बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 63
सेवकों को हाकिम बना दिया मनमोहन ने
जनता के सेवक हो गए हैं हुक्मरान!
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली (साई)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने निश्चित तौर पर इक्कीसवीं सदी के एसे भारत देश की कल्पना तो कतई नहीं की होगी जैसा कि वर्तमान में दिख रहा है। बेलगाम व्यवस्थाएं, अनादार, कदाचार, भष्टाचार देश पर जमकर हावी है। गणतंत्र के न जाने कितने टुकड़े होकर बिखर गए हैं। जनता की सेवा का कौल लेने वाले जनसेवक आज देश के हाकिम बन बैठे हैं।
यह सारी व्यवस्थाओं में तब्दीली एक दिन में नहीं वरन् धीरे धीरे ही आई है। कहते हैं कि अगर घर का मुखिया ही कमजोर हो जाए तो घर का हर सदस्य उच्चश्रंखल और निष्क्रीय हो जाता है। गठबंधन धर्म को राष्ट्रधर्म के उपर रखने वाले कथित ईमानदार छवि के धनी वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह बतौर प्रधानमंत्री सब कुछ गफलतें सामने से देखते रहे और मौन साधे रहे। देश को लुटता देखने उनकी क्या मजबूरी थी यह तो वे ही जाने पर क्या यह सब उचित था?
वजीरे आजम अर्थशास्त्री कहे जाते हैं बावजूद इसके देश में मंहगाई कचहरी की तारीख पर तारीख देने के बाद भी नहीं रोकी जा सकी। लोग तो अब प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर ही शक करने लगे हैं। अब प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को ईमानदार प्रधानमंत्री के बजाए भ्रष्टाचार का ईमानदार संरक्षक ज्यादा मानने लगे हैं।
(क्रमशः जारी)


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