आखिर झुके शिव
आंदोलन कारियों के सामने
(नंद किशोर)
भोपाल (साई)।
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खंडवा और हरदा जिले में जल
सत्याग्रह कर रहे किसानों को जमीन के जमीन देने का प्रस्ताव दिया है। सीएम ने इस
बाबत एक कमिटी बनाने का भी ऐलान किया है, जो अगले 3 महीने में रिपोर्ट देगी। सीएम के
इस ऑफर के बाद नर्मदा डूब से प्रभावित लोग जल सत्याग्रह वापस ले सकते हैं।
सोमवार को मध्य
प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जल सत्याग्रह कर रहे किसानों को जमीन के बदले
जमीन का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि जो किसान मुआवजे की राशि का 50 फीसदी
लौटाएंगे, उन्हें
जमीन के जमीन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस बाबत 5 सदस्यों की एक कमिटी
भी बनाई जाएगी, जो इस
मामले पर पर अगले 3 महीने में रिपोर्ट देगी। यही नहीं ओंकारेश्वर बांध की ऊंचाई भी
189 मीटर से अधिक नहीं होगी।
गौरतलब है कि खंडवा
जिले के घोघलगांव,
बड़खलिया और हरदा जिले के खरदाना में नर्मदा के डूब प्रभावितों
द्वारा जल सत्याग्रह किया जा रहा है। शुक्रवार को सीएम ने राज्य सरकार के दो
मंत्रियों को सत्याग्रह स्थल पर जाकर आंदोलनकारियों से बातचीत के निर्देश दिए थे।
शनिवार को उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और कुंवर विजय शाह सत्याग्रह स्थल पर
पहुंचे और आंदोलनकारियों से बातचीत की। उसके बाद ही सरकार ने यह कदम उठाया है।
बेमियादी जल
सत्याग्रह पर डटे डूब प्रभावितों को उफनती नर्मदा की बाढ़ का खतरा भी नहीं डिगा
पाया। उनका आंदोलन शुक्रवार को 17वें दिन भी जारी है। घोघलगांव में आंदोलनरत 51
सत्याग्रहियों के पैरों की चमडी गलने लगी है। प्रदूषित और कच्चे जल के कारण खुजली
रोग पनपने लगा है। इस मामले में विस्थपितों के साथ जिला प्रशासन और नर्मदा विकास
प्राधिकरण के साथ हुई बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
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