शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

आईडिया कंपनी ने ध्वस्त किए सारे रिकार्ड

एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  35

आईडिया कंपनी ने ध्वस्त किए सारे रिकार्ड

तेजी से उभर रहा है आईडिया का ग्राफ



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आज देश भर में बैनर पोस्टर्स, विज्ञापनों में आईडिया की धूम मची हुई है। जूनियर बी यानी अभिषेक बच्चन के विज्ञापनों में आईडिया चार चांद लगा रहा है। इन विज्ञापनों से आकर्षित होकर कमोबेश दस में से हर चौथे हाथ में आईडिया का मोबाईल मिल जाता है। आईडिया के ग्राहकों की संख्या में दिन दूनी रात चौगनी बढ़ोत्तरी वाकई तारीफे काबिल ही मानी जा रही है।

बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में पहले आरपीजी मोबाईल सेवा प्रदाता के नाम से जाना जाता था आईडिया को। बाद में इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली बिरला, एटी एण्ड टी और अन्य कंपनियों ने मिलकर आईडिया की स्थाना कर दी। इस वक्त इसे कर्मचारियों द्वारा बटाटा के नाम से ज्यादा जाना जाता था।

मध्य प्रदेश में उस वक्त आईडिया का इकलौता प्रतिद्वंदी हुआ करता था रिलायंस। आईडिया कंपनी ने अपने विज्ञापनों में जिन शहरों में इसका कव्हरेज होने की दावा किया जाता था अपने विज्ञापनों में उन शहरों के बजाए समूचे जिले में ही इसका कव्हरेज होने का दावा कर दिया जाता था। यही कारण था कि इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही आईडिया को कंज्यूमर फोरम की अनेकों मर्तबा लताड़ भी सहनी पड़ी।

वर्तमान में आईडिया कंपनी के मोबाईल उपभोक्ता देश भर में इतने अधिक हो चुके हैं कि ये सारे रिकार्ड ही ध्वस्त कर रहे हैं। मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया के इतने उपभोक्ता आखिर कैसे बने इस बारे में अन्य मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियां शोध ही कर रही हैं, कि आखिर आईडिया द्वारा बिजनिस प्रमोशन के लिए कौन सी तकनीक अपनाई गई है कि उसके ग्राहकों की तादाद दिनों दिन विस्फोटक तरीके से बढ़ती ही जा रही है।

(क्रमशः जारी)

आधार को संसद की लाल बत्ती

आधार को संसद की लाल बत्ती

संसदीय समिति ने की आधार निरस्तीकरण की मांग



(वरदान कुमार)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की अतिमहात्वाकांक्षी यूनिक आईडेंटी फिकेशन नंबर यानी आधार परियोजना पर ब्रेक लग सकता है। संसद के वित्त मामलात देखने वाली स्थाई समिति ने आधार परियोजना को करारा झटका देते हुए इसे निरस्त करने की सिफारिश कर दी है. संसद में पिछले साल दिसंबर में यूआईडी के लिए विधेयक प्रस्तुत किया गया था जो संसद के वित्तीय मामलों की स्थाई समिति के पास भेज दिया गया था. इस समिति ने लंबे विचार विमर्श और सलाह मशविरे के बाद यूआईडी परियोजना को महत्वहीन बताते हुए सरकार से इस विधेयक पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्त मामलों की स्थाई समिति जल्द ही अपनी सिफारिशों से संसद को रूबरू करवाएगी, इसके बाद सरकार को आधार के लिए प्रथक मसौदा तैयार करने को कहा जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि इससे सरकार पर गाज गिर सकती है। उल्लेखनीय है कि अब तक सरकार इस परियोजना पर 556 करोड़ रूपया खर्च कर चुकी है और 57 लाख से अधिक यूआईडी कार्ड जारी किये जा चुके हैं, लेकिन अब संसद की स्थाई समिति द्वारा सरकार के विधेयक पर ही सवाल उठा दिये जाने के बाद इस परियोजना को विराम दिया जा सकता है।

यूआईडी परियोजना में आधार कार्ड बनाने का ठेका व्यापक स्तर पर दिया गया है। बड़े ठेकेदारों द्वारा जिला स्तर पर छोटे ठेकेदारों से यह काम करवाया जा रहा है। इस परियोजना में अनेक जिलों में आधार कार्ड बनवाने के फार्म दो से पांच रूपए में बिकने की शिकायतें भी मिली थीं। वैसे इस परियोजना का न केवल विपक्ष विरोध कर रहा था बल्कि सरकार के अंदर भी इसको लेकर विरोध है. गृह मंत्रालय यूआईडी की बजाय नेशनल पापुलेशन रजिस्टर को मजबूत किये जाने के पक्ष में है लेकिन नंदन नीलकेणी के प्रभाव में प्रधानमंत्री यूआईडी परियोजना को आगे बढ़ा रहे थे।

एमपी पुलिस है टॉप पर


एमपी पुलिस है टॉप पर

पुलिस का साईबर सेल है पूरी तरह मुस्तैद



(नंद किशोर)

नई दिल्ली। इंटरनेट की दुनिया में भारत का परचम लहरा रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इंटरनेट पर अपराधों की तादाद भी तेजी से बढ़ी है। इसी के मद्देनजर देश भर में सूबाई पुलिस ने साईबर सेल का गठन किया। मध्य प्रदेश पुलिस का साईबर सेल इस साल टॉप पर रहा है। मध्य प्रदेश के खाते में आई इस उपलब्धि से देश के हृदय प्रदेश में खाकी का सीना चौड़ा होना स्वाभाविक ही है।

एमपी पुलिस के लिए यह गौरव की बात है कि देश में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में मध्य प्रदेश पुलिस इस साल अव्वल रही है। इसके लिए केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, नैसकॉम एवं डीएससीआई (डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) ने नई दिल्ली में राज्य साइबर पुलिस, मप्र को देश के सर्वाेच्च सम्मान ‘इंडिया साइबर कॉप’ अवॉर्ड दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एनएएसएससीओएम और डीएससीआई देश में साइबर सुरक्षा एवं साइबर अपराधों के अध्ययन, अनुसंधान और नियंत्रण उपायों पर संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत संस्थान हैं। यह संस्थान साइबर अपराधों पर लगाम कसने की दिशा में निरंतर प्रयास करते हैं। आईजी ने बताया कि इस अवॉर्ड के लिए संस्थान ने देश के समस्त 28 प्रदेश व 7 केंद्र शासित राज्यों, सीबीआई एवं एनआईए से उत्कृष्ट साइबर अपराधों के नामांकन बुलाए थे।

यह अवॉर्ड राज्य साइबर पुलिस को कोटक महिंद्रा बैंक में हुए 17 लाख रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा करने के लिए दिया गया। टीम ने इस मामले का खुलासा महज 72 घंटे में कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, साथ ही 15 लाख रुपए भी जब्त किए थे।

गैस त्रासदी मामले में सीएम ने लिखा पीएम को पत्र


गैस त्रासदी मामले में सीएम ने लिखा पीएम को पत्र

मृतकों के लिए मांगा दस लाख का मुआवजा



(अंशुल गुप्ता)

भोपाल। मध्य प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने गैस त्रासदी के 10 हजार 47 मामलों में मृतक श्रेणी के तहत 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। मंत्री समूह और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन मामलों को अनुग्रह राशि दिए जाने के मापदंड में शामिल नहीं माना था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है।

मुख्यमंत्री ने अपने इस पत्र में अपने 24 जून 2010 के पत्र का हवाला देकर गैस पीड़ितों के प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है। पत्र में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया है कि गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदंबरम की अध्यक्षता में बने मंत्री समूहों की बैठकों में मप्र सरकार ने गैस त्रासदी के मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपए और गैस पीड़ितों को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की थी।

केंद्र सरकार ने भोपाल गैस लीक डिजास्टर एक्ट के तहत मुआवजा बांटने के लिए न्यायिक अधिकरण गठित किया था। मंत्री समूह ने 5 लाख 14 हजार 376 गैस पीड़ितों के प्रकरणों में से कुल 48 हजार 694 मामलों में विभिन्न श्रेणियों में अतिरिक्त अनुग्रह राशि बढ़ाकर और पूर्व में दी गई मुआवजा राशि को घटाकर देने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री ने लिखा कि वास्तव में 10 हजार 47 प्रकरण मृतक श्रेणी में हैं लेकिन मंत्री समूह और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन मामलों में इनके परिवारों को अनुग्रह राशि देने के मापदंड में शामिल ही नहीं किया। मुख्यमंत्री ने आपत्ति व्यक्ति करते कहा है कि मृत्यु श्रेणी में दावों के वर्गीकरण में मृत व्यक्ति को स्थाई एवं आंशिक निशक्तता की श्रेणी में माना गया इस वर्गीकरण को सीएम ने न्यायसंगत नहीं माना है।

इसके अलावा पांच लाख 21 हजार 332 आंशिक गैस पीड़ितों को मुआवजा देने की अनुशंसा ही नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि इन बिंदुओं पर पुनरू विचार कर गैस पीड़ितों के साथ न्याय किया जाए। ज्ञात हो कि तीन दिसंबर को गैसकांड की बरसी पर भोपाल में रेल रोको आंदोलन के हिंसक होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया था। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री को यह पत्र गैस पीड़ितों की नाराजी दूर करने की कोशिश माना जा रहा है।

अंततः छिंदवाड़ा हुआ सिवनी पर सवार


अंततः छिंदवाड़ा हुआ सिवनी पर सवार

चार माह से लापता थे प्रभारी मंत्री जगन्नाथ सिंह



(शिवेश नामदेव)

सिवनी। लगातार चार माहों से जिले से लापता सिवनी जिले के पालक मंत्री जगन्नाथ सिंह को अंततः सिवनी के प्रभार से मुक्त ही कर दिया गया है। मण्डला और सिवनी जिले के प्रभारी मंत्री जगन्नाथ सिंह अब शहडोल में अपना हुनर दिखाएंगे। वहीं छिंदवाड़ा कोटे से मंत्री नाना भाउ माहोड़ को बालाघाट के साथ ही साथ सिवनी का प्रभार भी दे दिया गया है।

गौरतलब है कि डॉ.ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश में त्रिविभागीय मंत्री थे, उनके उपरांत सिवनी जिले को बतौर प्रदेश के मंत्री लाल बत्ती देखना नसीब नहीं हुआ। जिला भाजपा में मची आपसी गुटबंदी के कारण विधायकों की स्थिति भी काफी दयनीय हो चुकी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौहान और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा द्वारा सिवनी जिले की उपेक्षा करने में कोई कोर कसर नहीं रख छोड़ी है।

पालक मंत्री की अनुपस्थिति में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विधायकों और संगठन की दखल न के बराबर ही रहती है। जिले भर से कार्यकर्ता आकर जिला भाजपा की देहरी पर अपनी फरियाद लाते तो उन्हें महीनों इसके पूरे होने का इंतजार करना पड़ रहा था। मध्य प्रदेश में लागू मौजूदा व्यवस्था में किसी भी काम के लिए नस्ती पर चस्पा नोटशीट पर प्रभारी मंत्री की चिड़िया यानी हस्ताक्षर अवश्यंभावी ही होते हैं।

बताया जाता है कि निर्वतमान प्रभारी मंत्री जगन्नाथ सिंह के सिवनी न आने के कारण विधायकों और संगठन के अनेक कामों की नस्तियां कार्यालयों में ही पड़ी धूल खाती रहीं हैं। जिले में अनेक विभागों के अधिकारी भी पालक मंत्री की अनदेखी के चलते पूरी तरह से निरंकुश ही हो गए थे। भाजपा में चल रही चर्चाओं के अनुसार नाना भाउ को बालाघाट और सिवनी एवं बालाघाट कोटे के मंत्री गौरीशंकर बिसेन को छिंदवाड़ा और मण्डला का प्रभार देकर आग और पानी का भय एक दूसरे पर बनाने का प्रयास ही किया है।

नक्सलियों का बंद आज


नक्सलियों का बंद आज

(महेंद्र देशमुख)


बालाघाट। नक्सली नेता किशन जी की मौत का विरोध कर रहे नक्सलियों ने 3 से 9 दिसंबर के दौरान जिले में बंद का अव्हान किया है, जिसका प्रभाव जिले के शासकीय काम में दिखाई देने लगा है। नक्सल प्रभावित दक्षिण बैहर और लांजी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्र में रोजगार गारंटी, बीआरसीएफ, प्रधानमंत्री सड़क रोजगार योजना सहित बंास कटाई का बंद हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक नक्सलियों ने नवंबर के अंत में बाकायदा पर्चा बंटवाकर काम बंद करने का आव्हान किया था।

अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र में मजदूरों ने काम पर आना बंद कर दिया है। विरोध के स्वर तेज होते ही दर्जनभर से अधिक सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों ने लाखों की मशीन काम से अलग कर देने की बात सामने आ रही है। विरोध को देेखते हुए क्षेत्र में चलने वाली बसें बंद हो गई हैं। जानकारों के अनुसार मजदूर नक्सलियों के बंद समाप्त किए जाने की घोषणा के बाद ही काम पर वापस आने की बात कह रहे हैं।

जानकारों के अनुसार दक्षिण बैहर के सोनगुड्डा क्षेत्र के डाबरी, दडेकसा, पितकोना, मछुरदा सहित लांजी के बहेला, रिसेवाड़ा, देवरबेली, सीतापाला, सालेकसा सहित दर्जनों स्थान शामिल हैं। वर्तमान समय में दर्जनभर से अधिक छोटी और बड़ी प्रधानमंत्री सड़क रोजगार योजना की सड़कें, रोजगार गारंटी के काम, बांस कटाई के काम चल रहे हैं। जिले में कुल 338 बंास कूूप में कटाई का काम चल रहा है, जिसमें सेे 48 कूप में कटाई बंद हो गई है। प्रधानमंत्री सड़क रोजगार योजना के अधिकारी बताते हैं कि मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं इसीलिए काम प्रभावित हो रहा है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूरे जिले में जिला पुलिस बल, सीआरपीएफ, हॉक फोर्स की टीम जंगल में सर्चिग कर रही है। स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। हालांकि बीते दिनों नक्सलियों द्वारा बंद किए जाने का पर्चा मिला था, इसके बाद से ही सुरक्षा अधिक बढ़ा दी गई थी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

शिक्षा की दृष्टि से समृद्ध होगा महाकौशल प्रांत


0 महाकौशल प्रांत का सपना . . . 5

शिक्षा की दृष्टि से समृद्ध होगा महाकौशल प्रांत

तीन विश्वविद्यालय हैं महाकौशल में


(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। छोटे राज्यों से विकास के मार्ग प्रशस्त होते हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। भौगोलिक दृष्टिकोण से संयुक्त मध्य प्रदेश के विशाल भू भाग को जब छत्तीसगढ़ में बांटकर अलग किया गया था तब छत्तीसगढ़ के विकास के मार्ग तेजी से प्रशस्त हुए। उस वक्त प्रथक महाकौशल की मांग भी उठी थी, किन्तु नपुंसक राजनैतिक नेतृत्व के चलते यह मांग ठण्डे बस्ते में ही चली गई थी।

महाकौशल प्रांत का गठन अगर कर दिया जाता है तो शिक्षा की दृष्टि से महाकौशल प्रांत पूरी तरह से समृद्ध ही होगा। महाकौशल प्रांत में तीन विश्वविद्यालय होंगे। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय सालों से उत्कृष्ठ शिक्षा के लिए पहचान बनाए हुए है, इसके साथ ही साथ जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और अब प्रस्तावित आर्युविज्ञान विश्विद्यालय भी यहां की अलग पहचान बनेगा। आध्यात्मिक गुरू महर्षि महेश योगी द्वारा करोंदी में भी एक विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प लिया गया था।

महाकौशल में न जाने कितने आयुर्विज्ञान, इंजीनियरिंग, तकनीकि एवं अन्य क्षेत्र के महाविद्यालय सरकारी और निजी तौर पर संचालित हो रही हैं। पिछले सात सालों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पाने वाले मोगली महोत्सव में समूचे प्रदेश के चुने हुए स्कूली बच्चे सिवनी जिले के मोगली लेण्ड में एकत्र होते हैं। सुखद संयोग ही कहा जाएगा कि भेडिया बालक मोगली की कर्मभूमि भी महाकौशल के सिवनी जिले में ही है।

महाकौशल प्रांत में आने वाले लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के जनसेवक अगर ईमानदारी से प्रयास करें तो प्रथक महाकौशल के मार्ग प्रशस्त होने में देर नहीं लगने वाली। इसके साथ ही साथ केंद्र सरकार से महाकौशल प्रांत के लिए एक सैनिक स्कूल की मांग भी की जा सकती है। इतना ही नहीं महाकौशल में डिफेंस का अच्छा खासा बेस है, इसी आधार पर केंद्र सरकार से एक डिफेंस यूनिवर्सिटी की स्थापना भी महाकौशल की प्रस्तावित राजधानी जबलपुर के आसपास ही करवाई जा सकती है। सब कुछ संभव है बशर्ते यहां से जनादेश पाने वाले नुमाईंदे उन्हें मिले जनादेश का सम्मान करना चाहें।

(क्रमशः जारी)

6800 करोड़ रूपए हो गई पावर प्लांट की लागत


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 26

6800 करोड़ रूपए हो गई पावर प्लांट की लागत

आवश्यक्ता से अधिक जमीन का किया झाबुआ पावर ने अधिग्रहण

गुपचुप जनसुनवाई से प्रदूषण नियंत्रण मण्डल भी है संदेह के दायरे में


(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। उद्योग के क्षेत्र में मशहूर हस्ती गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा गु्रप के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा देश के हृदय प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से महज सौ किलोमीटर दूर बनाए जा रहे 1260 मेगावाट के पावर प्लांट की 22 नवंबर को जनसुनवाई की गुपचुप तरीके से हुई कार्यवाही से मध्य प्रदेश का प्रदूषण नियंत्रण मण्डल (पीसीबी) भी संदेह के दायरे में आ गया है।

संयंत्र के निर्माण स्थल के करीब ही हुई जनसुनवाई में मौके पर संयंत्र के अधिकारियों और पीसीबी के कारिंदों ने मण्डल की वेब साईट पर पूरी जानकारी नहीं डलने की बात स्वीकार कर सभी को आश्चर्य में डाल दिया था। उसी वक्त लगने लगा था कि गौतम थापर के मुलाजिमों ने मध्य प्रदेश की पीसीबी को पूरी तरह ‘सैट‘ कर रखा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार 2900 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले इस पावर प्लांट की लागत रातोंरात आश्चर्यजनक तरीके से बढ़कर 6800 करोड़ रूपए हो गई है।

22 नवंबर को हुई जनसुनवाई की कार्यवाही का सारांश भी इन पंक्तियों के लिखे जाने तक वेब साईट पर नहीं डाला गया है, जनसुनवाई के एक पखवाड़े के उपरांत भी इस कार्यवाही का विवरण वेब साईट पर उपलब्ध न होने से मध्य प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की नीयत पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। पीसीबी की वेब साईट में सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला में प्रस्तावित झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट के डाले गए कार्यकारी सारांश में महज 600 एकड़ भूमि की आवश्यक्ता दर्शाई गई है।

जनसुनवाई के दौरान संयंत्र के प्रभारी मिश्रा ने बताया कि झाबुआ पावर लिमिटेड ने वहां आठ सौ एकड़ से ज्यादा जमीन खरीद ली है एवं अभी डेढ़ दो सौ एकड़ भूमि और खरीदा जाना बाकी है। इस तरह पीसीबी के पास जमा कराए गए दस्तावेज और जमीनी हकीकत दोनों ही अलग अलग होने से अनेक संदेह अपने आप उतपन्न हो जाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि जनसुनवाई के वक्त मौके पर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने यह तथ्य उजागर किया गया फिर भी वे खामोशी से सब कुछ सुनते रहे। जनचर्चा है कि पीसीबी के अधिकारियों को गौतम थापर ने अपनी जेब में ही रख लिया है।

(क्रमशः जारी)

एफडीआई ने किया मन के मन को बेचेन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 48

एफडीआई ने किया मन के मन को बेचेन

रणनीतिकारों ने जानबूझकर हावी होने दिया विपक्ष को


(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके एफडीआई मामले में सरकार का यू टर्न मनमोहन को बुरी तरह अखर रहा है। प्रधानमंत्री को लगने लगा है कि उन्हें कमजोर करने और उनकी साख पर धब्बा लगाने के लिए उनके सहयोगी मंत्री ही माहौल बनाने पर आमदा हैं। मनमोहन के खिलाफ वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम ने परोक्ष तौर पर मोर्चा खोल लिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि एफडीआई मामले में वजीरे आजम की पेशानी पर पसीने की बूंदे साफ इशारा कर रही हैं कि वे इस मामले में बुरी तरह परेशान और आहत हैं। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री को लग रहा है कि कांग्रेस के ट्रबल शूटर्स इन दिनों उनके लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। एफडीआई मामले में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने जानबूझकर सरकार को यू टर्न लेने पर मजबूर किया है।

सूत्रों की मानें तो वजीरे आजम खुद अर्थशास्त्री हैं और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नफा नुकसान से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं। मनमोहन परेशान इसलिए भी हैं क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर भारत और उनकी छवि पर गहरा आघात लगेगा। अभी परमाणु करार भी रार का ही विषय बना हुआ है। सरकार के सहयोगी दलों की जुबानें भी इस मामले में अब खुलना आरंभ हो गई हैं। सरकार में शामिल त्रणमूल कांग्रेस कोटे से रेल मंत्री बने दिनेश त्रिवेदी ने तो साफ साफ कह दिया कि सरकार अगर इस मामले में पहले ही वार्ता कर लेती तो यह नौबत नहीं आती।

(क्रमशः जारी)

अभिषेक बच्चन को कोसने का आईडिया


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  34

अभिषेक बच्चन को कोसने का आईडिया

आईडिया के बजाए अब लोग जूनियर बी को रहे हैं कोस


(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आदित्य बिरला के स्वामित्व वाले आईडिया सेल्यूलर की विशेषकर ग्रामीण इलाकों में घटिया सेवाओं के चलते अब लोगों के मन में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के कुलदीपक सिने अभिनेता अभिषेक बच्चन के प्रति घ्रणा के भाव जगते जा रहे हैं। आईडिया की गलत नीतियों के कारण अब लोग आईडिया की सेवाओं के स्थान पर आईडिया के ब्रांड एम्बेसेडर अभिषेक बच्चन को ही कोसते नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि आईडिया सेल्युलर द्वारा अपने बिजनेस प्रमोशन के लिए मशहूर अभिनेत्री एश्वर्य राय के पति अभिषेक बच्चन को ब्रांड एम्बेसेडर के बतौर इंगेज किया है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन के पुत्र तथा एश्वर्य राय के पति होने के नाते भी इन साभी के प्रशंसकों की आंखों का तारा बने अभिषेक बच्चन से प्रभावित होकर न जाने कितने लोगों के द्वारा आईडिया का कनेक्शन लिया गया।

लोग जब आईडिया के सिग्नल में समस्या, कंजेशन, काल ड्राप आदि की समस्याओं से दो चार हुए और इंटरनेट के मामले में जब बेवकूफ बने तब उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने अभिषेक बच्चन के कहने पर आईडिया लेने का फ्लाप आईडिया चुना है। ‘अब पछताए का होत है, जब चिडिया चुग गई खेत‘ की तर्ज पर अब लुटे पिटे उपभोक्ता आईडिया के मालिकों और कारिंदों के बजाए रूपहले पर्दे के अभिनेता अभिषेक बच्चन को तबियत से कोस रहे हैं। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि आईडिया की हरकतों से अभिषेक बच्चन की टीआपी में जबर्दस्त तरीके से कमी दर्ज की जा रही है।

(क्रमशः जारी)

अम्बेडकर समारक एवं विकास का खर्चा उठाने तैयार हैं शिवराज


अम्बेडकर समारक एवं विकास का खर्चा उठाने तैयार हैं शिवराज

कार्यक्रम से बनाई पर्याप्त दूरी पर दिया आश्वासन



(एडविन अमान)

नई दिल्ली,। निजी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों प्रदेश सरकार के उड़न खटोले पर सरकारी खर्चे पर जब तब दिल्ली की यात्रा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संविधान रचयिता डॉ.भीमराव अम्बेडकर परिनिर्वाण भूमि सम्मान कार्यक्रम समिति के एक प्रोग्राम में शिरकत करना ही मुनासिब नहीं समझा। इस दिन मुख्यमंत्री की व्यस्तताएं मध्य प्रदेश में ही रहीं। उल्लेखनीय होगा िकि इसके स्थान पर अगर भाजपा का कोई प्रोग्राम या उनका पारिवारिक जलसा होता तो वे निश्चित तौर पर दिल्ली में उपस्थित होते।

डॉ0 अम्बेडकर परिनिर्वाण भूमि सम्मान कार्यक्रम समिति दिल्ली द्वारा गत दिवस राष्ट्रीय श्रृद्धांजलि एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इन्द्रेश गजभिये, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आयोजन समिति एवं अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ने की। भारत रत्न डॉ0 बाबा साहेब अम्बेडकर की परमपावन परिनिर्वाण भूमि पर उनकी पुण्य तिथि के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मान एवं श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शरद यादव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। केन्द्रीय मंत्री मुकुल वासनिक, नारायण सामी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया, सांसद जे.डी. सेलम, पर्वू सांसद श्रीमती सत्याबेन, डॉ0 उदित राज और अमरीश गौतम भी अतिथि के रूप में मौजूद थे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण इस अवसर पर उपस्थिति नहीं हो सके । उनकी अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री का संदेश इन्द्रेश गजभिये द्वारा पढ़ा गया। संदेश में श्री चौहान ने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर के विचारों और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रेरणा और आस्था को बढ़ाते हुए प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के सर्वांगीर्ण विकास के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि गैर आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में डॉ0 अम्बेडकर मांगलिक भवन बनाये गये हैं।

इसी प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समरसता के लिए अनेक योजनाएं भी बनायी गयी हैं। उन्होंने कहा कि वे महान राष्ट्रभक्त और भारत माता के सच्चे सपूत थे। उन्होंने भारतीय संविधाान की रचना की और सदियों से वंचित उपेक्षित दलित समाज को सम्मान दिलाने के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए जहां अंतिम सांस लेकर महानिर्वाण को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि सन् 2003 में एनडीए सरकार ने दिल्ली स्थित इस परिनिर्वाण स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करके तत्कालिक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसके समग्र विकास की कार्य योजना बनायी थी।

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि आठ वर्ष के उपरान्त भी अभी तक वहां कोई निर्माण और विकास का कार्य शुरू नहीं हुआ है। श्री चौहान ने बताया कि उन्होंने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर प्रस्ताव भेजा है कि अगर केन्द्र सरकार स्मारक स्थल को डॉ0 अम्बेडकर के विशाल व्यक्तित्व के अनुरूप निर्मित करने में असमर्थ है और केन्द्र अनुमति देगी तो मध्यप्रदेश शासन इसका समग्र विकास और निर्माण का खर्चा वहन करने को तैयार है।