शनिवार, 8 जनवरी 2011

अब पासपोर्ट हासिल करना होगा आसान

अब पासपोर्ट हासिल करना होगा आसान
नई दिल्ली (ब्यूरो)। पासपोर्ट के लिए आम जनों को होने वाली दुश्वारियों में कुछ कमी होने की उम्मीद जताई जा रही है। पासपोर्ट जारी करने के लिए देशभर में तीन चरणों में 77 पासपोर्ट सेवा केन्द्र और 14 मिनी पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जाएंगे। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने यहां संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई योजना से पासपोर्ट हासिल करना आसान हो जाएगा, क्योंकि इनसे देशभर में पासपोर्ट काउंटरों की संख्या तीन गुनी बढ़कर 1250 तक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने के लिए जगह की पहचान चल रही है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल देशभर में 37 पासपोर्ट कार्यालय हैं और पांच करोड़ लोगों के पास पासपोर्ट हैं। अब हर साल 50 लाख पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नए पासपोर्ट सेवा केन्द्र में नवीनतम तकनीक की मदद से प्राइवेट सेक्टर और सरकार की भागीदारी होगी। उन्होंने बताया कि 2009 में एक करोड़ दस लाख भारतीय विदेश गए, जबकि 2000 में 44 लाख भारतीय विदेश गए थे। इन भारतीयों का विदेश दौरा आसान बनाने के लिए सरकार ने पासपोर्ट सेवा को अधिक सुलभ बनाने की योजनाओं पर काम शुरू किया है।

पारदर्शिता के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव के प्रयास जारी: प्रधानमंत्री

पारदर्शिता के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव के प्रयास जारी: प्रधानमंत्री
नई दिल्ली (ब्यूरो)। नवमें प्रवासी भारतीय प्रवासी सम्मेलन में विभिन्न घोटालों को लेकर सरकार की आलोचना की पृष्ठभूमि में प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता तथा निगरानी सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव लाने के प्रयास जारी हैं।
तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन में दुनिया भर से आए करीब 1,500 अप्रवासियों और भारत वंशियों को संबोधित कर रहे सिंह ने कहा कि हम इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं कि चरणबद्ध तरीके से बदलाव कैसे लाया जाए ताकि हमारी प्रशासनिक प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शी प्रक्रियाएं तथा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

भारत और फ्रांस ने सड़क परिवहन और राजमार्ग के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए

भारत और फ्रांस ने सड़क परिवहन और राजमार्ग के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय सड़क कांग्रेस और फ्रांस के परिस्थितिकीए ऊर्जाए टिकाऊ विकास और समुद्र मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और सड़क नीति, निर्माणए रख-रखाव और सड़क परिवहन के क्षेत्र में तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग को प्रात्साहित करने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए है। कमल नाथ की पेरिस यात्रा के दौरान बुधवार को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने के समय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमल नाथ और फ्रांस की परिस्थितिकी, टिकाऊ विकास, परिवहन और आवास मंत्री सूश्री नथाली कोसक्यिूको मोरीजट भी उपस्थिति थी।
सहमति पत्र से पूलों और सुरंगों सहित राजमार्गों र्की योजना, डिजाइन, निर्माण, संचालन, रख-रखाव और वित्त पोषण के क्षेत्र में दोनों देशों के राजमार्ग विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह सड़क प्रशासन और प्रबंध नीतियों, उपकरण, सामग्री, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और पर्यावरण से संबंधित मामलों पर विशलेषण और विचारों के आदान-प्रदान का मंच भी उपलब्ध कराएगा।

कमलनाथ ने बांटे सड़क सुरक्षा ईनाम

सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन


नई दिल्ली (ब्यूरो)। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने सभी हितधारकों से सड़कों को सुरक्षित बनाने और देश भर में टिकाऊ सड़क परिवहन प्रणाली विकसित करने के सरकार के प्रयास में हाथ बंटाने का आग्रह किया है। आज यहां 22वें सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन समारोह के अवसर पर श्री कमलनाथ ने कहा कि यह न सिर्फ वर्ष 2011 के लिए हमारी सभी सड़क सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए योजना बनाने और उनकी समीक्षा करने का समय है बल्कि नए दशक के लिए भी योजना बनाने का समय है जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई का दशक कहा है जो बिलकुल उचित है। 22वां सड़क सुरक्षा सप्ताह देश भर में 1 जनवरी से 7 जनवरी, 2011 के दौरान मनाया गया।
देश में परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचे तथा सेवाओं की जबरदस्त वृद्धि की चुनौती के बारे में कमल नाथ ने कहा कि मंत्रालय ने वाहनों के लिए नियमों, उत्सर्जन नियमों, वाहनों के इस्तेमाल से प्रदूषण के नियंत्रण के नियमों में सामंजस्य बिठाने के संबंध में प्रयास किए हैं। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बस/ट्रक बॉडी बनाने के लिए बस/ट्रक बॉडी संहिता तैयार करने, प्रमाणपत्र केंद्रों की स्थापनाए ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूलों के साथ-साथ कई अन्य उपाय भी किए गए।
इस अवसर पर श्री नाथ ने वर्ष 2007 - 08 और 2008 - 09 के लिए प्रथम और दूसरे स्थान पर रहने वाले विजेताओं को ट्राफी भी प्रदान की। 2007 - 08 के विजेता हरियाणा राज्य परिवहन, हिमाचल सड़क परिवहन निगम और बंग्लूरू महानगर परिवहन निगम रहे। 2008 - 09 के लिए पंजाब राज्य बस स्टैंड प्रबंध कंपनी लिमिटेड, हिमाचल सड़क परिवहन निगम और राज्य परिवहन पंजाब को विजेता घोषित किया गया।

मंत्री मण्डल विस्तार 17 को

ज्योतिरादित्य, अरूण यादव की हो सकती है पदोन्नति

एक दूसरे के पर कतरने में लगे मंत्री

प्रणव, चिदम्बरम और मोईली कृष्णा आमने सामने

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह 17 जनवरी को अपने पत्ते फेंट सकते हैं। केंद्रीय मंत्रीमण्डल के बहुप्रतिक्षित फेरबदल में अनेक मंत्रियों का वजन कम तो कुछ युवाओं को महत्वपूर्ण जवाबदारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव की पदोन्नति की संभावनाएं प्रबल हैं। नीरा राड़िया के टेप कांड में नाम आने के बाद एक केंद्रीय मंत्री पर गाज गिरने की अटकलें भी लगाई जा रहीं हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि मंत्रीमण्डल के संभावित नामों और उनके विभागों के बारे में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी से चर्चा कर ली है। उधर युवा महासचिव राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप मंत्रीमण्डल में युवा कांधों पर अधिक जवाबदारी देने का प्रयास प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। पीएमओ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए कि अगर किसी कारणवश 17 को मंत्रीमण्डल में फेरबदल नहीं हो पाता है तो यह शनिवार 22 जनवरी को होगा।

मंत्रीमण्डल में फेरबदल की संभावनाओं की अटकलों के साथ ही मौजूदा मंत्रियों द्वारा एक दूसरे से ‘‘हिसाब किताब‘‘ चुकता करने की कवायद भी की जा रही है। कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के छींटे प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के दरबार तक पहुंच रहे हैं। एक दूसरे को निपटाने की मुहिम से कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी खासी खफा बताई जा रही हैं।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम के बीच अनबन अब सड़कों पर आ गई है। मंहगाई पर चिदम्बरम के हालिया बयान को प्रणव को उस बात का जवाब माना जा रहा है जिसमें आशंका व्यक्त की गई थी कि गृह मंत्रालय के कामकाज पर उठती उंगलियों के पीछे प्रणव मुखर्जी का हाथ है।

स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद से खफा कुछ मंत्रियों द्वारा उनकी कारगुजारियों के चिट्ठे सोनिया गांधी तक पहुंचा दिए हैं। उधर भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के खिलाफ मीडिया में बने माहौल, नीरा राडिया प्रकरण में 15 फीसदी कमीशन के आरोप और स्वर्णिम चतुर्भुज के उत्तर दक्षिण गलियारे के विवाद के चलते उन्हें खुद प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी को सफाई भी देनी पड़ी थी।

इसी तरह कर्नाटक की राजनैतिक फिजां में विदेश मंत्री एम.एस.कृष्णा और कानून मंत्री वीरप्पा मोईली के बीच चल रहे विवाद को वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा हवा दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि आनंद शर्मा वाणिज्य विभाग के बजाए अपने पुराने पसंदीदा विदेश मंत्रालय को पाना चाह रहे हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि आनंद शर्मा की शह पर फारेन मिनिस्ट्री के अधिकारी पीएमओ को ही गलत जानकारियां भेज रहे हैं ताकि कृष्णा की स्थिति उनके सामने कमजोर की जा सके।

इसके अलावा मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को संचार मंत्रालय का प्रभार मिलना अनेक मंत्रियों की आंखों में खटक रहा है। भारी उद्योग मंत्री विलासराव देशमुख, सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सी.पी.जोशी, वी.नारायणसामी, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायस्वाल, अल्पसंख्यक मंत्री सलमान खुर्शीद, तेल मंत्री मुरली देवड़ा, उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे आदि के कारनामों पर भी सोनिया गांधी गौर फरमा सकती हैं।

सोनिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के दो युवा क्षत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव सोनिया और राहुल की नजरों मे उभरकर सामने आए हैं। सूत्रों ने संकेत दिए कि इन दोनों में से किसी एक को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है, सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर दोनों ने इस जवाबदारी के लिए मना किया तो इन दोनों की पदोन्न्ति तय है।

कृष्णा ने दी सफाई
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा को मंत्री मण्डल से हटाने की अटकलें और अफवाहें इस कदर फैल चुकी हैं कि उनको इस मामले में सफाई देना पड़ा। उन्होंने खुद को विदेश मंत्री पद से हटाए जाने से जुड़ी अटकलों को शुक्रवार को खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बारे में फैसला लेना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। विदेश मंत्रालय से भी बड़ी जिम्मेदारी सम्भालने के सवाल पर कृष्णा ने कहा कि अटकलें मीडिया के कुछ भद्रजनों की हैं। आप अटकलें लगाते रहें और हम उसके बारे में पढ़ते और देखते रहें।

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

जयराम रमेश का खुलासा

अक्षरधाम को नहीं मिली थी पर्यावरण मंजूरी
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राजग के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी द्वारा देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली से बहने वाली यमुना के कनारे जिस अक्षरधाम मंदिर को स्थापित करवाने में महती भूमिका निभाई थी, उस मंदिर ने पर्यावरण विभाग की अनुमति ही नहीं ली थी। जब देश की राजधानी में पर्यावरण महकमे का यह आलम है तो शेष भारत में पर्यावरण की उड़ती धज्जियों का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में यमुना नदी के किनारे बने अक्षरधाम मंदिर को न तो पर्यावरण मंजूरी मिली थी और न ही मंदिर निर्माण करने वालों ने इसके लिए कभी आवेदन किया था। लेकिन मंत्री ने स्वीकार किया कि इस बारे में अब कुछ भी नहीं किया जा सकता।
यमुना नदी के किनारे 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वर्ष 2005 में बनकर तैयार हुए स्वामीनारायण सम्प्रदाय के इस भव्य मंदिर के निर्माण के बारे में रमेश ने कहा कि अक्षरधाम मंदिर का निर्माण करने वालों ने पर्यावरण मंजूरी हासिल करने के लिए आवेदन तक नहीं किया। बिना पर्यावरण मंजूरी के इस मंदिर का निर्माण यमुना नदी के तट पर हुआ।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, कि पर्यावरण मंत्रालय नदी नियमन क्षेत्र संबंधी अधिसूचना जारी करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है ताकि जिस तरह यमुना नदी के किनारे विनाशकारी निर्माण हुआ है, वैसा भविष्य में नहीं हो। यह पूछने पर कि क्या पर्यावरण नियमों का खुले तौर पर उल्लंघन कर अक्षरधाम मंदिर का निर्माण हुआ है, रमेश ने कहा कि निर्माण तो हो चुका है।  पर्यावरण मंत्रालय मंदिर के खिलाफ कोई कार्रवाई के बारे में विचार कर रहा है के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि हम अक्षरधाम मंदिर परिसर को नहीं गिरा सकते। हमें यमुना नदी के बाकी तटीय क्षेत्र को बचाना होगा।

संघ को बदनाम करने को लीक की जा रही स्वीकारोक्ति

संघ को बदनाम करने को लीक की जा रही स्वीकारोक्ति
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सीबीआई पर शुक्रवार को आरोप लगाया कि वह उसे बदनाम करने के लिए आतंकी घटनाओं में स्वामी असीमानंद की स्वीकारोक्तियों को लीक कर रही है। संघ के वरिष्ठ नेता राम माधव ने यहां कहा कि इन लीक किए गए दस्तावेजों से इस बात की भी पुष्टि होती है कि सीबीआई की रुचि मामलों की जांच से कहीं अधिक कुछ संगठनों और व्यक्तियों की छवि खराब करने में है।
उन्होंने कहा कि लीक किए गए दस्तावेजों से यह भी साबित होता है कि अपराध-स्वीकारोक्तियां संभवतः दबाव में ली गई हैं। लीक किए दस्तावेजों के बारे में माधव ने दावा किया कि ये सभी अंतरविरोधी हैं और कोई विश्वसनीय सुबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सीबीआई ने एक बार फिर अपनी इस बात को साबित कर दिया है कि वह कांग्रेस ब्यूरो आफ इंवेस्टीगेशन है।

भाजपा के झंडा फहराने पर बोले फारूख

भाजपा तनाव बढ़ाना चाहती है: फारूख
नई दिल्ली (ब्यूरो)। केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्री और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराने के भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम की कड़ी आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि मुख्य विपक्षी दल के इस करतब से पिछले कुछ दिनों से शांत चल रहे इस राज्य में फिर से तनाव पैदा हो जाएगा। हरित इमारतों पर राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान अब्दुल्ला ने कहा कि झंडा फहराने से भाजपा किस प्रकार की एकता और अखंडता लाना चाहते हैं। इससे एकता की बजाए राज्य में तनाव फैलेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने का एलान किया है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से राज्य में शांति की स्थिति बिगड़ सकती है। इससे पहलेए जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी भाजपा की युवा इकाई के इस कार्यक्रम की निंदा करते हुए कहा था कि इससे राज्य में हिंसा भड़क सकती है।

दिल्‍ली में ठंड का प्रकोप

राजधानी में चल रही है हाड़ गलाने वाली हवाएं
नई दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्लीवासियों को शुक्रवार को भी कड़ाके की सर्दी से कोई राहत नहीं मिली और आज फिर उनकी सुबह ठिठुरन भरी सर्दी में हुई। शहर में न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि अभी भी सामान्य तापमान से तीन डिग्री कम है और कल के न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री से एक डिग्री सेल्सियस कम है। ठंड में पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों से आने वाली हवाओं ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
लुढ़कते पारे और सर्द हवाओं के कारण दिल्लीवासियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक ठंड के कारण राजधानी में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग की माने तो ठंड से अभी लोगों को बहुत राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। कल न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस के आसपास और अधिकतम 15 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की उम्मीद है।
आज सुबह दिल्लीवासियों को कोहरे से राहत जरूर मिली। दिल्ली में पिछले सप्ताह से कड़ाके की ठंड पड़ रही है और पिछले कई दिनों से अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे ठहरा हुआ है हालांकि कल का अधिकतम तापमान 14.5 डिग्री दर्ज किया गया था जो कि अभी भी सामान्य से छह डिग्री नीचे है। गौरतलब है कि अभी तक का सबसे ठंडा दिन मंगलवार रहा जब न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था।
अर्जुन की राह पर दिग्विजय

(लिमटी खरे)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दो ठाकुरों में क्या समानता है? दोनों ही क्षत्रियों को उपरवाले ने कुशाग्र बुद्धि का धनी बनाया है। इस फेहरिस्त में अव्वल हैं विन्ध्य के कुंवर अर्जुन सिंह तो दूसरे नंबर पर हैं राघोगढ़ के राजा दिग्विजय सिंह। बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों में अर्जुन सिंह का डंका कांग्रेस में बजता रहा है। वे कांग्रेस के लिए चाणक्य और ट्रबल शूटर की भूमिका में रहे हैं। मामला चाहे पंजाब की समस्या का हो या फिर केंद्र में सरकार बनाने का, हर मामले में अर्जुन सिंह की चालों का लोहा मानते रहे हैं राजनेता।

इक्कसवीं शताब्दी के पहले दशक के उत्तरार्ध में कुंवर अर्जुन सिंह की ढलती उम्र और उनकी ढीली होती पकड़ के कारण उनके ही पैदा किए और सिखाए शिष्यों ने सिंह को हाशिए पर ढकेलने के सारे जतन कर डाले, और इसमें वे काफी हद तक कामयाब भी हुए। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के पहले कार्यकाल में मानव संसाधन और विकास जैसा महत्वपूर्ण विभाग संभालने वाले सिंह को दूसरी पारी में दूध में से मख्खी की तरह निकालकर अलग कर दिया गया। इसके बाद अर्जुन सिंह के आवास में खामोशी ने अपना डेरा डाल दिया।

संप्रग की दूसरी पारी में जैसे जैसे घपले और घोटालों की गूंज और उसकी अनुगूंज तेज हुई तब कांग्रेस के कुशाग्र बुद्धि के धनी प्रबंधकों का ध्यान अर्जुन सिंह की खामोशी की ओर गया। जहर बुझे तीर चलाने में उस्ताद रहे अर्जुन सिंह की खामोशी काफी कुछ कह गई। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मनमोहन सिंह पर एकाएक घपले घोटालों के वार के पीछे कहीं न कहीं यह खामोशी भी नजर आ रही है।

देश के हृदय प्रदेश के राजनैतिक तालाब से उपजे कांग्रेस के दोनांे ही क्षत्रपों ने अपने अपने हिसाब से राजनीति की धार पैनी की है। अर्जुन सिंह की खासियत यह रही है कि उनके वक्त उनके हर बयान के साथ समूची कांग्रेस खड़ी दिखाई देती थी, किन्तु दिग्विजय सिंह के साथ एसा होता नहीं दिख रहा है। अपने बयानो के बाद दिग्विजय सिंह अकेले ही नजर आ रहे हैं। अपनी बात कहने या सफाई देने के लिए भी दिग्गी राजा द्वारा ना तो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय 24 अकबर रोड़ और ना ही मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय का उपयोग किया जा रहा है। पत्रकारवार्ता में मीडिया में इस तरह के प्रश्न उठ ही गए कि आखिर क्या वजह है कि दिग्विजय सिंह अपनी बात कहने के लिए पार्टी का प्लेटफार्म उपयोग नहीं कर पा रहे हैं?

वैसे दिग्विजय सिंह का बतौर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दस साल का रिकार्ड देखा जाए तो वे जुबान के बड़े ही पक्के समझे जाते रहे हैं। यही कारण है कि 2003 में विधानसभा में बुरी तरह मात खाने के बाद उन्होंने दस साल तक सक्रिय राजनीति से परहेज का अपना कौल अब तक निभाया है। पता नहीं कैसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बनने के बाद वे लगातार कैसे विवादस्पद बयान देते और फिर उससे पलटते रहे।

करकरे से चर्चा के मुद्दे को ही लिया जाए, तो पहले बकौल दिग्विजय, करकरे ने उन्हें फोन किया था, अब वे काल रिकार्ड पेश करते वक्त फरमा रहे हैं कि यह काल उन्होंने यानी दिग्विजय सिंह ने लगाया था। आश्चर्य तो तब होता है जब उनका फोन एटीएस के मुंबई स्थित मुख्यालय में शाम पांच बजकर 44 मिनिट पर पहुंचता है, वह भी इंटरनेट पर एटीएस के पीबीएक्स नंबर पर। काल रिकार्ड बताते हैं कि इस नंबर पर 381 सेकण्ड बात हुई है।

सवाल यह उठता है कि जब दोपहर को ही मुंबई में ताज होटल पर आतंकवादियों ने कब्जा जमा लिया था, तब क्या एटीएस चीफ करकरे के पास आतंकियों से निपटने रणनीति बनने से इतर इतना समय था कि वे कांग्रेस महासचिव के साथ खुद को मिलने वाली धमकियों का दुखड़ा रोएं। इसके अलावा दिग्विजय सिंह खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वे करकरे से कभी मिले नहीं थे, तब एसी स्थिति में क्या करकरे पहली ही बातचीत में दिग्गी राजा से मन की बात कह गए होंगे?

पहले काल रिकार्ड नहीं मिलने की बात करने वाले सिंह ने जादू की छड़ी से रिकार्ड भी तलब कर लिया। इसके बाद उन्होंने एनसीपी कोटे के महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर.आर.पाटिल से माफी की मांग कर डाली है। एनसीपी और कांग्रेस के बीच इस मांग का क्या असर होगा यह तो वे ही जाने पर सूबे में दिग्विजय सिंह की दखल को स्थानीय क्षत्रप अलग नजर से अवश्य ही देखेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू के इस दावे में दम लगता है जिसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेस ने दिग्विजय को इस मिशन पर लगाया है जिसका मकसद लोगों का ध्यान कामन वेल्थ और टू जी घोटालों से भटकाना है। भले ही कांग्रेस ने इस मिशन पर उन्हें लगाया हो, पर एक बात तो है कि दिग्गी राजा के हिन्दू आतंकवादियों वाले बयान ने उन्हें मुस्लिम समाज में हीरो अवश्य ही बना दिया है। आज आवश्यक्ता इस बात की है कि कोई भी राजनेता इस मामले पर बहुत ही सोच समझकर बयान जारी करे, क्योंकि यह मामला 
आम नहीं वरन् भारत गणराज्य की अस्मिता के साथ जुड़ा हुआ है।

उल्लेखनीय होगा कि इसी आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। महाराष्ट्र में सियासत करने वाले अब्दुल रहमान अंतुले ने भी इस मामले में विवादस्पद बयान दिया था, पार्टी को अंतुले से भी किनारा ही करना पड़ा था।

बहरहाल कांग्रेस के ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के पिछले कुछ सालों के कदम ताल को देखकर लगने लगा है मानो वे अपने गुरू कुंवर अर्जुन सिंह के पदचिन्हों पर से धूल हटाकर उनका अनुसरण करना चाह रहे हों, किन्तु अर्जुन सिंह की बात निराली ही थी। वे एक कदम चलते थे तो बीस कदम आगे की सोच लेते थे। भोपाल गैस कांड में एंडरसन को भारत से भगाने की बात को छोड़कर अर्जुन सिंह पर कोई और आरोप एसा नहीं है जिसमें उन्हें देश की अस्मिता के साथ जरा भी खिलवाड़ करने का प्रयास किया हो। रही बात दिग्विजय सिंह की तो अपने आप को स्थापित करने और अपनी कही बात को सच साबित करने के चक्कर में उनके द्वारा जो चालें चलीं जा रहीं हैं, वे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कही जा सकती हैं।

दरसअल यक्ष प्रश्न तो यह है कि जब 26 नवंबर 2008 को राजा दिग्विजय सिंह और स्व.हेमंत करकरे के बीच फोन पर कथित तौर पर बातचीत हुई उसके बाद राजा दिग्विजय सिंह ने यह बात दो सालों तक दबाकर क्यों रखी? हो सकता है दिग्विजय सिंह यह कह दें कि उसके उपरांत उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब के प्रोग्राम में यह बात कही थी, किन्तु उसके बाद आज जिस वजनदारी से वे यह बात कह रहे हैं यही बात दो साल के अर्से में चिंघाड़ चिंघाड़ कर उन्होंने क्यों नहीं कही। कारण चाहे जो भी हो पर कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह की इस चाल में कहीं न कहीं षणयंत्र की बू अवश्य ही आ रही है।

यूपी में बतोर सीएम प्रोजेक्ट हो सकतीं हैं उमा

उमा के सहारे यूपी की वेतरणी पार करना चाहते हैं आड़वाण 

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पीएम इन वेटिंग रहे लाल कृष्ण आड़वाणी के मन में अभी भी सात रेसकोर्स रोड़ (भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) में जाने की अभिलाषाएं जोर मार रही हैं। आड़वाणी अगले आम चुनावों के पहले भारतीय जनता पार्टी को हर सूबे में चाक चोबंद करना चाह रहे हैं, ताकि भाजपा का जनाधार बढ़ाने के साथ ही साथ संसद में भाजपा सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सके। आड़वाणी की अभिलाषा है कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को उत्तर प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया जाए ताकि आबादी में देश के सबसे बड़े सूबे और अब तक सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले राज्य में भाजपा की खोई साख को वापस लाया जा सके।
भाजपा में एल.के.आड़वाणी ही अकेले उमा की वापसी के हिमायती नजर आ रहे हैं। उमा की वापसी की खबरों से भाजपा अनेक धड़ों मंे बंट गई है। आड़वाणी खेमे के अन्य सदस्यों के साथ ही साथ नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेतली, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, सुरेश सोनी जैसे धुरंधर भी उमा की घर वापसी के घोर विरोधी नजर आ रहे हैं।
आड़वाणी के करीबी सूत्रों का कहना है कि आड़वाणी मानते हैं कि भाजपा से जा चुके कल्याण सिंह की जगह भरने के लिए उमा भारती ही सबसे उपयुक्त हांेगी। माना जा रहा है कि उमा के वापस आकर यूपी की कमान संभालते ही कल्याण पर भी वापसी का दबाव बढ़ सकता है। उधर उमा के भाजपा से मोहभंग की खबरें भी जोर पकड़ने लगी हैं।
आड़वाणी मण्डली का मानना है कि अगर यूपी में भाजपा को पुर्नजीवित करना है तो सूबे में उमा भारती जैसा ओबीसी और हिन्दुत्ववादी चेहरा मैदान में उतारना ही होगा। यूपी में बसपा सुप्रीमो मायावती की तोड़ के तौर पर भाजपा के पास उमा भारती ही सबसे उपयुक्त हैं। वैसे भी उमा भारती द्वारा बावरी मस्जिद विध्वंस में महती भूमिका निभाई थी, जिसके चलते आज भी उत्तर प्रदेश में उनके प्रशंसकों की लंबी फेहरिस्त मौजूद है।
गौरतलब होगा कि एल.के.आड़वाणी के मन में भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री बनने की उत्कंठ इच्छा हिलोरे मार रही है, यही कारण है कि वे तेज तर्रार साध्वी उमा भारती को भाजपा में वापस लाने का ख्वाब देख रहे हैं, साथ ही वे चाहते हैं कि उमा भारती को यूपी के अगले चुनावों के पहले बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करवा दिया जाए।

यूपी में रास्ता नहीं आसान
भाजपा के उमरदराज नेता एल.के.आड़वाणी भले ही उमा भारती को उत्तर प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री प्रस्तुत कर चुनाव लड़वाना चाह रहे हों, किन्तु भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई में उमा भारती का नाम आते ही भूचाल मचा हुआ है। राज्य के नेता किसी परदेशी नेतृत्व को अपने उपर थोपे जाने के खिलाफ लामबंद होते जा रहे हैं। उमा के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि वे मायावती के मुकाबले पिछड़े वर्ग की भीड़ को आकर्षित करने में सफल होंगी,, किन्तु उनके विरोधियों का तर्क है कि पिछले दो सालों में उमा भारती के क्रिया कलाप देखकर कहा जा सकता है कि वे चुका हुआ बम ही साबित होने वाली हैं।

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

पीएम की सोनिया को दो टूक: कहा सॉरी मदाम

पीएम की सोनिया को दो टूक: कहा सॉरी मदाम
नई दिल्ली (ब्यूरो)। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के आग्रह को ठुकरा दिया है। सोनिया ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) में न्यूनतम मजदूरी के मसले पर पेशकश की थी।
पिछले साल 11 नवंबर को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सोनिया गांधी  ने कहा था कि मनरेगा में मजूदरी भुगतान के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 के नियमों का अनुसरण किया जाए। उल्लेखनीय होगा कि देश के लगभग डेढ़ दर्जन राज्यों में मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी इन राज्यों की तय न्यूनतम मजदूरी से काफी कम है।
उधर प्रधानमंत्री द्वारा पिछले साल के आखिरी दिन श्रीमति सोनिया गांधी को लिखे पत्र में साफ किया है कि मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान को न्यूनतम मजदूरी कानून से प्रथक रखते हुए कृषि आधारित मूल्य सूचकांक पर आधरित रखने का फैसला लिया गया है, और इसका भुगतान इसी के तहत जारी रहेगा।
माना जा रहा है कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री से इस तरह के दो टूक उत्तर की आशा कतई नहीं होगी। वैसे भी सर्वोच्च न्यायालय अनेक बार इस मामले पर टिप्पणी कर चुका है कि किसी भी निजी सा सरकारी संस्था द्वारा न्यूनतम मजदूरी भुगतान कानून का पालन करना अनिवार्य होगा, अन्यथा यह अनुच्छेद 23 का सीधा उल्लंघन होगा।

सम्मानजनक, व्यावहारिक समाधान का पक्षधर है केन्द्र

तेलंगाना के सम्मानजनक, व्यावहारिक समाधान का पक्षधर है केन्द्र: चिदंबरम
नई दिल्ली (ब्यूरो)। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा कि केन्द्र सरकार पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के मुद्दे का  सम्मानजनक और व्यावहारिक समाधान चाहती है। आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक में चिदंबरम ने उन्हें तेलंगाना मुद्दे पर श्रीकृष्णा समिति की रपट की प्रतियां सौंपी। चिदंबरम ने इन नेताओं से अपील की कि वे सिफारिशों को ध्यान से पढें और निष्पक्ष रूप से अपनी राय दें।
उन्होंने कहा कि आप ने ध्यान दिया होगा कि मैंने हमेशा से आगे बढने की बात की है । सम्मानजनक, न्यायोचित और व्यावहारिक समाधान हासिल करने के सरकार के इरादे को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि समाधान ऐसा हो जो सभी संबद्ध पक्षों को मंजूर हो। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेडडी, कांग्रेस नेता के संबासिवा राव, उŸाम कुमार रेडडी, माकपा राज्य सचिव डी वी राघावुलू और पार्टी नेता जे रंगाए पीआरपी नेता सी रामचंद्रैया, अकबरूददीन ओवैसी, एमआईएम के सैयद अहमद पाशा कादरी, भाकपा के के नारायणा और जी मालेश ने बैठक में हिस्सा लिया।
चिदंबरम ने विश्वास जताया कि इस रपट से तेलंगाना मुद्दे पर परिपक्व चर्चा हो सकेगी। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे सिफारिशों को ध्यान से निष्पक्ष ढंग से पढें। उन्होंने टीआरएसए तेदेपा और भाजपा के बैठक का बहिष्कार करने के फैसले पर अफसोस व्यक्त किया।

प्रवासी भारतीयों को शीघ्र मताधिकार देने पर विचार

प्रवासी भारतीयों को शीघ्र मताधिकार देने पर विचार
नई दिल्ली (ब्यूरो)। केंद्र सरकार प्रवासी भारतीयों को शीघ्र मताधिकार देने की प्रक्रिया पर कार्य कर रही है। आज यहां आगामी प्रवासी भारतीय दिवस के बारे में संवाददाता सम्मेलन में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वयालार रवि ने कहा कि संसद ने प्रवासी भारतीयों को मताधिकार देने के बारे में विधेयक पास कर दिया है। इसके तहत 10 लाख अप्रवासी भारतीयों के लाभ दिया जाएगा। सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इनका एनरोलमेंट और वेरिफिकेशन है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग से इस संबंध में दो दौर की चर्चा के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और वोट देने की विधियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने आशा प्रकट की कि भारतीय पासपोर्ट धारक एक करोड़ प्रवासी भारतीय इस कानून से लाभान्वित होंगे।
दुनिया भर में रह रहे भारतवंशियों को आकर्षित करने और उनसे संपर्क बढ़ाने के मकसद से प्रवासी भारतीयों का सम्मेलन 7 से 9 जनवरी तक दिल्ली में संपन्न होगा। इस बार 51 देशों से 1500 प्रतिनिधि भाग लेंगे। अभी तक 1300 प्रतिनिधियों का नामांकन हो चुका है। इनमंे शीर्ष उद्योगपतियांे के अलावा अर्थशाóी और वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इस सालाना जलसे में इस बार का सबसे बड़ा प्रतिनिधि जत्था अमेरिका और मलयेशिया से पहंुच रहा है। सम्मेलन के मुख्य अतिथि न्यूजीलैंड के गवर्नर जनरल सर आनंद सत्यानंद होंगे। इस सम्मेलन की मुख्य थीम पूर्वाेŸार राज्यों में निवेश की संभावनाओं पर गौर करने के साथ-साथ युवा अप्रवासी भारतीय प्रतिभाओं को देश के विकास की प्रक्रिया में जोड़ने की कोशिश करना है। सम्मेलन के दौरान इन दोनों थीमों पर बाकायदा चर्चा सत्र का आयोजन किया जाएगा।

दस स्थानांे पर सीबीआई के छापे

खेल घोटाले में चौथी प्राथमिकी दर्ज

नई दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी से लंबी पूछताछ के बाद आज तड़के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 ठिकानों पर छापेमारी की और इस मामले में चौथी एफआईआर दर्ज की। इस नई प्राथमिकी में आयोजन समिति के महानिदेशक वी.के.वर्मा का नाम है जिनके घर जांच एजेंसी के छापे पहले ही पड़ चुके हैं।
गौरतलब है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाडी से पूछताछ करने के एक दिन बाद यह छापे मारे गए हैं। सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, चार कंपनियों को अधिक राशि का ठेका दिए जाने के सिलसिले में इस घोटाले से जुड़ी चौथी एफआईआर सीबीआई ने दर्ज की। इन ठेकों की कुल कीमत 600 करोड़ रूपये थी।
सूत्रों ने बताया कि आज सुबह सीबीआई ने छापा मारना शुरू किया और चार कंपनियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। ये कंपनियां इंटरनैशनल कंपनियों की भारतीय शाखाएं हैं। इन ठेके को विदेशी और भारतीय कंपनियों ने मिलकर पाया था। यद्यपि प्राथमिकी का ब्यौरा उपलब्ध नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आयोजन समिति के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता की जांच की जा सकती है। ज्यादा रकम पर दिए गए ये ठेके पहले ही आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की जांच में हैं।

मंहगाई के लिए सरकार पर ही बरसे चिदम्बरम

मंहगाई के लिए सरकार पर ही बरसे चिदम्बरम
नई दिल्ली (ब्यूरो)। पूर्व वित्त मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदंबरम ने बुधवार को महंगाई के मुद्दे पर यूपीए सरकार पर जबर्दस्त तरीके से निशाना साधा। उन्हांेने, आगामी केंद्रीय बजट की शुरुआत करने वाले विŸा मंत्री प्रणव मुखर्जी को इशारों ही इशारों में यह सुझाव भी दे डाला कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब टैक्स लगाने की जरूरत नहीं है। बढ़ती महंगाई के रूप में आम आदमी एक तरह से टैक्स ही अदा कर रहा है।
यहां एक कार्यक्रम में भाग लेने आए चिदंबरम ने पत्रकारों से कहा, निश्चित तौर पर महंगाई की दर, खासकर खाद्य उत्पादों की महंगाई की दर काफी ऊंची है। कीमतों में स्थिरता बनाए रखने का दायित्व हम पर यानी सरकार पर है। उन्हांेने कहा कि महंगाई दर में बढ़ोतरी से बुरा कोई टैक्स नहीं है। आपकी आमदनी का बड़ा हिस्सा तो महंगाई खा जाती है।
महंगाई रोकने में सरकार को परोक्ष रूप से नाकाम बताते हुए चिदंबरम ने कहा कि उन्हें पक्का विश्वास नहीं है कि खाद्य वस्तुओं की महंगाई की दर को नियंत्रित करने के लिए हमारे पास सभी तरह के उपाय हैं। हालांकिए उन्हांेने यह उम्मीद जरूरत जताई कि बाजार में डिमांड और सप्लाई का जो अंतर है कि वह ठीक हो जाएगा। काफी हद महंगाई नियंत्रण में आ जाएगी। सरकार अपने तरफ से इसको नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

तेल की कीमतें बढ़ाने के मूड में नहीं है केंद्र

तेल की कीमतें बढ़ाने के मूड में नहीं है केंद्र
नई दिल्ली (ब्यूरो)। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने अपनी बातों से पलटते हुए संकेत दिए कि सरकार फिलहाल डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने के मूड में नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में उन्हांेने कहा कि मैं भी इस बात को जानता हूं कि महंगाई की दर काफी ऊंचे स्तर पर चली गई है। हमें यह देखना है कि ऐसा कोई नीतिगत फैसला न किया जाएए जिससे महंगाई और बढ़ जाए। मौजूदा समय में हम सबका प्रयास है कि किसी भी तरह से महंगाई को कम किया जाए।
गौरतलब है कि मुरली देवड़ा ने दिसंबर के अंत में पुरजोर कोशिश की थी कि किसी तरह से उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह की बैठक हो जाए ताकि डीजल और रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी पर फैसला हो सके। मगर विŸा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह कहते हुए मंत्रियों की समूह की बैठक टाल दीए कि अभी इसके लिए सही वक्त नहीं है।
उधर तेल कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार अगर कुछ समय के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों, डीजल और रसोई गैस की कीमतें नहीं बढ़ाई गई तो सालाना घाटा 80 से 90 हजार करोड़ रुपये तक जा सकता है। अगर कीमतें बढ़ा दी गई तो घाटा 60 से 70 हजार करोड़ रुपये तक सिमट कर रह सकता है।

वामदलों का आरोप

तृणमूल और माओवादियों में गठजोड़
नई दिल्ली (ब्यूरो)। तेलगु देशम पार्टी और जनता दल सेक्यूलर, सहित वाम मोर्चा ने पश्चिम बंगाल में माओवादियों और तृणमूल कांग्रेस के बीच गठजोड़ का आरोप लगाते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम को एक ज्ञापन सौंपा है। सीपीआईएम, के नेता सीताराम यचुरी ने चिदंबरम को ज्ञापन सौंपने के बाद बताया कि वाम मोर्चा और टीडीपी व जेडी एस, के प्रतिनिधियों के साथ हम लोगों ने गृहमंत्री के साथ मुलाकात कर वहां तृणमूल कांग्रेस और माओवादियों के बीच के गठजोड़ के निर्विवाद सबूतों की तरफ उनका ध्यान खींचा है।
यचुरी ने कहा कि इस ज्ञापन में हमने उनके एक लोकसभा सदस्य द्वारा प्रकाशित किताब से जुटाए गए साक्ष्यों की जानकारी दी है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम घटना से पहले हुए विभिन्न बैठकों का जिक्र किया है। नंदीग्राम आंदोलन पर यचुरी ने कहा कि उस समय से उनका यह गठजोड तृणमूल कांग्रेस-माओवादी, अब तक जारी है और एक माओवादी नेता ने ग्राफिक की जानकारी देने के साथ ही भविष्य में काम करने की बात कही

एनसीसी को सशक्त बनाने की पहल

एनसीसी को सशक्त बनाने की पहल
नई दिल्ली (ब्यूरो)। केंद्र सरकार द्वारा शालेय और महाविद्यालय स्तर पर संचालित होने वाली राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) को सशक्त बनाने के लिए प्रयास आरंभ किए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा एनसीसी, में न केवल 50 नई बटालियन खड़ी करने की तैयारी की जा रही है। बल्कि एनसीसी प्रशिक्षण को अधिक रोजगार मूलक और सामयिक बनाने की कवायद भी कर रहा है।
एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरके कारवाल के मुताबिक इस प्रस्ताव पर सरकार की मंजूरी के बाद मुख्यालय की एकए सेना की दस तथा वायुसेना व नौसेना की एक यूनिट खड़ी की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अगले पांच सालों में एनसीसी कैडेटों में दो लाख की वृद्धि की जाएगी।
एनसीसी महानिदेशक के अनुसार रोजगार बाजार में एनसीसी कैडेट की बढ़ती मांग के मद्देनजर प्रशिक्षण कोर्स को अधिक सामयिक बनाने की भी कोशिश की जाएगी। साथ ही एनसीसी महानिदेशालय एडवेंचर और स्पोटर्स के अलावा अपने कैडेटों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव दिलाने के लिए यूथ एक्सचेंज कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने का प्रयास भी कर रही है।

उत्पादक राज्य को मिलेगी पचास फीसदी हिस्सेदारी

नई बिजली आवंटन नीति जारी

नई दिल्ली (ब्यूरो)। सरकारी स्वामित्व वाले नये ताप बिजली संयंत्रों द्वारा पैदा की जाने वाली बिजली का 50 फीसदी हिस्सा उस राज्य को मिलेगा जहां वह संयंत्र स्थित है। सरकार ने इस आशय की एक नयी नीति को गुरुवार को मंजूरी दी।
कैबिनेट की बैठक के बाद एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि 50 फीसदी बिजली उस राज्य को मिलेगी जहां बिजली संयंत्र है। 35 प्रतिशत बिजली क्षेत्र के अन्य हिस्सेदारों को मिलेगी। शेष 15 प्रतिशत बिजली केन्द्र सरकार के कब्जे में होगीए जिसका आवंटन नहीं किया गया है।
यह प्रस्ताव 14 परियोजनाओं से जुड़ा है। एनटीपीसी और अन्य केन्द्रीय उपक्रमों के ताप बिजली की ये परियोजनाएं 12वीं और 13वीं योजना के दौरान तैयार होंगी। नयी नीति से पहले बिजली आवंटन का गाडगिल फार्मूला अपनाया जाता थाए जिसके तहत दस प्रतिशत बिजली उस राज्य को मिलती थीए जहां संयंत्र है। संबद्ध हिस्सेदारों या राज्यों के लिए 75 प्रतिशत बिजली सुरक्षित रहती थी जबकि शेष केन्द्र के पास रहती थी।