शिवराज पर होगा नस्तियां निपटाने का भार
सीएम मंत्री नहीं रोक पाएंगें फाईलें
(नंद किशोर)
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार नस्तियों के चलन को भी लोकसेवा प्रदाय गारंटी कानून के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। ऐसा होने पर मुख्यमंत्री व मंत्री से लेकर अफसर तक सभी के लिए समय सीमा के भीतर फाइलों को निपटाना कानूनन जरूरी हो जाएगा। ऐसा हुआ तो दफ्तरों में फाइलों के ढेर नहीं दिखेंगे। आने वाले समय में यह व्यवस्था लागू होते ही मुख्यमंत्री पर काम का बोझ इस कदर बढ़ जाएगा कि उन्हें समय सीमा में नस्तियों का निराकरण हर हाल में करना अनिवार्य हो जाएगा।
लोक सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जवाबदेही विषय पर राज्य सरकार और यूएनडीपी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वर्कशॉप में इस बात का संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तय किया जाएगा कि कौन-सी फाइल किसके पास कितने समय तक रहनी चाहिए। अगर किसी फाइल पर मुख्यमंत्री कोई फैसला नहीं लेते हैं तो इसका नुकसान अंततः राज्य को उठाना पड़ता है।
बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि लोक सेवाओं के बदले लोगों से एक टोकन शुल्क लिया जाना चाहिए, ताकि इसे लेकर आम जनता गंभीर रहे और उसे अपनी भी जिम्मेदारियों का एहसास होता रहे। इस तरह के कई सुझाव लोकसेवा प्रदान करने की समूची प्रक्रिया को मजबूत करने और इसमें जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।


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