मीटर बदलने के नाम पर एमपीईबी का
भ्रष्टाचार
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। नगर में चल रहे फीडर
कार्यक्रम में भारी भ्रष्टाचार के साथ साथ लापरवाही दिखाई दे रही है। विगत कुछ
दिनों से पुराने वायर बदलकर नये वायर और मीटर लगाने का काम चालू है। पिछली बार जो
वायर लगाये गये थे, वे रिलायंस कंपनी के तो थे ही साथ ही साथ आईएसआई द्वारा सत्यापित भी थे, जिसके चलते सभी निश्चिंत थे, किंतु इस बार जो वायर लगाये जा रहे हैं, वह न तो किसी नामी कंपनी के है न ही
आईएसआई द्वारा सत्यापित। मीटरों को बदलने की प्रकिया में जो मीटर लगाये जा रहे हैं, उनका फाइवर भी घटिया से घटिया क्वालिटी
का उपयोग किया गया है। मीटर के साथ ही अर्थिंग का कार्य कर रहे कर्मचारी सही तरीके
से अर्थिंग नहीं लगा पा रहे हैं। न तो गड्ढा कर नमक, कोयला, रेत का उपयोग हो रहा है और न ही किसी
अन्य चीज का। एक प्रकार से बला टालने के लिए एमपीईबी यह कार्य कर रही है। इस पूरे
सिस्टम में सबसे ज्यादा हैरतअंगेज बात यह है कि जो कर्मचारी मीटर अर्थिंग का कार्य
कर रहे हैं, वे अपने कार्य में निपुर्ण है हीं नही अर्थात अनुभविहीन लोगों से काम
लिया जा रहा है। वायरों की लाईन जितनी चाहे उतनी लंबी खींची गई है, जिसके चलते पूरे वायर झूल रहे हैं और
आगामी बारिश के हवा- धूल में 100 प्रतिशत सड़क पर बिछने से इसे कोई नहीं
रोक सकता। आखिर किस पैमाने के अंतर्गत इन ठेकेदारों से कार्य करवाया जा रहा है, इसका जवाब विद्युत मंडल के सक्षम
अधिकारी मिश्रा और मंडापे को देना ही होगा। कहीं इस पूरे काम में इनके द्वारा भी
कोई गोलमाल तो नहीं किया जा रहा..?
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