनादौन नगर और ग्रामीण मण्डल में चल रही हैं। लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एक शराब माफिया के कहने पर लखनादौन में भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं द्वारा अपने सम्मान को कुचले जाने की बात पर तल्ख नाराजगी जाहिर की गई थी। सिंथेटिक हॉकी मैदान के लोकार्पण में आए प्रभारी मंत्री ने जब कार्यकर्ताओं का आक्रोश देखा तो उन्होंने इस मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए एसडीएम लखनादौन लता पाठक को वहां से बिदा करवा दिया।

बताया जाता है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी अभी भी समाप्त नहीं हुई है, क्योंकि नगर परिषद् द्वारा दबंगई दिखाकर भाजपा के लखनादौन कार्यालय के काम को रूकवा दिया गया है। भाजपा के लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के रवैए और अपनी भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराना चाहा, किन्तु मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं को समय ही नहीं दिया गया।

शिवराज को हराने पर ही तुला प्रशासन!

शिवराज को हराने पर ही तुला प्रशासन!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मुख्यमंत्री की जन आर्शीवाद यात्रा को लेकर जिला मुख्यालय में मीडिया जगत में रोष और असंतोष देखा गया। बताया जाता है कि जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा सीएम की यात्रा के लिए पत्रकारों के दल को ले जाया जाना सुनिश्चित किया गया था।
इस दल में कौन कौन शामिल होगा, इस बात को लेकर तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। कहा जा रहा है कि जो मीडिया पर्सन्स अक्सर जिला जनसंपर्क कार्यालय में जाकर हाजिरी लगाते हैं उनकी आज खासी पूछ परख रही। शनिवार को जिला मुख्यालय में कुछ चुनिंदा मीडिया से जुड़े लोगों को जनसंपर्क विभाग द्वारा फोन कर सूचित किया गया था कि सुबह जनसंपर्क कार्यालय से मुख्यमंत्री की यात्रा के कव्हरेज के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है।
इस संबंध में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और दैनिक हिन्द गजट को किसी तरह की सूचना न तो शनिवार को ही दी गई और न ही रविवार को ही दी गई। जब इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क साधा गया तो उन्होंने कहा कि हो सकता है समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और हिन्द गजट का नाम जनसंपर्क कार्यालय की सूची में न हो।
जब पीआरओ को यह बताया गया कि जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा ही हिन्द गजट को जुलाई में निरंतरता का प्रमाण पत्र दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कम से कम हिन्द गजट का नाम तो जनसंपर्क कार्यालय की सूची में शामिल है, पर बावजूद इसके हिन्द गजट को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से वंचित रखा जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। इतना सब होने के बाद भी पीआरओ द्वारा हिन्द गजट और समाचार एजेंसी को उस वक्त भी सीएम के कार्यक्रम के कव्हरेज के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।
ज्ञातव्य है कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजिटल समाचार एजेंसी है, जो निरंतर खबरों का प्रसारण करती है। इसकी खबरें देश के ख्यातिलब्ध समाचार पत्रों, समाचार वेब पोर्टल्स, विभिन्न मीडिया माध्यमों द्वारा प्रकाशित और प्रसारित की जाती हैं, साथ ही साथ हिन्द गजट सिवनी जिले का प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र है। इन दोनों ही मीडिया के प्रतिष्ठानों की इस तरह उपेक्षा की शिकायत मुख्यमंत्री, जनसंपर्क मंत्री, जनसंपर्क आयुक्त आदि से की गई है।

वहीं, आज दिन भर जिला जनसंपर्क कार्यालय की चीन्ह चीन्हकर बांटी गई आमंत्रण की रेवड़ी की चर्चाएं तेज रहीं। लोगों का कहना था जब चुनाव सर पर हों उस समय अगर शासन, प्रशासन और मीडिया के बीच सेतु का काम करने वाला जनसंपर्क विभाग ही इस तरह की हरकत करे तो इसे यही समझा जाए कि प्रशासन ही शिवराज सिंह चौहान की हार के मार्ग प्रशस्त करने पर अमादा हो गया है।

विरोध की नायाब राजनीति

विरोध की नायाब राजनीति

(शरद खरे)

सिवनी में सियासी दलों का नया चलन सामने आया है। सिवनी जिले में कांग्रेस द्वारा भारतीय जनता पार्टी को और भाजपा द्वारा कांग्रेस को जमकर कोसा जाता है। इस कोसने की लक्ष्मण रेखा तय है। वह लक्ष्मण रेखा, सिवनी जिले की सीमा रेखा के बाहर ही है। सिवनी में भाजपा और कांग्रेस द्वारा गजब का सामंजस्य दिखाया जाता रहा है। कांग्रेस ने कभी भी भाजपा संगठन अथवा भाजपा के विधायकों का विरोध नहीं किया है। वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने भी कांग्रेस को जिला स्तर पर कभी भी कटघरे में खड़ा नहीं किया है। कुल मिलाकर सिवनी में रहने वाले सारे नेता एक दूसरे से परस्पर सामंजस्य स्थापित कर चल रहे हैं। दोनों ही प्रमुख दलों के अलावा शेष सियासी दल मृत प्राय ही हैं। शेष सियासी दलों की आवाज गाहे बगाहे सुनाई पड़ जाती है।
पिछले लगभग पांच सालों से भारतीय जनता पार्टी द्वारा केंद्र की कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को जमकर कोसा जाता रहा है। केंद्र की कांग्रेस की नीतियों पर कांग्रेस ने इस कदर वार किए हैं कि प्रदेश के प्रवक्ता मुकेश नायक और केंद्र में अजय माकन भी शर्मसार हो जाएं, पर जब बात सिवनी जिले की आती है तो भाजपा मुंह सिल लेती है। सिवनी में फोरलेन न बन पाने के लिए भाजपा ने भी जनमंच का साथ देते हुए केंद्रीय मंत्री कमल नाथ को इसके लिए दोषी ठहराया था। कमल नाथ की प्रतीकात्मक शवयात्राएं सिवनी में निकाली गईं। कमल नाथ को जमकर कोसा गया। उसके उपरांत कचहरी चौक पर सद्बुद्धि यज्ञ हुआ। इसमें कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर्स लगाए गए। कांग्रेस के नेता भी इसमें साथ थे। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि भाजपा की छांह बनते दिख रहे जनमंच को बेलेंस करने के लिए कांग्रेस नेता राजा बघेल द्वारा शिवराज सिंह चौहान का फोटो भी लगाने की बात कही गई तो जमकर विवाद हो गया था उस वक्त। बाद में मजबूरी में शिवराज सिंह चौहान का फोटो भी बेमन से लगाया गया। 13 जून को जब कमल नाथ सिवनी आए तो भाजपा के एक धड़े ने उन्हें काले गुब्बारे दिखाए। भाजपाई पार्षदों ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर साफ कहा कि भाजपा के जिला संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमल नाथ की खिलाफत के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। नतीजतन 13 जून को जिला भाजपा ने कमल नाथ के प्रति अपना अघोषित अनुराग दर्शा ही दिया। कमोबेश यही अनुराग और प्रेम पूर्व में सालों से जिला भाजपा द्वारा कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह के साथ भी दिखाया जाता रहा है। जिला भाजपा ने कभी हरवंश सिंह का विरोध नहीं किया। हरवंश सिंह प्रदेश में मंत्री रहे या विपक्ष में रहकर विधानसभा उपाध्यक्ष रहे इस मामले में भाजपा द्वारा सदा ही मौन धारित किए रहा गया। जिला मुख्यालय के लोगों की प्यास बुझाने के लिए दो वक्त का पानी मुहैया करवाने हेतु दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भीमगढ़ जलावर्धन योजना का आगाज हुआ। उस वक्त सिवनी के विधायक नरेश दिवाकर हुआ करते थे। नरेश दिवाकर लगातार दस साल तक विधायक रहे। आज भीमगढ़ जलावर्धन योजना से गंदा, बदबूदार, बीमार कर देने वाला पानी सिवनी के लोगों को मिल रहा है, किन्तु विधानसभा में नरेश दिवाकर और उनके उपरांत विधायक बनीं नीता पटेरिया ने कभी प्रश्न नहीं उठाया, आखिर क्यों? क्या वजह थी कि नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया ने हरवंश सिंह की मुखालफत से खुद को दूर रखा? क्या दोनों के पास इसका कोई जवाब है? अगर है तो सिवनी की जनता को दिया जाए? मनमोहन सरकार को कोसने के लिए तो देश के सवा छः सौ जिले हैं पर जिले के अंदर क्या हो रहा है इस बारे में भी तो ध्यान दिया जाए।
कमोबेश यही आलम कांग्रेस का है। कांग्रेस के सुधि तीन तीन प्रवक्ताओं ने भी कभी भाजपा के जिला संगठन या विधायकों को कटघरे में खड़ा नहीं किया है। क्या है इसकी वजह? लोग कहते हैं कि भाजपा मानसिकता वाले कांग्रेस में आए एक प्रवक्ता राम दास ठाकुर द्वारा कभी डॉ.ढाल सिंह बिसेन के खिलाफ कलम नहीं उठाई जा सकती है? वहीं ओ.पी.तिवारी कभी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं? क्या ये महज अफवाहें हैं? हो सकता है नहीं, क्योंकि इतिहास इसी बात की ओर संकेत कर रहा है कि इन्होंने अपने आप को इन विवादस्पद मामलों से दूर ही रखा है। जिला मुख्यालय से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र द्वारा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के द्वारा दी जाने वाली जनसंपर्क निधि की राशि का खुलासा किया गया। इस खुलासे में कुछ पत्रकारों के साथ ही साथ कांग्रेस के नामचीन लोगों या उनके परिजनों के नाम भी हैं, वह भी महज दो से पांच हजार रूपए की राशि के लिए! क्या दो से पांच हजार रूपए की राशि में कांग्रेस ने अपने आप को भाजपा के हाथों गिरवी रख दिया है। हमने मई माह में ही एक सूचना के जरिए साफ कहा था कि हम वो ही विज्ञप्तियां प्रकाशित करेंगे जिसमें सिवनी का उल्लेख हो। भोपाल में प्रादेशिक और दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की विज्ञप्तियां जारी करने के लिए कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ता है, उन्हें उनका काम करने दिया जाए। उनकी नौकरी में सिवनी के प्रवक्ता हस्तक्षेप न करें तो उचित ही होगा।

सिवनी में सड़क की लड़ाई के लिए बना जनमंच भी लोगों से अपने स्तर पर विरोध की बात कह रहा है। यह वही जनमंच है जिसके बेनर तले 21 अगस्त 2009 को सिवनी में जनता कफर््यू लगा था। अब कहां गया वह लड़ने का माद्दा। क्या आज जनमंच की ताकत कम हो गई है जो खुद शिवराज सिंह चौहान का विरोध करने के बजाए लोगों से विरोध करने को कह रहा है? क्या इसके पीछे सियासी मकसद छिपा है? अगर नहीं है तो आगे आएं जनमंच से जुड़े संजय तिवारी, भोजराज मदने, राकेश पाल सिंह, पंकज शर्मा, वीरेंद्र सोनकेसरिया, राज कुमार खुराना, आशुतोष वर्मा, घनश्याम जाड़ेजा, विधायक कमल मर्सकोले (कुरई में हड़ताल पर बैठे थे), श्रीमती नीता पटेरिया (कचहरी चौक पर पूर्णाहुती डालने र्गइंं थीं) नरेंद्र ठाकुर और दिखाएं शिवराज को काले झंडे। अगर नहीं तो यही माना जाएगा कि ये सारे लोग शिवराज सिंह चौहान का विरोध इसलिए नहीं कर सकते हैं क्योंकि इन्हें अभी टिकिट की लालसा है और सिवनी की जनता के प्रति इनका कोई कर्तव्य नहीं बाकी रह गया है. . .।

रविवार, 29 सितंबर 2013

विधायकों को नहीं गुरूजियों की कमी से सरोकार

विधायकों को नहीं गुरूजियों की कमी से सरोकार

(गजेंद्र ठाकुर)

सिवनी (साई)। विकासखण्ड छपारा मे जहां शिक्षको की कमी के चलते अथिति शिक्षकों की भर्ती की जा रही है वहीं ग्राम कचनरा मे सहायक अध्यापक पद रहकर वेतन पाने वाले राजेश तिवारी जो सिवनी विधायक नीता पटैरिया के पीए वर्षो से बने है उनके तरफ किसी अधिकारी की नजर नही जाती जानकारी हो की जब नीता पटैरिया सिवनी सासंद थी तब भी राजेश तिवारी  मेडम के पीए रहकर सरकारी वेतन ले रहे थे जब मेडम सिवनी विधायक बनी तब भी यही हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2003 मे तिवारी की नियुक्ति संविदा शाला शिक्षक सहायक अध्यापक पद पर ग्राम कचनरा के प्राथमिक शाला में हुई नियुक्ति दिनांक से ही तिवारी एक भी दिन स्कूल नही गये और स्कूल की उपस्थिति पंजी मे एक माह की हास्तछर कर स्कूल की औपचारिका पूरी की जाती है।
जबकि वर्ष 2010 से शिक्षा अधिकार अधिनियम मे यह स्पष्ट है कि कोई भी शिक्षक किसी राजनीति व नेता का पीए या अन्य सहयोगी नही रहेगा लेकिन सिवनी जिले मे यह कानून कहीं लागू नही होता विधायक की मेहरवानी के चलते शिक्षक तिवारी को कोई कुछ बिगाड भी नही सकता बताया जा रहा है, कि पीए साहब विधायक के साथ भोपाल भाजपा के महासम्मेलन मे घुमने गये थे जबकि यहां स्कूलों मे छात्रों के भविष्य के लिये नियुक्त तिवारी भाजपा की राजनीति करने के साथ विधायक के पर्सनल कामों के लिये अन्य विभागों के चक्कर काटते देखे जा सकते है। यहां का स्थानीय प्रशासन सब जानता है फिर भी चुपचाप वेतन का भुगतान कर रहा है।
नही है लिखित आदेश
जनपद व शिक्षा केन्द्र छपारा मे ऐसा कोई लिखित आदेश नही है कि राजेश तिवारी सहायक अध्यापक ग्राम कचनरा को विधायक नीता पटैरिया का पीऐ बनाया जाए  है लेकिन फिर भी राजनैतिक दबाब के चलते  वर्ष 2003 से वर्तमान समय तक  सब चल रहा है। जबकि 10 वर्षो तक पीए बन घूम रहे राजेश तिवारी मेडम पटैरिया के प्रशासनिक व राजनैतिक सभी काम करते देखे गये फिर भी स्कूली समस्याओं को ध्यान रखते हुए किसी अधिकारी ने कार्रवाही करने की जहमत नही उठाई।
नही जानते स्कूल के बच्चे
जब ग्राम कचनरा के प्राथमिक शाला के बच्चों से पूछा गया तो उन्होने बताया की साहब कौन है तिवारी सर हम नही जानते हमने कभी देखा भी नही है हम तो केवल धुर्वे सर को जानते है जानकारी हो कि प्राथमिक शाला कचनरा मे 29 बच्चे है जहां दो शिक्षक राजेश तिवारी और बक्के सिंग धुर्वे है लेकिन स्कूल वर्षो से एक शिक्षक के भरोषे चल रहा है।
कथन
राजेश तिवारी प्राथमिक शाला कचनरा मे वर्ष 2003 से पदस्थ है यह सही है कि वे विधायक के पीए है लेकिन विरोध कौन करेगा।
महेन्द्र चौकेसे मण्डल संयोजक छपारा

प्राथमिक शाला कचनरा मे राजेश तिवारी पदस्थ है लेकिन वे कभी स्कूल नही जाते दो चार माह मे एक बार उपस्थिति पंजी मे हास्तछर करने आते है वे मेडम पटैरिया के यहां काम करते है यह सभी अधिकारियों को मालूम है।
गोविन्द उईके जनशिक्षक गोरखपुर मडवा संकुल

मैं फरवरी 2012 से बीआरसी पद पर आया हुं तब से राजेश तिवारी पीऐ के पद पर विधायक पटैरिया का कार्य संभाल रहे है स्कूल में मैने कभी नही देखा। 
सहाबलाल दसरिये बीआसी छपारा

यह सही है कि राजेश तिवारी शिक्षक विधायक के पास पीए पद कार्यरत हेै हमारे पास ऐसा कोई लिखित आदेश नही है कि जिससे उन्हे शिक्षक पद से हटा कर विधायक के यहां भेजा जाये हालाकि कि हमने वरिष्ठ अधिकारियों को दो साल पहले पत्र लिख कर बता दिया है इस विषय में अधिक जानकारी बीआरसी व संकुल प्रभारी बता सकते है।

शफी मो कुरैशी सीईओ जनपद छपारा

घोषणाएं अधूरी, किस बात का आशीर्वाद ले रहे शिवराज: वर्मा

घोषणाएं अधूरी, किस बात का आशीर्वाद ले रहे शिवराज: वर्मा

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले को घोषणाओं के अलावा कोई सौगात तो दी नहीं है लेकिन अब जब वे जन आर्शीवाद लेने जिले में आ रहें हैं तो कम से कम जवाब तो दे दें। मुख्यमंत्री की घोषणायें  पूरा होने का इंतजार कर रहीं है तो किये गये शिलान्यास एक ईंट लगने का इंतजार कर रहें हैं। और तो और पिछली जन आर्शीवाद यात्रा के दौरान शिवराज ने जो घोषणायें की थीं वे तो भी अधूरी ही हैं भले ही उन्हें जन आर्शीवाद फिर से मिल गया हो। उक्ताशय के विचार वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा ने प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में व्यक्त किये हैं।
इंका नेता आशुतोष वर्मा ने आगे कहा हैं कि आगामी नवम्बर महीने में होने वाले विस चुनावों के लिये जनता का आर्शीवाद लेने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिले में आ रहें हैं। मुख्यमंत्री ने जिले में घोषणाओं का तो अंबार लगा दिया लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। शिव की नगरी सिवनी पिछले दस सालों से किसी बड़ी सौगात का इंतजार करती रह गयी। अब शिवराज सौगात नहीं तो कम से कम यह जवाब तो जनता को दें दें कि आखिर किन कारणों से ये घोषणायें पूरी नहीं हो पायीं हैं। मुख्यमंत्री ने 2 फरवरी 2008 को सिवनी में घोषणा की थी कि कान्हीवाड़ा को उप तहसील तथा लखनादौन के अस्पताल का उन्नयन किया जायेगा। आज तक प्रदेश सरकार लखनादौन के सासै बिस्तर वाले अस्पताल के लिये जमीन नहीं दे पायी है।27 अप्रल 2008 को मुख्यमंत्री ने सिवनी के पॉलेटेक्निक कालेज में सिवनी में आकाशाणी केन्द्र खेलने की घोषणा की थी।  
इंका नेता वर्मा ने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया है कि 2008 के चुनाव के पहले जब शिवराज जन आर्शीवाद लेने 12 जुलाई को जिले में आये थे तब भी उन्होंने घोषणाओं का अंबार ़लगा दिया था। आपने केवलारी में नगर पंचायत बनाने,पलारी में उप तहसील बनाने,कान्हीवाड़ा में अब सरकार बनने पर पूर्ण तहसील और विकास खंड़ बनाने की घोषणायें की थी। प्रदेश में जनता के आर्शीवाद से शिवराज की सरकार तो बन गयी लेकिन जिले के लोग ठगे से रह गये और एक भी सौगात उन्हें नहीं मिल। लेकिन इसे बेशर्मी नहीं तो और क्या कहा जाये कि पांच साल सरकार चलाने के बाद बिना एक भी घोषणा पूरी किये शिवराज फिर वहीं जनता का आर्शीवाद लेने पहुंच रहें हैं।
इंका नेता वर्मा ने आरोप लगाते हुये कहा है कि  इसके बाद भी मुख्यमंत्री ने 26 जुलाई 2008 को लखनादौन में आचार संहिता लागू होने की संभावना की बात करते हुये कहा था कि वे कोई घोषणा नहीं करेंगें लेकिन अगली सरकार हमारी बनेगी और प्रदेश देश में नंबंर वन और सिवनी प्रदेश में नंबंर वन का जिला बनेगा। यह संभव है कि सिवनी प्रदेश में नंबंर वन का वो जिला बन गया हो जहां सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री की घोषणायें पूरी ना हुयीं हों।

इंका नेता वर्मा ने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2009 को सुकतरा में यह गर्जना की थी कि फोर लेन सिवनी से ही जायेगी। लेकिन इसके बाद वे कई बार केन्द्र के वन एवं पर्यावरण मंत्री से प्रदेश की विभिन्न योजनाओं के लिये मिले लेकिन कभी फोर लेन की बात तक नहीं की थी। इसकें बाद 21 अक्टूबर 2009 को शिवराज ने सिवनी का सबसे सुन्दर शहर, दलसागर को मेहमानों को गर्व से बताने लायक स्थान बनाने,नरसिंह कॉलेज के लिये 6 करोड़ देने,प्रायवेट सेक्टर में मेडिकल कॉलेज खोलने के साथ ही यह भी कहा था कि सूरज चाहे पूरव के बजाय पश्चिम से गने लगे लेकिन फोर लेन सिवनी से गुजरने की सिंह गर्जना की थी। इसी दिन शिवराज ने थोक सब्जी मंड़ी का शिलान्यास भी किया था जिसमें आज तक एक ईंट भी नहीं लग पायश्ी है। इसके साथ ही संभाग मिलने का सपना भी अधूरा ही रह गया है। ऐसे हालात में जिले के लोगों को यह विचार करना चाहिये कि जिले के भोले भाले लोगों की भावनाओं से खेलने वाले ऐसे मुख्यमंत्री को फिर से आर्शीवाद दें या नहीं? शिवराज की कथनी और करनी में अंतर और जिले के भाजपा विधायकों को उनकी निष्क्रियता का सबक जिले के लोग आगामी चुनाव में देंगें।

मामा जी आप रोज रोज आएं, कम से कम शहर चमन तो रहेगा!

मामा जी आप रोज रोज आएं, कम से कम शहर चमन तो रहेगा!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी की सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे ऐसे पूर दिये गये जैसे यहां गड्ढे नाम की कोई चीज थी ही नहीं, वहीं जगह- जगह साफ- सफाई करते कर्मचारियों को देख लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों को लगा कि अब नगर स्वच्छ और सुंदर बनने की तैयारी में है, लेकिन देखने वालों को यह समझने में जरा भी मौका नहीं लगा कि आखिर यह साफ-सफाई क्यों हो रही है।
असल में कल हमारे प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का आगमन हो रहा है और उनके आगमन को देखते हुए जगह-जगह बने गड्ढों को भर दिया गया ताकि मुखिया हिचकोले न ले पाएं। सर्किट हाऊस के आसपास बने गड्ढे पूर दिये गये और रोड इतनी सुंदर बना दी गई कि लोग उसमें अपना चेहरा तक देख लें, वहीं बस स्टैण्ड के आसपास भी साफ-सफाई का माकूल इंतेजाम भी किया गया। बताया जाता है कि यही स्थिति बरघाट, लखनादौन और केवलारी की भी है जहां प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को पहुंचना है।
वहीं सोशल मीडिया पर आज यह चर्चित रहा। उपरोक्त छाया चित्रों के साथ निम्न इबारत भी लोगों द्वारा सराही गई।
जनता से आशिर्वाद लेने निकले हैं प्रदेश के मुखिया। इस कड़ी के तहत कल उनका सिवनी नगर आगमन हो रहा है।
मामा जी के नगर आगमन से सबसे ज्यादा सक्रिय और प्रोत्साहित प्रशासनिक अमला नजर आ रहा है। निस्तेज से दिखने वाले सरकारी अधकारी और विभाग एक दम से तेजस्वी हो गए से लग रहे है। एकबारगी तो इनको देखकर घ्सा लगता ही नहीं की ये सरकारी विभागों से ताल्लुक रखते हैं। पूरे शहर को वैशाली की नगरबधु की तरह सजाया जा रहा है। जिन गलियों में चलने से आपके सफ़ेद बाल बिना डाई के ही धूल के कारन सफ़ेद पढ़ जाते थे, उन गलियों से धूल को इस तरह हटाया जा रहा है की उसका नामो निसान ही ना रहे। साथ ही मामा जी की कार किसी गड्डे में न फस जाये इसके लिए रातों रात सड़कों को सुधारा जा रहा है। इतना ही नहीं सारे महकमों में बाजी मारी बिजली विभाग ने। जिस विभाग को अभी तक सड़कों की खराब स्ट्रीट लाइट नजर नहीं आती थी, अचानक से अतिसक्रिय दिखाते हुए इस विभाग ने खराब स्ट्रीट लाइट्स को बदलने की मानों मुहीम छेड़ दी। इतना ही नहीं, मामा जी का स्वागत चोरी की बिजली से किया जा रहा है और ये सब कुछ हो रहा है थाने के सामने।

मामा जी की जन आशीर्वाद यात्रा के कारन ही सही शहर में हो रही साफ सफाई को देखते हुए अनायास ही जवान से निकल रहा है- श्रीमान! आप तो आते रहा करें...।

पेंशनर्स खून के आंसू रो रहे हैं ‘शिव‘ के ‘राज‘ में

पेंशनर्स खून के आंसू रो रहे हैं शिवके राजमें


(अखिलेश दुबे/ अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। पेंशन पाने वाला अपना सारा जीवन अर्थात जिस आयु में वह भाग दौड़ कर सकता है, सरकार को समर्पित कर देता है। पेंशन पाने वाले को आंग्ल भाषा में पेंशनर्स ही कहा जाता है। पेंशन पाने की आयु तक पहुंचते पहुंचते साठ की आयु को पा जाता है सरकारी कर्मचारी। इस आयु में वृद्धावस्था का आना स्वाभाविक ही है। वृद्धावस्था में रोग प्रतिशोधक क्षमता कम होना स्वाभाविक ही माना जाता है इस आयु में शरीर निरोगी रहे यह संभव नहीं है। इस आयु में सबसे ज्यादा जरूरत दवाओं और देखभाल की ही होती है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्वास्थ्य विभाग के तुगलकी रवैए के कारण यहां के पेंशनर्स खून के आंसू रोने पर मजबूर हैं। पेंशनर्स को सरकारी स्तर पर दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जो उनका मौलिक अधिकार है। चिकित्सालय में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशों को भी रद्दी की टोकरी में डाला जा रहा है।
अपर संचालक (औषधी प्रशासन) कार्यालय स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल के पत्र क्रमांक औप्र/2013/683 दिनांक 26 दिसंबर 2012 के द्वारा प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, समस्त सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों को यह आदेशित किया गया था कि दीनदयाल योजना के हितग्राहियों, पेंशनर्स, शासकीय कर्मचारियों को दवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इस पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 2012 में 17 नवंबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क औधधि वितरण योजना आरंभ की गई है। सरकारी चिकित्सालय में आने वाले हर रोगी को निरंतर दवाएं उपलब्ध कराने की जवाबदेही सीएमओ और सिविल सर्जन की निर्धारित की गई है। इसके साथ ही साथ पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि संचालनालय को लगातार इस बात की शिकायतें मिल रही हैं कि जरूरत मंदों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, इसलिए इस हेतु स्पष्ट गाईड लाईन जारी की गई हैं।

21 माह पूर्व जारी हुए दिशा निर्देश
26 दिसंबर को जारी इस पत्र की कंडिका क्रमांक एक में कहा गया है कि सामान्यतः नब्बे से पंचानवे फीसदी रोगियों का उपचार ईडीएल में उपलब्ध जेनेरिक दवाओं से किया जा सकता है। शेष रोगियों को इस प्रक्रियाम में छूट दिए जाने के मापदण्ड जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसी बीमारियों जिनमें रोगी लंबे समय से उपचार में कोई विशेष ब्रांडेड दवा ले रहा है उन्हें प्रिस्क्राईब की जा सकती है। ऐसी पेटेन्ट दवाएं जिनका जेनेरिक विकल्प बिल्कुल उपलब्ध न हो, उन्हें लिखा जा सकता है। इसके साथ ही साथ टरशरी केयर में उपचाररत अथवा फॉलोअप के रोगियों के लिए यदि विशेषज्ञ की राय है कि जेनेरिक विकल्प रोगियों के लिए उपयुक्त नहीं होंगे, ऐसी स्थिति में भी पेटेन्ट दवा प्रिस्क्राईब की जा सकती है। प्रथम कंडिका के अंत में यह निर्देश साफ तौर पर दिया गया है कि मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को ब्रांडेड काम्बीनेशन्स लिखे जा सकते हैं। उक्त दवाएं मरीज को हर हाल में निशुल्क ही उपलब्ध कराई जाएं।

10 प्रतिशत रोगियों को मिलें ब्रांडेड दवाएं!
इस आदेश की कंडिका नंबर दो में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि रोगी का उपचार करने वाले चिकित्सक/विशेषज्ञ (सिर्फ विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं) को चिकित्सा संस्था प्रमुख से अनुमोदन (प्रतिहस्ताक्षरित) प्राप्त करने पर ही उपरोक्तानुसार दवा लिखने की छूट दस प्रतिशत से अधिक रोगियों के लिए नहीं दी जा सकेगी। इसके रिकार्ड के लिए एक रजिस्टर संधारित भी किया जाए।

किन्हें मिलेगी यह सुविधा!
इसकी कंडिका नंबर तीन में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख है कि किन रोगियों को इसकी पात्रता है। इसमें गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले रोगियों को दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के अंतर्गत उपरोक्त परिस्थिति में लाभ दिया जा सकेगा। इसके अलावा पेंशनर्स को उपरोक्तानुसार दवाईयां शासकीय व्यय पर उपलब्ध कराई जाएंगी। अपर संचालक ने साफ तौर पर न केवल इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है वरन् समय समय पर इसकी समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं।

कचरे में डाल दिए गए निर्देश
सिवनी के स्वास्थ्य विभाग विशेषकर जिला चिकित्सालय में अपर संचालक के निर्देशों को कूड़े में डाल दिया गया। पिछले दो सालों से सिवनी जिले के पेंशनर्स दवाओं के लिए लगातार भटक रहे हैं। जब भी सिविल सर्जन से इस बारे में पेंशनर्स बात करने का प्रयास करते हैं, उनके द्वारा बजट न होने का बहाना बनाकर बात को टाल दिया जाता है।

छः माह बाद जारी किए निर्देश
वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा इस साल 12 जून को पत्र क्रमांक अप्रशा/2013/6259 में कहा गया है कि जिला पेंशन फोरम की 17 अप्रेल को आहूत बैठक के पालन प्रतिवेदन के रूप में यह पत्र जारी किया जा रहा है। इस पत्र में भी संचालनालय के 26 दिसंबर के पत्र का हवाला दिया गया है, एवं इबारत वही है जो संचालनालय के पत्र की है।

नौ माह बाद जागे डॉ.सोनी
लगभग तीन दशकों से सिवनी में पदस्थ निश्चेतक डॉ.सत्यनारायण सोनी जिनके बारे में कहा जाता है कि वे बिना पैसा लिए शल्य क्रिया के पूर्व किसी को बेहोश करने हाथ नहीं लगाते हैं, इस समय सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ हैं। डॉ.सत्यनारायण सोनी ने संभवतः निश्चेतना वाली दवा सूंघ ली और उसका असर बहुत लंबा रहा प्रतीत हो रहा है। इस 26 दिसंबर के आदेश के नौ माहों के उपरांत डॉ.सत्यनारायण सोनी वापस होश में आए और 23 सितंबर को उन्होंने समस्त चिकित्सा विशेषज्ञ अधिकारी के नाम से एक पत्र जारी कर कहा कि जिला चिकित्सालय में आने वाले पेंशनर्स को पात्रतानुसार औषधियां लिखी जाएं।

पांच चिकित्सकों को दिए अधिकार
जिला पेंशनर्स एसोसिएशन के सदस्य ने बताया कि सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी ने इस पत्र पर ही हाथ से डॉ.ए.के.तिवारी, डॉ.एस.के.नेमा, डॉ.टीकाराम बांद्रे, डॉ.दीपक अग्निहोत्री (जिनका नाम काटकर बाद में उनके स्थान पर डॉ.किरण कटरे का नाम लिखा गया है) एवं डॉ.वी.के.नावकर के नाम लिखकर यह बताया कि ये चिकित्सक ही पेंशनर्स को दवाएं लिखने के लिए अधिकृत किए गए हैं। गौरतलब है कि संचालनालय के पत्र में विशेषज्ञ के साथ ही साथ रोगी का उपचार करने वाले चिकित्सक के बारे में लिखा गया है।

विशेषज्ञ कक्ष रहता है सूना
जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ कक्ष में जाकर शायद ही कभी डॉ.सत्यनारायण सोनी ने झांककर देखा होगा कि वहां कोई चिकित्सक बैठा है अथवा नहीं। इन परिस्थितियों में पेंशनर्स कहां और किससे दवा लिखवाएं यह यक्ष प्रश्न आज भी अनुत्तरित है।

भाजपा के खिलाफ जहर बो रहे डॉ.सोनी

जिला चिकित्सालय में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी की कार्यप्रणाली से पेंशनर्स के दिलो दिमाग में प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति रोष और असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। पेंशनर्स यह मानते जा रहे हैं कि सरकार द्वारा सिवनी में जानबूझकर ऐसे अधिकारी की पदस्थापना की गई है जो कि पेंशनर्स को जानबूझकर परेशान कर रहा है। एक पेंशनर ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि अगर डॉ.सत्यनारायण सोनी की तैनाती बरकरार रखी जाती है तो यह भी हो सकता है कि पेंशनर्स और उनके परिवार के लोग भाजपा से विमुख हो जाएं।