बुधवार, 5 जून 2013

लिमटी खरे को लेकर की गई टिप्पणी निंदनीय: पुनीत कपूर

लिमटी खरे को लेकर की गई टिप्पणी निंदनीय: पुनीत
कपूर

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। वरिष्ठ पत्रकार लिमटी खरे को लेकर बीते दिवस कही गई बातें बहुत ही अशोभनीय और निंदनीय हैं। लिमटी खरे का नाम सिवनी, मध्य प्रदेश ही नहीं वरन् दिल्ली में भी पत्रकार बिरादरी में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। घटिया सोच और मानसिकता के धनी व्यक्तियों द्वारा ही लिमटी खरे जैसे व्यक्तित्व पर कीचड़ उछाले जाने की बात सोची जाती होगी।
उक्ताशय की बात देश के पहले समाचार चेनल आज तकके सिवनी ब्यूरो पुनीत कपूर द्वारा कही गई हैं। पुनीत कपूर ने कहा है कि लिमटी खरे निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार हैं। उन्होंने कहा है कि उन्होंने दिल्ली में अपने करियर के शुरुआती दिनों से लेकर आज तक बीते करीब 6 सालों से लिमटी खरे के साथ जुड़ा रहा हूं, इस दौरान पत्रकारिता को लेकर उनकी निर्भीकता और निष्पक्षता को उन्होंने बहुत करीब से देखा है।

श्री कपूर ने कहा कि सिवनी ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी पत्रकार बिरादरी में लिमटी खरे का नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है, उनके खिलाफ इस्तेमाल अशोभनीय भाषा से वे स्वयं भी व्यक्तिगत तौर पर आहत हुए हैं।

कांग्रेस में पसरा हुआ है अजीब सा सन्नाटा

कांग्रेस में पसरा हुआ है अजीब सा सन्नाटा

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर के निधन के उपरांत कांग्रेस के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया है। कांग्रेस के नेता अब अपने आप को दादा ठाकुर के अभाव में असहाय महसूस कर रहे हैं। दादा ठाकुर के बाद उनके कद या उनके समकक्ष कोई भी नेता सिवनी में नहीं बचा है।
कांग्रेस के अंदर हरवंश सिंह के रहते एक उत्साह का संचार होता था, उसकी कमी आज साफ तौर पर देखने को मिल रही है। कांग्रेस के कार्यकर्ता और जिला स्तर के बड़े नेता भी इस बात को कह रहे हैं कि भले ही हरवंश सिंह को वे लाख भला बुरा कह लेते थे, पर उनके रहते एक सरपरस्ती का भाव अवश्य ही लोगों के मन में रहता था जो आज बुरी तरह खल रहा है।
जिला कांग्रेस के जो नेता प्रदेश के क्षत्रपों से जुड़े हुए हैं उन्हें इस बात से बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ रहा है कि आज हरवंश सिंह कांग्रेस में नहीं हैं, किन्तु हरवंश सिंह से सीधे सीधे जुड़े नेता और उनके बताए अनुसार ही राजनीति करने वाले नेता अब अपने आप को मजबूर ही पा रहे हैं।
कांग्रेस के एक खेमे में तो अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में अगर कांग्रेस पर कोई हमला किया जाता है तो उससे कांग्रेस किस रणनीति के तहत निपटेगी? आने वाले समय में सिवनी जिले के सियासी समीकरण इस कदर करवट लेने वाले हैं जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी।
ज्ञातव्य है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और गुजरे समय की कद्दवर नेत्री सुश्री विमला वर्मा के सक्रिय राजनीति से किनारा करने के उपरांत सिवनी में कांग्रेस की कमान हरवंश सिंह ठाकुर के हाथ में परोक्ष तौर पर आ गई थी। हरवंश सिंह ने सभी गुटों के बीच यहां तक कि विपक्षी दलों के साथ भी गजब का सामंजस्य बिठाया हुआ था।
हर चुनाव में पर्यावेक्षक की नियुक्ति से लेकर टिकिट वितरण, भीतराघात के आरोप आदि को सिवनी से भोपाल होकर दिल्ली तक संभालने का माद्दा हरवंश सिंह के पास ही था। हर स्थिति में हरवंश सिंह द्वारा अपने समर्थकों को बचा लिया जाता रहा है, पर आज कांग्रेस के एक बड़े धड़े के सामने यह संकट आ खड़ा हुआ है कि आखिर वे हाथ थामें तो किसका?
उधर, हरवंश सिंह के सिवनी जिले के गृह ग्राम बर्रा की ओर से भी अभी तक स्पष्ट संकेत कांग्रेस को नहीं मिल पाया है कि हरवंश सिंह का उत्तराधिकारी कौन होगा? कांग्रेस के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार हरवंश सिंह के सुपुत्र रजनीश सिंह या हरवंश सिंह के अनुज रामजियन सिंह उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं।

ज्ञातव्य है कि गत दिवस सूत्रों के हवाले से हिन्द गजट ने इस बात का संकेत दिया था कि केवलारी विधानसभा के विधायक रहे हरवंश सिंह ठाकुर की राजनैतिक विरासत को उनके पुत्र रजनीश सिंह के स्थान पर उनके अनुज रामजियन सिंह संभालने वाले हैं।

जल जनित रोग और जल गुणवत्ता

जल जनित रोग और जल गुणवत्ता

(लिमटी खरे)

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ठाकुर ने गर्मी के शबाब पर होने के कारण जल जनित रोगों से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री से रोजना जल गुणवत्ता मानीटरिंग रिपोर्ट नियमित तौर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भेजने की बात कही गई थी। साथ ही साथ सीएमएचओ ने ईई पीएचई से यह भी कहा था कि वे अपने अधीनस्थों को जिले भर से प्रतिवेदन भेजने पाबंद भी करें।
सीएमओ डॉ.ठाकुर की इस पहल के लिए उन्हें साधुवाद दिया जाना चाहिए, कि कम से कम जल जनित रोगों के लिए उन्होंने संबंधित पीएचई विभाग से सामंजस्य तो बनाया, वरना जिले में सरकारी महकमों में आपस में तालमेल के अभाव में नागरिक नारकीय पीड़ा ही भोगने पर मजबूर हैं।
कहा जाता है कि नब्बे फीसदी बीमारियों की जड़ पानी ही होता है। पानी अगर साफ नहीं है तो पेट संबंधी अनेक बीमारियों के होने का खतरा बरकरार रहता है। वैसे भी सिवनी में पेट के रोग से त्रस्त लोगों की तादाद बहुत ही ज्यादा मानी जा सकती है। जिला चिकित्सालय में ही इस तरह के रोगियों की भरमार रहती है। वैसे भी सिवनी के लोगों को अमीबाईसिस की समस्या से जब चाहे तब दो चार होना ही पड़ता आया है।
जिला मुख्यालय सिवनी में नगर पालिका प्रशासन द्वारा प्रदाय किया जाने वाला पेयजल किसी भी दृष्टिकोण से साफ और सीधे पीने योग्य कतई नहीं माना जा सकता है। इसका कारण सिवनी शहर में लगभग 22 किलोमीटर की दूरी से पानी का शोधन किया जाकर पाईप के माध्यम से यहां लाया जाना ही है।
याद पड़ता है कि एक बार प्रदेश सरकार के तत्कालीन आदिवासी विकास विभाग के राज्य मंत्री और सिवनी जिले के प्रभारी मंत्री जब यहां के दौरे पर आए एवं श्रीवनी फिल्टर प्लांट देखा तो वे गदगद हो गए। पर जैसे ही उन्हें पता चला कि वहां से 22 किलोमीटर का लंबा सफर तय करता है साफ पानी तो वे चकित रह गए।
उस वक्त उनके मुंह से एक ही बात निकली थी कि पीएचई विभाग क्या जादूगर है जो इतना लंबा रास्ता फिल्टर किया गया पानी साफ रख पाएगा? प्रभारी मंत्री ने राजनैतिक दबाव के चलते उस वक्त इस मामले को तूल नहीं दिया वरना श्रीवनी का फिल्टर प्लांट सिवनी शहर के आसपास ही लग चुका होता।
पिछले लगभग दस सालों से प्रदेश में भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस विपक्ष में। इस फिल्टर प्लांट के बारे में ना तो भाजपा ने और ना ही कांग्रेस ने ही कोई आवाज उठाई है। कांग्रेस इसलिए चुप है क्योंकि यह उसके शासनकाल में बना था और भाजपा आज कुछ करने की स्थिति में नहीं है।
सालों साल सिवनी को दो वक्त पर्याप्त पानी देने वाली बैनगंगा नदी के लखनवाड़ा तट की हालत जर्जर है। इसके बाद दूसरा स्त्रोत बबरिया भी अपनी दुर्दशा पर आंसू ही बहा रहा है। भूजल विशेषज्ञों ने भी महज तीन साल के अंदर सिवनी में पानी को लेकर मचने वाले कोहराम की ओर इशारा किया है।
जब जिला मुख्यालय में पानी की यह हालत है तो बाकी सुदूर ग्रामीण अंचलों के बारे में कौन और क्या कहे। हो सकता है कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका प्रशासन के आला अधिकारियों के घर फायर ब्रिगेड से पानी की आपूर्ति हो रही हो तो उन्हें जनता के दर्द का पता नहीं हो।
संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव अगर किसी दिन किसी भी वार्ड में जाकर सुबह पानी भरने का नजरा देखें तो उनके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। पीने और निस्तार का पानी भरने के लिए लोगों ने दो से चार फिट के गड्ढे खोदकर रखे हैं जिसमें से वे नगर पालिका के नल के माध्यम से पानी भरते हैं।
बहरहाल, डॉ.ठाकुर की इस पहल की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने जल की गुणवत्ता के बारे में ना केवल सोचा वरन् उसे सुधारने उस पर नजर रखने के लिए संबंधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को ताकीद भी किया। पता नहीं पीएचई विभाग डॉ.ठाकुर के इस निवेदन पर कितना संजीदा होता है।
जिला प्रशासन विशेषकर युवा, उर्जावान एवं संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव से अपेक्षा है कि सीएमएचओ डॉ.ठाकुर की इस पहल को अकारत ना जाने दें। जल की गुणवत्ता के लिए वे पीएचई के साथ ही साथ नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों को भी निर्देश जारी करें।

बारिश का मौसम आने को है। बारिश के मौसम में जल जनित बीमारियों की आशंका सबसे अधिक हुआ करती है। जिला प्रशासन के प्रयासों से अगर सिवनी जिले के निवासियों को साफ पानी मुहैया हो सकेगा तो कम से कम वे मंहगी दवाओं और सिवनी में सरेआम अपने कर्तव्यों के बजाए निजी हितों पर ज्यादा ध्यान रखने वाले भगवान धनवंतरी के वंशजों से बचे रहेगें।

मंगलवार, 4 जून 2013

सांसद के.डी.देशमुख ने ‘आज तक‘ से कहा हट्ट!

सांसद के.डी.देशमुख ने आज तकसे कहा हट्ट!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। अन्नपूर्णा योजना का आगाज आज विवादों का केंद्र बन गया। इसके शुभारंभ के कार्यक्रम में सिवनी बालाघाट के सांसद के.डी.देशमुख मंच से जमकर गरजे। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान की तारीफ में कशीदे गढ़कर भाजपा के मुख्यमंत्रियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। बाद में जब मीडिया ने उनसे इस संबंध में चर्चा की तो आज तक के प्रतिनिधि पुनीत कपूर को सांसद श्री देशमुख ने जोर से हट्ट कहकर अपना मुंह मोड़ लिया।
आज पालीटेक्निक कालेज में संपन्न कार्यक्रम में मंच पर बाकी अतिथियों ने तो संयमित भाषण दिया किन्तु जब बारी सांसद के.डी.देशमुख की आई तो मानो वे आपा खोने लगे। उन्होंने कैलाश जोशी से लेकर सुंदर लाल पटवा और दिग्विजय सिंह तक को भ्रष्टाचार पर जमकर कोसा।
उन्होने कहा कि वे पांच बार विधायक रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कैलाश जोशी, मोतीलाल वोरा, श्यामा चरण शुक्ल, सुंदर लाल पटवा यहां तक कि उमा भारती को भी देखा है। इनके शासनकाल में भ्रष्टाचार चरम पर था। नेता पैसा कमा रहे थे, अधिकारी किसी की भी नहीं सुनते थे। एसपी पैसा बटोरते थे।
इसी बीच जिला कलेक्टर भरत यादव का मोबाईल बजा और वे कुछ बात करने लगे तो यह बात सांसद के.डी.देशमुख को गवारा नहीं हुई, उन्होंने कहा कि कलेक्टर साहब यहां सुनिए। जिस तरह चीख चीख कर सांसद के.डी.देशमुख भाषण दे रहे थे उसे देखकर श्रोताओं में यह चर्चा चल रही थी कि कहीं सांसद के.डी.देशमुख के अंदर क्रांतिवीर के नाना पाटेकर की आत्मा तो प्रवेश नहीं कर गई है।
वहीं कुछ भाजपाई यह चर्चा करते पाए गए कि सांसद के.डी.देशमुख दरअसल, विधानसभा चुनावों की टिकिट चाहते हैं इसलिए वे शिवराज सिंह चौहान की शान में कशीदे गढ़ रहे हैं।
बहरहाल, मध्यप्रदेष में बी.पी.एल और अन्त्योदय अन्न योजना के कार्ड धारियों को इस माह से एक बहुत बड़ी सौगात मिली है। हर गरीब की थाली में भरपेट भोजनरूपी खुषहाली का सपना अब साकार होकर धरातल में दिखने भी लगा है। मध्यप्रदेष के सभी बी.पी.एल. और ए.ए.वाय. कार्ड धारियों सहित वृद्धजनों को भी मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत एक रूपये किलो गेहूॅं, 2 रूपये किलो चावल और एक रूपये किलो आयोडीनयुक्त नमक दिया जायेगा।
इसमें बी.पी.एल. कार्डधारियों को कुल 20 किलो खाद्यान्न (जिसमें 18 किलो गेहॅूं, 02 किलो चावल और एक किलो नमक) तथा अन्त्योदय अन्न योजना के कार्डधारियों (वृद्धजनों सहित) को कुल 35 किलो खाद्यान्न (जिसमें 17 किलो गेहॅूं, 18 किलो चावल और एक किलो नमक) दिया जायेगा। सरकार की इस अत्यंत महत्वकांक्षी योजना का लाभ समाज के अंतिम छोर के अंतिम जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिये हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किये जायेगें। इस आषय के उद्गार प्रदेष के स्कूल षिक्षा राज्यमंत्री एवं सिवनी जिले के प्रभारी मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ ने व्यक्त किये।
प्रभारी मंत्री मोहोड़ आज स्थानीय पॉलीटेक्निक मैदान में सिवनी जिले में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के भव्य शुभारम्भ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर प्रभारी मंत्री मोहोड़ व अन्य अतिथियों ने फीता काटकर जिले में इस योजना का विधिवत शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री व मौजूद अतिथियों ने मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत बी.पी.एल. कार्डधारी हितग्राही श्रीमती पन्नी बाई डहेरिया व शेख जहीर खान, ए.ए.वाय. कार्डधारी हितग्राही रम्मूलाल यादव, श्रीमती सावित्री बाई व मोहम्मद इसराइल तथा वृद्धजन हितग्राही इजहार अहमद व श्रीमती हाषम बी को इस योजना के तहत पात्रतानुसार खाद्यान्न बैग्स का वितरण किया।
इस मौके पर अतिथियों ने मध्यप्रदेष श्रम एवं अन्य कर्मकार कल्याण मंडल योजना के तहत छह पात्र हितग्राहियों को चैक सौपने के अलावा पांच लाड़ली लक्ष्मियों को राष्ट्रीय बचत पत्र, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत छह हितग्राहियों को 50-50 हजार रूपये के ऋण स्वीकृति पत्र, रानी दुर्गावती योजना के तहत 3 पात्र हितग्राहियों को बड़े टेक्सी वाहनों की चाबियॉं तथा मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग स्वरोजगार योजना के तहत भी 3 पात्र हितग्राहियों को बड़े टेक्सी वाहनों की चाबियों का वितरण किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये प्रभारी मंत्री मोहोड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को एकमुष्त एक माह का राषन एक साथ वितरित किया जायेगा। प्रभारी मंत्री ने इस योजना के बारे में बताया कि मध्यप्रदेष के अलावा केवल छत्तीसगढ़ में ही ऐसी योजना लागू है जिसमें गरीबों में को बेहद कम मूल्य पर राषन का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक राषन दुकान में एक निर्धारित समयबद्ध कार्यक्रम के तहत खाद्यान्न का वितरण अधिकारियों की निगरानी में कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिले की सभी सेवा सहकारी समितियों को और अधिक मजबूत बनाया जायेगा और यह सुनिष्चित किया जायेगा कि राषन लेने के लिये दुकान में आया कोई भी पात्र हितग्राही इस योजना के राषन से वंचित न रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल ने कहा कि सर्वजन के कल्याण का दायित्व मध्यप्रदेष सरकार ने बखूबी निभाया है। हर व्यक्ति भर पेट भोजन उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का शुभारम्भ मध्यप्रदेष सरकार का प्रयास निःसन्देह वंदनीय है, अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यह हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है कि समाज के हर जरूरतमंद आदमी तक इस योेजना का लाभ पहुचें।

स्वागत भाषण में कलेक्टर भरत यादव ने कहा कि यह योजना मध्यप्रदेष सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है, क्योंकि देष में ऐसा पहली बार हो रहा है कि गरीबों को एक दिन की मनरेगा मजदूरी से भी कम राषी में अति न्यूनतम मूल्य पर पूरे महीने भर का एकमुष्त राषन मुहैया कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत आवंटित राषन का चार, पांच, छह और सात जून को जिले की प्रत्येक शासकीय उचित मूल्य दुकान में कार्यक्रम आयोजित कर पात्र कार्डधारियों को वितरण कराया जायेगा। इस खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम की निगरानी के लिये जिले के सभी अधिकारियों की ड्यिूटी लगाई गई है। कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र की उचित मूल्य दुकान में आयोजित खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम पहुंचे और अपनी मौजूदगी में सभी पात्रों को इस योजना का लाभ दिलवायंे।

दिनेश राय हमें जान से मारने की योजना बना चुके हैं: खरे

दिनेश राय हमें जान से मारने की योजना बना चुके हैं: खरे

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। ‘‘शराब व्यवसाई रहे और वर्तमान में लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने हमें जान से मारने की योजना बना चुके हैं, पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उनके द्वारा 22 मई को दिया गया आवेदन उसकी पहली कड़ी है!‘‘ उक्ताशय की बात आज जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय को दिए आवेदन में हिन्द गजट के संपादक एस.के.खरे द्वारा कही गई है।
अपने आवेदन में श्री खरे ने कहा है कि दिनेश राय, पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका परिषद, सिवनी द्वारा मेरे खिलाफ दुष्प्रचार कर आपके कार्यालय में 22 मई को एक आवेदन दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अगर मेरे साथ कोई घटना कारित होती है तो उसके लिए दिनेश राय को जिम्मेदार ना समझा जाए। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया है कि उक्त आवेदन की प्रमाणिक प्रति श्री खरे को उपलब्ध कराने का कष्ट करे।
अपने आवेदन में श्री खरे ने कहा है कि इसके साथ ही साथ दिनेश राय का पूर्व का रिकार्ड भी अच्छा नहीं माना जा सकता है। इसके पूर्व में लखनादौन में एक पत्रकार के साथ हाथापाई की गई थी, 2008 में विधानसभा चुनाव के पूर्व सहारा समय के मिशन हाई स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में दिनेश राय द्वारा युवा नेता बाबू लाल श्रीवास्तव के प्रश्न पर बाहें चढ़ाकर उन्हें मारने उठ गए थे।
श्री खरे ने कहा है कि 30 साल के पत्रकारिता के जीवन में उनका आज तक कोई वाद विवाद, झगड़ा आदि नहीं हुआ है। उन्होंने कहा है कि उन्हें तो वाद विवाद या झगड़े की आशंका नहीं है किन्तु दिनेश राय द्वारा इस तरह की आशंका व्यक्त की गई है, जिससे साफ हो जाता है कि इनके द्वारा भविष्य में उनके साथ झगड़ा या जान से मारने की योजना बना चुके हैं और कभी भी इसे अंजाम दे सकते हैं। एवं इसी कड़ी में यह उनकी पहली कोशिश है। श्री राय का यह कदम अपने आप को बचाने के लिए पूर्व तैयारी का हो सकता है।
श्री खरे ने अपने आवेदन में कहा है कि वे पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में इस बात को लाना चाहते हैं कि पूर्व में 15 मई को लखनादौन नगर पंचायत जहां के दिनेश राय अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में उनकी माता श्रीमति सुधा राय अध्यक्ष हैं के एक पार्षद प्रमोद झारिया द्वारा भी उन्हें फोन पर धमकाया गया था, जिसकी सूचना 15 मई को आपके कार्यालय को दी जा चुकी है। इसकी प्रति भी उन्होंने संलग्न कर भेजी है।
श्री खरे ने आगे कहा है कि सिवनी जिले में उनकी छवि के बारे में पता किया जा सकता है, ना तो वे अय्याशी में ही संलग्न हैं और ना ही नशे के आदी ही हैं। आखिर किस आधार पर दिनेश राय द्वारा उनकी छवि के बारे में कहा जाकर उनका चरित्र सत्यापन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ किसी भी थाने में कोई भी अपराध पंजीबद्ध नहीं है। वे एक अधिमान्य पत्रकार हैं एवं अधिमान्यता के पूर्व पुलिस वेरीफिकेशन किया जाता है, जिसमें उनका रिकार्ड दिल्ली और भोपाल पुलिस के पास साफ सुथरा है। उन्होंने कहा कि उनके पास दस साल से अधिक समय से पासपोर्ट भी बना हुआ है जिसमें कोतवाली सिवनी पुलिस ने भी पुलिस वेरीफिकेशन किया हुआ है। इसकी तसदीक की जा सकती है।
अपने आवेदन के अंत में श्री खरे ने पुलिस अधीक्षक से अपील की है कि दिनेश राय के खिलाफ तत्काल उचित कार्यवाही करते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि अगर उनके साथ अगर कोई भी दुर्घटना कारित होती है तो उसके लिए दिनेश राय को ही जवाबदेह माना जाए, क्योंकि उन्हें तो यह आशंका कतई नहीं थी कि उनके साथ कोई दुर्घटना या झगड़ा होगा, पर दिनेश राय को यह किस आधार पर लगा कि उनके साथ कोई दुर्घटना कारित हो सकती है। इससे साफ हो जाता है कि वे हमें जान से मारने की योजना बना चुके हैं।
श्री खरे का कहना है कि दिनेश राय एक जिम्मेदार नागरिक हैं। वे लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं, सिवनी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, अतः अगर उन्होंने अपने हस्ताक्षरों से युक्त कोई आवेदन जिला पुलिस अधीक्षक को दिया है तो निश्चित तौर पर पूरी जिम्मेदारी और जवाबदारी के साथ दिया होगा। श्री खरे ने दिनेश राय को चुनौति देते हुए कहा है कि दिनेश राय इस बात के प्रमाण अवश्य प्रस्तुत करें कि श्री खरे अय्याश और नशे के आदी हैं, अथवा सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, अन्यथा कानूनी कार्यवाही के लिए श्री खरे स्वतंत्र होंगे।

मुंह देखी अतिक्रमण विरोधी मुहिम!

मुंह देखी अतिक्रमण विरोधी मुहिम!

(लिमटी खरे)

सिवनी शहर के लोग सुकून महसूस कर रहे थे कि युवा एवं उर्जावान जिलाधिकारी भरत यादव द्वारा शहर में नासूर बन चुके अतिक्रमण को हटाने की मुहिम छेड़ी जा रही थी। इस मुहिम के आरंभ होते ही लोग बहुत ही प्रसन्न नजर आ रहे थे। अचानक ही पता नहीं कैसे इस पर ग्रहण सा लगता दिख रहा है, जिससे लोगों में निराशा होना स्वाभाविक ही है।
सालों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही  ना किया जाना भी आश्चर्य का ही विषय है। शहर के मुख्य मार्ग अतिक्रमण की जद में हैं। यहां तक कि नगर पालिका के सामने ही अतिक्रमण पसरा हुआ है तो बाकी की कौन कहे। इस अतिक्रमण के कारण लोगों का सड़क पर चलना दूभर हो चुका है।
बुधवारी बाजार, नेहरू रोड जैसे मार्ग तंग गलियों में तब्दील हो चुके हैं। प्रतिष्ठानों के सामने दो पहिया वाहनों की भरमार से आवागमन अवरूद्ध हुए बिना नहीं रहता है। अस्सी के दशक में कोतवाली पुलिस की लारी जिसे डग्गा भी कहा जाता था इस सड़क पर जब निकलता तो दुकानदार खुद सड़क पर आकर वाहनों को अलग कर लिया करते थे। उस वक्त पुलिस वाहनों को इस लारी में भरकर ले जाया करती थी।
समय के साथ पुलिस पर बनने वाले कानून व्यवस्था के दबाव में यातायात पुलिस का काम बढ़ गया है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। यातायात पुलिस के पास अमला भी पर्याप्त नहीं है। जिला संवेदनशील की श्रेणी में है, फिर भी सांसद विधायकों ने पुलिस में तैनाती के लिए भी ठोस पहल ना किया जाना आश्चर्यजनक ही है। ऐसा नहीं कि सांसद विधायक अगर मुख्यमंत्री या गृह मंत्री को पत्र लिखें और उनके पत्र पर कार्यवाही ना हो।
बस स्टेंड से छिंदवाड़ा चौक तक वाहन दिल्ली के मानिंद ही रेंगते नजर आते हैं। इसका कारण सड़कों के किनारे वाले प्रतिष्ठानों द्वारा सड़क पर अतिक्रमण किया जाना ही है। यातायात पुलिस के साथ ही साथ पुलिस के आला अधिकारी, नगर पालिका एवं जिला प्रशासन के अफसर भी इन मार्गों से होकर गुजरते हैं पर किसी को भी इसे पटरी पर लाने की सुध नहीं रहती है।
नवागत जिला कलेक्टर भरत यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला ने सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर चौड़ा करने की मुहिम अवश्य ही चलाई है, पर यह मुहिम राजनीतिक दांव पेंच में उलझती दिख रही है। वस्तुतः जिला प्रशासन को चाहिए कि वह नेहरू रोड़, जीएन रोड़, शुक्रवारी, बुधवारी आदि स्थानों का नक्शा बुलवाए और इन स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई देखे।
जिला प्रशासन को अगर शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना है तो उसे कठोर कदम उठाने ही होंगे। नब्बे के दशक के आरंभ में जब बाबू लाल गौर स्थानीय शासन मंत्री हुआ करते थे तब प्रदेश स्तर पर अतिक्रमण के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया गया था। भोपाल की ग्रेंड होटल को तो एक किनारे में समेट दिया गया था।
सिवनी में उस वक्त तत्कालीन जिलाधिकारी पुखराज मारू एवं जिला पुलिस अधीक्षक संजय चौधरी की जुगल जोड़ी ने बाबू लाल गौर की मंशाओं को इस कदर मूर्तरूप दिया था कि शहर खिल उठा था। लोग उस वक्त यह कहने से नहीं चूक रहे थे कि ऐसा लग रहा है मानो शहर की दाढ़ी ही बना दी गई हो।
शहर भर में खरपतवार की तरह अतिक्रमण पसर गया है। देखा जाए तो यह जवाबदेही नगर पालिका प्रशासन के साथ ही साथ यातायात पुलिस की है। सालों से दोनों ही चिरनिंद्रा में लीन हैं। दोनों ही जवाबदेह विभागों ने इस संबंध में कोई भी कार्यवाही नहीं की है। अगर कोई कार्यवाही हुई भी है तो उस पर भी मुंहदेखी कार्यवाही के आरोप लगे हैं।
जिला प्रशासन अगर सभी दलों के नेताओं को एक साथ बिठाकर अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही को राजी कर लेता है तो यह वाकई एक बड़ी सफलता माना जाएगा। इस काम में सिवनी में सियासी बियावान में चहलकदमी करने वाले नेताओं को भी निहित स्वार्थ तजना आवश्यक है।
नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह शहर उनका अपना शहर है, इसे संुदर बनाने में उन्हें आगे आना ही होगा। भाई भतीजावाद, एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप एक अलग बात हो सकती है, पर जब शहर को साफ सुथरा अतिक्रमण मुक्त बनाने की बारी आए तब सभी एक सुर से प्रशासन का इसमें साथ दें।
वर्तमान में जिसका जहां मन आ रहा है, वहां चौपाटी तो कभी हाकर्स कार्नर खोल दे रहा है। नगर पालिका परिषद द्वारा ऐतिहासिक दलसागर तालाब में चौपाटी की स्थापना करवा दी गई है जो अनुचित ही है। इसका कारण यह है कि इस चौपाटी के कचरे से दलसागर तालाब के गंदे होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
पालिका प्रशासन यह दुहाई अवश्य ही दे सकता है कि उसने वहां डस्टबिन रखवा दिए हैं, पर इन कचरादानों में कितने लोग कचरा डाल रहे हैं यह देखना भी प्रशासन की ही जवाबदारी है। एक दूसरे पर आरोप लगाना, परनिंदा का काम सबसे आसान होता है। इससे आप अपनी जवाबदेही से तो बच सकते हैं पर सच्चाई से कतई नहीं।

शहर को साफ और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि राजनैतिक दल के लोग आगे आएं और प्रशासन की इस मुहिम में उसका साथ दें। इसके लिए प्रशासन को भी पारदर्शी रवैया अपनाना अत्यावश्यक होगा, अन्यथा एक बार फिर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को मुंहदेखी कार्यवाही कहने से नहीं चूकने वाले लोग।

सोमवार, 3 जून 2013

रजनीश नहीं रामजियन होंगे दादा ठाकुर के उत्तराधिकारी

रजनीश नहीं रामजियन होंगे दादा ठाकुर के उत्तराधिकारी

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। चार दशकों तक सिवनी में कांग्रेस के आसमान पर धूमकेतू की तरह छा जाने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के अवसान के बाद अब यह चर्चा तेज हो चुकी है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा।
ज्ञातव्य है कि हरवंश सिंह ठाकुर ने सिवनी विधानसभा से पराजय के उपरांत केवलारी विधानसभा में अपना सिक्का जमाया। चार बार से वे केवलारी विधानसभा के विधायक हैं और मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रहते उनका निधन हुआ है। इसके पूर्व वे प्रदेश के गृह मंत्री जैसे जिम्मेदार ओहदों पर भी रहे हैं।
हरवंश सिंह के पारिवारिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि हरवंश सिंह ठाकुर की जमी जमाई विरासत अब किसके नाम हो इस बारे मेें चर्चाएं तेज हो गई हैं। रजनीश सिंह स्वाभाविक तौर पर उस विरासत के सबसे बड़े दावेदार बनकर सामने आ रहे हैं। वहीं चर्चा है कि इस बार केवलारी विधानसभा से हरवंश सिंह की अर्धांग्नी पवन सिंह को मैदान में उतारा जाएगा।
इसी बीच, हरवंश सिंह ठाकुर के एक करीबी ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि हरवंश सिंह ठाकुर की केवलारी विरासत अब उनके अनुज रामजियन सिंह ही संभालेंगे। इस हेतु कांग्रेस के आला दर्जे के क्षत्रपों और रामजियन सिंह के बीच प्राथमिक चर्चाएं भी पूरी हो चुकी हैं।
सूत्रों ने बताया कि कृषि उपज मंडी में उपसंचालक के पद पर पदस्थ रामजियन सिंह ने अब नौकरी से त्यागपत्र देने का मन भी बना लिया है। सूत्रों ने दावे के साथ कहा कि हरवंश सिंह की राजनैतिक विरासत अब दादा ठाकुर के पुत्र रजनीश के बजाए रामजियन सिंह ही संभालने वाले हैं।

वहीं, पारिवारिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि आज रात रामजियन सिंह बर्रा पहुंचने वाले हैं। उनके लिए हरवंश सिंह के कक्ष से लगे कक्ष को तैयार करवाया जा रहा है। संभवतः सोमवार से बर्रा में समूची कमान रामजियन ंिसह के हाथों में आ जाए।

पत्रकार लिमटी खरे अय्याश और बेवड़ा: दिनेश राय

पत्रकार लिमटी खरे अय्याश और बेवड़ा: दिनेश राय

30 साल के पत्रकारिता जीवन में आज तक कोई लड़ाई झगड़ा या दुर्घटना नहीं: खरे

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। ‘‘पत्रकार लिमटी खरे आदतन नशा और अय्याशी के कार्यों में संलग्न हैं, अगर ये खुद की गल्ति से कहीं दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं तो इसमें मेरी कोई जवाबदारी नहीं होगी।‘‘ उक्ताशय की बात शराब व्यवसाई रहे और वर्तमान में लखनादौन र्मिस्जद के सरपरस्त दिनेश राय उर्फ मुममुन ने जिला पुलिस अधीक्षक को दिए एक आवेदन में कही गई है। ला ग्रेजुएट दिनेश राय द्वारा दिए गए आवेदन में ओर छोर तथा भाषा देखकर यह कहना मुश्किल ही है कि वह आवेदन किसी पढ़े लिखे व्यक्ति ने बनाया है।
जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 22 मई को नगर पंचायत लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष और सिवनी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके दिनेश राय उर्फ मुममुन ने एक आवेदन पुलिस अधीक्षक को दिया है। इस आवेदन में कहा गया है कि हिन्द गजट पेपर लगातार उनके खिलाफ पेपर में न्यूज का प्रसारण कर रहा है।
सूत्रों ने आगे बताया कि दिनेश राय उर्फ मुममुन ने अपने आवेदन में कहा है कि वे इस तरह के प्रसारण से कतई विचलित नहीं हैं। किन्तु दुर्घटना के संदेह को देखते हुए लिमटी खरे आदतन नशा एवं अय्याशी के कार्यों मं संलग्न हैं, अतः इनकी स्वयं की गल्ति से कोई दुर्घटना घट जाए तब जानबूझकर श्री खरे द्वारा दिनेश राय उर्फ मुममुन के नाम को उन घटनाओं से जोड़ेंगे क्योंकि इसी तरह का वाक्या पूर्व में घट चुका है।
सूत्रों ने आगे बताया कि दिनेश राय उर्फ मुममुन ने अपने आवेदन में कहा है कि इस तरह का एक वाक्या उनके नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उनके खिलाफ सीरिज चलाई जा रही थी, जिसमें एक लखनादौन के एक पत्रकार रेस्ट हाउस के बाजू में किसी के घर में घुसकर लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में आसपास के लोगों द्वारा मारपीट हुई।
सूत्रों की मानें तो इस आवेदन में राय पेट्रोलियम के संचालक और लखनादौन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने आगे कहा है कि इस घटना को रेस्ट हाउस के सामने की घटना बताकर उनके द्वारा इसे घटित करवाकर मारा जाना इस प्रकार की झूठी कहानी बनाकर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई गई, किन्तु जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के द्वारा तत्काल उक्त घटना की सूक्ष्म जांच कराई गई, जिसमें इन आरोपों को झूठा पाया गया एवं केस खत्म किया गया।
सूत्रों ने आगे बताया कि दिनेश राय उर्फ मुममुन द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में कहा है कि इसी प्रकार अय्याश और नशैला पत्रकार लिमटी खरे आर्थिक पूर्ति एवं राजनैतिक षणयंत्र के तहत लगातार उनके खिलाफ झूठा एवं निराधार प्रकाशित कर रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि अपने आवेदन में अंत में दिनेश राय उर्फ मुममुन ने कहा है कि अगर लिमटी खरे स्वयं की गल्ति से दुर्घटना के शिकार हो जाएं या किसी से झगड़ लें या किसी अनैतिक कार्यों के कारण किसी दुर्घटना के शिकार हो जाएं तो उस घटना को दिनेश राय उर्फ मुममुन के द्वारा की गई बताकर उनके खिलाफ मामला बनाने का प्रयास कर सकते हैं।
इस संबंध में श्री खरे का कहना था कि दिनेश राय उर्फ मुममुन पता नहीं किस आधार पर उनके खिलाफ समाचार प्रकाशन की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्द गजट समाचार पत्र उन्होंने भी देखा है एवं 5 मई, 29 मई एवं 30 मई को प्रकाशित समाचार दिनेश राय के अच्छे कामों से संबंधित हैं। दिनेश राय द्वारा हरवंश सिंह ठाकुर को श्रृद्धांजली दी गई जिस संबंध में फोटो युक्त समाचार भी प्रकाशित किया गया था।
श्री खरे ने आगे कहा कि उनके तीस साल के पत्रकारिता के जीवन में अब तक ना तो किसी से कोई विवाद हुआ है और ना ही किसी से झगड़ा हुआ है। उन्होने कहा कि दिनेश राय उर्फ मुममुन को पता नहीं यह आशंका क्यों है कि लिमटी खरे के साथ मारपीट हो सकती है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि दिनेश राय उर्फ मुममुन द्वारा ही इस तरह का माहौल तैयार किया जा रहा है कि कहीं कोई विवाद हो और बात बढ़े।
श्री खरे ने कहा है कि उनकी शालीनता, चुप्पी, सहनशीलता को नपुंसकता कतई ना समझा जाए। उन्होंने कहा कि सिवनी की जनता अभी यह बात भूली नहीं है कि पिछले विधान सभा चुनावों के दौरान सहारा समय द्वारा आहूत मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला में हुए कार्यक्रम में दिनेश राय उर्फ मुममुन द्वारा नेता बाबूलाल श्रीवास्तव के एक प्रश्न पर किस तरह बांहे चढ़ाकर उनकी और दौड़े थे।
उन्होंने कहा कि सिवनी की जनता ने उनके तीस साल के पत्रकारिता जीवन को देखा है एवं सिवनी की जनता इस बात को भली भांति जानती है कि दिनेश राय उर्फ मुममुन के इशारों पर कौन से पत्रकारों द्वारा पत्रकारिता धर्म को तिलांजली देकर शराब व्यवसाईयों, आदिवासी विरोधी ठेकेदारों के चरण चूमे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस तरह के तत्वों को भी बेनकाब करने से नहीं चूकेंगे।
उन्होंने कहा कि वे पिछले एक दशक से राज्य शासन की ओर से अधिमान्य पत्रकार हैं एवं अधिमान्यता के लिए पुलिस द्वारा चारित्रिक और व्यक्गित सत्यापन किया जाता है। उनका चारित्रिक और व्यक्तिगत सत्यापन भोपाल एवं दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया है, फिर किस आधार पर दिनेश राय उर्फ मुममुन ने उन्हें अय्याश बताने की जहमत उठाई है इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक शराब व्यवसाई द्वारा उन्हें बेवड़ा बताया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी शराब व्यवसाई के किसी भी तरह के प्रमाण पत्र की आवश्यक्ता नहीं है।
श्री खरे ने कहा कि सोमवार को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय से इस शिकायत की प्रमाणिक प्रति प्राप्त करेंगे और उसके बाद इसके अध्ययन के साथ ही वे दिनेश राय उर्फ मुममुन के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे। श्री खरे ने कहा कि वे नशैले हैं और अय्याश हैं इस बात को दिनेश राय साबित अवश्य करें।
इतना ही नहीं श्री खरे ने कहा है कि उनके तीस साल के पत्रकारिता के जीवन में यह पहली बार उनके उपर आरोप लगा है, इस आरोप से बुरी तरह आहत हैं और इसकी शिकायत वे प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया में अवश्य ही करेंगे ताकि दिनेश राय उर्फ मुममुन को इसका करारा जवाब दिया जा सके।

श्री खरे ने कहा कि उनके द्वारा 15 मई को जिला पुलिस अधीक्षक को उन्हें फोन पर लखनादौन नगर पंचायत के पार्षद प्रमोद झारिया के नाम से मिली धमकी के बाद जिला पुलिस अधीक्षक को इसकी लिखित शिकायत कर सुरक्षा की मांग की थी, जो उन्हें अब तक नहीं मिल पाई है।

जिन्दा बम पर बैठा सिवनी शहर!

जिन्दा बम पर बैठा सिवनी शहर!

(लिमटी खरे)

सिवनी शहर में कभी भी किसी भी दुर्घटना के घटने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसका कारण शहर में जहां तहां एक्सप्लोसिव एक्ट का उल्लंघन ही प्रमुख वजह माना जाएगा। शहर के अंदर फटाखों के अलावा बारूद का ढेर लगा हुआ है। हाल ही में महावीर मढिया के सामने अनुग्रह गैस एजेंसी के बाजू में एक गोदाम में बड़ी तादाद में माचिस के खोके उतारे गए। राहगीरों की आपत्ति के बाद पुलिस ने लारी के कागज बुलवा लिए किन्तु इसके बाद क्या कार्यवाही हुई इस बारे में सिवनी पुलिस मौन ही है।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में जब सिवनी में मीनाक्षी शर्मा जिला पुलिस अधीक्षक थीं, उस वक्त एन बुधवारी बाजार से लगे दारोगा मोहल्ले में बारूद फटने से एक व्यक्ति के चिथड़े उड़ गए थे। वह घर पर बारूद क्यों रखा हुआ था? घर पर वह बारूद के साथ खेल रहा था या फिर बम बना रहा था, डेटोनेटर बना रहा था, इस बारे में सिवनी पुलिस ने मौन ही साधे रखा था।
पिछले दिनों सिवनी में हड्डी गोदाम से बड़ी तादाद में बम गोले असलाह बरामद हुआ था। इसके तार दारोगा मोहल्ला के हादसे से जुड़ सकते हैं। हो सकता है दारोगा मोहल्ला में भी बन बनाने का काम चल रहा हो। सिवनी में बड़ी संख्या में बम मिलना वाकई चिंताजनक ही माना जाएगा।
सिवनी शहर में घनी आबादी में अगर इस तरह के हादसे हो रहे हों तो यह निश्चित तौर पर पुलिस की असफलता ही मानी जाएगी। बार बार चेताने के बाद भी किराएदारी या मुसाफिरी दर्ज कराना आवश्यक ना बनाया जाना और इसको कड़ाई से लागू ना किया जाना वाकई आश्चर्यजनक ही कहा जाएगा।
हाल ही में पुलिस महानिरीक्षक ने जिले में किराएदारी की सूचना देना और मुसाफिरी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया है। दो वर्ष पूर्व भाजपा के युवा नेता नरेंद्र ठाकुर ने मुसाफिरी और किराएदारी अनिवार्य कराने की मांग की थी। विडम्बना ही कही जाएगी कि पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई है।
पुलिस महानिरीक्षक संजय झा के आदेश के उपरांत भी सिवनी में किराएदारी के सत्यापन का काम अभी तक आरंभ नहीं हो सका है, जो वाकई अपने आप में आश्चर्यजनक के साथ ही साथ अनेक संदेहों को जन्म देने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। दक्षिण भारत का एक कातिल हत्यारा सिवनी की अभिषेक कालोनी में ना केवल रहकर चला गया वरन् नगर पालिका परिषद ने सारी सीमाएं पार कर उसका राशन कार्ड तक बना दिया था।
सिवनी शहर में माचिस का बल्क में स्टोरेज भी किसी दिन किसी अनहोनी को जन्म दे सकता है। इसका सबसे खतरनाक पहलु यह है कि यह आबादी वाला क्षेत्र है। साथ ही साथ महज दस कदम पर ही अनुग्रह गैस एजेंसी है। सिवनी में फटाखा व्यवसाई भी अपना माल कहां रखते हैं यह बात भी शोध का ही विषय है।
क्या कभी जिला प्रशासन ने कभी फटाखा व्यवसाईयों से यह पूछने की जहमत उठाई है कि वे अपना स्टोरेज कहां रखते हैं। दीपावली के पहले फटाखा व्यवसाईयों को ज्वलनशील फटाखे बेचने के लिए लाईसेंस दिया जाता है। दीप पर्व और ग्यारस के उपरांत जिन फटाखा व्यवसाईयों को लाईसेंस दिया जाता है उनसे यह पूछने की जहमत भी प्रशासन नहीं उठाता कि उनके पास कितना माल बचा है और वह उन्होंने कहां खुर्द बुर्द किया है।
सिवनी शहर के हड्डी गोदाम और बारापत्थर की एकता कालोनी में बम मिले और आरोपी भी। इसका मतलब साफ है कि अब शहर का कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं बचा है। हर ओर डर ही डर है कि पुलिस की मुखबिर सूचना तंत्र के पंगु होने के चलते और नेताओं तथा मीडिया पर्सन्स की अनावश्यक तांक झांक और दबाव के कारण ही शहर के हालात बद से बदतर हो चुके हैं।

जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से एक ही अपेक्षा है कि वह अपना गोपनीय सूचना तंत्र मजबूत करे, एवं साथ ही साथ किराएदारी तथा मुसाफिरी दर्ज करवाने के काम को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न करवाया जाए, ताकि शहर में अमन चैन वापस लौट सके और नागरिक एक बार फिर चैन की सांस ले सकें।

रविवार, 2 जून 2013

चांदा ढूंढता रह गया अतिक्रमण विरोधी दस्ता

चांदा ढूंढता रह गया अतिक्रमण विरोधी दस्ता

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। जिलाधिकारी भरत यादव के निर्देशन में की जा रही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही में आज नेहरू रोड़ पर अतिक्रमण हटाने गया दस्ता माप के लिए सुबह से शाम तक चांदा ही ढूंढता रह गया।
ज्ञातव्य है कि नगर पालिका परिषद की कथित उदासीनता के चलते शहर के लिए नासूर बन गए अतिक्रमाण को हटाने की कार्यवाही जिला कलेक्टर के निर्देश पर की जा रही है। इसके तहत बस स्टेंड, शुक्रवारी, जीएन रोड़ आदि पर अस्थाई अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही गत दिवस तक जारी थी।
आज जब दस्ते ने नगर पालिका के सामने से नेहरू रोड़ में प्रवेश किया तब वहां राजस्व विभाग के चांदे को लेकर अधिकारी पशोपेश में रह गए। अधिकारियों को वह चांदा नहीं मिल पाया जहां से कि इसका माप किया जा सके। दिन भर पालिका और राजस्व विभाग के कर्मचारी चांदे को ही ढूंढने में व्यस्त रहे।
गौरतलब है कि आज शनिवार होने के कारण बाजार का अवकाश था। इसके साथ ही साथ आज कांग्रेस की एक जरूरी बैठक भोपाल तो भाजपा की बैठक ग्वालियर में थी, जिसके चलते कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता शहर से बाहर ही थे। इन परिस्थितियों में राजनैतिक विरोध की गुंजाईश इस सड़क पर कम ही थी।
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि शहर में लाउड स्पीकर के माध्यम से मुनादी पिटवाई गई थी जिसमें इस कार्यवाही को अंजाम देने की बात कहकर स्वयं ही अतिक्रमण हटाने की बात कही जा रही थी।
राजस्व विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरसअल, राजस्व विभाग के चांदे और मुनारों के जरिए जमीन की वस्तु स्थिति का सही अंदाजा लगाया जाता है। शहर के अंदर चांदा कहां हैं और किसके घर के अंदर दब चुका है इस बारे में पटवारी से बेहतर और कोई नहीं बता सकता है।
आज संपन्न हुई कार्यवाही में चांदा ढूंढते रह जाना अपने आप में एक आश्चर्य से कम इसलिए नहीं है क्योंकि वहां नगर पालिका परिषद के अलावा राजस्व विभाग का बड़ा अमला भी मौजूद था।
कहा जा रहा है कि सेठ साहूकारों के दबाव में आकर अतिक्रमण विरोध दस्ते ने अपनी कार्यवाही को अंजाम ना देते हुए चांदा खोजने में ही अपना दिन बिता दिया और शाम ढलते ही कर्मचारी अपने अपने घरों की ओर कूच कर गए।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगर रविवार को इस सड़क पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाती है तो दुकानों पर लगी ग्राहकों की भीड़ इसमें बाधक बन सकती है। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि इस दस्ते ने शनिवार को नेहरू रोड़ को अतिक्रमण से मुक्त कराने का एक सुनहरा मौका हाथ से गंवा दिया है।

इन पंक्तियों के लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इस संबंध में ना तो कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है और ना ही कोई विज्ञप्ति ही जारी की गई है।

शनिवार, 1 जून 2013

पुलिस का विशेष चेकिंग अभियान

पुलिस का विशेष चेकिंग अभियान

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले के समस्त थाना क्षेत्रों में पुलिस विभाग द्वारा चौपहिया और दो-पहिया वाहनों की चैकिंग का अभियान आरंभ किया गया है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में आई.जी. संजय झा द्वारा निर्देशित किया गया है।
इस अभियान के अंतर्गत पुलिस बल द्वारा चौपहिया वाहनों में लगाई गई काली फिल्मों को सख्ती से हटाने का निर्णय लिया गया है। इसी प्रकार दो पहिया वाहनों में तीन सवारी बैठाकर वाहन चलाने वाले चालकों पर भी चालानी कार्यवाही की जा रही है। इसी अभियान के तहत वाहनों में नंबर प्लेट है या नहीं या नंबर प्लेट पर नंबर इस तरह से लिखा गया है कि वे ठीक से स्पष्ट रूप से दिखायी नहीं देते हैं, उनके विरूद्ध भी कार्यवाही की जायेगी।
गौरतलब है कि पूर्व में भी काली फिल्मों को हटाने का अभियान छेड़ा गया था। लेकिन कुछ दिनों तक चले इस अभियान के ठण्डे बस्ते में जाते ही सड़कों पर फिर से गहरे रंग की फिल्मों से सजी गाड़ियों को देखा जा रहा था। इसी को देखते हुए पुलिस ने पुनः सभी थाना क्षेत्रों में कार्यवाही करने का निर्णय लिया है।
जनापेक्षा है कि इस तरह के अभियान यदि निरंतर जारी रखना संभव नहीं भी है तो कम से कम थोड़े-थोड़े अंतराल पर इस तरह की कार्यवाहियां की जाते रहना चाहिये। जिससे विभिन्न थाना क्षेत्रों में लूट, चोरी, जैसे अपराधों में शामिल असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखी जा सके।