मंगलवार, 18 जून 2013

वेतन के लाले हैं आयुष कर्मचारियों को

वेतन के लाले हैं आयुष कर्मचारियों को

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। जिले में जिला आयुष अधिकारी की मनमानी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर आयुष विभाग के कर्मचारियों का मई माह का वेतन आज तक नहीं निकल सका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला आयुष अधिकारी डॉ.एस.डी.गर्ग को प्रभार तो मिल गया है किन्तु आहरण वितरण अधिकार उनके पास ना होने से कर्मचारियों का वेतन अब तक नहीं निकल सका है।
जिला कलेक्टरेट के सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में एक नोटशीट जिला कलेक्टर कार्यालय में चल रही थी, जिस पर आज यह आदेश किए गए हैं कि जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के आहरण वितरण अधिकार उप जिलाध्यक्ष सुनीता खण्डाईत को दिए गए हैं।
संभवतः वे एक दो दिन में जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के आहरण वितरण अधिकार प्राप्त करेंगी, जिसके उपरांत इस कार्यालय में कर्मचारियों के देयक बनाए जाकर जिला कोषालय भेजे जाएंगे। माना जा रहा है कि अगले सोमवार तक जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों को वेतन प्राप्त हो सकता है।
0 अस्पताल में नहीं चिकित्सक
जिला आयुष अधिकारी का पदभार ग्रहण करने के उपरांत जिला चिकित्सालय की आयुष विंग सूनी ही नजर आ रही है। चिकित्सालय में ना तो कोई चिकित्सक ही अपनी सेवाएं दे रहा है और ना ही अन्य कर्मचारी।
बताया जाता है कि अपनी शिकायत से आजिज आकर डॉ.गर्ग ने जिला चिकित्सालय से आयुष विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों को वापस बुलवा लिया है।
0 भटक रहे हैं पैंशनर्स
जिला चिकित्साालय में आर्युवेद पर भरोसा करने वाले पेंशनर्स को इससे सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है। पैंशनर्स आयुष विभाग में जाते हैं तो ना तो उन्हें देखने के लिए कोई चिकित्सक वहां मौजूद रहता है और ना ही उन्हें आर्युवेदिक दवाएं ही मुहैया हो पा रही हैं।

जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि इस दिशा में शीध्र ही उचित कार्यवाही सुनिश्चित करे।

नाथ के स्वागत से गायब रहे हुकुम व दरबार

नाथ के स्वागत से गायब रहे हुकुम व दरबार

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय संसदीय कार्य और शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के सिवनी आगमन पर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और घंसौर क्षेत्र में हुकुम के नाम से मशहूर कुंवर शक्ति सिंह एवं लखनादौन नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय की अनुपस्थिति ने लोगों को चौंका दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में परिवर्तन यात्रा का आगाज करने आए केेंद्रीय मंत्री कमल नाथ, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के द्वारा स्थानीय महावीर लान में एक कार्यक्रम रखा गया था।
बताया जाता है कि इस कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के अंदर व्याप्त विभिन्न धड़ों ने अपना असहयोग साफ तौर पर दर्शाया। एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार (हिन्द गजट नहीं) के अनुसार कमल नाथ के सिवनी कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर लखनादौन में कांग्रेस की बैठक में दिनेश राय ने शिरकत कर चौंका दिया। माना जा रहा था कि दिनेश राय 13 जून को कमल नाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे।
इस दिन लखनादौन घंसौर क्षेत्र से कांग्रेस के कार्यकर्ता तो उपस्थित हुए किन्तु इसमें कुंवर शक्ति सिंह के समर्थकों का टोटा साफ दिखाई पड़ा। कांग्रेस के खेमे में व्याप्त चर्चाओं को अगर सही माना जाए तो कुंवर शक्ति सिंह का अब कांग्रेस से मन भर चुका है।
वहीं पिछले कुछ दिनों से कुंवर शक्ति सिंह के भाजपा में जाने, केवलारी से दावेदारी पेश करने की खबरें आम हो रही थीं। माना जा रहा है कि कल तक कांग्रेस के कद्दावर नेता ठाकुर हरवंश सिंह की उंगली पकड़कर राजनीति के बियावान में राजनीति का ककहरा सीखने वाले कुंवर शक्ति सिंह उनके जाते ही अब कांग्रेस को ही आंखें दिखाने लगे हैं।
केवलारी से टिकिट की दावेदारी की खबरो ंने लोगों को चौंका दिया है। कांग्रेस में चल रही चर्चाओं के अनुसार हरवंश सिंह के अवसान के साथ ही कुंवर शक्ति सिंह के बारे में केवलारी की टिकिट मांगने की खबरें आना इस बात का घोतक है कि अब वे राजनीश सिंह पर दबाव बनाकर अन्य कहीं से टिकिट की दावेदारी करने जा रहे हैं।

कहा तो यह भी जा रहा है कि कुंवर शक्ति सिंह अब प्रेशर टेक्टिस अपनाकर कांग्रेस पर जमकर दबाव बना रहे हैं ताकि उन्हें जबलपुर जिले की सिवनी से लगी किसी सीट से कांग्रेस का टिकिट मिल सके।

मूत्रालय, शौचालय को तरसता शहर!

मूत्रालय, शौचालय को तरसता शहर!

(शरद खरे)

यह वाकई दुखद और निराशाजनक ही कहा जाएगा कि सिवनी शहर में सार्वजनिक स्तर पर ना तो मूत्रालय ना ही शौचालय ही हैं। नगर पालिका प्रशासन का यह दायित्व है कि वह नगर के लोगों को कम से कम जरूरी सुविधाएं तो उपलब्ध करवाए। नगर पालिका प्रशासन की हठधर्मिता के चलते दलसागर के मुहाने पर विसर्जन घाट पर अधबने शौचालय पर भी स्टे दे दिया गया है।
सिवनी शहर में कहने को तो बस स्टेंड के अंदर राज्य परिवहन का सुलभ शौचालय है। निजी बस स्टेंड पर सुलभ शौचालय है। बुधवारी बाजार में सिर्फ मूत्रालय है जिसे भी तोड़ने के षणयंत्र का ताना बाना बुना गया था। पुराने शौचालय जिन्हें चालू भाषा में बम पोलस भी कहा जाता था, एक दो जगह हैं पर दुर्गंध और गंदगी से बजबजा ही रहे हैं।
शहर की आबादी में इजाफा हुआ है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लोगों को साफ सफाई, पानी, प्रकाश सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। इसके साथ ही साथ सुलभ शौचालय की तो सबसे अधिक जरूरत है, पर इस ओर ध्यान देना किसी ने मुनासिब नहीं समझा है।
ऐसा नहीं है कि पार्षदों से उनके वार्ड की दुरावस्था छिपी हुई है। पार्षद भी अपने अपने वार्ड में विकास कार्य के नाम पर सिर्फ निर्माण कार्य ही करवाना चाहते हैं। ये निर्माण कार्य कितनी गुणवत्ता के होते हैं यह बात भी सभी जानते हैं। इसमें कमीशन का गंदा खेल भी किसी से छिपा नहीं हैं।
मूत्र विसर्जन और विष्ठा विसर्जन किसी के बस में नहीं है। कोई भी शौच या मूत्र को अधिक देर तक नहीं रोक सकता है। इन दोनों ही के निष्पादन के लिए उसे एक स्थान की आवश्यक्ता होती है। घरों में शौचालय या बाथरूम का उपयोग चौबीस घंटे में महज दस से पंद्रह मिनिट के लिए होता है पर घरों के निर्माण के समय इनकी अनदेखी नहीं की जाती है।
ठीक इसी तरह शहर के विकास के लिए मल त्यागने या मूत्र विसर्जन के लिए स्थान सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। सड़कों किनारे लोग पाखाना करते अलह सुब्बह दिख जाते हैं। सड़कों पर पड़ी मल की गंदगी दिन भर आने जाने वालों को परेशान ही किया करती है।
सिवनी में मूत्रालय की आवश्यकता सबसे अधिक है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण जनपद पंचायत और टेलीफोन एक्सचेंज के बीच की गली में देखा जा सकता हैै। इस गली से होकर शहर की शालाओं के विद्यार्थी विशेषकर छात्राएं बहुतायत में गुजरती हैं। मिशन शाला, गणेश चौक, कचहरी चौक, दलसागर के आसपास मूत्रालय ना होने से यह गली अब ‘‘पेशाब वाली गली‘ के नाम से पहचानी जाने लगी है जो नगर पालिका प्रशासन के मुंह पर तमाचे से कम नहीं है।
कुछ साल पहले हरे पीले रंग के प्लास्टिक के मूत्रालय नगर पालिका परिषद द्वारा खरीदे गए थे। गुणवत्ता विहीन इन डब्बों ने कुछ ही माह में दम तोड़ दिया। अब ये कहां हैं किसी को पता नहीं है। इसके परिणाम स्वरूप लोगों को दीर्घ या लघु शंका के लिए स्थान ढूंढना पड़ता है।
सिवनी शहर को काम्प्लेक्स या दुकानों का शहर बना दिया गया है यह बात भी जगजाहिर ही है। शहर में मकान कम दुकानें बहुतायत में है। कमोबेश हर घर में एक शटर लगा दिखाई दे जाता है। पता नहीं नगर पालिका की नजरों से ये बचे हुए कैसे हैं अब तक।
युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव अगर शहर के समस्त शापिंग काम्प्लेक्स का अवलोकन कर लें तो वे पाएंगे कि शहर में किसी भी काम्प्लेक्स में (स्मृति धर्मशाला को छोड़कर) ना तो पार्किंग की सुविधा है, ना ही आवागमन के लिए कारीडोर की और ना ही मूत्रालय वहां है।
शहर के मुख्य बाजार बुधवारी में मूत्रालय का अभाव साफ दिखाई पड़ता है। बुधवारी में नगर पालिका के काम्प्लेक्स के मूत्रालय पर विदेशी शराब दुकान का कब्जा है, तो बारापत्थर के काम्प्लेक्स में मूत्रालय ना होने से अस्पताल के आसपास लोग लघुशंका करने पर विवश हैं।
शहर में महिलाओं के लिए प्रथक से मूत्रालय की व्यवस्था ना होने से महिलाओं विशेषकर ग्रामीण अंचलों से आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुरूष वर्ग तो निस्तार के लिए कहीं भी खड़े हो जाते हैं पर महिलाओं की पीड़ा को आखिर कौन समझेगा? महिला संगठन, नगर पालिका की महिला पार्षद भी इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझती हैं।

युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव से अपेक्षा है कि शहर में मूत्रालय और शौचालयों की कमी को गंभीरता से लेते हुए शहर में इनकी व्यवस्था सुनिश्चित करवाने के लिए नगर पालिका प्रशासन को निर्देशित करें। साथ ही साथ इनके निर्माण में इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाए कि इनके निर्माण के चलते कहीं आवागमन, जनभावनाएं, धार्मिक भावनाएं आहत ना हों।

सोमवार, 17 जून 2013

किसानों को टिकाया जा रहा घटिया खाद बीज

किसानों को टिकाया जा रहा घटिया खाद बीज

बीज विकास निगम कर रहा किसानों के साथ जमकर छलावा

(गजेंद्र ठाकुर)

छपारा (साई)। बीज विकास निगम द्वारा छपारा क्षेत्र में किसानों के साथ जमकर छल किया जा रहा है। किसानों को गुणवत्ता विहीन खाद बीज, बिना टेग लगी खाद की बोरियां, एफ वन के स्थान पर एफ टू क्वालिटी का बीज देने की अनेक शिकायतें प्रकाश में आई हैं।
क्षेत्र मे वर्षो से संचालित कृषि फार्म बीज निगम जहां किसानों का उच्च गुणवत्ता का उत्पादित अनाज खरीदा जाता है जिसकी ग्रेडिंग के पश्चात बीज को उच्चकोटी का बनाकर व उसकी अंकुरण क्षमता का परीक्षण करवा कर किसानों को बेचा जाता है लेकिन छपारा के बीज निगम मे लगे अधिकारी कर्मचारी किसानों के साथ खिलवाड कर रहे है। निगम के अधिकारी घटिया किस्म के बीज को आधार प्रमाड़ित बीज बता कर अधिक मुल्य पर बेच रहे है।
अधिवक्ता किसान ने पकड़ी चोरी
अधिवक्ता किसान अजय बाबा पाण्डे ने बीते दिवस छपारा में अधिकारियों को गुणवत्ता विहीन खाद बीज देते हुए पकड़ा। जब बाबा पाण्डे स्वयं खाद बीज लेने पहुंचे तो वहां किसानों ने उनसे शिकायत की कि उन्हें बिना टेग लगी खाद की बोरी दी जा रही है। इस पर उन्होंने वहां उपस्थित अधिकारी श्री मांझी से इसकी शिकायत की तो श्री मांझी ने उन्हे बताया कि किसानों के खाद के बैग से टेग लिखापढ़ी पूरी करने के लिए निकाल लिया जाता है।
श्री पाण्डे द्वारा मौके पर श्री मांझी के पास महज 12 टेग पाए गए, जबकि 44 टेग गायब थे। श्री पाण्डे ने इनका हिसाब मांगा। श्री मांझी ने कहा कि वे किसानों के पास हो सकते हैं। तब श्री पाण्डे ने कहा कि अगर 44 टेग किसानों के पास हैं तो श्री मांझी ने अपने पास महज 12 टेग लिखा पढ़ी के लिए क्यों रखे हैं। इसका जवाब श्री मांझी के पास नहीं था।
किसान ने की शिकायत
शनिवार को कृषक संतोष सिसोदिया खरीफ सीजन के लिये सोयाबीन बीज को खरीदने के लिये बीज निगम गया जहां  उसने 8 बोरी बारह हजार छःसौ छियत्तर रूपये में खरीदा। जब किसान ने बीज के बैग को बीज निगम से उठा लाया तब उसने बैग मे देखा तो उसमे प्रमाणित सफेद टेग नही लगा था और ना ही मैटल सील लगी थी। जब खरीदे गये कैस मेमो को देखा गया तो उसमे भी बीज का लाट नम्बर नही डाला गया था। जो यह साबित करता है कि बीज निगम मे अधिकारी वर्ग घटिया बीज बेच कर किसानों को बर्बाद करने मे तुले है।
वर्षो से चल रहा था खेल
छपारा तहसील क्षे़त्र के किसान वर्षों से बीज निगम से बीज खरीद रहे हैं। लेकिन किसानो ने कभी गंभीरता से इन सब बातों को नही देखा क्योंकि बीज निगम मे ग्रेडिंग मशीन से बीज को साफ कर बनाया जाता है और यहां ही बीज के बैग तैयार होते हैं। जिसमें अधिकारी कितनी मात्रा मे सैकंेड का बीज किसानों को बेच रहे है यह तो वे ही जानते है बेचारा किसाना शासन की ईकाई होने से बीज निगम पर भरोसा कर बीज खरीद लेता है और खेत मे बीज अंकुरित नही हुआ या कम हुआ तो किसान भगवान व प्रकृति को दोष देता है कि अधिक पानी गिर जाने से या अंकुर के समय तेज धूप निकल जाने से बीज अंकुरित नही हुआ। जबकि असल बात घटिया बीज की होती है जिसे प्रमाणित नही किया जा सकता इस लिये किसानो को जागरूक होने की जरूरत है।
बनाया गया पंचनामा
जब इस मामले कि शिकायत विभाग के बडे अधिकारियों को की गयी तो अधिकारियों ने एसडीओ एस.एल.नाईक लखनादौन एंव वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बीएल परते को को मामले की जांच करने के निर्देश दिये। जिसके आधार पर अधिकारियों ने मौके पर खरीदे गये बीज का निरीक्षण किया जांच मे बीज के बेगो पर सफेद रंग का टेग लगा होना चाहिए जो नही लगा था। और धातु की कोई सील पैकिंग धागा मे नही लगी पायी गयी।
साथ ही कैश मेमों क्र0 0440 दिनांक 15 जून मे लाट नम्बर भी अंिकंत नही था जिससे साफ जाहिर होता है कि बीज निगम के कर्मचारी फैल लाट जो बीज निगम मे रखा है उसको ही बीज बनाकर बेच रहे है इस तरह जांच अधिकारियों ने बीज निगम की गोदाम मे जाकर निरीक्षण भी किया जिसमे निगम के प्रभारी अधिकारी ने उक्त बीज के लाट के बारे मे जानकारी नही दिया। इस तरह पंचानाम मे निगम को निर्देशित किया गया कि उक्त संबंध मे जानकारी उपलब्ध करायी जाये।

मैने भी 10 बोरी सोयाबीन बीज निगम से खरीदा है लेकिन उसमे सफेद कागज और धातु की कोई सील नही लगी है कागज मे क्या लिखा है देख कर बता पाउंगा।
रगंलाल धुर्वे जनपद अध्यक्ष एंव कृषक

मैने बीज निगम से 8 बैग खरीदा है बैग मे तो आधार प्रमाणित हाथ की सियाही से लिखा है, लेकिन सफेद टेग व धातु सील नही लगी है। साथ ही बीज को निकाल कर देखा गया तो वह घटिया किस्म का पाया गया है। निगम के अधिकारी लाभ कमाने के लिये ऐसा कर रहे है।
संतोष सिसोदिया कृषक

मेरे पास शिकायत आई थी, जिस पर मैने एसडीओ व स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी को निर्देश कर जांच करवाया है। जांच रिर्पोट मेरे पास नही आयी है, जैसे ही जांच रिर्पोट आती है निगम को नोटिस देकर पुछा जायेगा नही तो आवश्यक कार्यवाही की जावेगी।
एस.आर.धुर्वे उपसंचालक कृषि विभाग सिवनी

शिकायत के आधार पर मौका निरीक्षण कर पंचनामा बनाया गया है आगामी कार्यवाही वरिष्ठ अधिकारी करंेगे।

बी.एल.परते वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी छपारा

शराब विरोध अण्णा का स्वागत होगा शराब के पैसों से!

शराब विरोध अण्णा का स्वागत होगा शराब के पैसों से!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। गांधी वादी समाज सेवी अण्ण हजारे ने भले ही महाराष्ट्र के अपने गृह ग्राम रालेगण सिद्धि में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया हो पर सिवनी में उनके स्वागत की तैयारियों में शराब के पैसों के इस्तेमाल की चर्चाएं आरंभ हो गई हैं।
शहर में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार 8 जुलाई को अण्णा हजारे का सिवनी आने का कार्यक्रम तय किया गया है। इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने अण्णा के समर्थकों की फौज सिवनी में सक्रिय हो चुकी है।
चर्चा है कि अण्णा की इस सभा के लिए एक बड़बोले नेता जो शराब व्यवसाय में लिप्त हैं ने अचानक ही अपनी सक्रियता दिखाना आरंभ कर दिया है। एक ओर तो अण्णा हजारे शराब के कारोबार को समाप्त करने पर आमदा हैं, इसका उदहारण उनके गृह ग्राम की शराब वेदी से मिल जाता है।

वहीं, दूसरी ओर शराब के पैसों से अण्णा हजारे के स्वागत की तैयारियों की चर्चाएं भी शहर में तेज हो गई हैं, जिसकी प्रतिक्रियाएं बहुत अच्छी नहीं कही जा रही हैं।

गौर का फूंका पुतला: आज रखेंगे प्रतिष्ठान बंद

गौर का फूंका पुतला: आज रखेंगे प्रतिष्ठान बंद

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। मप्र शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा सिंधी समाज के द्वारा दिये गये आपत्तिजनक बयान को लेकर पूरे प्रदेश के सिंधी समाज में आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते आज नगरपालिका के सामने सिवनी के सिंधी समाज के लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए बाबूलाल पुतला दहन किया।
स्थानीय सिंधी समाज द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में उक्ताशय की बात कहते हुए कहा गया है कि प्रदेश के स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर की मति भ्रष्ट हो गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सिंधी समाज के सदस्य सोमवार 17 जून को नगर में अपने अपने प्रतिष्ठान विरोध स्वरूप एक बजे तक बंद रखेंगे।
इसके अलावा सोमवार 17 जून को अपरान्ह बारह बजे पूज्य सिंधी पंचायत की अगुआई में सिंधी समाज द्वारा महामहिम राज्यपाल राम नरेश यादव एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाकर बाबू लाल गौर को प्रदेश कैबनेट से हटाने की मांग की जाएगी।
पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा सिंधी समाज के समस्त सामाजिक व्यवसाईयों के साथ ही साथ अन्य व्यापारी बंधुओं से भी सहयोग की अपील की है।
पुतला दहन करने वालों में प्रमुख रूप से संतोष पंजवानी, हीरा आसवानी, मनोज गुरूनानी, हरीश रावलानी, राजकुमार पंजवानी, विनोद रावलानी, अशोक आहूजा, आनंद पंजवानी, सुशील आडवानी, बलराम गनवानी, भारत चेनानी, मुकेश आहूजा, अनिल बच्छानी, जीतू काछेलानी, दिलीप सच्चानी सहित बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग मौजूद थे।
सिंधी समाज के लोगों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार जबसे केंद्र में लाल कृष्ण आड़वाणी कमजोर हुए हैं तबसे भाजपा के आला नेताओं के निशाने पर सिंधी समाज के लोग आने लगे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि भाजपा के आला नेता अब सिंधि समाज के प्रतिनिधि ईश्वर दास रोहाणी पर भी बयानों के तीर चलने लगें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

कुरई घाट का बस हादसा!

कुरई घाट का बस हादसा!

(शरद खरे)

सिवनी जिले की कुरई घाटी सालों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दशकों पहले यहां शेरों की दहाड़ सुनाई देती थी। उसके बाद इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही कुरई घाट में सड़क निर्माण को अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने स्थान दिया। इसके उपरांत पहले दशक की समाप्ति के दौरान ही फोरलेन पर लगे फच्चर के कारण यह घाट चर्चित हुआ। सड़क ना बन पाने के कारण हुए हादसों ने सभी को हिला दिया और अंततः 14 जून को यादव ट्रेवल्स की यात्री बस खाई में गिर गई।
बताते हैं कि पचास के दशक के आसपास कुरई के घाट में शेरों की तादाद बहुत अधिक हुआ करती थी। इसके बाद शिकारियों ने इस घाट को शेरों की दहाड़ से वंचित ही कर दिया। एक समय था जब कुरई घाट के विहंगम दृश्य को देखने बाहर से इस मार्ग से होकर गुजरने वाले बरबस ही रूक जाया करते थे। लोक कर्म विभाग द्वारा कुरई घाट के एक स्थान को चौड़ा कर वहां विहंगम दृश्य देखने की बाकायदा व्यवस्था भी की है।
इक्कीसवीं सदी के आरंभ में युवा एवं उर्जावान तथा प्रदेश के उत्कृष्ठ सर गोविंदराम सक्सेरिया इंजीनियरिंग कालेज इंदौर के प्रोडक्ट इंजीनियर प्रसन्न चंद मालू द्वारा उस समय बनाए गए कुरई घाट का जिकर एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा किया गया था। उस समय इस सड़क के घुमावदार रास्ते पर गुणवत्ता के साथ काम करने के लिए अपने आलेख में उक्त पत्रिका ने इंजीनियर प्रसन्न मालू के नाम का भी उल्लेख किया था।
दिसंबर 2008 में सिवनी के लिए मनहूस थी 18 दिसंबर की तारीख। इस काले दिन तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि द्वारा सीईसी के निवेदन पर एक आदेश जारी कर फोर लेन का काम मोहगांव से खवासा तक रूकवा दिया। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश था कि उसके बाद वन और गैर वन भूमि पर सड़क के निर्माण का काम नहीं हो सकेगा।
बस यहीं से एक बार फिर कुरई घाट में स्याह सन्नाटा पसर गया। इस मार्ग का रखरखाव भी 2008 के उपरांत 2013 तक निर्माण में लगी सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा नहीं किया गया। ना ही इस काम को करवाने के लिए जिम्मेदार एनएचएआई के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही इस काम को करवाने की जुर्रत की गई।
इसका नतीजा यह हुआ कि मोहगांव से खवासा तक का मार्ग जिसमें कुरई घाट शामिल है बुरी तरह जर्जर हो गया। इस मार्ग पर भारी ओव्हर लोडेड वाहन इस कदर झूलते चलते थे कि लगता था अब गिरे तब गिरे। इनके पास से निकलने वाले दो और चार पहिया वाहनों के चालक इनकी हाथी जैसी मदमस्त चाल को देखकर सहम ही जाया करते थे। सड़क के इस भाग में हुई दुर्घटनाओं में मरने वालों की भी खासी तादाद है।
सिवनी में सड़क के इस भाग के निर्माण के लिए अनेक गैर राजनैतिक संगठन भी लोगों को लामबंद करते रहे पर सड़क के रखरखाव के लिए किसी ने आवाज नहीं उठाई जो आश्चर्य का विषय ही बनी रही। इस सड़क का रखरखाव ना करके सिवनी के जिम्मेदार लोगों द्वारा प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर सद्भाव कंपनी के करोड़ों रूपए बचवा दिए बताए जाते हैं।
ऐसा नहीं कि अगर जिला प्रशासन, सांसद विधायक एवं सड़क के लिए लड़ने वाले संगठन चाहते तो इस सड़क के रखरखाव का काम आरंभ से ही पूरा होता रहता और सड़क पर हादसों में इस कदर लोग ना तो मारे जाते और ना ही घायल होते। वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं। कहा जा रहा है कि इन सभी ने परोक्ष तौर पर सद्भाव कंपनी का ही साथ दिया है। सच्चाई क्या है यह तो निर्माण कंपनी जाने या बाकी सब, पर यह सच है कि हादसों में लोग काल कलवित हुए हैं।
इस साल के आरंभ में पता नहीं ऐसा क्या हो गया कि एनएचएआई ने इस सड़क को मोटरेबल बनवा दिया। कहा जाता है कि एक वरिष्ठ अधिकारी जबलपुर में पदस्थ थे, और उन्हें हर सप्ताह नागपुर जाना आना पड़ता था। दो तीन बार जब उन्हें तकलीफ हुई उन्होंने मामला बुलवाया अध्ययन किया और फिर एनएचएआई सहित सभी को जमकर लताड़ा। बन गई सड़क रातों रात।
अगर यह सड़क 2013 में बन सकती है तो 2008 के बाद क्यों नहीं बन सकती? क्या इसका जवाब कांग्रेस, भाजपा या अन्य विरोध करने वाले राजनैतिक और गैर राजनैतिक संगठनों के पास है? मतलब साफ है कि मामले को अज्ञानता या जानते बूझते गलत दिशा में ले जाया गया था।
बहरहाल, 14 जून के अंक में दैनिक हिन्द गजट ने कुरई घाट में सड़क में गड्ढ़े होने और किनारे की मिट्टी खिसलने की खबर प्रकाशित की थी। इसी दिन यादव ट्रेवल्स की एक बस खाई में गिर गई। यह हादसा हुआ और एनएचएआई अभी भी कुंभकर्णीय निद्रा में है। कुरई घाट बेहद घुमावदार और खतरनाक है।
बस वैध रूप से संचालित थी या अवैध रूप से बिना परमिट वाली थी, इस बारे में भी तहकीकात करना पुलिस का ही काम है। अगर अवैध रूप से चल रही थी तो उस पर एवं रास्ते में पड़ने वाले पुलिस थानों और यातायात प्रभारी पर भी कार्यवाही करना चाहिए। साथ ही साथ आरटीओ को भी शंका के दायरे में लाया जाएगा।

शासन प्रशासन से अपेक्षा है कि कुरई घाट जैसे घुमावदार और दुर्गम मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों की लगाम कसें, और समय सीमा में उन्हें इस सड़क के दुरूस्तीकरण के लिए आदेशित करें, ताकि लगातार घट रही दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

रविवार, 16 जून 2013

इस सड़क पर चलना सर्कस के बाजीगरों का काम

इस सड़क पर चलना सर्कस के बाजीगरों का काम

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर के ज्यारत नाका क्षेत्र से पॉलीटेक्निक कॉलेज जाने वाले मार्ग की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है। कदम कदम पर उभर आए गड्ढों में पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को इन गड्ढों की गहराई का अंदाज न हो पाने के कारण उनका वाहन अनियंत्रित हो जाता है। पैदल चलने वाले भी, इस मार्ग से निकलने वाले वाहनों से उचटने वाले मैले पानी के छींटों के कारण बेतहाशा परेशान हैं।
इस मार्ग से गुजरने वाले कई लोगों को दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ता है। क्षेत्रीयवासी बताते हैं कि इस मार्ग से रेत, ईंट, पत्थर, मुरम से लोडेड डम्फर निकलते हैं जो मार्ग के जर्जर होने का कारण बनते हैं। इन वाहनों का दबाव यह सड़क सह नहीं पाती है और नतीजतन बड़े-बड़े गड्ढे निर्मित हो जाते हैं। क्षेत्रीयवासियों का कहना है कि इस मार्ग का जीर्णोंद्धार किया जाना अत्यंत आवश्यक है और इसके साथ ही भारी वाहनों का प्रवेश भी इस मार्ग पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि यह मार्ग ज्यारत नाका क्षेत्र को बारापत्थर, पॉलीटेक्निक कॉलेज, बींझावाड़ा, बबरिया से जोड़ता है। इस मार्ग से रात्रि के समय भी आनाजाना जारी रहता है। कई लोग इस मार्ग के जर्जर हो जाने के कारण सर्किट हाउस चौराहे जाने वाले मार्ग का सहारा लेने को मजबूर होते हैं। यदि इस इस मार्ग का कायाकल्प कर दिया जाए तो प्रमुख मार्ग पर पड़ने वाले यातायात के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मूत्रालय शौचालयों की कमी से जनता हलाकान

मूत्रालय शौचालयों की कमी से जनता हलाकान

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर में सुलभ शौचालयों की कमी निरंतर महसूस की जा रही है। जो पेशाब घर या गिनती के सुलभ शौचालय बने हुए हैं वे भी गंदगी से बजबजा रहे हैं। नगर में सार्वजनिक स्थलों में एक दो ही सुलभ शौचालय हैं। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जनमानस की इस आधारभूत सुविधा की ओर ध्यान तो सभी का जाता है पर कोई पहल नहीं करता। नतीजतन यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
सिवनी शहर के प्रमुख स्थलों बारा पत्थर बाहुबली चौक, गांधी भवन, कचहरी चौक, सोमवारी चौक भैरोगंज, पोस्ट ऑफिस का क्षेत्र, बस स्टैंड, शुक्रवारी चौक, नेहरू रोड, नगर पालिका चौक, बुधवारी बाजार, मंगली पेठ, छिंदवाड़ा चौक जैसे व्यस्ततम इलाकों में सुव्यवस्थित पेशाब घर या सुलभ शौचालय की सख्त आवश्यकता है। वर्षाें पूर्व बने पेशाबघरों की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है लेकिन मजबूरी मंे लोगों को उनका इस्तेमाल करना पड़ता है। बुधवारी के एकमात्र पेशाब घर में गंदगी का साम्राज्य पसरा हुआ है। यहां प्रवेश करने वालों का बदबू से बुरा हाल होता है।
गौरतलब है कि बुधवारी नगर का सबसे व्यस्ततम क्षेत्र है। इस बाजार में विभिन्न क्षेत्रों से लोग खरीदी के उद्देश्य से आते हैं। यहां स्थित पेशाबघर के आसपास एकदम सटे हुए सभी आवश्यक सामग्रियों की दुकाने, होटलें हैं। इससे बीमारियां फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा नगर पालिका के सामने हिन्दी मेन बोर्ड स्कूल से लगा हुआ एक और पेशाबघर है। इस पेशाबघर की हालत तो और भी ज्यादा बेकार है। यहां गंदगी होने के अलावा इस पेशाब घर का इस्तेमाल, जनता बारिश के दिनों में इसलिए ज्यादा नहीं कर पाती क्योंकि यहां ऊपर शेड ही नहीं है।
यही हाल बस स्टैंड परिसर स्थित पेशाबघर का भी है। इसके आसपास भी कई उपयोगी सामग्रियों की दुकानें हैं जिससे लोगों का आना जाना यहां बना रहता है। मजे की बात तो यह है कि इसी पेशाबघर की दीवार से लगी हुई वर्षाें पुरानी कैंटीन भी यहीं से संचालित होती है जहां पेशाबघर से फैलती व्यापक बदबू के बाद भी लोग नाश्ता चाय पान करने मजबूर हैं।

कमोबेश पूरे शहर का ही ये हाल है। सबसे ज्यादा परेशानियों का शिकार महिलाओं को होना पड़ता है। संकोचवश कोई महिला संगठन भी इस पहल के लिए आगे नहीं आता है। पेशाबघरों में व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण लोगों को खुले स्थान तलाशने पड़ते हैं। कई स्थान तो जैसे बलि ही चढ़ गए हैं। जनपद पंचायत कार्यालय और भारत संचार के बीच बनी सीमेंटेड रोड इसका ज्वलंत उदाहरण है। जबकि यह गणेश चौक को भैरोगंज से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है।

आशुतोष वर्मा की पहल ला सकती है रंग

आशुतोष वर्मा की पहल ला सकती है रंग

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा का रामटेक गोटेगांव रेल के लिए पोस्ट कार्ड अभियान अब रंग लाता दिख रहा है।
इंका नेता आशुतोष वर्मा द्वारा विगत कई वर्षों से, रामटेक गोटेगांव ब्रॉडगेज की मांग को लेकर लगातार अभियान चलाया जाते रहा है। इस अभियान में उन्होंने सभी वर्गों के लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया और इनके माध्यम से पोस्टकार्ड अभियान चलाकर ब्रॉडगेज की मांग को केंद्र से मनवाने का पूरा प्रयास किया गया। शुरू में इस अभियान को भले ही आशातीत कामयाबी न मिली हो लेकिन आशुतोष वर्मा की निरंतर जारी मेहनत अब रंग लाती नजर आ रही है। 13 जून को केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के आगमन ने आशुतोष वर्मा की मांग के पूरा होने के संकेत दिये हैं। इसे आशुतोष वर्मा की सतत् मेहनत का ही नतीजा कहा जायेगा कि कमल नाथ ने गोटेगांव रामटेक ब्राडगेज को मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया है।
उल्लेखनीय है कि जगदगुरू स्वरूपानंद महाराज एवं इंका नेत्री पूर्व केंद्रीय मंत्री कु.विमला वर्मा की मांग को गंभीरता से लेते हुए पूर्व प्रधानमंत्री स्व.नरसिंहराव ने इस रेल लाइन को पूरा किये जाने की घोषणा की थी। सुश्री विमला वर्मा एवं आशुतोष वर्मा  इसके बाद भी निरंतर प्रयासरत रहे, और पूर्ण गांधीवादी तरीके से इस मांग को पूरा किये जाने के लिये कार्य करते रहे।
गौरतलब है कि आशुतोष वर्मा द्वारा इस महत्वपूर्ण योजना के लिये पोस्ट कार्ड अभियान भी चलाया गया। इस अभियान के द्वारा केंद्र सरकार के नेताओं को इस मांग की याद दिलाये जाते रही। इस अभियान की सबसे प्रशंसनीय बात यह रही कि दलगत राजनीति से ऊपर हटकर इस मांग को व्यापक समर्थन मिला। इसके बाद भी केंद्र की सरकारें इस ओर ध्यान नहीं दे रही थी।

इसे आशुतोष वर्मा की निःस्वार्थ और जनहित के लिये की गई मेहनत का नतीजा ही कहा जा सकता है कि हाल ही में परिवर्तन यात्रा के चलते केंद्रीय मंत्री कमल नाथ का सिवनी आगमन हुआ और कमल नाथ ने सुश्री विमला वर्मा के निवास स्थान जाकर उनसे मुलाकात कर, उन्हें गोटेगांव रामटेक रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिलाये जाने के लिये प्रयास करने का आश्वासन दिया।

आधुनिक भारत निर्माण में सिंधी समाज का अमूल्य योगदान

आधुनिक भारत निर्माण में सिंधी समाज का अमूल्य योगदान

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। हम दिल से हिन्दुस्तानी हैं और रहेंगे। हमें पाकिसतान भेजने की बात करने वाले प्रदेश के मंत्री बाबू लाल गौर अपनी मानसिकता बदले। सिन्धी समाज आज देश के विभाजन के पश्चात् अनेकों तकलीफों के बावजूद देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है। हम जिस मुकाम पर हैं वह भी सारा देश देख रहा है। सिन्धी समाज को पाकिस्तान भेजने की धमकी देने वाले बाबू लाल गौर अपने शब्द वापिस लें और सिन्धी समाज से माफी मांगे अन्यथा उनका विरोध प्रदर्शन एवं पुतला दहन किया जावेगा।
इस संबंध में सिन्धी समाज के वरिष्ठ नागरिक हीरा आसवानी, संतोष पंजवानी, मनोज गुरनानी, हरीश रावलानी, विनोद रावलानी, आनंद पंजवानी, सुशील आडवानी, बलराम गनवानी, भारत चैनानी, मुकेश आहुजा, अनिल बच्छानी, जीतू काछेलानी, दिलीप संच्चानी एवं अनेक गणमान्य नागरिकों ने बाबूलाल गौर के बयान की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि बाबू लाल गौर के बयान से समूचा सिन्धी समाज आहत हुआ है। देश की आन बान और शान के लिए सिन्धी समाज ने विभाजन के समय अपनी समस्त सम्पत्ति छोड़कर भी हिन्दुस्तान में ही रहना पसंद किया। विभाजन की घोर त्रासदी हमारे समाज के बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों ने झेली है। बाबू लाल गौर ने नहीं? आज समूचा सिन्धी समाज स्वयं अपने बल पर देश के विकास में समुचित योगदान देता आ रहा है।

बलराम गनवानी द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रदेश के मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा सिन्धी समाज के संबंध में दिए गये आपत्तिजनक बयान के विरोध में 16 जून को दोपहर 1 बजे नगर पालिका चौक में धरना प्रदर्शन कर बाबूलाल का पुतला दहन किया जावेगा। समस्त सामाजिक बन्धुओं एवं सिन्धी समाज से सहानुभूति रखने वाले गणमान्य नागरिकोें से अपील है कि इस विरोध प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपना विरोध दर्ज करावें।

नहीं चेता एनएचएआई हो गई दुर्घटना!

नहीं चेता एनएचएआई हो गई दुर्घटना!

(जुगल किशोर श्रीवास)

कुरई (साई)। बार बार दुर्घटनाओं की आशंकाओं के समाचार मीडिया में उछलने के बाद भी एनएचएआई के अधिकारियों के कानों में जूं नहीं रेंगी जिसके परिणामस्वरू शुक्रवार को कुरई में बस दुर्घटना घट गई।
ज्ञातव्य है कि हिन्द गजट ने ‘‘बारिश में उखड़ने लगी कुरई घाट की सड़क‘‘ शीर्षक से शुक्रवार को ही फोटो सहित समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खबर में कहा गया था कि बरसात के आगमन के साथ ही कुरई घाटी रोड के उखड़ जाने की खबरें आना शुरू हो गई हैं। बताया जाता है एन.एच.7 की इस रोड को बने हुए अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ है और शुरूआती बारिश में ही उसका धसकना शुरू हो गया है।
कुरई घाटी में विहंगम दृश्य के पास के मोड़ पर सड़क बुरी तरह से उखड़ गयी है। दुर्घटना की दृष्टि से इस मोड़ को अत्यंत खतरनाक माना जाता हैं। कई वाहन इस स्थान पर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में इस स्थान पर रोड का उखड़ना गंभीर विषय है। हालाकि ठेकेदार द्वारा सड़क के मरम्मत का कार्य शुरू तो कर दिया गया है, लेकिन यदि तकनीकि दृष्टि से देखा जाये तो सड़क के दोनों छोर पर पानी की निकासी के लिये नाली का होना बेहद आवश्यक है। अन्यथा पूरी बारिश भर इस सड़क की टूट फूट होते रहेगी और फिर लंबे-लंबे जाम लगने की स्थिति पुनः निर्मित हो जायेगी।
एनएचएआई के आला अधिकारी मदमस्त हाथी के मानिंद मौन साधे बैठे हुए हैं। हालात देखकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि एनएचएआई को सांसद विधायकों यहां तक कि जिला प्रशासन का भी कोई भय नहीं बचा है।

नाथ के स्वागत में निष्क्रिय रहे कांग्रेस के अनेक धड़े!

नाथ के स्वागत में निष्क्रिय रहे कांग्रेस के अनेक धड़े!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की सिवनी यात्रा के दौरान कांग्रेस के अनेक धड़ों का निष्क्रिय रहना अपने आप में एक आश्चर्य माना जा रहा है। कमल नाथ के स्वागत में उमड़ी भीड़ उनके कद के अनुरूप कतई नहीं मानी जा सकती है। इस भीड़ में छिंदवाड़ा, मण्डला, जबलपुर, बालाघाट आदि जिलों के उनके समर्थकों की तादाद अधिक मात्रा में बताई जा रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी के सूत्रों का दावा है कि सिवनी जिले के विभिन्न ब्लाक से कार्यकर्ताओं का टोटा साफ इस परिवर्तन यात्रा में दिखाई दिया। सूत्रों की मानें तो इसका कारण जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा इस कार्यक्रम की पूर्व तैयारी ना किया जाना ही प्रमख है।
सूत्रों के अनुसार इसके पूर्व किसी भी नेता की सभा के लिए जब तक ठाकुर हरवंश सिंह जीवित रहे तब तक उन्होंने ब्लाक स्तर की बैठक आहूत कर कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित की जाती रही है। यह पहला मौका होगा जब जिला कांग्रेस कमेटी इस दिशा में निष्क्रिय ही रही।
कांग्रेस के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे हरवंश सिह ठाकुर की अंतिम यात्रा में जिस तरह सिवनी जिले के कांग्रेस के कार्यकर्ता उमड़ पड़े थे, उसके प्रकाश में यह माना जा रहा था कि उनके ना रहने पर कार्यकर्ता उन्हें याद करते हुए इस सभा में ज्यादा से ज्यादा तादाद में उपस्थित होंगे।
इस परिवर्तन यात्रा में केंद्रीय संसदीय कार्य और शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी शिरकत करने वाले थे। स्पष्ट तौर पर सिवनी में कांति लाल भूरिया और अजय सिंह के समर्थक नगण्य ही हैं, इसलिए उनके लिए कार्यकर्ता शायद ही मेहनत करते।
वहीं, दूसरी ओर यह भी माना जा रहा था कि कमल नाथ चूंकि पड़ोसी छिंदवाड़ा जिले के संसद सदस्य हैं और सिवनी से उनका गहरा नाता रहा है, सिवनी जिले की सिवनी, लखनादौन या बरघाट विधान सभा की टिकिट पाने के लिए कार्यकर्ता दिल्ली जाकर उनके दरबार में मत्था टेकते आए हैं। इस लिहाज से यह माना जा रहा था कि वे सभी लोग जो टिकिट की दावेदारी प्रस्तुत कर चुके हैं या भविष्य में करेंगे अपने समर्थकों के साथ इस कार्यक्रम में उपस्थित अवश्य होंगे।
वहीं, दूसरी ओर इसमें हरवंश सिंह के पुत्र रजनीश सिंह को भी अपने पिता का स्थान लेना तय माना जा रहा था, इस लिहाज से हरवंश सिंह के समर्थकों का भी ज्यादा से ज्यादा तादाद में वहां पहुंचना तय ही माना जा रहा था। वैसे देखा जाए तो सिवनी में कुंवर अर्जुन सिंह की अगुआई में नेतागिरी करने वाले अब नहीं बचे हैं। वहीं दिग्विजय ंिसंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरूण यादव अािद के गुट के लोग सिवनी में बचे नहीं हैं। रही बात सुरेश पचौरी की तो उनके समर्थक आज भी सिवनी में मौजूद हैं।

कांग्रेस के अंदर अब कमल नाथ के जाने के बाद उनकी यात्रा, उनके वक्तव्यों, कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा, नेताओं के रवैए आदि का पोस्ट मार्टम सार्वजनिक तौर पर आरंभ हो गया है। कुछ नेताओं का मानना है कि कमल नाथ की इस सभा में अन्य क्षत्रपों के समर्थकों ने अपने आप को लगभग निष्क्रीय ही रखा।

शुक्रवार, 14 जून 2013

बारिश में उखड़ने लगी कुरई घाट की सड़क

बारिश में उखड़ने लगी कुरई घाट की सड़क

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बरसात के आगमन के साथ ही कुरई घाटी रोड के उखड़ जाने की खबरें आना शुरू हो गई हैं। बताया जाता है एन.एच.7 की इस रोड को बने हुए अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ है और शुरूआती बारिश में ही उसका धसकना शुरू हो गया है।
कुरई घाटी में विहंगम दृश्य के पास के मोड़ पर सड़क बुरी तरह से उखड़ गयी है। दुर्घटना की दृष्टि से इस मोड़ को अत्यंत खतरनाक माना जाता हैं। कई वाहन इस स्थान पर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में इस स्थान पर रोड का उखड़ना गंभीर विषय है। हालाकि ठेकेदार द्वारा सड़क के मरम्मत का कार्य शुरू तो कर दिया गया है, लेकिन यदि तकनीकि दृष्टि से देखा जाये तो सड़क के दोनों छोर पर पानी की निकासी के लिये नाली का होना बेहद आवश्यक है। अन्यथा पूरी बारिश भर इस सड़क की टूट फूट होते रहेगी और फिर लंबे-लंबे जाम लगने की स्थिति पुनः निर्मित हो जायेगी।

क्षेत्रीय नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय है कि पहली ही बारिश को सड़क के न सह पाने से, इस सड़क की गुणवत्ता पर शासन को ध्यान जरूर देना चाहिए।