बुधवार, 18 जनवरी 2012

अग्निपथ में रोल नेगेटिव किन्तु दमदार: संजय दत्त


अग्निपथ में रोल नेगेटिव किन्तु दमदार: संजय दत्त



(नेहा घई पण्डित)

मुंबई (साई)। वर्ष 2012 अपनी पहली बड़ी फिल्म के प्रदर्शन होने के इंतजार में है। इस इंतजार को समाप्त करने के लिए फिल्म अग्निपथ 26 जनवरी को प्रदर्शन होने जा रही है और इसमें कांचा का किरदार निभा रहे संजय दत्त से नेहा घई पंडित ने की खास बातचीत:-

0 संजय अग्निपथ में काम करने का निर्णय आपने कैसे लिया ?

- मैंने धर्मा प्रोडक्शन के साथ काफी समय पहले गुमराह फिल्म की थी। उसके बहुत समय के बाद मुझे एक ऐसी फिल्म मिली जिसमें एक स्ट्रांग केरेक्टर है। रोल भले ही नेगेटिव है लेकिन है दमदार। धर्मा प्रोडक्शन के बैनर के साथ काम करने का अनुभव भी अपने आप में खास है। मैंने करण जौहर के पिता यश जौहर जी के साथ काम किया है

0 पुरानी और नई फिल्म में क्या-क्या समानताएं हैं ?

- पुरानी अग्निपथ से इस फिल्म की कहानी कुछ अलग है। लोग यह सोचकर फिल्म देखने ना जाएं कि यह पुरानी फिल्म की हू-ब-हू कॉपी है। फिल्म की कहानी और किरदार जरूर पुरानी अग्निपथ से प्रेरित है लेकिन इसका ट्रीटमेंट अलग है।

0 कांचा का किरदार पुरानी फिल्म में डैनी ने निभाया था...आपको लगता है लोग आपकी परफॉर्मेन्स की तुलना उनसे करेगें ?

- डैनी जी मेरे गुरू के समान हैं। उन्होने इस किरदार को इस कदर निभाया है कि लगता है वह खुद ही कांचा हैं। जब यह रोल स्वीकार किया था तभी से पता था कि लोग मेरी तुलना उनसे करेंगें। उनका अगर 10 प्रतिशत भी कर पाया तो यह मेरी नजरों में कामयाबी ही होगी। अगर इससे भी कम आंका गया तब भी कोई गम नहीं होगा। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की इस किरदार के साथ न्याय कर पाऊं।

0 अक्सर देखने में आया है कि फिल्मी कलाकार अपने लुक को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं क्या फिल्म के लिए गंजा होने का फैसला लेना कठिन था ?

- हां वो तो है..भला गंजा होना किसको अच्छा लगेगा...दरअसल पहले हमने मेक-अप से कोशिश की..उस गेटअप के लिए 2-3 घंटे मेकअप की सीटिंग लगती थी और एक-दो बार गर्मी के कारण मेक-अप खराब भी हुआ...फिर मुझे लगा कि टकला होना ही बेहतर है। इससे एक फायदा य़ह भी हुआ कि 24 घंटे कांचा का किरदार मेरे दिमाग में रहा और मेरी प्रस्तुति बेहतर हुई।

0 आपने हाल ही में टेलीविजन की ओर रूख किया है...बिग बॉस होस्ट करना कैसा अनुभव रहा?

- बिग बॉस करने में बहुत मजा आया मुझे। हालांकि शुरूआत में मैं कुछ नर्वस था लेकिन बाद में मैंने बहुत एंजाय किया। सलमान के साथ ने इस अनुभव को और भी यादगार बना दिया। आजकल सिनेमा और टेलीविजन का अंतर लगभग खत्म हो चला है। हर स्टार अब टीवी पर अपनी फिल्म प्रमोट करता है।

0 आपने राजनीति में कुछ रूझान दिखाया और फिर गायब हो गए ?

- फिलहाल मैं फिल्मों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूं। अपने स्तर पर जरूर कुछ सामाजिक कार्य करता हूँ पर उनका गुणगान करते रहना मुझे अच्छा नहीं लगता।

0 संजय आज कल रेव पार्टीयां और डिस्को में ड्रग्स मिलने के किस्से अक्सर देखने मिलते हैं...आप खुद ड्रग्स के चंगुल से निकले हैं...आज के युवा को आप क्या कहना चाहेंगे ?

- मुझे भी इस तरह की खबरें बहुत दुःखी करती हैं। आज के युवा और बच्चे हमारे देश का आने वाला कल है। अपने कल को इस तरह देखना भला किसे पसंद होगा। मैंने भी अपनी जिंदगी में नशे का सहारा लिया लेकिन जब समझ आया मैंने अपने के इस दलदल से निकाला और यही मैं अपने युवाओं से कहना चाहता हूं कि इससे दूर रहें...स्वस्थ रहें...। जिंदगी का नशा सबसे मजेदार है..इसे चखो..

(नेहा घई पंडित पेशे से पत्रकार, कापी व वेब कंटेंट एडीटर हैं,)

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