मंगलवार, 18 जनवरी 2011

खस्ताहाल है युवराज की जागीर

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

खस्ताहाल है युवराज की जागीर

कांग्रेसियों की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री और युवराज राहुल गांधी समूचे देश में युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने का जतन कर रहे हैं, किन्तु उन्हें अपनी जागीर यानी संसदीय क्षेत्र अमेठी की कोई परवाह ही नहीं है। अमेठी का आलम यह है कि वहां न बिजली है, न पानी का ठिकाना है, रही बात उद्योग धंधों की तो लगभग उद्योग विहीन हो चुका है अमेठी। कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के बावजूद भी लगभग सवा लाख गैस कनेक्शन धारकों वाली अमेठी में रसोई गैस का जबर्दस्त संकट है। राजनैतिक कारणों से सदा चर्चा में रहने वाली अमेठी में केप्टन सतीश शर्मा ने सांसद रहते बहादुर पुर में पेट्रोलियम इंस्टीटयूट की घोषाण की थी, 97 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात ही है। बतौर सांसद पहले कार्यकाल में राहुल गांधी ने अमेठी को एजूकेशन हब बनाने का सपना दिखाया था, किन्तु न तो इंस्टीट्यूट ऑफ इंफरमेशन तकनालाजी ने यहां डिस्कवरी पार्क बनाया और न ही दिल्ली पब्लिक स्कूल ने ही यहां काम आरंभ किया। मौजूदा हालात में अमेठी की बदहाली को देखकर यहां के नागरिक अपने सांसद पर आंसू ही बहा रहे है। अमेठी में इन दिनों एक पुराना चुटकुला चर्चा में है।

यह है आरटीई का हाल सखे

देश में बच्चों को शिक्षित करने के लिए कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून आरटीई को लागू किया है। गैर कांग्रेसी सरकारों वाले सूबों में आरटीई का परवान न चढ़ पाना समझ में आ सकता है कि वे कांग्रेस के फैसलों को अंगीकार करने से गुरेज कर रहे हों, किन्तु कांग्रेस की ही राजस्थान सरकार द्वारा आरटीई में कोताही समझ से परे है। राजस्थान में बारह लाख से अधिक बच्चों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा है। इतना ही नहीं सूबे 72 हजार शालाओं में 23 हजार शिक्षकों की कमी है। राजस्थान में तकरीबन सात लाख 14 हजार कन्याएं ौर चार लाख 77 हजार बालक स्कूल जाने से वंचित हैं। राजस्थान में बालिकाओं के स्कूल से विमुख होने पर खासा आश्चर्य होता है। कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी खुद महिला हैं, देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी महिला हैं, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी महिला हैं, फिर कांग्रेस की राजस्थान सरकार द्वारा बालिकाओं की शिक्षा दीक्षा के मामले में कोताही ही बरती जा रही है। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के द्वारा बच्चों की शिक्षा को लेकर बनाए गए कानून में राज्यों की अनदेखी पर सजा का प्रावधान अवश्य ही होगा, अगर नहीं तो इसमें संशोधन पर प्रावधान करे और केंद्र को उसका उपयोग करना ही चाहिए।

आईटीडीपी में महिला बटालियन

भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने एक नया इतिहास रचते हुए महिलाओं की पहली बटालियन को अपने आप में समाहित कर लिया है। इस बटालियन में देश की 209 महिलाओं को शामिल किया गया है। इस बटालियन में उत्तराखण्ड से 44, राजस्थान की 13, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और दिल्ली की चार चार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की दो दो एवं हिमाचल प्रदेश की एक महिला शामिल है। अर्धसैनिक बलों में अब तक पुरूषों का ही वर्चस्व रहा है, महिलाएं भी किसी से कम नहीं है, यह बात साबित करते हुए देश की महिलाओं ने आईटीबीपी के माध्यम से देश की सेवा करने की ठानी है। इन महिलाओं को प्रशिक्षण के कठिन दौर से गुजरना पड़ रहा है। बावजूद इसके ये महिलाएं अपने आप को इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जब पूरी तरह से यह बटालियन तैयार हो जाएगी तब इनकी सेवा कैलाश मानसरोवर और नाथुला दर्रे में चुनौतिपूर्ण जवाबदारी भी दी जा सकती है। आने वाले समय में समूची दुनिया ‘भारत की स्त्री शक्ति‘ को सलाम करती नजर आएगी।

फिर केंद्र पर बरसे शिवराज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगता है रह रह कर केंद्र सरकार पर बरसने का भूत सताता है। वे अनेक मामलों में केंद्र से पक्षपात का आरोप लगाते हैं फिर दिल्ली आकर मध्य प्रदेश भवन में पत्रकारों को चाय पर बुलाकर अपनी भड़ास निकाल देते हैं। केंद्र सरकार क्या दे रही है क्या नहीं इस बात से शायद उनको बहुत ज्यादा लेना देना नहीं है। मध्य प्रदेश में सड़कों की दुर्दशा को लेकर सूबे की भाजपा ने पहले भूतल परिवहन मंत्री को घेरने की घोषणा की, इसके लिए हस्ताक्षर अभियान और मानव श्रंखला की घोषणा की गई इसके बाद प्रधानमंत्री से मिलने की बात थी। मध्य प्रदेश की भाजपा ने तो यह नहीं किया, कुछ दिनों बाद शिवराज सरकार ने भी भूतल परिवहन मंत्रालय को घेरने की बात कही। शिवराज की हुंकार के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। रही बात शिवराज सिंह की दिल्ली में पत्रकार वार्ताओं की तो उसमें भूतल परिवहन मंत्रालय को छोड़ बाकी सभी मंत्रालयों को घेरने में शिवराज सिंह चौहान कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।

बताएं बापू का आई क्यू लेबल

देश में सूचना का अधिकार कानून क्या लागू हुआ लोगों ने जो मर्जी चाहे वो जानकारी मांगना आरंभ कर दिया है। अहमदाबाद के एक शस्ख ने केंद्रीय सूचना आयुक्त से एक जानकारी मांगी है, जो हैरतअंगेज ही कही जा सकती है। उसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित अनेक पूर्व राष्ट्रपतियों के बौद्धिक स्तर (आई क्यू लेबल) के बारे में जानकारी चाही है। उधर केंद्रीय सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्र का मानना है कि इस तरह की सूचनाएं मागने से साफ हो जाता है लोग अब सूचना के अधिकार के नाम पर हदें पार करते जा रहे हैं। बकौल मिश्र यह सूचना के अधिकार दायरे का उल्लंघन है, जिसे रोका जाना चाहिए। वैसे कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार कानून के जरिए न जाने कितने लोगों को बेनकाब कर दिया है, और कुछ ने इसके जरिए दुकानदारी भी आरंभ कर दी है। पहले जानकारी मांगो फिर उससे सौदा कर लो। कुछ जगहों पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां मांगने पर लोगों का कत्लेआम तक मच गया है। कुछ भी हो सूचना का अधिकार कानून है बड़े काम की चीज। सरकार को इसका और अधिक प्रचार प्रसार करना चाहिए, ताकि व्यवस्था को चाक चौबंद बनाया जा सके।

आड़वाणी का ब्लाग भारती नहीं भाया भाजपाईयों को

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी बहुत बड़े ब्लागर हो गए हैं। आड़वाणी अब अपनी मंशाएं और पार्टी की अंदरूनी बातें अपने ब्लाग पर लिखाकर सार्वजनिक करते हैं। आड़वाणी बहुत बड़े नेता हैं, और उनके लिए भाजपा का मंच है, फिर भी उन्होंने ब्लाग की दुनिया में जाकर अपने आप को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया है। आड़वाणी ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भाजपा वापसी की मंशा को अपने ब्लाग पर उजागर कर दिया था, उसके बाद से ही भाजपा में उफान आ गया। उमा भारती ने भाजपा में रहते और छोड़ने के बाद जिन जिन लोगों को कोसा था, वे सब लामबंद होकर उमा भारती की वापसी में शूल बोने लगे। पहले लगने लगा था कि जब आड़वाणी ने अपने ब्लाग पर उमा भारती का भविष्य तय कर दिया है तो फिर भला कोई संसदीय बोर्ड में इसका प्रतिकार करने का साहस जुटा पाएगा। उमा विरोधियों ने जमकर सियासत की कहा कि उमा ने टीवी के सामने ही आड़वाणी को जमकर कोसा था, और तो और भाजपा को हराने के लिए एक पार्टी तक बना डाली थी, नतीजा सामने है उमा भारती को अभी वेट करना पड़ रहा है।

एम्स के पानी में हैं लाख बीमारियां

देश का आला दर्जे का चिकित्सालय अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान मरीजों या उसके परिजनों को पानी ही नहीं बीमारियां पिला रहा है। यह सच है, संस्थान के लेबोरेटरी मेडीसिन विभाग की रिपोर्ट यह सब कह रही है। प्रतिवेदन कहता है कि पानी के नमूने लेकर उसकी जांच में पाया गया है कि इसमें पैथोजीन है, जो टाईफाईड, हेपीटाईटिस ए एवं सी के साथ ही साथ पेट की अनेक बीमारियांे का कारक है। इसमें ओपीडी, इंडियन रोटरी केंसर हॉस्पिटल का पानी सबसे ज्यादा दूषित है। उम्दा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विख्यात एम्स में गरीबों के लिए प्रदूषित पानी पिलाया जा रहा है इसमें मरीजों के साथ ही साथ उनकी तीमारदारी में लगे लोग भी प्रभावित हुए बिना नहीं है। वहीं दूसरी ओर पाईवेट वार्डस और व्हीव्हीआईपी क्लीनिक्स में रसूखदारों के लिए आरओ मशीन लगा दी गईं हैं। बहरहाल डिपार्टमंेट द्वारा एम्स निदेशक डॉ.आर.सी.डेक्का को लिखे पत्र में इन बातों का सविस्तार से उल्लेख कर दिया है। अब देखना यह है कि लोगों को भला चंगा करने वाला अस्पताल कब लोगों को साफ सुथरा पानी मुहैया करवाता है।

‘डियर मिनिस्टर‘ का खौफ

केंद्रीय मंत्रियों मंे इन दिनों एक नया खौफ देखने को मिल रहा है। केबनेट सचिव के.एम.चंद्रशेखर ने एक पत्र लिखकर मंत्रियों को हलाकान कर रखा है। कैबनेट सचिव ने केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के एक निर्देश की याद दिलाई है, जिसमें प्रधानमंत्री ने मंशा व्यक्त की थी कि केंद्रीय मंत्री सांसदों का पूरा पूरा ध्यान रखें, उनसे समय समय पर भंेट मुलाकात करें। केबनेट सचिव चंद्रशेखर ने पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे पूर्व राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के पत्र की याद भी दिलाई है। मंत्री हैरान हैं कि आखिर एक नौकरशाह को मंत्रियों को पत्र लिखकर याद दिलाने की क्या जरूरत पड़ गई। मंत्रियों का कहना है कि एसा प्रतीत होता है कि वे सांसदों की उपेक्षा कर रहे हैं और सांसदों ने जाकर केबनेट सचिव के सामने अपना दुखड़ा रोया है। इसके पहले भी कैबनेट सचिव ने मंत्रियों को अपने अपने महकमों की परफार्मेंस रिपोर्ट तैयार करने संबंधी पत्र लिखा था। गौरतलब होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी के कार्यकाल में उनके सचिवों और कंाग्रेस के आला नेताओं द्वारा अपनी इच्छा को राजीव जी की इच्छा बताकर काम साध लिए जाते थे।

बापू को सच्ची श्रृद्धांजली दे रहे हैं अश्विनी

‘रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम‘ अहिंसा के पुजारी मोहन दास करमचंद गांधी जिन्होंने आधी धोती पहनकर उन ब्रितानियों को भारत से खदेड़ दिया था, जिनके बारे में मशहूर था कि उनका सूरज कभी डूबता नहीं है। मौजूदा सियासी हालात देखकर लगने लगा है कि भारत गणराज्य में आज नेताओं के लिए बापू आप्रसंगिक हो गए हैं। आज के समय में सरकारों द्वारा 30 जनवरी को दो मिनिट का मौन रखकर और दो अक्टूबर को सरकारी अवकाश के साथ ही साथ मांस मदिरा की दुकानें बंद करवाकर बापू को श्रृद्धा सुमन अर्पित किए जाते हैं। दिल्ली में संपन्न नौवें प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए महात्मा गांधी के पुजारी सखामित्र अश्विनी ने एक अनोखा संकल्प लिया है। अश्विनी ने बापू के शांति और अहिंसा के संदेश को समूचे विश्व में गुंजायमान कारने का बीड़ा उठाया है। सम्मेलन में लंदन, कनाड़ा, आफ्रीका से आए भारतवंशियों ने उनसे मिलकर इन देशों में बापू के संदेश के प्रचार प्रसार का आग्रह किया है। अश्विन का मानना है कि बापू हमेशा निचले तबके के सहारा माने जाते रहे हैं। फिल्म और थियेटर की दुनिया के सशक्त हस्ताक्षर अश्विनी ने पीस टू जर्नी नामक एलबम के माध्यम से इसका प्रचार प्रसार करने का निर्णय लिया है, यह एलबम इस साल गांधी जयंती पर लांच होने की उम्मीद है।

अब नहीं लगा सकोगे विदेशियों को चूना

जब भी कोई गोरी चमड़ी वाला हिन्दुस्तान की सैर पर आता है, उसे लूटना भारत के आटो चालक अपना धर्म समझते हैं। एक के बदले दस वसूलने के आदी हो चुके महानगरों के आटो चालकों को सबक सिखाने के लिए दुनिया के चौधरी अमेरिका में नायाब मुहिम छेड़ी है। अमेरिका की एक कंपनी ने अपनी वेब साईट पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) सहित अठ्ठारह शहरों के लिए फेयर पोर्टल लांच किया है। टेक्सीआटोफेयर डॉट काम नामक इस वव साईट पर देशी विदेशी पर्यटक अपने रूट मेप, आटो का किराया आदि की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसमें दिल्ली, एनसीआर के अलावा मुंबई, बंगलुरू, कोलकता, पुणे, अहमदाबाद, अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़, औरंगाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, त्रिवेंद्रम, पटना, मंगलौर, नागपुर शहरों की जानकारी का समावेश किया गया है। अब अमेरिका वालों को कौन समझाए कि आप भले ही पोर्टल पर चाहे जो जानकारी डाल दंे, पर यह हिन्दुस्तान की बिगड़ैल व्यवस्था है, इसमें कोई लगाम नहीं लगा सकता है। यहां नियम कायदे कानून हैं, आटो का किराया भी निर्धारित है, किन्तु उसका पालन करने की फुर्सत न तो आटो चालकों को है, और ना ही यातायात पुलिस के बस की ही बात है।

पुच्छल तारा

स्वच्छ छवि वाले अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार, घपले घोटालों की भरमार देखकर कांग्रेस के आला नेताओं को छोड़कर समूचा देश हैरान परेशान है। इसी मामले में केरल के त्रिशूर से सविता नायर ने ईमेल भेजा है। सविता लिखती हैं कि स्विस बैंक में जमा धन, घपले, घोटाले भ्रष्टाचार में कांग्रेस ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। अब तो लोग कहने लगे हैं कि दो सौ सालों में अंग्रेजों ने हमें क्या लूटा होगा जितला महज साठ सालों में ही देश के जनसेवकों और नौकरशाहों ने हमें लूट लिया है।

ये है दिल्‍ली मेरी जान

आवाम ए हिन्‍द 18 जनवरी 2011

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

विदेशी कम्पनी मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा शिक्षा तंत्र पर अध्ययन

शिक्षा के विकास में मध्यप्रदेश सर्वश्रेष्ठ राज्य

नई दिल्ली (ब्यूरो)। मध्यप्रदेश को शिक्षा के विकास के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया। विदेशी कम्पनी मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा 20 देशों में शिक्षा तंत्र पर किये गये अध्ययन पर जारी रिपोर्ट में शिक्षा तंत्र को खराब से बेहतर कैसे बनाया जाए, बेहतर से अच्छा कैसे बनाया जाए और अच्छे से सर्वश्रेष्ठ कैसे किया जाए। यह अध्ययन आर्मीनिया, बोस्टन, चिली, इंग्लैण्ड, घाना, हॉग कॉग, जॉर्डन, लात्विया, लिथुवानिया, कैलीफोर्निया, ब्राजील, ओन्टेरिया, पोलैण्ड, सैक्सोनी, सिंगापुर, सिलोवानिया, दक्षिण कोरिया, वेस्टर्न केप (दक्षिण अफ्रीका) जैसे देशों में किया गया।

मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा ’विश्व के स्कूल शिक्षा तंत्र को कैसे बेहतर बनायें’ के अध्ययन पर हाल ही में जारी रिपोर्ट में विश्व के लगभग 20 स्कूल तंत्रों पर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों पर अध्ययन किया गया। जिसमें लगभग 200 लोगों से साक्षात्कार और 600 लोगों से उनके विचार लिये गये।

रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में पिछले दो से चार सालांें के अंदर प्रदेश में साक्षरता और शिक्षित लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग और सम्पन्न वर्गों के बीच की खाई के अंतर में काफी कमी आयी है। मध्यप्रदेश में शिक्षा तंत्र के अनुसार कक्षा 2 से 5 तक जो छात्र गणित में गुणा भाग में दक्ष हो और पठन में कक्षा 2 की पुस्तक को पढ़ सके, के मापदंड रखे गये हैं। इसके अनुसार पिछले 2 से 4 सालों में गणित की दक्षता में 8 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है जबकि राष्ट्रीय औसत सामान्य से घटकर 9 अंक हो गयी है। इसी तरह पढ़ने के क्षेत्र में 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 2 प्रतिशत बढी है।

शिक्षा तंत्र में आये भारी बदलाव प्रदेश में समर्पित नेतृत्व, तय मानकीकरण, शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण और विद्यार्थियों को सामान्य जरूरतों को पूरा करना जिसमें मध्यान भोजन, मुफ्त वर्दी और साइकिल आदि उपलब्ध कराना है।

Latest Report on Education System by Mckinsey & companyNew Delhi, January 14, 2011

Madhya Pradesh Adjudged the Best State in the Field of Education Development



Madhya Pradesh (in India) was adjudged as the best state in the field of education development particularly,Ow does a school system with poor how does a school system with poor performance become good? And how does one good performance become excellent. The study was conducted in the countries like Armenia, Aspire (a US charter school sytem), Boston, Chile, England, Ghana, Hong Kong, Jordon, Latvia, Lithuania, California, Minas Gerais(Brazil) Ontario, Poland, Saxony, Singapore, Slovenia, South Korea and Western Cape (South Africa) by Mckinsey &company .

In its new Report by on How the World's most improved school system keep getting better by Mckinsey and company, 20 school systems from around the World were analyzed, all with improving but differing level of performance, examining how each was achieved significant, sustained, and widespread gains in students outcomes as measured by international and national assessments. Based on over 200 interviews with system stakeholders and analysis of some 600 interventions carried out by these systems. The Report identifies the reform elements that are applicable for school systems elsewhere as they move from poor to fair to good to great to excellent performance.

The Report says that, "even systems starting from low level of performance, such as Madhya Pradesh in India have significantly improved their literacy and numeracy levels within just 2 to 4 years, while making strides in narrowing the achievement gap between students from different socio-economic background. Improvement can start from any student outcome level, whatever the geography, culture or income."

In Madhya Pradesh, the education system aspire from every student in class 2 through 5 to be proficient in reading and mathematics (mathematics is proficiency in division: reading is proficiency in reading standard 2 text). In

mathematics there was 8 per cent increase in proficiency compared to the national average which was minus 9 per cent. As regards reading there was 9 per cent increase in proficiency compared to national level i.e. 2 per cent increased.

The drastic change in the education system is possible because of the committed leadership, standardized, scripted teaching techniques (highly prescriptive curriculum, teaching methods), teachers coaches, data monitoring and basic needs provisions like mid day meal programme, free uniform and bicycles etc.

जनपद सदस्य का चुनाव जीतने के बाद से लालचंद ने अपने ग्राम मे नही रखा है पैर

अनोखा संकल्प लालचंद की गले की फांस बना

महज 3 किलोमीटर सड़क बनाने का संक ल्प नही कर पाया है पूरा *
नेताओ और अधिकारियो के दरवाजो पर माथा टेकने मे निकल गये 1 वर्ष 
* सिवनी विधान सभा की इससे अधिक दुर्दशा की कहानी और क्या होगी

सिवनी आदिवासी विकास खंड छपारा का एक जनपद सदस्य पिछले एक वर्ष से जनपद सदस्य का चुनाव जीतने के पश्चात आज तक अपने ग्राम मे नही पहुंचा है। उस जनपद सदस्य को पूरे ग्राम के व्यक्तियो एवं उसके परिजन उसके समर्थक और जनप्रतिनिधि मना मना कर थक गये है। परन्तु वह अपने संकल्प को जब तक पूरा नही करेगा। तब तक ग्राम मे पैर नही रखेगा। उक्त जनपद सदस्य ने कोई बडा संकल्प नही लिया है। बहुत छोटा सा संकल्प है। परन्तु विकास की गंगा बहाने वाला शिवराज सिंह का शासन उसके उस संकल्प को पूर्णता प्रदान नही कर रहा है। जिससे आदिवासी क्षेत्रो का विकास करने के प्रति सरकार की गति को और मानसिकता को समझा जा सकता है। इस क्षेत्र से बहुत ही संवेदन शील मानी जाने वाली सिवनी विधायक का बड़ा गहरा संबंध है। जनपद सदस्य से अपना राजनैतिक सफर प्रारंभ करने वाली श्रीमति नीता पटेरिया इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य रही फिर ५ वर्ष सांसद भी रही और अब सिवनी विधान सभा क्षेत्र से विधायक होने के साथ ही महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष है। परन्तु इनकी विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाला एक आदिवासी ग्राम जहां से हर वर्ष २५ से ३० लाख रूपये का सीताफल दिल्ली सहित अन्य प्रदेश को लिये निर्यात होता है। ऐसे वन ग्राम मे महज तीन किलोमीटर की सड़क नही बन पा रही है। क्षेत्र के लोगो ने अपने क्षेत्र की सबसे बडी इस समस्या के निराकरण के लिये लालचंद धुर्वे नामक व्यक्ति को जनपद सदस्य निर्वाचित किया छपारा जनपद पंचायत के वार्ड क्र मांक १२ से निर्वाचित जनपद सदस्य लालचंद धुर्वे ने भी बहुत छोटा काम समझकर संकल्प ले लिया कि जब तक उसके ग्राम खैरमटाकोल से बंधानी तक ३ किलोमीटर की पक्की सड़क नही बन जायेगी। वह अपने ग्राम मे पैर नही रखेगा। परन्तु लाल चंद धुर्वे को वह संकल्प बहुत अधिक मंहगा साबित हो रहा है। लगभग १ वर्ष का समय बीत चुका है। वह अपने ग्राम मे पैर नही रख पाया है। महज तीन किलोमीटर की सड़क बनाने के लिये उसने हर सक्षम जनप्रतिनिधि और हर अधिकारी की चौखट पर माथा रगड़ लिया है। परन्तु सड़क बनने का आश्वासन भी अभी तक कही से प्राप्त नही हुआ है। पूरे मध्यप्रदेश की राजनीति मे छायी रहने वाली इस क्षेत्र की दो महान हस्तियां आदिवासी जनपद सदस्य की पीड़ा को नही समझ पा रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह जो आदिवासियो के हितो के प्रति हमेशा सजग रहते है। और अपने आप को उनका सबसे अधिक हितेषी बताते है। वही छपारा क्षेत्र मे विकास की गंगा बहाने वाली सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया भी अपनी उपलब्धियो का बखान करते रहती है। परन्तु आदिवासी निर्वाचित जनप्रतिनिधि महज तीन किलोमीटर की सड़क बनाने के संकल्प पूरा करने के लिये दर-दर की ठोंकरे खा रहा है जो बडबोले नेताओ की करनी और कथनी को स्पष्ट करता है। मध्यप्रदेश विधान सभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह को ऐसे छोटे मोटे कार्य कराने के लिये केवल आदेश देने की आवश्यकता काम चुटकि मे हो सकता है सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया भी इस काम को कराने मे रूचि ले ले तो कार्य होना कोई मुश्किल नही है। और इस प्रकार के कार्य कराने की उनकी अपनी नैतिक जिम्मेदारी है। क्योकि वे इस क्षेत्र से निर्वाचित विधायक है। हलांकि पहले सांसद भी रह चुकी है। जो संकल्प जनपद सदस्य ने लिया है उसकी आवश्यकता ही नही पड़ऩी थी। सिवनी बालाघाट सांसद के.डी. देशमुख ने भी उक्त जनपद सदस्य की समस्या को टालते हुए सी.सी. एफ के पास पहुंचा दिया जबकि वह सी.सी.एफ के यहां चक्कर काट काट कर अपनी चप्पल घिस चुका है। रोजगार गारंटी योजना, प्रधान मंत्री सड़क योजना, मुख्यमंत्री सड़क एवं वनसुरक्षा समीतियो द्वारा किये जाने वाले विकास कार्यो के मद से इस छोटी सी सड़क निर्माण आसानी से किया जा सकता है परन्तु सड़क निर्माण न होना कही न कही किसी बडे जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत अरूचि का कारण और आदिवासी समाज के प्रति घटिया सोच का परिणाम कहा जा सकता है। विकास अपने क्षेत्र विकास के प्रति संकल्पवान जनप्रतिनिधियो की कैसे दुर्दशा होती और आदिवाासियो के साथ किस प्रकार का दुव्र्यहार हो रहा है यह लालचंद धुर्वे की दशा क ो देखकर अनुमान लगाया जा सकता है। और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जो मंच से यह घोषणा करते नही थक रहे है कि खजाने पर सबसे पहला अधिकार आदिवासियो का है उन्हे इस प्रकार के बाधित कार्यो की समीक्षा अवश्य करना चाहिए।

आर्थिक समानता से सामाजिक और राजनैतिक समानता आयेगी-मिश्रा

आर्थिक समानता से सामाजिक और राजनैतिक समानता आयेगी-मिश्रा
सिवनी -:''बिना सहकार नहीं उद्धारÓÓ यह सहकारिता का उद्घोष है। सहकार भारती ने इसमें संस्कार शब्द जोड़कर सहकारिता को नया रूप प्रदान किया है, भारत के संस्कारों में सहकार की भावना हजारों-हजारों साल से विद्यमान है पाश्चात्य संस्कृति ने आज स्वरूप को विकृत कर दिया है, परंतु जबतक इसे सशक्त नहीं किया जायेगा। भारत की वर्तमान दुर्दशा को सुधारना संभव नहीं है, सहकार में ही भारत की समृद्धि सामाजिक समानता और राजनैतिक समानता का विकास संभव हैं, यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विवादपूर्ण घनश्याम मिश्रा ने आज सहकार भारती के स्थापना दिवस के अवसर पर जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन के दौरान कही। आज जिला सहकारी बैंक कन्द्रीय बैंक के छत पर सहकार भारती का स्थापना दिवस जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक तेकाम के मुख्य आतिथ्य एवं सहकार भारती के अध्यक्ष राजेन्द्र विश्वकर्मा की अध्यक्षता में मनाया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलिति किया गया अतिथि स्वागत के पश्चात मुख्य अतिथि अशोक तेकाम ने अपना संक्षिप्त उद्बोधन दिया और कहा कि सहकारिता का क्षेत्र इतना विशाल है कि इसके माध्यम से हर क्षेत्र में कार्य किये जा सकते और कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं जहां इस क्षेत्र में कार्य कर रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं वहीं छोटे-छोटे कार्यो में लगे हुए व्यक्तियों को  शोषण से मुक्त कराकर उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सकता है। इसके पश््रचात मुख्य वक्ता श्री घनश्याम मिश्रा ने सहकार से राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने की अवधारणा को प्रतिपादित करते हुए कहा कि सहकार कोई नई कल्पना नहीं है इस प्रकार की व्यवस्था हमारे वेदो मे भी प्राचीन काल से थी, और इसी कारण भारत का सम्मान विश्व मे रहा है। उच्चकोटि के संस्कार और सामाजिक व्यवस्थाये विश्व के  लिये अनुकरणीय रही हैै। संस्कार युक्त सहकार से ही भारत की समस्याओ का निराकरण संभव है।  उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय अध्यात्म, संस्कार और ज्ञान पर व्याख्यान देकर शिकागो धर्म सभा मे भारतीय दर्शन को उच्च कोटि का स्थान दिलाया था। परन्तु भारत की गरीबी अशिक्षा ने उन्हे बुरी तरह झंकझोर दिया था पं. दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार आद्यशंकराचार्य भी हजारो वर्ष पहले आसमानता से व्यथित थे। और उन्होने समाज को एक दूसरे की चिंता करने का संदेश दिया था एक दूसरे का सहयोग करना ही सहकार है। समाज के दबे -कुचले विकास की मुख्य धारा से छुटे हुये व्यक्तियो को विकास की मुख्यधारा से जोडने का सामाजिक प्रयास ही सहकार है। जब तक बेहतर सोच के साथ प्रयास नही होंगे और समाज के व्यक्तियो की रोटी, शिक्षा, मकान की चिंता नही की जायेगी। देश का भला नही हो सकता एक तरफ आधुनिकता की दौड़ बडी-बडी अट्टालिकाऐ और दूसरी तरफ भूखमरी, अशिक्षा और फु टपाथों  पर बड़ी संख्या मे व्यक्ति जीवन यापन कर रहें हैं। यह स्वास्थ्य सामाजिक व्यवस्था नही कही जा सकती भारतीय जीवन दर्शन सभी को एक दूसरे का भाई के रूप मे प्रतिपादित करता है। उसी भावना से हमे अपने जीवन मूल्यो को प्रतिबिंबित करना चाहिए। स्वर्ग मरने के पश्चात ही नही मिलता जहां हम रहते जिस समाज के बीच रहते है। उसे ही स्वर्ग बनाने की भावना से मिलजुलकर काम करे। इसी प्रकार  सहकार से उद्धार की कल्पना की जा सकती है। आर्थिक समानता से सामाजिक समानता और सामाजिक समानता से राजनैतिक समानता आसानी से प्राप्त हो सकती है। जो उपेक्षित और दबा कुचला समाज है उसे पहले आर्थिक रूप से संपन्न करने की आवश्यकता है। और आर्थिक समानता सामाजिक समानता और राजनैतिक समानता लाने मे सक्षम है। यह बहुत दुखद पहलू है कि आज विश्व आधुनिकता के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है, और उसी क्रम में भारत भी विकास की गति में कमजोर नहीं है, परंतु आज भी, समाज के बहुत बड़े वर्ग का उद्धार नहीं हो पाया है, आज भी अशिक्षा, भूखमरी हमारा पीछा नहंी छोड़ रही है, इस कलंक को धोये बिना सशक्त भारत का निर्माण नहीं हो सकता और इसकी जिम्मदारी आपसी सहयोग से ही संभव है, श्री मिश्रा ने कहा कि अपने आने वाले समय को सुख समृद्धिपूर्ण बनाने के लिए सभी वर्गाे के सम विकास की चिन्ता करना होगी।
कार्यक्रम मे विशेष अतिथि के रूप मे संतोष अग्रवाल एवं अधिवक्ता राजेन्द्र विश्वकर्मा, राजेश उपाध्याय, भूमि विकास बैंक के संचालक प्रहलाद पटेल, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी, समीर अग्रवाल, श्रीमती निर्मलाठाकुर, श्रीमती संगीता उपाध्याय श्रीमती आशा अवस्थी, सुश्री रानीबघेल, श्रीमती शान्ति बघेल, श्रीनिवास मूर्ति, नरेंन्द्र टॉक, आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।  कार्यक्रम का संचालन अजय डागोरिया द्वारा किया गया, कार्यक्रम में सहकार भारती के पदाधिकारी एवं अन्य जन बडी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में रजेन्द्र विश्वकर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

कृष्णा की बिदाई लगभग तय

शर्मा और सिब्बल हैं विदेश मंत्रालय के दावेदार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा का मंत्रालय बदलना लगभग तय ही माना जा रहा है।

भारत गणराज्य के नए विदेश मंत्री के लिए वर्तमान वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और मानव

संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल सशक्त दावेदार बनकर उभरे हैं। आनंद शर्मा सोनिया

गांधी तो सिब्बल प्रधानमंत्री की पहली पसंद बताए जा रहे हैं।ं

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ

रही खबरों के अनुसार विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर की बिदाई के बाद से ही सोनिया गांधी को

कृष्णा की कार्यप्रणाली पसंद नहीं आ रही है। वहीं दूसरी और वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा

द्वारा बिना नागा के हर सप्ताह अंतर्राट्रीय मसलों पर एक सटीक नोट कांग्रेस अध्यक्ष के

सामान्य ज्ञान को बढ़ाने की गरज से पेश कर दिया जाता है, जिससे आनंद शर्मा के नंबर 10

जनपथ में जबर्दस्त तरीके से बढ़ चुके हैं।

बताते हैं कि आनंद शर्मा वैसे भी प्रधानमंत्री को फूटी आंख नहीं सुहाते, इसलिए वजीरे आजम

डॉ.मनमोहन सिंह चाहते हैं कि कृष्णा के स्थान पर कपिल सिब्बल को फिट किया जाए। सियासी

गलियारों कें चल रही बयार के अनुसार दोनों ही स्थितियों में मौजूदा विदेश मंत्री कृष्णा का

जाना तय है। गौरतलब होगा कि पिछले दिनों एस.एम.कृष्णा को मीडिया के सामने स्पष्टीकरण

भी देना पड़ा था कि उनके हाथ से विदेश मंत्रालय कतई नहीं फिसलने वाला है।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि पीएम चाहते हैं कि कृष्णा के स्थान पर सिब्बल और सिब्बल
की जगह सलमान खुर्शीद को एचआरडी मिनिस्ट्री की कमान सौंपी जाए। अगर एसा हुआ तब
खुर्शीद के स्थान पर अंतुले जैसे कट्टरपंथी नेता को लाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक मजबूत किया
जा सकता है।

बुधवार, 12 जनवरी 2011

किसे फिकर है राजमाता के फरमान की

सोनिया की नसीहतों पर धूल डालने के आदी हो चुके हैं कांग्रेसी

(लिमटी खरे)

देष को ब्रितानियों के कब्जे से छुड़ाने में महती भूमिका अदा करने वाली सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस की वर्तमान निजाम श्रीमति सोनिया गांधी एक के बाद एक करके कांग्रेसियों को सुधरने की बात कहती जा रही हैं, वहीं मोटी चमड़ी वाले कांग्रेस के जनसेवकों को मानो सोनिया की बातों से कोई लेना देना ही नहीं रहा है। हाल ही में सोनिया ने मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को हिदायत दी है कि वे विवेकाधीन कोटे को समाप्त कर दें।

गौरतलब होगा कि इससे पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष ने मंत्रियों विधायकों के साथ ही साथ कांग्रेसियों को तरह तरह की नसीहतें दी हैं। मंदी के दौर में सोनिया ने साफ कहा था कि कांग्रेस के हर जनसेवक को अपनी पगार का बीस फीसदी जमा कराना होगा। देष में कांग्रेस के विधायक, सांसद और अन्य जनसेवकों पर सोनिया गांधी के इस फरमान का कोई असर नहीं हुआ, किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली,, यहां तक कि खुद सोनिया और उनकी मण्डली ने भी। इसी दरम्यान सोनिया गांधी ने सादगी बरतने का संदेष दिया। कांग्रेसियों ने इतनी सादगी बरती कि कांग्रेस के मंत्रियों ने दिल्ली में राज्यों के भवन होते हुए भी मंहगे आलीषान पांच या सात सितारा होटल में रातें रंगीन की, वह भी सरकारी खर्चे पर। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह भी इन मंत्रियों से हिसाब पूछने का साहस नहीं जुटा पाए कि आखिर इन होटल्स का महंगा भोगमान किसने भोगा।

कांग्रेस के भद्रजनों को सादगी का पाठ पढ़ाने के लिए नेहरू गांधी परिवार की बहू सोनिया गांधी ने दिल्ली से मुंबई तक की यात्रा हवाई जहाज की इकानामी क्लास में कर डाली। उनके बेटे सांसद और महासचिव राहुल गांधी ने दिल्ली से चंडीगढ़ का सफर षताब्दी में किया। मीडिया ने इन दोनों ही घटनाओं को बढ़ा चढ़ा कर देष के सामने पेष किया। बाद में इन्हीं मंत्रियों में से कुछेक ने ‘‘ऑफ द रिकार्ड‘‘ कह डाला कि हवाई जहाज में बीस सीटों का किराया भरकर सोनिया गांधी ने, और षताब्दी की पूरी की पूरी एक बोगी बुक करवाकर राहुल गांधी ने कौन सी सादगी की मिसाल पेष की है।

कांग्रेस अध्यक्ष का विवेकाधीन कोटा समाप्त करने का डंडा किस कदर परवान चढ़ सकेगा कहना जरा मुष्किल ही है। कांग्रेस षासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को सोनिया की यह बात गले नहीं उतर रही है। दरअसल विवेकाधीन कोटा ही वह मलाई है, जिसे इनके द्वारा रेवडियों की तरह बांटा जाता है। अब जबकि सोनिया को अपनी नई टीम का गठन करना है, तथा केंद्र में मंत्रीमण्डल में फेरबदल मुहाने पर है तब मंत्रियों ने अवष्य ही सोनिया गांधी की चिट्ठी का जवाब देना आरंभ कर दिया है कि वे अपने विवेकाधीन कोटे का प्रयोग ही नहीं करते हैं। जैसे ही सोनिया की टीम और मंत्रीमण्डल फेरबदल पूरा होगा वैसे ही इन मंत्रियों के असली दांत अपने आप ही सामने आ जाएंगे।

वैसे देखा जाए तो कांग्रेस को इस वक्त महाराष्ट्र में सबसे अधिक ध्यान देने की आवष्यक्ता है, क्योंकि यहां जमीन घोटाले में कांग्रेस को अपने एक मुख्यमंत्री अषोक चव्हाण की बली चढ़ानी पडी है। उनके स्थान पर भेजे गए पृथ्वीराज चव्हाण ने भी अभी तक सोनिया गांधी को यह नहीं बताया है कि वे अपने अधिकारों में कटौती करने की मंषा रख रहे हैं। देखा जाए तो महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान, दिल्ली, हरियाण, आंध्र प्रदेष जैसे राज्यों में कांग्रेस सत्तारूढ़ है, फिर भी यहां के निजामों ने सोनिया गांधी के इस फरमान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है।

हो सकता है कि कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों द्वारा श्रीमति सोनिया गांधी को यह तर्क दे दिया जाए कि विवेकाधीन कोटा समाप्त करने से जरूरतमंद लोगों की मदद करना ही मुष्किल हो जाएगा। महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेष, तमिलनाडू आदि राज्यों में जमीन, प्लाट, फ्लेट आदि को गलत तरीके से आवंटित करने के आरोप तेजी से सियासी फिजां में तैर रहे हैं। नब्बे के दषक में मध्य प्रदेष के कांग्रेसी मुख्यमंत्री राजा दिग्जिवय सिंह ने एमपी की राजधानी भोपाल में पत्रकारों को भी तबियत से सरकारी मकान आवंटित किए थे, बाद में कोर्ट के हस्ताक्षेप से यह मामला रूक पाया था। आज भोपाल के पत्रकारों पर सरकारी मकान खाली करवाने की तलवार लटक ही रही है।

एक समय था जब रसोई गैस और टेलीफोन कनेक्षन मिलना बहुत ही मुष्किल होता था। तब सांसदों को निष्चित मात्रा में रसोई गैस के कूपन मिला करते थे, इसके साथ ही साथ सांसदों को टेलीफोन कनेक्षन का कोटा भी निर्धारित था। अनेक सांसदों पर इस कोटे को बेचने के आरोप भी लगा करते थे। बाद में जब गैस और फोन की मारामारी समाप्त हुई तब इन्हें कोई नहीं पूछता है।

इसी तरह केंद्रीय विद्यालय में दाखिले के लिए उस जिले के जिलाधिकारी और क्षेत्रीय सांसद के पास दो सीट का कोटा हुआ करता है। जब इस कोटे में भी धांधलियों के आरोप आम हुए तब वर्तमान मानव संसाधन और विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस कोटे को ही समाप्त करने की घोषणा कर डाली। जैसे ही सिब्बल के मुंह से यह बात निकली वैसे ही सारे सांसदों ने सिब्बल को जा घेरा, मजबूरी में बाद में सिब्बल को अपनी बात वापस लेकर इस कोटे को बहाल ही करना पड़ा।

एसा नहीं है कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के कानों तक कांग्रेसियों की गफलतों की षिकायतें न जाती हों। सोनिया को सब पता है कि कौन सा मंत्री कितने फीसदी कमीषन लेकर काम कर रहा है, किस सूबे का कांग्रेस अध्यक्ष या महासचिव पैसा लेकर विधानसभा चुनावों की टिकिटें बेच रहा है? पर क्या करें सोनिया गांधी की मजबूरी है, चुप रहना। अगर सोनिया गांधी ने जरा भी आवाज तेज की, ये सारे कांग्रेसी ही सोनिया गांधी का महिमा मण्डन और स्तुतिगान बंद कर देंगे। इन परिस्थितियों में सोनिया गांधी की नसीहत या उनके फरमान को कांग्रेसी बहुत ज्यादा तवज्जो देने वाले नहीं। बेहतर होगा कि सोनिया गांधी इस तरह का प्रलाप करने के पहले सोचें, जब उनकी बात मानी ही नहीं जानी है तो फिर जुबान खराब करने से भला क्या फायदा।

मध्य प्रदेश को नहीं बसों की दरकार

मध्य प्रदेश को नहीं बसों की दरकार

बसों के लिए कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा केंद्र को

(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली इमदाद की मध्य प्रदेष सरकार को दरकार नहीं है। यही कारण है कि केंद्र द्वारा बार बार प्रस्ताव भेजने के अनुरोध के बावजूद भी एमपी गर्वमेंट ने कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा है। केंद्र सरकार को मिले छः राज्यों के प्रस्तावों को उसने मंजूरी दे दी है, जिसमें मध्य प्रदेष का नाम षामिल नहीं है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पास किए गए प्रस्तावों में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडू, हिमाचल प्रदेष और कर्नाटक को षामिल किया गया है। गौरतलब होगा कि सूबों की सरकारी या अर्धसरकारी परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली यात्री बसों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब तक कोई मदद नहीं दी जाती थी। पिछले साल मार्च में भूतल परिवहन मंत्रालय के द्वारा एक योजना बनाई थी जिसके मुताबिक अगर सूबों की बसें सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाओं से लैस होंगी तो केंद्र सरकार उन्हें मदद उपलब्ध करवाएगा।
सूत्रों का कहना है कि इसके उपरांत केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2010 - 2011 के लिए सूबों से प्रस्ताव मांगे गए थे किन्तु मध्य प्रदेष सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव ही नहीं मिला। इसके अलावा सूबों में निरीक्षण एवं मरम्मत केंद्र की स्थापना के लिए भूतल परिवहन मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए मध्य प्रदेष, उत्तर प्रदेष, दिल्ली, गुजरात, आंध्र प्रदेष, हरियाणा, हिमाचल प्रदेष, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि प्रस्ताव मांगे थे, जिनमें से महज हरियाणा और हिमाचल प्रदेष से ही प्रस्ताव आ पाए हैं।

अत्याधुनिक सुविधाओं से जुड़ सकेंगी यात्री बस
सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा जिन राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, उसके लिए तीस करोड़ रूपए की राषि चरणों में प्रदान की जाएगी, जिससे बसों में जीपीएस, जीएसएस प्रणाली के अंतर्गत व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, इलेक्ट्रानिक टिकिट वैंडिग मषीन, आटोमेटिक फेयर कलेक्षन सिस्टम के साथ ही साथ सूचना प्रोद्योगिकी की अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य परिवहन निगम में परिचालन क्षमता बढ़ने के साथ ही साथ वाहनों के रखरखाव में मदद मिलेगी।

छिंदवाड़ा को मिल गया एक सेंटर
भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ ने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में दो करोड़ 55 लाख रूपए की लागत से बनने वाले निरीक्षण और मरम्मत केंद्र मंजूर कर दिया गया है, जिसके लिए स्थान की तलाष युद्ध स्तर पर की जा रही है।

पीएम से मिली चौहान

पीएम से मिली चौहान

प्रदेश में पाला पड़ने से पांच हजार करोड़ की फसलों को नुकसान:केन्द्रीय सहायता की मांग

नई दिल्ली, (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह और केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री श्री शरद पवार से भेंट की। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे प्रदेश के लंबित प्रकरणों को हल करने में सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए और फसलों को हुई क्षति के आकलन के लिए शीघ्र केन्द्रीय अध्ययन दल भेजने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में चना, मसूर और अरहर सहित अनेक दलहन फसलों में पाला पड़ने के कारण लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र की पांच हजार करोड़ रूपये की फसलों का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार किसानों को अपने स्तर पर सहायता दे रहा है। इसके लिए केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता होगी। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री से केन्द्रीय अध्ययन दल भेजकर क्षति का आकलन कर सहायता देने का अनुरोध किया है। श्री चौहान ने फसल बीमा योजना में भी सुधार करने का आग्रह किया है। किसान और एक गांव को यूनिट मानकर बीमा का लाभ दिया जाए। श्री चौहान ने लागत मूल्य बढ़ने के कारण गेहूं के समर्थन मूल्य में 20 रूपये प्रति क्विंटल की वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की। मध्यप्रदेश शासन अपने स्तर पर 100 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य दे रहा है। प्रदेश के किसानों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार भी ब्याज की दरें कम करे। श्री चौहान ने बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत छतरपुर में एक कृषि विश्वविद्यालय खोलने का अनुरोध किया। प्रदेश सरकार ने इसक्रे लिए जमीन चिन्हित कर ली है।

श्री चौहान ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया कि प्रदेश को 170 लाख टन कोयले की आवश्यकता है। प्रदेश को 150 टन आवंटित कोयले के विरूद्ध मात्र 130 लाख टन कोयला दिया जा रहा है इससे प्रदेश में विद्युत उत्पादन कम हो रहा है। श्री चौहान ने मध्यप्रदेश के लिए कोयला की आपूर्ति मध्यप्रदेश की कोयला खानों से करने का आग्रह किया। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया कि कोयला आयात करने पर प्रदेश को चार गुना अधिक खर्च होता है। इसलिए कोयला उत्पादक राज्यों को उनके ही राज्यों से कोयला दिया जाए। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री जी से कहा कि प्रदेश को गैर आवंटित बिजली में से 350 मेगावाट बिजली कम मिली रही है। इसी प्रकार दामोदर वैली से 200 मेगावाट बिजली प्राप्त नहीं हो रही है। इस दिशा में प्रधानमंत्री पहल करने का आग्रह किया है। प्रदेश के थर्मल पावर प्लांटों के लिए 6 कोल ब्लाक आवंटित किये गये हैं किन्तु वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति नहीं मिलने के कारण थर्मल पावर प्लांट चालू नहीं हो पा रहे हैं। महेश्वर बांध मंें 5 रेडियल गेट लगाने की वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी दिलायी जाए। महेश्वर बांध में रेडियल गेट लग जाने से तुरंत 200 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

प्रदेश का 30 प्रतिशत वन क्षेत्र सुरक्षित रखा गया है जिसका लाभ पूरे देश को मिलता है। कैम्पा के अंतर्गत 967 करोड़ रूपये की राशि जमा है। इसमें से मात्र 104 करोड़ रूपये की राशि हमें मिली है। शेष राशि भी राज्य को खर्च करने क्रे लिए प्रधानमंत्री निर्देश दें। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आदिवासियों को पट्टे देने में प्रदेश अव्वल है। किन्तु वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वन भूमि को डी नोटिफाई करने के आदेश जारी नहीं किये जाने के कारण आदिवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि प्रदेश में 37 लाख आवासहीन अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर आय वर्ग के लोग हैं जिन्हें इन्दिरा आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन्दिरा आवास योजना में मध्यप्रदेश को अधिक लाभ दिलाया जाए। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री का इस ओर भी आकर्षित किया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। किन्तु इस वर्ष ग्रामीण सड़कों के लिए बिल्कुल राशि आवंटित नहीं की गयी है। इससे गांवों को जोड़ने का काम प्रभावित होगा। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को लंबित प्रकरणों के निराकरण में सहयोग करने का आश्वासन दिया है।

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

महंगाई पर प्रधानमंत्री की बैठक बेनतीजा

महंगाई पर प्रधानमंत्री की बैठक बेनतीजा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। प्याज समेत अन्य खाद्य पदार्थाे की कीमतों के आसमान छूने से चिंतित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा महंगाई का समाधान खोजने के लिए मंगलवार बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक बेनतीजा रही। बुधवार को बैठक फिर होने की संभावना है। करीब दो घंटे चली इस बैठक में महंगाई पर अंकुष लगाने के विभिन्न उपायों पर विचार विमर्ष किया गया।

बैठक में विŸा मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृह मंत्री पी चिदंबरम, खाद्य मंत्री षरद पवार और योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया मौजूद थे। उद्योग मंडलों के साथ पहले से निर्धारित बजट पूर्वक बैठक में भाग लेने के लिए श्री मुखर्जी बैठक के बीच में ही चले गए थे।

पामोलिन तेल घोटाले में सुनवाई को अनुमति

पामोलिन तेल घोटाले में सुनवाई को अनुमति

नई दिल्ली (ब्यूरो)। केेंद्रीय सतर्कता आयुक्त के गले की फांस बने करोड़ों रुपये के पामोलिन तेल घोटाला मामले में आगे की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को अनुमति दे दी। इस मामले में मुख्य सतर्कता आयुक्त पी जे थॉमस और तत्कालीन मुख्यमंत्री के करूणाकरन कथित तौर पर लिप्त बताए जाते हैं।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की पीठ ने करूणाकरन की अपील को उनके निधन के मद्देनजर समाप्त मानते हुए केरल सरकार को मामले की सुनवाई करने की अनुमति दे दी। करूणाकरन का गत 23 दिसंबर को निधन हो गया था। केरल सरकार ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट से पामोलिन तेल आयात मामले में सुनवाई पर लगी रोक वापस लेने के लिए याचिका दायर की थी। इस मामले में थॉमस एक आरोपी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन अगस्त 2007 को इस मामले की केरल में सीबीआई की एक अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी। पामोलिन आयात मामले में आठ आरोपी हैं। 2000 में करूणाकरन और थॉमस सहित राज्य सरकार के सात अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। थॉमस उन दिनों केरल में खाद्य सचिव थे।

पीएम के गले में अजगर की तरह लिपटे हैं थामस

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेतली ने कहा कि पामोलिन आयात घोटाले के आरोपी पीसी थामस को प्रधानमंत्री ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्ति षर्मनाक है। जेटली ने कहा कि आज यह स्थिति है कि वर्तमान सीवीसी प्रधानमंत्री के गले में अजगर की तरह लिपटे हुए हैं। प्रधानमंत्री के बारे लोग कहते हैं कि वह अर्थषाóी हैं और ईमानदार हैं, लेकिन मनमोहन सिंह विचित्र प्रकार के ईमानदार व्यक्ति हैं, जो आजादी के बाद देष की सबसे भ्रश्ट सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

आखिर क्‍या है मिशन सिब्‍बल

सिब्बल सही या सोनिया!

(लिमटी खरे)

कांग्रेस की अंदरूनी संस्कृति बड़ी ही अजीब है। कांग्रेस अध्यक्ष अपना राग मल्हार गाती हैं तो उनके कुनबे के अन्य लोग अपनी ढपली अपना राग बजाते रहते हैं। कहीं किसी पर कोई नियंत्रण नहीं है। कांग्रेस की नीति रीति और कांग्रेस के नताओं के बयान में जमीन आसमान का अंतर होता है। जब विवाद बढ़ता है तब कांग्रेस के प्रवक्ता अपना रटा रटाया जुमला ‘‘यह उनके निजी विचार हो सकते हैं।‘‘ कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। देखा जाए तो हर सियासी दल के पास अपने प्रवक्ताओं की फौज होती है, प्रवक्तओं के अक्षम होने पर दीगर नेताओं द्वारा बयानबाजी की जाना आम बात है। सवाल यह है कि अगर प्रवक्ता अक्षम है तो उन्हें शोभा की सुपारी बनाकर बिठाने का क्या तात्पर्य हो सकता है?

हाल ही में कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र के एटीएस चीफ हेमंत करकरे से बातचीत पर सियासत गर्मा दी। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता इस मामले में अपना मुंह सिले रहे। हायतौबा मचने पर उन्होंने गेेंद एक बार फिर दिग्गी राजा के पाले में ढकेलकर वह सारी बयानबाजी को उनके नितांत निजी विचार बता डाले। जब दिग्गी राजा से पूछा गया कि उन्होंने करकरे से बातचीत के सबूत देने के लिए कांग्रेस मुख्यालय के बजाए कांस्टीट्यूशनल भवन का उपयोग क्यों किया? के जवाब में वे बोले क्या मैं कांग्रेसी नहीं हूं? अरे जनाब आपको कांग्रेसी मानने से इंकार करने की हिमाकत कौन कर सकता है। किन्तु कांग्रेस के उन प्रवक्ताओं को कौन समझाए जो कहे जा रहे हैं कि ये विचार कांग्रेस के नहीं दिग्विजय सिंह के निजी हैं।

बहरहाल अभी वह मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि मानव संसाधन मंत्रालय का भारी भरकम प्रभार संभाले कपिल सिब्बल ने संचार मंत्री के बतौर नियंत्रक महालेख परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को ही सिरे से खारिज कर दिया है। कितने आश्चर्य की बात है कि भारत गणराज्य के एक जिम्मेदार मंत्री होते हुए कपिल सिब्बल यह कह रहे हैं कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में 1.76 लाख करोड़ रूपए का नुकसान नहीं हुआ है। वे कहते हैं कि सरकारी खजाने को एक पैसे का भी नुकसान नहीं झेलना पड़ा है।

अगर सिब्बल सही हैं, तो फिर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा को अपने पद से त्यागपत्र क्यों देना पड़ा और कपिल सिब्बल को दूरसंचार विभाग का नया मंत्री क्यों बनाया गया? क्या यह सच नहीं है कि राजा ने 2008 में नियमों को बलाए ताक रख 2001 की दरों पर 122 कंपनियों को लाईसेंस प्रदाय किया था? इसमें आरकाम, टाटा सहित जीएसएम आपरेटर्स को 6.2 मेगाहर्टज से अधिक का स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया गया था।

सिब्बल उवाच का सबसे अधिक असर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर पड़ेगा जो इन दिनों बजट सत्र के दौरान संसद को चलने देने के लिए विपक्ष के साथ मान मनौअल में जुटे हैं। विपक्ष के तरकश में सिब्बल का छोड़ा नया तीर आ चुका है। विपक्ष मांग कर सकता है कि जब सरकार खुद परोक्ष तौर पर मान चुकी है कि इसमें घपला हुआ है, तब सिब्बल की नई तान पर उनका त्यागपत्र लिया जाए।

अब तो सरकार और सोनिया गांधी की नीयत पर ही संदेह होना स्वाभाविक ही है। लागों को लग रहा था कि भले ही सरकार द्वारा जेपीसी की मांग स्वीकार न की जाए, पर इस मामले की ईमानदारी से जांच अवश्य ही करवाई जाएगी। इसी तारतम्य में जो भी तथ्य उभरकर सामने आएंगे उन्हें सरकार जनता के समक्ष रखेगी, किन्तु अब सिब्बल के इस बयान से तो लगने लगा है कि मानो कुछ हुआ ही नहीं है, बेचारे ए.राजा की नौकरी मुनाफे में ही चली गई।

वैसे कपिल सिब्बल का बयान दूरसंचार मंत्री की हैसियत से आया है, और उन्होंने कैग के प्रतिवेदन पर उंगली उठाई है। अगर सिब्बल सही हैं, तो फिर कैग जैसा ईमानदार संगठन भी भ्रष्टाचार के दलदल का एक नगीना बन गया है, और अगर एसा है तो फिर कैग की विश्वसनीयता ही नहीं रह जाती है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि इसकी जांच अवश्य करवाएं वह भी टाईम फ्रेम में बांधकर। जांच में जो भी गलत साबित हो उसे जनता के सामने लाया जाए बिना किसी राजनैतिक नफा नुकसान को सोचे हुए, क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ही इकलौती एसी संस्था बची है, जिस पर लोगों का भरोसा अभी तक कायम है। सीबीआई और केंद्रीय विजलेंस की कारगुजारियों से तो लोगों के मानस पटल पर इनका होना न होना बराबर ही माना जा रहा है। वैसे भी जब भारत गणराज्य के मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठा शख्स जब संवैधानिक संस्थाओं की ओर उंगली उठाएगा तो इससे इन संस्थाओं की साख में इजाफा तो होने से रहा।

हो सकता है कि सिब्बल को यह मशविरा दिया गया हो कि तमिलनाडू में जल्द ही विधानसभा चुनाव है और टूजी का मसला वहां स्थानीय स्तर पर उठापटक कर सकता हैै, इसलिए इस मामले के पटाक्षेप का प्रयास किया जाए। डीएमके के दबाव में आकर कांग्रेस किसी भी स्तर पर आ सकती है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि गठबंधन धर्म के पहले कांग्रेस का राजधर्म है, जिसकी तह में देश की सेवा करना वह भी सच्चाई और ईमानदारी के साथ है।

पिछले साल ही स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भारत के वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह ने कामन वेल्थ गेम्स के बारे में कहा था कि इसे राष्ट्रीय पर्व के तौर पर लेना चाहिए, प्रधानमंत्री बेहतरीन छवि के कारण उनकी अपील के बाद इसमें हुए भ्रष्टाचार पर चीत्कार कुछ कम हुआ। लोगों को लगा कि जल्द ही जांच हो जाएगी, किन्तु अब लोगों को लगने लगा है कि प्रधानमंत्री की अपील महज दिखावा ही थी। कांग्रेस को लगने लगा है कि देश का मीडिया और अन्य सियासी दल उनकी छवि के चलते खामोश रह सकते हैं। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को यह नहीं भूलना चाहिए कि देश सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है किन्तु उनकी छवि की कीमत पर भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

पिछले कुछ माहों से कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी भी भ्रष्टाचार पर काफी संजीदा प्रतीत हो रही हैं। बार बार वे भ्रष्टाचार पर बोलती नजर आ रही हैं। सोनिया के इस स्वरूप से देश की जनता के मन में एक बार आस जगी थी कि हो सकता है कि सवा सौ साल पुराने सियासी दल द्वारा देश को आज आकंठ भ्रष्टाचार में दलदल में फंसाने के बाद उसका ही एक अध्यक्ष रहनुमा बनकर आया है, जो देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करा सकेंगी।

तीन चार सालों में सोनिया गांधी ने युवराज राहुल गांधी के साथ सादगी का प्रहसन किया। चाटुकार मीडिया ने उसे खूब हवा दी। कम ही ईमानदार पत्रकार होंगे जिन्होंने इस बात को रेखांकित किया होगा कि दिल्ली से मुंबई की सोनिया गांधी की यात्रा इकानामिक क्लास में अवश्य ही हुई किन्तु उनके लिए बीस सीट खाली रखी गईं थीं। इन बीस सीट का भोगमान किसने भोगा, यह बात आज भी किसी को नहीं पता।

इसी तरह युवराज राहुल गांधी ने शताब्दी में यात्रा की। यात्रा के लिए पूरी की पूरी एक बोगी बुक करवा दी गई थी। आलम यह था कि उसके आगे और पीछे के डिब्बे वाले यात्री एक दूसरे के डिब्बे में नहीं जा पा रहे थे। यह थी कांग्रेस की नजर में देश के भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी की सादगी की नौटंकी। मंदी के दौर में मंत्रियों ने पांच सितारा होटलों में रातें रंगीन की, वह भी सरकारी खर्चे पर। न तो प्रधानमंत्री डॉ.एम.एम.सिंह, न सोनिया गांधी, न वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज तक यह पता कर जनता को बताने का प्रयास किया है कि उन होटलों का बिल किस मद से किसने भुगतान किया है?

कुल मिलाकर नब्बे के दशक की गूंगी गुडिया कही जाने वाली कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को भी सियासी कीचड़ के रंगे हुए सियारों ने अपनी तरह ही बना लिया है। रही राहुल गांधी की बात तो राहुल का भी इसी दिशा में प्रशिक्षण जारी है। सच ही कहा है किसी ने देश में जनसेवक खाएंगे मोती और उन्हें चुनने वाली जनता खाएगी दाना।

प्रियंका की नजरों से सोनिया देख रहीं हैं सियासत

मतलब प्रियंका हैं सोनिया की असली सलाहकार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के सलाहकारों में नंबर वन अहमद पटेल हैं, या महासचिव दिग्विजय सिंह? इस प्रश्न पर समूचा देश उलझा हुआ है, किन्तु हकीकत यह है कि सोनिया गांधी उसी रंग से सियासी दुनिया देख रही हैं, जिस रंग का चश्मा उनकी पुत्री प्रियंका वढ़ेरा उन्हें लगा रही हैं।

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी के लिए सियासी बिछात, जमीनी हकीकत और नेताओं की पोल पट्टी कोई और नहीं उनकी ही अपनी बेटी प्रियंका उपलब्ध कराती हैं। कल तक सियासी गलियारों में चर्चाओं में रहने वाली प्रियंका वढ़ेरा ने एकाएक अपने आप को समेट लिया है। अब वे अपने पति राबर्ट वढ़ेरा और बच्चों के साथ सुर्खियों से दूर ही रह रही हैं।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि प्रियंका द्वारा निजी गुप्तचर एजेंसियों के माध्यम से केंद्रीय मंत्रियों, सूबों में कांग्रेस की इकाईयों के बारे में मालुमात की जाती है, फिर उसे अपने सूत्रों के द्वारा क्रास चेक भी किया जाता है। जब जानकारी पुख्ता हो जाती है तब वे उसे अपनी मां के सामने परोस देती हैं। उन्होंने कहा कि एसा लंबे समय से नहीं हो रहा है, यह सिलसिला पिछले आठ दस माहों से ही आरंभ हुआ है।

उधर सोनिया के करीबी सूत्रों का भी यह दावा है कि नेहरू गांधी परिवार की छटवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए भी भविष्य का रोड़मेप प्रियंका द्वारा ही तैयार किया जा रहा है। यही कारण है कि वे सियासी से चमक दमक से अपने आप को दूर रखते हुए अमेठी और रायबरेली में ही चुनावों के दौरान शिरकत करती हैं।



प्रियंका के लिए प्रायोजित हुए थे टीवी शो

पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान अपनी दादी स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी की साड़ी पहनना, उनके जैसे हेयर स्टाईल बनाना, और प्रियंका की आदतों को प्रियदर्शनी स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी से जोड़ने के फीचर भी मीडिया में जमकर उछले। माना जा रहा है कि सोनिया के करीबी प्रबंधकों ने चुनावों के दौरान कोशिश की थी कि प्रियंका में इंदिरा गांधी का अक्स ढूंढकर सामने लाया जाए ताकि देश में कांग्रेस को इससे फायदा हो सके। बताते हैं कि बाद में प्रियंका की आपत्ति के उपरांत ये फीचर आगे परवान नहीं चढ़ सके।

अविनाश वाचास्‍पति और गिरीश बिल्‍लोरे को सलाम

हिन्‍दी ब्‍लॉंगिंग का एक नया कीर्तिमान अविनाश वाचस्‍पति और गिरीश बिल्‍लौरे मुकुल के नाम



रविवार 9 जनवरी 2011 का दिन हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के सम्‍मेलनीय इतिहास में स्‍वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। इस दिन खटीमा (उत्‍तराखंड) में हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के सम्‍मेलन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के जरिए पूरे विश्‍व में सफलतापूर्वक विभिन्न एग्रीगेटर्स, खासकर ब्लॉगप्रहरी (दिल्ली), सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक,ट्विटर, गूगल-बज्ज आदि के जरिये किया गया।

हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के सम्‍मेलनीय स्‍वरूप को चहुं ओर इसकी सकारात्‍मकता के साथ प्रवाहित करने वाले चर्चित ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर और ब्‍लॉगर, साहित्‍यकार, व्‍यंग्‍यकार अविनाश वाचस्‍पति ने जबलपुर के मशहूर ब्‍लॉगर गिरीश बिल्‍लौरे ‘मुकुल’ के साथ मिलकर इन पलों को पूरे विश्‍व में प्रसारित करके ऐतिहासिक बना दिया है। इससे साबित होता है कि धुन के धनी जब चाहते हैं तो प्रत्‍येक परिस्थिति को अपने अनुकूल बना नेक कार्यों को सर्वोत्‍तम अंजाम तक पहुंचा देते हैं।

इस अवसर पर साहित्‍य शारदा मंच के तत्‍वावधान में उत्‍तराखंड स्थित खटीमा के ब्‍लॉगर, कवि डॉ. रूपचन्‍द्र शास्‍त्री ‘मयंक’ की दो पुस्‍तकें सुख का सूरज और नन्‍हे सुमन का लोकार्पण डॉ. इन्द्रराम, सेवानिवृत्‍त प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर के कर कमलों द्वारा किया गया । अविनाश वाचस्‍पति जी इस समारोह के मुख्‍य अतिथि रहे। एक साथ कई पायदानों पर सफलतापूर्वक सफर करने वाले अविनाश वाचस्‍पति और गिरीश बिल्‍लौरे के इस कारनामे को, हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग विधा के चितेरे करोड़ों दर्शकों ने लगातार 6 घंटे तक इस जीवंत प्रसारण का भरपूर आनंद लिया और इसके साक्षी बने।

इस संबंध में यह भी उल्‍लेखनीय है कि इस जीवंत प्रसारण को अब भी http://bambuser.com/channel/girishbillore/broadcast/1313259 पर देखा और सुना जा रहा है। इसे टीम वर्क का अन्‍यतम उदाहरण बतलाते हुए अविनाश वाचस्‍पति ने इसका श्रेय जबलपुर के गिरीश बिल्‍लौरे, दिल्‍ली के पद्मसिंह के उनमें अपने प्रति विश्‍वास के नाम करते हुए कहा है कि इस सजीव प्रसारण से हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के शिखर पर पहुंचने के प्रयासों में अभूतपूर्व तेजी देखने में आएगी।

इस अवसर पर खटीमा में मौजूद रहे, प्रख्‍यात हिदी ब्‍लॉगर लखनऊ के रवींद्र प्रभात (परिकल्‍पना) , दिल्‍ली के पवन चंदन (चौखट) , राजीव तनेजा (हंसते रहो) , धर्मशाला के केवलराम (चलते चलते), बाराबंकी के रणधीर सिंह सुमन (लोकसंघर्ष) , खटीमा के रावेन्‍द्र कुमार रवि, डॉ. सिद्धेश्‍वर सिंह और आसपास के क्षेत्रों यथा बरेली, पीलीभीत, हल्‍द्वानी इत्‍यादि के साहित्‍यकार, कवि, प्रोफेसरों और हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत के प्रेमियों सोहन लाल मधुप, बेतिया से मनोज कुमार पाण्डेय (मंगलायतन) ,शिवशंकर यजुर्वेदी, किच्छा से नबी अहमद मंसूरी, लालकुऑ (नैनीताल) से श्रीमती आशा शैली हिमांचली, आनन्द गोपाल सिंह बिष्ट, रामनगर (नैनीताल) से सगीर अशरफ, जमीला सगीर, टनकपुर से रामदेव आर्य, चक्रधरपति त्रिपाठी, पीलीभीत से श्री देवदत्त प्रसून, अविनाश मिश्र, डॉ. अशोक शर्मा, लखीमपुर खीरी से डॉ. सुनील दत्त, बाराबंकी से अब्दुल मुईद, पन्तनगर से लालबुटी प्रजापति, सतीश चन्द्र, मेढ़ाईलाल, रंगलाल प्रजापति, नानकमता से जवाहर लाल, सरदार स्वर्ण सिंह, खटीमा से सतपाल बत्रा, पी. एन. सक्सेना, डॉ. गंगाधर राय, सतीश चन्द्र गुप्ता, वीरेन्द्र कुमार टण्डन आदि उल्‍लेखनीय हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा किया गया।

पाला से परेशान किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं

नुकसानी पर मुआवजे का हल्ला केवल झूठी हमदर्दी

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी -: जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में कड़ाके की ठण्ड और पाला पडऩे से कृषकों की फसलें बुरी तरह नष्ट हो गई है, सभी राजनैतिक दलों सहित कृषक हितेषी संगठनों द्वारा नुकसानी की मांग मुआवजे के रूप में किसानों को देेने की मांग की है, और राजनैतिक दल के नेताओं द्वारा किसानों को हुई नुकसानी ने खेतो में जाने का अवसर प्रदान कर दिया है लगभग सभी राजनैतिक दल के नेता क्षेत्रों में भ्रमण कर किसान हितेषी बनने का स्वांग रचा रहे हैं भोला भाला किसान उनकी इस झूठी संवेदना से भावविभोर हो रहा है,हालांकि वह यह बात भी जानता है कि नुकसानी पर संवेदना जताने आ रहे नेतागण झूठी संवेदनाएं ही दे रहें हैें किसानों का इससे कोई भला होने की संभावना नहंीं है । पिछले वर्ष फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में रबी की फसल ओला वृष्टि से चौपट हो गई थी, जिसमें केवलारी विधानसभा क्षेत्र के एवं सिवनी विधानसभा क्षेत्र के कृषकों को भारी नुकसानी हुई थी। केवलारी विधायक ठाकुर हरवंशसिंह ने क्षति ग्रस्त क्षेत्र का दौराकर मुआवजे की मांग की थी, केवलारी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति कर रहे डॉ. ढालङ्क्षसह बिसेन भी कहां पीछे रहने वाले थे उन्होंने ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ओला वृष्टि से बरबाद फसल का मुआयना किया था। सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, बंडोल कलारबांकी क्षेत्र के अनेक ग्रामों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ओला वृष्टि से हुई क्षति को देखने खेतों में पहुंची एवं उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये थे कि किसानों की क्षति का मुआवजा उन्हें एक सप्ताह के भीतर दिया जाये ओवर बुरी तरह चौपट हुई फसल के कारण ग्राम में राहत काल प्रारंभ किये जाये शासन की जन कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित ग्रामों में अधिकतम संचालित की जाये परंतु किसानों के लिए वे सारे वायदे, झूठे साबित हुए न उन्हें मुआवजा मिला और न कोई योजनाएं लाभ पहुंचाने वाली संचालित हुई , फिर इसके पश्चात सावंरदेही नामक फौजी कीट से खरीब की फसल बर्बाद हुई, और कृषक हितेषी बनने वाले सभी नेताओं ने सरकार से मुआवजे की मांग की । यहांतक की नुकसानी राजस्व मंत्री स्वयं खेतों में देखकर गये, केवलारी विधायक ठाकुर हरवंशसिंह, डॉ. ढालसिंह बिसेन, श्रीमती नीता पटेरिया, कमल मर्सकोले,सभी ने मुआवजा देने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा और नुकसानी का सीधा आंकलन कराकर किसानो को मुआवजा दिलाने की बात कही थी, परंतु जब क्षेत्रीय पटवारियों ने नुकसानी का आंकलन दर्शाया तो नुकसानी इतनी निकली जितने में किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता था। हालांकि इसके पश्चात बेमौसम बरसात भी हुई और नुकसानी बढ़ी भी परंतु किसानों को नुकसानी का मुआवजा नहीं मिला। राजस्व अमला किसानों की नुकसानी के आंकलन में जानबुझ कर ऐसा कर रहा है ऐसा प्रतीत होता है जानकार, जानकारों के अनुसार किसानों को मुआवजा की राशि नुकसानी के अनुसार सीधे चैक से भुगतान होना होती है, जिसमें राजस्व अमले की काई फायदा होने की संभावना नहीं होती है समझा जा रहा है कि अपना कोई फायदा न होने के कारण राजस्व अमले के अधिकारियों द्वारा नुकसानी के आंकलन में कंजुसी दिखाई जाती है, कड़ाके की ठण्ड और पाले से हुई नुकसानी ने नेताओं को किसान के पक्ष में झूठी हमदर्दी दिखाने का अवसर अवश्य प्रदान कर दिया परंतु उन्हे मुआवजा प्राप्त हो जायेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है और नेता भी अभी होहल्ला के पश्चात जो मौन धारण करेंगे तो फिर किसानों को मुआवजा मिला या नहीं इसकी उन्हे परवाह नहंी रहेगी। सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि, नेताओं द्वारा अभी किया जा रहा हो हल्ला पटवारियों की कलम से कमजोर पड़ जता है।

सोमवार, 10 जनवरी 2011

गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट के लिए टिकटों की बिक्री

गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट के लिए टिकटों की बिक्री
नई दिल्ली (ब्यूरो)। आम जनता के लिए राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड तथा विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह हेतु टिकटों की बिक्री आरंभ हो गई है। 26 जनवरी, 2011 को गणतंत्र दिवस परेड के लिए आरक्षित सीटों हेतु टिकटों का मूल्य 300. 150 रुपए तथा अनारक्षित सीटों हेतु टिकटों का मूल्य 50,10 रुपए है । 28 जनवरी 2011 को बीटींग रिटरीट समारोह (फुल ड्रेस रिहर्सल) के लिए टिकटों का मूल्य क्रमशः 50. 20. रुपए होगा तथा कोई आरक्षित सीट नहीं होगी।
इस उद्दश्य से जनपथ एवं अशोक होटल के आई टी डी सी ट्रवेल काउंटर, कॉफी होम, बाबा खडग सिंह मार्ग पर डी टी डी सी काउंटरों तथा फूड एवं क्राफ्ट बाजार, दिल्ली हाट आईएनए बाजार के सामने और गांधी आश्रम, चाँदनी चौक पर गैर-विभागीय बिक्री काउंटर स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर केवल कार्य दिवस में टिकट उपब्ध रहेंगे।
नौ विभागीय बिक्री काउंटरों पर भी सभी दिन सुबह दस से शाम पांच बजे टिकट उपलब्ध रहेंगे। ये काउंटर स्थापित किए गए हैं नॉर्थ ब्लॉक गोल चक्कर, साउथ ब्लॉक गोल चक्कर, प्रगति मैदान (गेट नं 1, भैरों मार्ग), जंतर मंतर (मुख्य द्वार), शास्त्री भवन (गेट नं 1 के पास), इंडिया गेट (जाम नगर हाउस के पास), लाल किला (पुलिस पिकेट के पास) तथा संसद भवन (स्वागत कक्ष)। संसद भवन स्वागत कक्ष में टिकट 19 से 28 जनवरी, बीच उपलब्ध रहेंगे। भारत सरकार पर्यटन कार्यालय, 88, जनपथ पर भी टिकट उपलब्धध रहेंगे।

नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा चार दिन के इंडोनेशिया दौरे पर

नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा चार दिन के इंडोनेशिया दौरे पर
नई दिल्ली (ब्यूरो)। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा 10 जनवरी से चार दिन के सरकारी दौरे पर, इंडोनेशिया के लिए रवाना हुए। एडमिरल वर्मा वहां इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री पुरनोमो युस्जिआंतोरो, इंडोनेशियाई नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुपरनो. कानूनी, राजनीतिक तथा रक्षा मामलों में सहायक मंत्री तथा इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल आगस सुहारतोनो से बातचीत करेंगे।
अपने चार दिन के दौरे के दौरान एडमिरल इंडोनेशियाई सेना, नौसेना तथा वायु सेना की विभिन्न सुविधा केन्द्रों का दौरा करेंगे तथा जकारता के साथ-साथ बैन्डंग एंड बाली का भी दौरा करेंगे। साझा गश्त व मिलान जैसे अभ्यास द्वारा प्रोत्साहित भारतीय एवं इंडोनेशियाई नौसेना के बीच आपसी सहयोग व समझ पर आधारित एक नियमित पुराना उच्च स्ततरीय संबंध है।

थम नहीं रहा ठंड का कहर

यूरोप की बराबरी में पहुंची दिल्‍ली
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राजधानी में अधिकतम तापमान ने पिछले पांच साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। राजधानी में रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री लुढ़ककर 11 डिग्री पर आ गया। न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री खिसककर 5 डिग्री पर आ गया। हालत यह है कि दिल्ली का अधिकतम तापमान यूरोप के बराबर पहुंच गया है। इस समय बार्सिलोना का अधिकतम तापमान 15, मैड्रिड का 9, पैरिस का 8, बर्लिन का 7 और लंदन का 6 डिग्री सेल्सियस है।
मौसम विभाग का कहना है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच कम अंतर के कारण ही ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में बर्फ बारी और बारिश का असर राजधानी में भी पहुंच रहा है। कोहरा भी पसरा हुआ है और सूर्यदेव के ठीक से दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में चल रहे मौसमी बदलाव के कारण आने वाले दिनों में राजधानी में बारिश भी हो सकती है। ठंड और कोहरे की मार हर तरह के ट्रैफिक पर पड़ रही है। एयरपोर्ट पर 2 उडान निरस्त हुईं, 7 के मार्ग बदले गए और 80 से ज्यादा विलंब से चलीं। 70 से ज्यादा ट्रेनें 3 से 27 घंटे लेट थीं। 35 को रीशेड्यूल किया गया और 9 ट्रेनें कैंसल की गईं।
0 वेस्टर्न डिस्टर्बेंर्स
 वेस्टर्न डिस्टर्बेंर्स यानी पश्चिमी विक्षोभ दरअसल बादलों और हवा का वह इलाका है, जो पश्चिम से पूर्व की तरफ बढ़ता है। पहले समझा जाता था कि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर से नमी लेकर आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह कैस्पियन सागर से भी नमी ला सकता है। कभी-कभी यह अपने आप ही बन जाता है। सदिर्यों र्में र्दिल्ली में आम तौर पर पश्चिमी विक्षोभ की एक पूरी सीरीज आती हैए जो अपने साथ बारिश लाती है और कोहरे का कारण बनती है, क्योंकि ये नमी में बढ़ोतरी करती हैं।
 
विंड चिल फैक्टर
यह दरअसल वह तापमान है, जब किसी ठंडे दिन तेज हवाएं चलती हैं। शरीर का तापमान, जो तकरीबन 37 डिग्री से. होता है, इन ठंडी हवाओं के कारण नीचे आ जाता है। ये हवाएं तापमान में एकरूपता लाने का भी काम करती हैं। उŸार की ठंडी हवाएं, जो हिमालय की ऊंची बफीर्ली पहाडिय़ों से बहकर आती हैं, तापमान में और कमी लेकर आती हैं। विंड चिल फैक्टर सिर्फ तभी लागू होता हैए जब तापमान 10 डिग्री से. या उससे नीचे हो और हवाओं की रफ्तार 4.8 किमी. प्रति घंटा हो।
पाला
जब न्यूनतम तापमान 3 डिग्री से. से नीचे जाता है, तो नमी पौधों पर जम जाती है। यह आम तौर पर खुले ग्रामीण इलाकों में होता है, जबकि वहां हवाएं, हॉरिजोंटल और वर्टिकल दोनों, बिना रुके चलती रहें।
कोहरा
पृथ्वी की सतह पर यह बहुत हद तक बादलों जैसा होता है। कोहरा तब बनता है, जब पानी की भाप कम तापमान के दौरान सघन हो जाती है। हालांकि, जब पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस से कम होता है, कोहरा बनना खत्म हो जाता है, क्योंकि भाप पाला (फ्रॉस्ट) में बदल जाती है। कोहरे के कारण दृश्यता 1000 मीटर से भी कम हो जाती है।