बुधवार, 21 अगस्त 2013

सद्भाव ने बिगाड़ा सद्भाव

सद्भाव ने बिगाड़ा सद्भाव

(शरद खरे)

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के समय बनी स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे में सिवनी जिले का शुमार किया गया था। यह वाकई सिवनी के लिए सौभाग्य की ही बात थी कि ‘कौओं के कोसने से ढोर नहीं मरते‘ की कहावत चरितार्थ करते हुए सिवनी जिले को उत्तर दक्षिण गलियारे में बरकरार रखा गया था। इस सड़क के निर्माण में दिसंबर 2008 में षणयंत्र के ताने बाने बुने गए। सियासी नेताओं को इस षणयंत्र की जानकारी न हो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस षणयंत्र के लिए जिम्मेदार तत्कालीन जिला कलेक्टर के पत्र को समाचार पत्रों में प्रकाशन के साथ ही साथ विधायक सांसदों को इसकी प्रति भेजी गई थी। न अखबारों में यह खबर आई और न ही सांसद विधायक ने ही इसमें कोई दिलचस्पी दिखाई।
सिवनी से खवासा तक के काम के लिए गुजरात की सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका दिया गया था। सद्भाव ने सिवनी के साथ सद्भाव नहीं दिखाया। सिवनी के कुछ कथित अगुआ यानी पायोनियर को आर्थिक झंझावत में उलझाकर सद्भाव ने लोगों का ध्यान भटकाया और सिवनी जिले के सीने को छलनी कर दिया। सिवनी में अवैध खनन इस कदर हुआ कि धरती कांप गई। इस अवैध खनन में सिवनी के कथित पायोनियर्स की भूमिका भी संदिग्ध ही रही है। सद्भाव की ओर से ध्यान भटकाकर इन पायोनियर्स ने लोगों को भ्रमित कर गैर जरूरी बातों में उलझाए रखा।
इन पायोनियर्स ने आपस में ही एक छद्म जंग चलाई, जिसका लोगों ने खूब मजा लिया, किन्तु सड़क का मामला पूरी तरह उलझा हुआ ही रहा। सद्भाव ने एक बार फिर सिवनी के लोगों के साथ सद्भाव नहीं दिखाया। सिवनी में काम करने वाले ठेकेदारों के द्वारा ‘जो काम नहीं कराए गए‘ उन कामों के एवज में सद्भाव के संचालकों ने पैसा भी निकाल लिया बताया जाता है। इस राशि में से कुछ ही राशि का उपयोग ‘चौथ‘ देने में किया गया, शेष राशि हजम ही कर ली बताई जा रही है। बताते हैं कि इसी बात को लेकर सद्भाव कंपनी के अंदर का सद्भाव भी बिगड़ गया था।
सिवनी में सद्भाव ने मोहगांव से खवासा तक की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। कभी वन विभाग के डंडे का डर दिखाया गया तो कभी न्यायालय के डंडे का। वस्तुतः न तो वन विभाग ही इसके खिलाफ था न ही न्यायालय ने ही इस काम को रोकने की मंशा जाहिर की थी। सद्भाव ने सिवनी में सड़क न बनाकर किसके इशारे पर सद्भाव बिगाड़ा यह बात तो सद्भाव का सद्भाव बनाने वाले ही बेहतर जानते होंगे किन्तु चर्चा यह है कि सिवनी में सड़क न बनाने के पारितोषक के बतौर सद्भाव को छिंदवाड़ा जिले में सड़क निर्माण के काम प्रदाय कर दिए गए।
यह सब होता रहा और सिवनी के कांग्रेस के तत्कालीन विधायक स्व.हरवंश सिंह, के अलावा भाजपा की विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, श्रीमती शशि ठाकुर एवं कमल मर्सकोले अचंभित और किंकर्तव्यविमूढ़ हालत में बैठे रहे। इसका सबसे आश्चर्यजनक पहलू तो यह है कि सिवनी के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख भी अपने आप को लोकसभा में बौना ही महसूस करते रहे। दोनों ही सांसदों ने लोकसभा में एक बार भी प्रश्न पूछने की जहमत नहीं उठाई। हो सकता है कि दोनों ही सांसदों को डर रहा होगा कि कहीं प्रश्न पूछने से ‘बलशाली षणयंत्रकारी‘ नाराज न हो जाए। इन सांसदों को ‘बलशाली षणयंत्रकारी‘ के कोप भाजन होने का डर ज्यादा था पर जनता के नाराज होने का भय शायद ही किसी को रहा हो।
यहां एक तथ्य विशेष तौर पर उल्लेखनीय है कि सिवनी जिले से होकर गुजरने वाला यह फोरलेन मार्ग दोनों सांसदों के संसदीय क्षेत्र और चारों विधायकों के विधानसभा क्षेत्र से होकर गुजरता है। अब जबकि विधानसभा चुनाव सर पर हैं तब क्या जनता इनसे यह नहीं पूछेगी कि आखिर क्या कारण था कि इन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन के बजाए ‘बलशाली षणयंत्रकारी‘ का साथ क्यों दिया? सिवनी में मीडिया में भी इन सांसद विधायकों की भूमिका चर्चित न रह पाना आश्चर्य का ही विषय है। इस सड़क पर न जाने कितने निर्दोष लोगों की जान गई। लगता है इन निर्दोष लोगों की जान की कीमत इन लोगों की नजरों में कीड़े मकोड़ों से भी गई गुजरी है।
इस मामले में याद पड़ता है कि लखनादौन नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, पेशे से अधिवक्ता, राय पेट्रोलियम के संचालक, शराब व्यवसाई रहे, लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त दिनेश राय ने लखनादौन जनमंच के बेनर तले एक आंदोलन किया था, इस आंदोलन की समाप्ति तत्कालीन अपर कलेक्टर अलका श्रीवास्तव के द्वारा लिखित आश्वासन कि सड़क का निर्माण जल्द कराया जाएगा, के साथ हुई थी (जैसा दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने उस समय मीडिया में प्रचारित करवाया था)। इस आश्वासन पत्र का इसके बाद क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता है? लगता है कि यह भी सद्भाव पर दबाव बनाने के लिए ही उठाया गया कदम था।
बहरहाल, सद्भाव द्वारा सड़क नहीं बनाए जाने से सिवनी में न जाने कितनी जानें गईं, सिवनी जिले मेें आपसी सामंजस्य का सद्भाव बिगड़ा, सद्भाव से लाभ लेने के चक्कर में सालों के दोस्त अचानक दुश्मन बन गए, लगा मानो ‘सद्भाव कंपनी‘ नहीं सिवनी में ‘ईस्ट इंडिया कंपनी‘ आ गई हो जो ‘डिवाईड एण्ड रूल‘ की नीति अपना रही हो। होना यह चाहिए कि सड़क के लिए लड़ने वाले हर व्यक्ति संस्था को (अब विधायक सांसद से उम्मीद बाकी नहीं) कोर्ट में परिवाद पेश करते समय सद्भाव के मालिकों को पार्टी बनाना चाहिए। जब वे स्वयं इस सड़क से होकर गुजरेंगे तब उन्हें सिवनी के दुख दर्द का शायद भान हो पाए।

18 लाख के काम की निविदा जरूरी नहीं!

18 लाख के काम की निविदा जरूरी नहीं!

जो पूछना है अध्यक्ष से पूछें, हम कुछ भी नहीं बता सकते: सीएमओ चौधरी

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। ‘लखन कुंवर की नगरी में नगर परिषद् के हौसले इतने बुलंद हैं कि दूसरे की जमीन को अपना समझकर उस पर सब्जी मण्डी का निर्माण करवा दिया गया वह भी 18 लाख रूपए की राशि से, और इसके लिए निविदा जारी करना भी उचित नहीं समझा है, नगर पंचायत लखनादौन ने।
जी हां, यह चर्चा है समूचे जिले में। जब इस संबंध में 18 लाख रूपए की राशि की लागत से नवनिर्मित सब्जी मण्डी के बारे में, इसकी निविदा कब जारी हुई, किन समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन हुआ, किन तिथियों में प्रकाशन हुआ, समाचार पत्र भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत हैं या नहीं, कब निविदा जारी की गई, आदि प्रश्नों के सबंध में नगर परिषद् के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी का सुर आज बदला हुआ है।

अध्यक्ष से करें चर्चा!
कल तक हर जानकारी देने वाले लखन कुंवर की नगरी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी (9424380458) से जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने कथित तौर पर कृषि उपज मण्डी की जमीन पर नगर परिषद् द्वारा बलात् रूप से दबंगई के साथ सब्जी मण्डी के निर्माण की निविदा के बारे में जानकारी चाही गई तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी तरह की जानकारी नहीं दे सकते हैं। जो भी जानकारी लेना है वह अध्यक्ष से ली जाए! अध्यक्ष का मोबाईल नंबर पूछने के पहले ही उन्होंने मोबाईल काट दिया।

क्या मीडिया को नहीं है जानकारी देने का प्रावधान!
कल तक मीडिया से फ्रेंडली व्यवहार रखने वाले लखनादौन नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राधेश्याम चौधरी ने आखिर अचानक ही सुर क्यों बदल लिए, यह बात भी लोगों को खटक ही रही है। कहा जा रहा है कि वैसे तो आम जनता में भद्र, ग्रहणी और सज्जन महिला की छवि वाली नगर परिषद् की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय की दबंगई के चलते अब मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी भी खौफजदा हो गए हैं। संभवतः यही कारण है कि उन्होंने अब मीडिया को जानकारी देने केे बजाए जो भी जानकारी लेना है अध्यक्ष से लें का ‘टेप‘ बजाना आरंभ कर दिया है।

नहीं हुआ विधिवत टेंडर
वहीं, नगर परिषद् लखनादौन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मूलतः कृषि उपज मण्डी की जमीन को बलात् ही कब्जा कर इसे सब्जी मण्डी में तब्दील करने की गरज से, नगर परिषद् लखनादौन द्वारा आनन फानन ही 18 लाख रूपए का टेंडर निकाल कर अपने चहेते ठेकेदार को यह काम दे दिया गया है। इसकी निविदा किसी को भी, किसी समाचार पत्र में देखने को नहीं मिली है।

सूचना के अधिकार में निकलेगी जानकारी!
वहीं, कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट अब इस जानकारी को सूचना के अधिकार के तहत निकालने की तैयारी में लग गए हैं कि आखिर यह गड़बड़झाला हुआ तो हुआ कैसे।

कांग्रेस भाजपा पार्षदों पर शक की सुई!
यह काम अगर नियम विरूद्ध कराया गया तो इस काम को अंजाम देते समय कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों की भूमिका पर भी शक की सुई घूम रही है। माना जा रहा है कि सभी पार्षद 53 ग्रेड की सीमेंट के मानिंद ही पूरी तरह सैट होते जा रहे हैं।

देखने लायक है नगर परिषद् की दबंगई

अगर आप चित्रों को देखें तो उसमें अंकित तिथियों में पाठकों को साफ दिखाई दे जाएगा कि अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय लखनादौन के स्थगन के उपरांत भी यहां लखनादौन नगर परिषद् के अध्यक्ष और भद्र तथा कुलीन ग्रहणी की छवि वाली श्रीमती सुधा राय की कथित तौर पर दबंगई के चलते काम जारी रहा। कहा जा रहा है कि समूचे लखनादौन शहर को यह दिखाई देता रहा, पर न जाने क्यों इस पर स्थगन देने वाली अनुविभागीय दण्डाधिकारी लखनादौन लता पाठक की नजर नहीं पड़ पाई।

शनिवार, 17 अगस्त 2013

अस्पताल में हैं खून के दलाल सक्रिय: डेहरिया

अस्पताल में हैं खून के दलाल सक्रिय: डेहरिया

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। ‘जिला चिकित्सालय में खून के दलाल सक्रिय हैं, हमारे पास न सुरक्षा कर्मी हैं न ही पर्याप्त कर्मचारी, हम कैसे रोकें खून के दलालों को।‘ यह बात जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात एक कर्मचारी श्री डेहरिया ने आज इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी से फोन पर चर्चा के दौरान कही।
दरअसल, एक मरीज के परिजन आज अपरान्ह समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के कार्यालय पहुंचे और उन्होंने बताया कि उनके मरीज को खून लग रहा है इसलिए वे रक्त दाता के लिए यत्र तत्र भटक रहे थे। इसी बीच खून के गंदे धंधे के कुछ दलालों ने उन्हें घेर लिया और उनसे 1800 रूपए में सौदा तय किया।
इसी बीच मरीज के परिजनों कोे एक रक्त दाता मिल गया, उसे लेकर वे ब्लड बैंक पहुंचे तो वहां उपस्थित कर्मचारी श्री डेहरिया ने उनका रक्त लेने से इंकार कर दिया। इस पर वे निराश हो गए, पर बाद में अपने ही एक रिश्तेदार को उन्होंने खून देने पर राजी कर लिया।
जब इस संबंध में साई न्यूज ने श्री डेहरिया से पूछा तो छूटते ही श्री डेहरिया ने कहा कि अस्पताल में विशेषकर ब्लड बैंक के आसपास खून के दलाल घूमते ही रहते हैं जो परिजनों को ब्लड बैंक आने के पहले ही रोक लिया करते हैं। जब इसकी शिकायत साई न्यूज ने डॉ.सत्य नारायण सोनी (9425174767) से चर्चा कर की, तो उन्होंने कहा कि यह बात गलत है कि उनके प्रशासन में खून के दलाल अस्पताल में सक्रिय हैं।
जब उनकी मोबाईल पर ब्लड बैंक में पदस्थ श्री डेहरिया से बात करवाई गई तो श्री डेहरिया ने साफ तौर पर सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी को बताया कि खून के दलाल ब्लड बैंक के आसपास ही घूमते रहते हैं। ब्लड बैंक में स्टाफ नहीं होने के कारण वे कुछ नहीं कर सकते हैं।

खून का गंदा धंधा चल रहा है पर ब्लड बैंक के कर्मचारी ‘कथित तौर पर‘ निरीह हैं। वहीं ब्लड बैंक के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि खून के गंदे धंधे में ब्लड बैंक के कर्मचारियों का भी कमीशन शामिल होता है। बताया जाता है कि जिसका खून लेने से श्री डेहरिया ने मना कर दिया था, बाद में किसी अन्य मरीज के खून के लिए, दलालों ने उसका खून दिलवा दिया।

दिखा ठेकेदार का असली रूप!

दिखा ठेकेदार का असली रूप!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। लखनादौन में स्वाधीनता दिवस समारोह के प्रोग्राम में विधायक बनने की चाहत मन में लिए पानी की तरह पैसा बहाने वाले जिले के ठेकेदार का असली रौद्र रूप देखने को मिला, जिससे लखनादौन की जनता सिहर गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनादौन में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक शशि ठाकुर, जनपद अध्यक्ष राजेश्वरी ठाकुर, नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमति सुधा राय आदि मंचासीन थीं। मंच पर एक कुर्सी रिक्त थी, जिस पर पूर्व जनपद सदस्य द्रोपदी पटेल जाकर बैठ गईं।
द्रोपदी पटेल जिस कुर्सी पर बैठीं, वह कुर्सी नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय के एन बाजू वाली कुर्सी थी। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार सियासी बियावान में तेजी से उतराते डूबते समीकरणों के चलते, एक अलग लेकिन जिसे अच्छी नहीं कहा जा सकता है वाली छवि बना चुके ठेकेदार ने भाजपा के एक पदाधिकारी को देखते ही विधायक श्रीमती शशि ठाकुर को भद्दी भद्दी गालियां बकना आरंभ कर दिया।
वहां मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि उक्त नेतानुमा ठेकेदार ने वहां यह तक कह डाला कि अब वह श्रीमती शशि ठाकुर का विरोध करेंगे। जैसे ही यह बात हुई वैसे ही भाजपा पदाधिकारी ने छूटते ही कहा कि न तो पार्टी को शशि ठाकुर की जरूरत है और न ही उस ठेकेदार की। पार्टी अपने आप में काफी बलवान होती है और पार्टी की जरूरत सभी को पड़ती है चाहे वह सांसद हो, विधायक हो, या फिर वह ठेकेदार।

इस वाक्ये की चर्चाएं समूचे लखन कुंवर की नगरी में जोर शोर से हो रही है कि जिसके मन में राजनैतिक सीढ़ियां चढ़ने की महत्वाकांक्षाएं कुलाचें भर रही हों, वह आखिर शार्ट टेंपर्ड होकर इस तरह की छिछोरी हरकत पर कैसे उतर रहा है।

किसकी सुरक्षा कर रही एक तीन की गार्ड!

किसकी सुरक्षा कर रही एक तीन की गार्ड!

(गजेंद्र ठाकुर)

छपारा (साई)। लंबे समय तक सत्ता का केंद्र बना रहा बर्रा अब भी सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष के 14 मई को अवसान होने के बाद भी विशेष सशस्त्र बल के चार जवान आज भी बाकायदा ‘बर्रा‘ की ‘कोठी‘ में पहरा दे रहे हैं। तीन माह से अब वे किसकी सुरक्षा में लगे हैं, यह बात शोध का विषय बन चुका है।
पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रतिमाह एक हवलदार और तीन सिपाहियों का वेतन लगभग एक लाख रूपए बैठता है। इस हिसाब से राज्य शासन ने कांग्रेस के एक विधायक के अवसान के उपरांत अब तक तीन लाख रूपए व्यय कर दिए हैं। इतना ही नहीं हरवंश सिंह के सुरक्षा कर्मी की आमद भी वापस बटालियन में नहीं हुई बताई जा रही है।
छपारा थाना प्रभारी (07691 290225) का कहना है कि इनकी तैनाती पुलिस लाईन से होती है, अतः वे पुलिस लाईन में ही पूछकर कुछ बता सकते हैं। वहीं दूसरी ओर जब पुलिस लाईन सिवनी (07692 220508) से संपर्क किया गया तो वहां उपस्थित कर्मी दिलीप ने कहा कि रक्षित निरीक्षक (9425389328) ही इस बारे में पूरी जानकारी दे पाएंगे। जब आरआई से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाईल बंद मिला।
वहीं दूसरी ओर सिवनी में पदस्थ एसएएफ के प्रभारी दुबे (9424990610) का कहना था कि स्व.हरवंश सिंह के निवास पर अभी भी विशेष सशस्त्र बल के चार जवान जिनमें एक मेजर, तीन सिपाही शामिल हैं की तैनाती जारी है। वे किसकी सुरक्षा कर रहे हैं के प्रश्न पर उन्होने कहा कि राज्य शासन, पुलिस मुख्यालय के आदेश पर जवान वहां तैनात थे, अब जब ‘ऊपर‘ से अथवा एसपी सिवनी का आदेश आएगा, जवान वापस बुला लिए जाएंगे।
चर्चा तो यह भी हो रही है कि स्व.हरवंश सिंह के इशारों पर कदम ताल करने वाली भारतीय जनता पार्टी का संगठन अब उनकी राजनैतिक विरासत संभालने को आतुर उनके पुत्र रजनीश सिंह के लिए रेड कारपेट बिछाने की तैयारी में जुट गया है। अगर इन चर्चाओं पर भरोसा किया जाए तो केवलारी किला फतह करने के लिए एड़ी चोटी एक करने वाले डॉ.ढाल सिंह बिसेन के सामने बहुत ही बड़ी चुनौति खड़ी होने वाली है।

आश्चर्य तो इस बात का है कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा हरवंश सिंह के निवास की सुरक्षा में तीन लाख रूपए व्यय कर दिए गए पर भाजपा के प्रवक्ता अभी भी मौन ही साधे हुए हैं। वहीं, हरवंश ंिसह को आवंटित भोपाल के सरकारी आवास में भी सुरक्षा कर्मी खाली आवास की सुरक्षा कर रहे बताए जा रहे हैं।

सड़क निर्माण का एग्रीमेंट 14 को हो चुका है: सीएमओ चौधरी

सड़क निर्माण का एग्रीमेंट 14 को हो चुका है: सीएमओ चौधरी

पता कर जांच करवाता हूं: आयुक्त, एग्रीमेंट 14 को पर काम 10 से ही हो गया था चालू, काम तो चल रहा है पर मेरे संज्ञान में नहीं है: एसडीएम लता पाठक, काम की गुणवत्ता देखो एग्र्रीमेंट पर मत जाओ: चौधरी

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। लखनादौन नगर परिषद् में नियम विरूद्ध काम तेजी से हो रहे हैं और नियम कायदों को पालन करवाने के लिए पाबंद लखनादौन एसडीएम लता पाठक के ‘संज्ञान‘ में कुछ भी नहीं है। सब्जी मण्डी के मसले पर एसडीएम ने ही स्थगन् दिया है और स्थगन् के बाद भी मण्डी का न केवल काम चलता रहा वरन मण्डी का लोकार्पण भी कर दिया गया। आज लखनादौन की मुख्य सड़क को दोनों ओर से बंद कर इसका काम आरंभ करवा दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनादौन शहर में रोटा नाला से पेट्रोल पंप चौराहे तक के सड़क निर्माण का ठेका दो करोड़ रूपयों की लागत से दमोह जिले के बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। इसके रेट सेंक्शन की कार्यवाही पिछले दिनों संचालनालय स्तर पर लंबित होने के बाद भी ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण का प्राथमिक कार्य आरंभ करवा दिया गया था।

पता कर जांच करवाते हैं: खाण्डेकर
जब इस संबंध में जबलपुर संभागायुक्त दीपक खाण्डेकर से उनके मोबाईल पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे मण्डला दौरे पर हैं। अगर बिना एग्रीमेंट, किसी ठेकेदार द्वारा काम आरंभ करवाया गया है तो वे इसकी जांच के लिए निर्देशित करेंगे। संभागायुक्त ने इस काम के बारे में विसंगतियों को विस्तार से सुना।

मीटिंग में व्यस्त जिला कलेक्टर
जब इस संबंध में जिला कलेक्टर भरत यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो ज्ञात हुआ कि वे संवेदनशील अपराधों की एक बैठक में शिरकत कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक के भी इसी बैठक में होने के चलते उनसे भी संपर्क नहीं हो सका।

चल तो रहा है कुछ दिनों से काम: एसडीएम
इस संबंध में जब लखनादौन अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक से (07690 40122) से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उनका आवास भी इसी मार्ग पर पड़ता है एवं चार पांच दिनों से यहां काम तो चल रहा है। यह बात उनके संज्ञान में नहीं है कि बिना एग्रीमेंट यहां काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में सीएमओ को बुलाकर जानकारी लेंगी कि इसका काम कब आरंभ हुआ और कब इसका टेंडर व एग्रीमेंट हुआ।

मण्डी में चल रहा था काम: एसडीएम
अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक से जब यह पूछा गया कि उनके स्थगन् के उपरांत मण्डी के काम चलने की शिकायतें मिली हैं और स्थगन के बाद भी मण्डी का लोकार्पण कर दिया गया है। इस पर उन्होंने कहा कि पता करते हैं कि क्या वास्तविकता है। अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत है। साथ ही साथ एसडीएम लता पाठक ने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आई है कि इस मामले को सिविल कोर्ट में भी पेश किया गया है।

14 को हो गया एग्रीमेंट
नगर परिषद् लखनादौन के सीएमओ राधेश्याम चौधरी (9424380458) ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस काम का एग्रीमेंट 14 अगस्त को हो गया है, एवं ठेकेदार द्वारा पांच परसेंट परफामेंस गारंटी लगभग दस लाख रूपए भी 14 अगस्त को ही जमा करवा दी गई है। जब उनसे यह पूछा गया कि 10 अगस्त से ही ठेकेदार इस सड़क का काम कर रहा है, इस पर वे बिफर गए और बोले ठेकेदार सड़क की साफ सफाई कर रहा था। अब साफ सफाई होगी तब ही काम आरंभ होगा ना। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।

विकास काम नियमों के प्रतिकूल न हो
भाजपा नगर मण्डल अध्यक्ष नरेश सेन से जब इस बारे में जानकारी लेना चाहा तो उन्होंने कहा कि नगर विकास एक बहुत बड़ा और अच्छा मुद्दा है। इसमें सभी को पार्टीगत भावनाएं भुलाकर मदद के लिए आगे आना चाहिए। किन्तु विकास का काम नियम कायदों की बलि चढ़ाकर किया जाए तो यह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता है।

पता नहीं कब हुई मुसाफिरी दर्ज
दमोह जिले के तहसील मुख्यालय हटा के ठेकेदार द्वारा इस काम को कराया जा रहा है। इस काम के लिए ठेकेदार के साथ कर्मचारियों की फौज का आना लाजिमी है। जिला कलेक्टर भरत यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला के निर्देशानुसार इनकी मुसाफिरी कोतवाली लखनादौन में दर्ज होना जरूरी है। इस संबंध में जब लखनादौन कोतवाली (07690 240123) से संपर्क किया गया तो वहां तैनात ‘दीवान जी‘ ने कहा कि मुसाफिरी के बारे में तभी पता चल पाएगा जब उनका मददगार सिपाही कोर्ट के काम निपटा कर लौट आएगा। उन्होंने बताया कि नगर निरीक्षक लखनादौन जबलपुर गए हुए हैं।

एसडीओपी, टीआई हैं बाहर

इसके उपरांत जब मुसाफिरी के संबंध में लखनादौन एसडीओपी (07690 240157) से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वहां तैनात सिपाही का कहना था कि एसडीओपी पेशी पर रायसेन गए हुए हैं। वहीं टीआई जबलपुर की ओर कूच कर चुके थे। वहीं, पुलिस सूत्रों ने यह भी कहा कि अब तक तो हटा के ठेकेदार की मुसाफिरी दर्ज नहीं हुई है पर अब पुलिस के संज्ञान में आने से आनन्-फानन पिछली तारीख में मुसाफिरी दर्ज करवाई जा सकती है, क्योंकि एक शराब माफिया के सामने पुलिस भी अपने आप को निरीह ही महसूस करती है।

जागिए कमल मर्सकोले जी, खवासा आपकी विधानसभा में है

जागिए कमल मर्सकोले जी, खवासा आपकी विधानसभा में है

(लिमटी खरे)

बरघाट विधानसभा के विधायक हैं कमल मर्सकोले। कमल मर्सकोले के बारे मेें कहा जाता है कि वे काफी संवदेनशील हैं। पांच साल होने को आए, उनके विधायक बनने के उपरांत सिवनी जिले या बरघाट विधानसभा के हित में कमल मर्सकोले ने विधानसभा में कितने प्रश्न पूछे हैं, इस बारे में वे ही बेहतर बता पाएंगे। अब चूंकि पांच साल का समय पूरा होने को आया है अतः कमल मर्सकोले को जनता की अदालत में खड़ा होना पड़ेगा। उनके विरोधी उनकी टिकिट कटवाने की जुगत में होंगे। कमल मर्सकोले के विरोधी चाह रहे होंगे कि कमल मर्सकोले के खिलाफ मामलों का पुलिंदा उनके हाथ लगे और वे उसे आलाकमान के हाथों सौंप दें।
खवासा अब बरघाट विधानसभा का हिस्सा है। खवासा में आरटीओ, विक्रय कर, मण्डी आदि की जांच चौकियां स्थापित हैं। इन जांच चौकियों में नियम कायदों का कितना पालन होता है यह बात आला अधिकारियों के साथ ही साथ विधायक कमल मर्सकोले को भी अच्छे से पता है। क्या इन पांच सालों में कभी कमल मर्सकोले ने इन जांच चौकियों की सुध ली? अगर नहीं तो क्या रही इसकी वजह? क्या संवेदनशील विधायक कमल मर्सकोले इस बात का जवाब सार्वजनिक रूप से देने का माद्दा रखते हैं?
एक वाक्या याद दिलाना यहां कमल मर्सकोले और जनता को लाजिमी होगा, क्योंकि अमूमन सांसद, विधायक सा सियासी बियावान में विचरण करने वाले नेता मानकर चलते हैं कि ‘पब्लिक मेमोरी‘ यानी लोगों की याद्दाश्त बहुत कम होती है। अधिक समय तक लोग बातों को याद रखने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ तब हर चौक चौराहों, पान की दुकानों पर इसके चर्चे चटखारे लेेकर हुआ करते थे।
इसके उपरांत संसद पर हमला हुआ देश दहल गया, तब भी लोगों ने इसकी चर्चा की, पर तब तक अमरीका पर हुआ हमला लोगों के जेहन से गायब हो चुका था। इसके बाद छुटपुछ घटनाएं हुईं और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। इस वक्त तक अमरीका और संसद पर हुए हमले को लोग भूल चुके थे। आज मुंबई हमले पर भी कोई भूले भटके ही चर्चा करता होगा। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पुणे में यूं ही बयान नहीं दिया था कि लोगों की याद्दाश्त कम होती है लोग यह बात भी भूल जाएंगे।
यह कड़वी सच्चाई है कि ‘बीती ताहि बिसार देय, आगे की सुध लेय‘ की तर्ज पर व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। किन्तु इन व्यवस्थाओं के बीच मीडिया का यह दायित्व है कि वह हुक्मरानों को समय समय पर चेताने के साथ ही साथ रियाया को भी समय समय पर सच्चाई से अवगत् कराए, वस्तुतः मीडिया के ग्लेमर के चक्कर में मीडिया के मर्म को समझने के बजाए ‘प्रबंधन कौशल‘ के धनी लोग आज पत्रकारों की फेहरिस्त में शामिल हो चुके हैं, जिन्हें मीडिया के गुणधर्म के बारे में माहिती कतई नहीं है। चंद सिक्कों की खनक में हीरो को जीरो और जीरो को हीरो बनाकर अपना दायित्व कथित तौर पर निभा रहे हैं इस तरह के पत्रकार।
मुद्दे की बात पर आएं और वाक्ये का जिकर किया जाए। मोहगांव से खवासा सड़क के निर्माण के लिए विधायक कमल मर्सकोले ने भी अनशन पर बैठने की घोषणा की, यह वाकई एक स्वागत योग्य कदम था कि विधायक पद की गरिमा के अनुरूप कमल मर्सकोले ने लोगों के दुःखदर्द को देखकर ऐसा कदम उठाया। उस वक्त लोगों ने कमल मर्सकोले की विधायकी पर आंच आने तक की बात कह दी थी, जिससे भी कमल मर्सकोले नहीं डिगे।
पर आज जिले की जनता, बरघाट के विधायक कमल मर्सकोले से यह पूछना चाह रही है कि क्या वे स्वयं अपनी मर्जी से अनशन पर बैठने राजी हुए थे, या किसी के दबाव में! अगर किसी के दबाव में उन्होंने धरने पर बैठने का निर्णय लिया था तो पर्दे के पीछे कौन था, चर्चा तो यह भी है कि उन्होंने एनएचएआई के एक अधिकारी के स्थानांतरण की सिफारिश भी की है? अगर की है तो इसका माजरा बता पाएंगे कमल मर्सकोले? पर अगर कमल मर्सकोले ने बिना किसी दबाव के अनशन पर बैठने का मन बनाया था तो उनके विधायक बनने के उपरांत खवासा बार्डर पर लगने वाले जाम के मामले में वे खामोश क्यों हैं? इस बात का जवाब उन्हें देना ही होगा, जनता आज जवाब मांग रही है।
कमल मर्सकोले के विधानसभा क्षेत्र की दुधारू गाय मानी जाती है खवासा बार्डर। इस बार्डर से हर माह ‘चंदी‘ के रूप मेें लाखों रूपए खवासा से सिवनी, जबलपुर होकर भोपाल ग्वालियर तक जाते हैं। यह बात जिले के कमोबेश हर शख्स की जानकारी में है। कमल मर्सकोले जी बरघाट विधानसभा की जनता ने आपको जनादेश देकर विधानसभा में भेजा है। इस जनादेश का सम्मान करना आपका पहला कर्तव्य है। अपने इशारों पर मीडिया को नचाने का दावा भले ही आप प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर करें, या फिर वकीलों के सामने एक फोन पर कथित ‘मीडिया मुगलों‘ को अपने पास बुलाने का दंभ भरें, इस बात से जनता को ज्यादा लेना देना नहीं है। जनता को खवासा बार्डर से खासी परेशानी हो रही है। आपका फर्ज है कि तत्काल वहां जाएं और जाम हटाने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करवाएं, अगर अधिकारी न मानें तो दिखावे और मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए ही सही पर अनशन पर बैठें, वरना चुनाव नजदीक हैं, जिस जनता ने पांच साल पहले आपको सर माथे पर बिठाया वही जनता आपको सत्ता के गलियारे से बाहर करने में नहीं चूकने वाली।

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

आजाद मुल्क के छियासठ साल, क्या खोया क्या पाया

आजाद मुल्क के छियासठ साल, क्या खोया क्या पाया

(लिमटी खरे)

भारत देश 1947 में 14 और 15 अगस्त की दर्मयानी रात को आजाद हुआ था। भारत देश को आजाद कराने में आजादी के मतवालों ने क्या क्या जुल्म नहीं सहे। फिरंगियों ने भारत के शूरवीरों पर क्या क्या सितम नहीं ढाए। आज जवान हो चुकी पीढ़ी को इस बात का इल्म नहीं होगा कि आजादी कितनी मुश्किल से हमें मिल सकी है। दरअसल शिक्षा को लेकर नित नए प्रयोगों से आज की युवा पीढ़ी इस बात से अनिभिज्ञ है कि आजादी किस कीमत पर हमें मिली है।
आज 15 अगस्त (स्वाधीनता दिवस) या 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) या 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के मायने अवकाश का और ड्राय डे (जिस दिन मदिरा का विक्रय प्रतिबंधित होता है) के रूप में जाना जाने लगा है। संजय दत्त अभिनीत ‘लगे रहो मुन्ना भाई‘ में भारत की शिक्षा प्रणाली पर जमकर प्रहार किया गया था, बावजूद इसके हुक्मरान चेत नहीं सके हैं। आज की युवा पीढ़ी मुन्ना भाई के सर्किट की तरह दो अक्टूबर पर ड्राय डे है कहकर मदिरा का स्टाक करने में जुट जाता है।
सिवनी की अगर बात की जाए तो सिवनी में आजादी के 66 सालों में से आधे समय अर्थात 33 साल ही महत्व के माने जा सकते हैं। इन 33 सालों अर्थात अस्सी के दशक के आगाज तक ही सिवनी में मूल्य आधारित राजनीति होती आई है। इसी दौरान सिवनी के विकास का ताना बाना बुना गया। सिवनी के लिए अगर किसी ने कुछ किया है तो वे हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा। कायस्थ कुल में जन्मीं सुश्री वर्मा ने अपना सारा जीवन सिवनी को न्योछावर किया है।
सिवनी में आयुर्विज्ञान संस्थान (मेडीकल कालेज) की क्षमता वाला जिला चिकित्सालय हो, एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध, संजय सरोवर परियोजना का भीमगढ़ डेम हो, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय हो, सिंचाई विभाग का मुख्य अभियंता कार्यालय हो, लोक कर्म विभाग का अधीक्षण यंत्री कार्यालय हो, राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्यपालन यंत्री कार्यालय हो (जो कुछ सालों पहले यहां से उठकर चला गया है), दूध डेरी हो, सब कुछ सुश्री विमला वर्मा की देन है।
सुश्री विमला वर्मा को उनके इर्द गिर्द घूमने वालों ने ही षणयंत्र के तहत घर बिठा दिया। जैसे ही सुश्री वर्मा ने सक्रिय राजनीति से किनारा किया वैसे ही कांग्रेस के मौका परस्त लोगों ने शहनाई बजाई, उत्सव का आयोजन किया, राग मल्हार गए, और फिर हुई हरवंश सिंह ठाकुर की ताजपोशी। हरवंश सिंह ठाकुर के हाथों जैसे ही सिवनी में कांग्रेस की कमान आई, उसके बाद से सिवनी में सियासी अवमूल्यन आरंभ हो गया।
कहते हैं कि हरवंश सिंह के तबले की थाप पर ना केवल कांग्रेस वरन् भाजपा का संगठन भी कत्थक करता आया है। वरना क्या कारण है कि आमानाला जैसे काण्ड में हरवंश सिंह के खिलाफ भाजपा की पूर्व सांसद और वर्तमान विधायक बंडोल थाने से चालान कोर्ट में पेश नहीं करवा सकीं। अंततः नाटकीय तरीके से हरवंश सिंह को ही इस प्रकरण की समयसीमा समाप्त होने के चलते खात्मा का आवेदन देना पड़ा। यह भाजपा संगठन के मुंह पर एक जबर्दस्त तमाचे से कम नहीं है, जिसकी गूंज गत दिवस सिवनी के कार्यकर्ता सम्मेलन में ‘नरेश नीता हटाओ, भाजपा बचाओ‘ नारे के रूप में सुनाई दी गई है।
हरवंश सिंह को काफी साल पहले ‘मनराखनलाल‘ नाम दिया गया था। हरवंश सिंह ने दिग्विजय सिंह, अर्जुन सिंह, कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुंदर लाल पटवा, उमा भारती, बाबू लाल गौर, शिवराज सिंह चौहान सहित कांग्रेस और भाजपा के ना जाने कितने क्षत्रपों को साधा था। उनकी अंतिम यात्रा में कांग्रेस के नेता तो रस्म अदायगी कर रवाना हो गए पर भाजपा के नेता अंत तक रूके रहे, यह जीता जागता प्रमाण था हरवंश सिंह की लोकप्रियता का।
हरवंश सिंह ठाकुर ने लगभग 25 सालों तक सिवनी में कांग्रेस की कमान परोक्ष तौर पर संभाली और सिवनी में सत्ता की धुरी बने रहे। हरवंश सिंह ठाकुर का मीडिया प्रबंधन कौशल गजब का था। यह प्रबंधन कौशल सिवनी को छोड़कर अन्य जिलों के लिए तारीफे काबिल था। सिवनी में तो उनके चंद ‘गुलाम‘ कथित ‘मीडिया मुगलों‘ ने हरवंश सिंह को भगवान बनाने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी थी। आज वे ही कथित ‘मीडिया मुगल‘ हरवंश सिंह के पुत्र का कुछ नेता नुमा ठेकेदारों के चाहने पर विरोध करते नजर आ रहे हैं।
हरवंश सिंह के खाते में सिवनी में एसटीडी सुविधा के अलावा और कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। हरवंश सिंह ने सिवनी को जलावर्धन योजना की सौगात दी है। करोड़ों अरबों रूपए खर्च करने के बाद भी आज सिवनी के नागरिकों को एक वक्त भी साफ शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है जबकि यह दो वक्त पानी देने के लिए बनी थी। इस मामले में उस समय के विधायक नरेश दिवाकर, उर्मिला सिंह, बेनी परते, शशि ठाकुर, डॉ.ढाल सिंह बिसेन, कमल मस्कोले, श्रीमति नीता पटेरिया ने कभी आवाज नहीं उठाई। आज किस मुंह से ये नेता जनता का सामना करने का साहस जुटा पा रहे हैं, जबकि ये कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह का विरोध ही नहीं कर पाते थे।
आज यह सोचना बेहद जरूरी हो गया है कि आजादी के इन 66 सालों में हमने क्या पाया? क्या खोया है? जो मिला है वह सुश्री विमला वर्मा ने दिया है पर उसे भी आज के नेता संभाल कर नहीं रख पा रहे हैं। सिवनी में कांग्रेस भाजपा के नेता स्थानीय समस्याओं से विमुख हैं। देश और प्रदेश सरकार पर तोहमत लगाना उनका प्रिय शगल बनकर रह गया है। स्थानीय समस्याओं पर एक शब्द भी बोलना उनकी शान के खिलाफ है।
अगर देश प्रदेश की सरकारों की इतनी ही चिंता है तो हमारी निजी राय में बेहतर होगा कि वे दिल्ली या भोपाल में जाकर बयानबाजी करें। सिवनी की जनता को स्थानीय समस्याओं से मुक्त कराने में आखिर इन नेताओं की जान क्यों निकल जाती है। जाहिर है हर कोई किसी ना किसी से कहीं ना कहीं उपकृत है। अगर विधायक के खिलाफ बोला तो हमारी . . . बंद हो जाएगी? अध्यक्ष अपना वाला है, हमें क्या करना है, उसकी पूंछ पर क्यों पैर रखें, क्यों खुजाएं जबरन? जैसे जुमलों में ही इन नेताओं की जनसेवा हो जाती है। अंततः ये नेता अपना पूरा हुनर केंद्र की कांग्रेस और प्रदेश की भाजपा सरकार पर दिखाते नजर आते हैं।
आज अगर आप जहां खड़े हैं वहां से देखें तो सियासी बियावान में नैतिक मूल्यों का पतन साफ तौर पर पाएंगे। सिवनी के विकास के मामले में विज्ञप्तिवीर प्रवक्ता और नेताओं ने जिले की जनता को भरमाने का कुत्सित प्रयास किया है, जिसकी निंदा की जानी चाहिए। इन नेताओं को इस बात से सबक लेना चाहिए कि आज हरवंश ंिसंह ठाकुर जैसे कद्दावर क्षत्रप के अवसान के बाद कुंवर शक्ति सिंह और राजा बघेल जैसे नेता प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर उनकी मिट्टी खराब करने से नहीं चूक रहे हैं। आज जो स्थिति का निर्माण हुआ है उससे निश्चित तौर पर हरवंश सिंह से दिल से जुड़े लोग अवश्य आहत हो रहे होंगे।

इसी बात को समझना जरूरी है कि हम आज चंद सिक्कों की खनक के लिए अपना दीन ईमान पैसा ना बनाएं, आने वाली पीढ़ी आपको कोसेगी या पूजा करेगी यह बात सिवनी में ही साफ हो रही है। एक ओर जीते जी सुश्री विमला वर्मा की तारीफों में कशीदे गढ़े जा रहे हैं वहीं, दूसरी और अवसान के बाद भी हरवंश सिंह की मिट्टी पलीत की जा रही है। सोचना सिवनी के सियासी बियावान में विचरण करने वाले नेताओं को है, कि वे आने वाले समय में अपनी छवि किस तरह की बनाना चाहते हैं? आज समय है हम अपने आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत, आशावादी, पढ़ी लिखी बनाना चाह रहे हैं, या उसके हाथ में ‘माउजर‘ देकर उसे सट्टा विशेषकर क्रिकेट सट्टा किंग, जुंए की फड़ का संचालक, रंडी नचाने वाला, आतंक बरपाने वाला बनाना चाह रहे हैं?