मंगलवार, 1 जनवरी 2013

जनसंपर्क में दलाली चरम पर!



लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 34

जनसंपर्क में दलाली चरम पर!

(विनय डेविड)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जन जन तक पहुंचाने के लिए पाबंद मध्य प्रदेश के जनसंकर्प विभाग में दलाली की चर्चाएं अब आम होने लगी हैं। चर्चाएं हैं कि मध्य प्रदेश से इतर दिल्ली एवं अन्य प्रदेशों से प्रकाशित होने वाले ईद के चांद मानिंद अखबारों, पत्रिकाओं आदि को विज्ञापन दिलवाने की आड़ में कमीशन का गंदा खेल खेला जा रहा है। गंदा है पर धंधा है की तर्ज पर जनसंपर्क विभाग से सेवानिवृत हुए आला अफसरान ही इस काम को अंजाम देने में लगे हुए हैं।
दिल्ली से आए एक पत्रिका के प्रतिनिधि ने नाम और पहचान उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में सेवानिवृत अधिकारियों द्वारा बाहर की पत्रिकाओं और अखबारों को यह प्रलोभन दिया जा रहा है कि अगर वे उन सेवा निवृत अफसरों या उनके परिजनों को अपना मध्य प्रदेश प्रतिनिधि बना दें तो वे अफसर उनके लिए विज्ञापनों की झडी लगा सकते हैं।
उक्त प्रतिनिधि ने साई न्यूज को बताया कि अगर आपकी जान पहचान जनसंपर्क विभाग में नहीं है तो आपको जनसंपर्क से विज्ञापन लेने के लिए ना जाने कितने पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। उन्होने आगे कहा कि अगस्त सितम्बर माह में जनसंपर्क मंत्री की अनुशंसा को जनसंपर्क के विज्ञापन विभाग द्वारा कचरे की टोकरी में डाल दिया गया है, पर जहां कमीशन का खेल है वहां बिना जनसंपर्क मंत्री की अनुशंसा के ही विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं।
चर्चा तो यहां तक भी है कि दिल्ली में पदस्थ रहे एक चर्चित अधिकारी ने भी सेवानिवृति के उपरांत अपने दिल्ली के पुराने संपर्कों को जीवंत कर उन अखबारों और पत्रिकाओ जो यदा कदा ही प्रकाशित होते हैं को साधकर उनका अपने नाते रिश्तेदारों या परिचितों को उसका प्रतिनिधि बनाकर उनके लिए खासे विज्ञापन बटोर लिए गए हैं। तथा कुछ को अभी प्रलोभन इसी तरह का दिया गया है। इन चर्चाओं में सच्चाई कितनी है यह बात या तो सेवानिवृत अधिाकारी जाने या जनसंपर्क का विज्ञापन विभाग किन्तु कुछ लोगों द्वारा सूचना के अधिकार कानून में विज्ञापनों के बारे में पतासाजी करने का काम आरंभ किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि किसको, कितना अैर किसकी सिफारिश पर दिया गया है विज्ञापन!



रेप पर मौन चिदम्बरम, तिवारी आए प्रेस के सामने

सब्सीडी का सीधा हस्तांतरण 20 जिलों में

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। सरकार, विभिन्न कल्याण कार्यक्रमों के लाभार्थियों के खाते में सीधे नकदी हस्तांतरण की योजना आज से बीस जिलों में शुरू कर रही है। ग्यारह और जिलों में पहली फरवरी से और १२ जिलों में पहली मार्च से यह योजना लागू की जायेगी। वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम  ने कल नई दिल्ली में सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के साथ संवाददाता सम्मेलन में बताया कि शुरू में सात योजनाओं के लिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में डाली जायेगी।
उन्होंने बताया कि पहली जनवरी से सात योजनाओं की राशि लाभार्थियों के खातों में डाली जाएगी। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति, इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना, धनलक्ष्मी योजना तथा अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए परीक्षा तैयारी और मार्गदर्शन के वास्ते स्टाइपैंड राशि शामिल है।
एक प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी खातों में राशि जमा करने और निकालने की सुविधा होगी, चाहे वे खाते आधार कार्ड से जुड़े हों या नहीं। उन्होंने बताया कि पहले कुछ जि$लों में सुचारू रुप से लागू करने के बाद इस योजना को इसी वर्ष देश के अन्य भागों में भी लागू कर दिया जायेगा।  एक और प्रश्न के उत्तर में श्री चिदम्बरम ने स्पष्ट किया कि अनाज, खाद, डीजल और केरोसीन की सब्सिडी इस योजना में शामिल नहीं है। श्री मनीष तिवारी ने कहा कि इस योजना से लगभग दो लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा।
पहले चरण में ४३ जिलों को नामजद किया गया है। ये ४३ जिले १६ प्रदेशों में हैं और एक जनवरी २०१३ से लेकर १ मार्च २०१३ तक, जो इस कार्यक्रम का पहला चरण है, कोशिश यह है कि जो २६ स्कीमें निर्धारित की गई हैं जैसे-जैसे उनकी तिथि आती जाएगी, वैसे-वैसे उनका जो लाभ है वो बेनिफिशरीज तक पहुंचाया जाए। इस योजना का उद्देश्य नकद राशि के भुगतान में देरी और हेराफेरी पर रोक लगाना है।
ज्ञातव्य है कि आधी-अधूरी तैयारियों के बावजूद सरकार ने आज 1 जनवरी से देश के केवल 20 जिलों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम लॉन्च कर दिया है। पहले इसे 51 जिलों में इसे शुरू करने का प्लान था। स्कीम के पहले फेज़ में देश के 20 जिलों में 2 लाख लोगों के बैंक खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद 1 फरवरी से 11 और जिलों को इस स्कीम के दायरे में लाया जाएगा। बाकी के 12 जिले 1 मार्च से कवर किए जाएंगे।
उन्होंने आगे कहा, कि सभी 26 स्कीम रोलआउट के लिए तैयार हैं। 1 जनवरी को जिन सात स्कीम्स में भुगतान (सेलेक्टेड 20 जिलों के) करना बाकी है, डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर सिस्टम के जरिए वहां पेमेंट कर दिया जाएगा। इसके लिए यूआईडीएआई प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल होगा। 1 जनवरी से जिन सात स्कीम्स को भुगतान के तैयार किया गया है, उनमें एससी, एसटी और ओबीसी के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना, धनलक्ष्मी स्कीम और एससी-एसटी बेरोजगारों के लिए स्टाइपेंड शामिल हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों के पास आधार नंबर न होने पर भी उनके बैंक खातों में सब्सिडी भेज दी जाएगी। उन्होंने कहा, श्अगले कुछ दिनों या हफ्तों में हमारा मकसद 100 फीसदी आधार लाभार्थियों तक पहुंचना है।श् सरकार विदड्रॉल अरेंजमेंट को मजबूत बनाने के लिए बैंकिंग सिस्टम को भी तैयार कर रही है। चिदंबरम ने बताया कि इन 43 जिलों की 7,900 बैंक ब्रांचेज़ में ऑनसाइट एटीएम होंगे। बैंकों ने 20 लाख इंटर-ऑपरेबल माइक्रो-एटीएम के टेंडर भी मंगाए हैं। इनमें बायोमीट्रिक स्कैनिंग और आधार अथॉन्टिकेशन के लिए फसिलिटीज़ होंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि शुरुआत में इस स्कीम को चलाने में कुछ तकनीक दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन जो अधिकारी इसकी देख-रेख में लगे हुए हैं, वे धीरे-धीरे इन्हें दुरुस्त कर लेंगे।

रेल का खाना हुआ मंहगा!


रेल का खाना हुआ मंहगा!

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। भारतीय रेल भले ही यात्रियों को सुविधाएं मुहैया करवाने में असफल साबित रही हो पर जब बारी आती है वित्तीय प्रबंधन की तो सदा की ही तरह वह वित्त पोषण का रोना रोती रहती है। एक बार फिर महंगाई की मार झेल रहे लोगों को रेलवे ने नए साल पर झटका दिया है। रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों में ब्रेकफास्ट महंगा कर दिया गया है। ट्रेनों में बिकने वाले ब्रेकफास्ट आइटमों के रेट भी रिवाइज किए गए हैं। रेलवे बोर्ड की ओर से नई रेट लिस्ट जारी कर दी गई है। रेलवे बोर्ड ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है।
कई ट्रेनों में नई रेट लिस्ट के अनुसार ही पैसे लिए जा रहे हैं। हालांकि, रेलवे के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नई रेट लिस्ट धीरे-धीरे सर्कुलेट की जा रही है। आखिरी बार रेलवे ने 2006 में खाद्य पदार्थों के रेट बढ़ाए थे। 6 साल बाद फिर रेट में इजाफा किया गया है। याद हो कि दो महीने पहले रेलवे फूड प्लाजा पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों के रेट बढ़ाए गए थे। ऐसे में ब्रेकफास्ट आइटमों व जनता खाना पर रेट बढ़ जाने से यात्रियों पर बोझ बढ़ गया है। नई रेट लिस्ट के अनुसार, प्रत्येक आइटम पर 1 से 5 रुपए की वृद्धि की गई है। कॉफी का रेट 5 से बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया गया है।

नया साल, कहीं खुशी कहीं गम!


नया साल, कहीं खुशी कहीं गम!

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। दुनिया भर में लोगों ने गीत-संगीत, आतिशबाजी और पार्टियों के साथ नव वर्ष-२०१३ का स्वागत किया, लेकिन भारत में दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड की पीड़िता के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में नए साल के कार्यक्रमों में इस बार परम्परागत उत्साह नहीं देखा गया। सेना के तीनों अंगों, कुछ राज्य सरकारों और कई राजनीतिक दलों ने अपने नए साल के कार्यक्रम रद्द कर दिए। नई दिल्ली में क्लबों और होटलों में भी नए साल के कार्यक्रम या तो रद्द कर दिए गए या बहुत ही छोटे पैमाने पर आयोजित किए गए।
भारत गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने लोगों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में श्री मुखर्जी ने लोगों का आह्घ्वान किया कि देश में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार और उनके उत्थान के लिए कार्य करें। उन्होंने लोगों से यह भी अनुरोध किया कि उस मानसिकता को बदलने के तरीकों पर गौर करें जो दिल्ली में २३ वर्षीय छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष दो हजार तेरह महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होना चाहिए। श्री हामिद अंसारी ने अपने संदेश में कहा है  कि सभी लोगों को शांतिपूर्ण, सद्भावपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए।
न्यूजीलैंड में ऑकलैंड में आतिशबाजी के साथ नए साल का स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलिया में सिडनी तट पर १५ लाख से अधिक लोगों ने रंगीन रोशनियों और आतिशबाजी के साथ शहर में नए साल का यह सबसे बड़ा जश्न मनाया। चीन के पेइचिंग और शंघाई शहरों में भी आतिशबाज$ी हुईं। म्यामां की राजधानी यंगून में भी जोर-शोर से नया साल मनाया गया। दुबई और मॉस्को में लोगों ने सड़कों पर गीत-संगीत और जश्न के साथ नए साल का स्वागत किया।

रेप मामले में संजीदगी का दिखावा हुआ आरंभ


रेप मामले में संजीदगी का दिखावा हुआ आरंभ

(प्रदीप चोहान)

नई दिल्ली (साई)। राजधानी दिल्ली में २३ वर्षीया लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मद्देनजर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर बलात्कार से संबंधित कानून में परिवर्तन करने के मुद्दे पर उनके सुझाव मांग रहे है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि श्री शिंदे राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर अपने विचार न्यायाधीश जे. एस. वर्मा समिति को भेजने के लिए कहेंगे। इस समिति का गठन मौजूदा कानून की समीक्षा के लिए किया गया है ताकि बर्बर यौन शोषण मामले में शीघ्र न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा दी जा सके।
वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता के मामले में करीब एक हजार पृष्ठ के आरोप पत्र को अंतिम रूप दे दिया है। अदालत में बृहस्पतिवार को रिपोर्ट दर्ज की जायेगी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसे कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसमें तीस गवाहों की सूची है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह मामले में आरोपियों को मृत्युदंड देने की मांग करेगी।

डॉ.दीपक खरे विभागाध्यक्ष बने


डॉ.दीपक खरे विभागाध्यक्ष बने

(विशेष प्रतिनिधि)

रूड़की (साई)। आईआईटी रूड़की के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.दीपक खरे को संस्थान द्वारा जल संसाधन विपणन और प्रबंधन विभाग का विभाग प्रमुख बनाया है। मूलतः मध्य प्रदेश के दमोह जिला निवासी डॉ.दीपक खरे ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई गोविंद राम सक्सेनिया इंजीनियरिंग कालेज इंदौर से पूरी की है।
डॉ.खरे लंबे समय तक जीएसआईटीएस इंदौर में अध्यापन का कार्य करते रहे हैं। बाद में वे विश्व प्रसिद्ध रूड़की के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी में अध्यापन का कार्य कर रहे थे। सदा प्रसन्न चित्त रहने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. दीपक खरे ने 01 जनवरी को आईआईटी रूड़की में जल संसाधन विपणन और प्रबंधन विभाग के प्रमुख के बतौर कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

समीर वर्मा आकाशवाणी के समाचार संपादक बने


समीर वर्मा आकाशवाणी के समाचार संपादक बने

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी समीर वर्मा ने आकाशवाणी भोपाल में बतौर समाचार संपादक कामकाज संभाल लिया है। समीर वर्मा पूर्व में मण्डला में बतौर फील्ड पब्लिसिटी ऑफीसर कार्यरत थे। मूलतः पत्रकारिता पृष्ठभूमि वाले श्री वर्मा ने लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया। इसके उपरांत उन्होंने भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय में भारतीय सूचना सेवा की नौकरी ज्वाईन की। श्री वर्मा सूचना प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न अनुभागों में उन्हें सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन बखूबी कर चुके हैं।

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

चिदम्बरम को चुभने लगा है कमल!


चिदम्बरम को चुभने लगा है कमल!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम को अब कमल चुभने लगा है। एफडीआई के मसले पर नए नवेले संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ की बाजीगरी से चिदम्बरम चारों खाने चित्त गिर गए हैं। सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के रणनीतिकारों की नजरों में कमल नाथ का बढ़ता कद चिदम्बरम की आंखों में खटक रहा है। कमल नाथ का हर मोर्चे पर कुशल प्रबंधन वास्तव में चिदम्बरम के 7, रेसकोर्स रोड़ (भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को आशियाना बनाने के सपनों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (बतौर सांसद श्रीमति सोनिया गांधी को आवंटित सरकारी आवास) के विश्वस्त सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एफडीआई मामले में विपक्षी और संप्रग के घटक दलों को साधने में पलनिअप्पम चिदम्बरम पूरी तरह नाकामयाब रहे थे। वामदलों के विरोध ओर एफडीआई मामले में अमरीका के बढ़ते दबाव ने सोनिया गांधी का रक्त चाप बढ़ाया हुआ था। सोनिया गांधी ने चिदम्बरम की पूरी गोलाई इस मामले में नाप दी थी।
इसी बीच सोनिया गांधी के एक रणनीतिकार ने एफडीआई मामले में कमल नाथ को पाबंद करने का सुझाव दे मारा। कमल नाथ की काबिलियत से परिचित श्रीमति सोनिया गांधी ने बिना एक सेकन्ड की देर किए हुए कमल नाथ को एफडीआई मामले में सरकार के पक्ष में माहोल बनाने का निर्देश दे दिया। कमल नाथ के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि कमल नाथ ने इस काम के लिए सोनिया गांधी से फ्री हेण्ड की डिमांड की, पर सोनिया ने अहमद पटेल को सारी रिपोर्ट्रिग देने की नसीहत के साथ नाथ को काम करने का मौका दे दिया।
सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि कमल नाथ ने अपने प्रभावों का उपयोग कर वामदलों और मायावती को साधना आरंभ किया। वासुदेव आचार्य, गुरूदास दासगुप्ता, मायावती, अगर चिदम्बरम के साथ बैठकर चर्चा को राजी हुए तो वह कमल नाथ की ही बदोलत। वामदलों और मायावती ने सरकार का साथ देने के लिए अपनी शर्तों से कमल नाथ और चिदम्बरम को आवगत करा दिया। बाद में बरास्ता अहमद पटेल सारी बातें सोनिया तक पहुंची और संसद में बच गई कांग्रेस की जान।

चिदम्बरम को चुभने लगा है कमल!


चिदम्बरम को चुभने लगा है कमल!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम को अब कमल चुभने लगा है। एफडीआई के मसले पर नए नवेले संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ की बाजीगरी से चिदम्बरम चारों खाने चित्त गिर गए हैं। सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के रणनीतिकारों की नजरों में कमल नाथ का बढ़ता कद चिदम्बरम की आंखों में खटक रहा है। कमल नाथ का हर मोर्चे पर कुशल प्रबंधन वास्तव में चिदम्बरम के 7, रेसकोर्स रोड़ (भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को आशियाना बनाने के सपनों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (बतौर सांसद श्रीमति सोनिया गांधी को आवंटित सरकारी आवास) के विश्वस्त सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एफडीआई मामले में विपक्षी और संप्रग के घटक दलों को साधने में पलनिअप्पम चिदम्बरम पूरी तरह नाकामयाब रहे थे। वामदलों के विरोध ओर एफडीआई मामले में अमरीका के बढ़ते दबाव ने सोनिया गांधी का रक्त चाप बढ़ाया हुआ था। सोनिया गांधी ने चिदम्बरम की पूरी गोलाई इस मामले में नाप दी थी।
इसी बीच सोनिया गांधी के एक रणनीतिकार ने एफडीआई मामले में कमल नाथ को पाबंद करने का सुझाव दे मारा। कमल नाथ की काबिलियत से परिचित श्रीमति सोनिया गांधी ने बिना एक सेकन्ड की देर किए हुए कमल नाथ को एफडीआई मामले में सरकार के पक्ष में माहोल बनाने का निर्देश दे दिया। कमल नाथ के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि कमल नाथ ने इस काम के लिए सोनिया गांधी से फ्री हेण्ड की डिमांड की, पर सोनिया ने अहमद पटेल को सारी रिपोर्ट्रिग देने की नसीहत के साथ नाथ को काम करने का मौका दे दिया।
सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि कमल नाथ ने अपने प्रभावों का उपयोग कर वामदलों और मायावती को साधना आरंभ किया। वासुदेव आचार्य, गुरूदास दासगुप्ता, मायावती, अगर चिदम्बरम के साथ बैठकर चर्चा को राजी हुए तो वह कमल नाथ की ही बदोलत। वामदलों और मायावती ने सरकार का साथ देने के लिए अपनी शर्तों से कमल नाथ और चिदम्बरम को आवगत करा दिया। बाद में बरास्ता अहमद पटेल सारी बातें सोनिया तक पहुंची और संसद में बच गई कांग्रेस की जान।

सरकारी नुमाईंदे सो रहे, देशवासी रो रहे


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

सरकारी नुमाईंदे सो रहे, देशवासी रो रहे

16 दिसंबर की रात देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में जो कुछ हुआ वह भयावह ही था। अनाम पीडिता के साथ हैवानों ने जो कुछ किया वह निश्चित तौर पर रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है पर उसके उपरांत लगातार तेरह दिन तक जिस तरह देश के युवाओं के मन में आक्रोश दिखा और सरकार का दमन चक्र चला उससे लगने लगा कि निश्चित तौर पर इससे अच्छा तो गोरे ब्रितानियों का ही राज था। कांग्रेस सत्ता में रहकर लोगों पर जुल्म कर रही है तो विपक्ष में रहकर भाजपा द्वारा कांग्रेस का पूरा पूरा साथ दिया जा रहा है। कुल मिलाकर कांग्रेस और भाजपा मिलकर देश को लूटने में लगी हुईं हैं। बाकी के राजनैतिक दल भी इस लूट में अपना अपना हिस्सा लेकर शांत हैं। विरोध दिखावटी ही लगता है। मीडिया भी ध्यान भटकाने के लिए नए नए शिगूफे छोड़ने से पीछे नहीं रहता। कुल मिलाकर नेताओं सहित सरकारी नुमाईंदे सो रहे और देशवासी रो रहे की कहावत ही देश में चरितार्थ होती दिख रही है।

मनमोहन और रेपिस्ट में क्या अंतर है?
दिल्ली में हुए गैंग रेप ने देश ही नहीं समूची दुनिया को हिलाकर रख दिया है। नहीं हिले तो भारत के हुक्मरान! सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर एक अन्य विदेशी पीडिता ने भारत गणराज्य के वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह और उनकी सरकार की तुलना बलात्कारियों से ही कर दी है। खूंखार तालिबानियों से लोहा लेने वाली 15 वर्षीय मलाला यूसुफजाई भी दिल्ली में सामूहिक दुराचार से बुरी तरह आहत नजर आ रही है। दिल्ली गैंग रेप पीडिता को सिंगापुर भेजने पर मलाला ने भारत सरकार को आड़े हाथों लिया है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट पर मलाला का कहना है कि भारत सरकार और रेपिस्ट में अंतर ही क्या है? बालात्कारियों ने पीडिता को सड़क पर फेंक दिया और भारत सरकार ने उसे सिंगापुर ले जाकर पटक दिया। दोनों ही की हरकत एक समान है, दोनों ही में अंतर क्या रह जाता है?

नपुंसक, निर्लज्ज, निर्मम, संवेदनहीन नेतृत्व में सांसे ले रहा भारत गणराज्य
देश को जगाकर एक दामिनी मौत की नींद सो गई! इस तरह के ट्वीट और फेसबुक अपडेट से अटी पड़ी हैं सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स। कहीं जया बच्चन देश से माफी मांग रहीं हैं तो कही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। सोनिया कह रहीं कि उसकी मौत जाया नहीं जाएगी! मीडिया भी इन नेताओं की ताल और ठुमरी गान पर अपनी कमर मटका रहा है। किसी भी समाचार चेनल, प्रिंट मीडिया आदि ने इतना नैतिक साहस नहीं दिखाया कि वे सीधे सीधे, प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी, लोस नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, रास के अरूण जेतली आदि को सीधे कटघरे में खड़ा करें। कहां हैं कांग्रेस के तीखे बाण चलाने वाले सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी। आधे से ज्यादा नेता तो साल के अंत में छुट्टियां मनाने दिल्ली से बाहर हैं, सो मीडिया उन पर सवालिया निशान लगाने से रहा।

क्या किया गृह राज्य मंत्री ने!
16 दिसंबर की घटना के बाद एक दिन कुछ पत्रकारों के साथ गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने जिस रूट पर यह बलात्कार कांड हुआ था उसका दौरा किया। जोश में मंत्री जी ने सरकारी बस की सवारी गांठी, ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिल सके। बस से जब वे छतरपुर मेट्रो स्टेशन वाले स्टेंड तक गए तो उन्हें रास्ते में एक भी पुलिस की पीसीआर नहीं मिली। उल्टे बस स्टेंड पर रात में खड़ी बस को उन्होंने अपनी नंगी आंखों से मयखाना बना देखा। पुलिस के बारे में मीडिया के पूछने पर बस के अंदर सुरा सेवन करने वाले चालक परिचालकों ने कहा कि पुलिस आती ही होगी और वह भी छककर पिएगी उनके साथ। सकुचाए शर्माए भारत गणराज्य के जिम्मेदार गृह राज्य मंत्री महोदय ने कहा पुलिस अगर इस रूट पर नहीं तो कहीं ना कहीं तो होगी ही! मंत्री जी को पब्लिसिटी तो नहीं मिली पर यह खबर आम होते ही विपक्षी दलों ने भी केंद्र की कांग्रेस सरकार से इस बारे में प्रश्न ना पूछकर उसे क्लीन चिट दे दी। पर मंत्री महोदय से समूचा देश पूछना चाह रहा है कि उस बस यात्रा के बाद उन्होने क्या कार्यवाही की?

हिटलर बन गए मनमोहन
भारत गणराज्य के वजीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह को देश के निवासी कमोबेश मौन मोहन सिंह की उपाधि देते रहे हैं। किसी भी मामले में वे मौन रहना ही पसंद करते हैं। अनाम बाला के साथ जब सामूहिक दुराचार हुआ उसके बाद देश उबल पड़ा। यह उबला सिर्फ दुराचार के खिलाफ नहीं था। देश की जनता बुरी तरह आहत हो चुकी है। कांग्रेस भाजपा के द्वारा देश को लूटने से आजिज आ चुकी जनता ने हुक्मरानों को अपना गुस्सा दिखाया। निर्मम मनमोहन सिंह ने इस गुस्से से भड़ककर बजरिया पुलिस देश की जनता को कुचलना आरंभ कर दिया। वातानुकूलित घर आफिस, कार के आदी हो चुके मनमोहन सिंह सहित सारे नेताओं को इस बात का भान भी नहीं होगा कि दिल्ली की हाड़ गलाने वाली सर्दी में अगर पुलिस आंदोलनकारियों पर ठण्डा पानी फेंक रही है तो वे किस स्थिति से गुजरे होंगे। अबोध बालाओं को पुलिस ने इस तरह पीटा मानो कपड़े धोए जा रहे हों। पुलिस की इस हरकत से साफ हो गया कि मनमोहन सिंह अब हिटलर की भूमिका में आ चुके हैं।

आरक्षक की मौत से भी नहीं पसीजी दिल्ली!
दिल्ली अर्थात देश के हुक्मरान अपने ही एक आरक्षक की मौत से भी नहीं हिले। उसमें भी षणयंत्र का तानाबाना बुना जाने लगा। पुलिस और नेताओं ने कभी भीड़ तो कभी आम आदमी की पार्टी पर इसकी हत्या का आरोप मढ़ने का कुत्सित प्रयास किया। मीडिया ने भी हवा का रूख भांपकर सरकार की ताल पर ठुमके लगाना आरंभ कर दिया। बाद में जब दो पत्रकारों ने कुछ चित्रों के माध्यम से यह बात सार्वजनिक की कि उनके साथ जनता ने उस कांस्टेबल को बचाने का प्रयास किया था, तब जाकर सरकार, नेताओं और मीडिया के चेहरे पर कालिख लगना आरंभ हुआ। हड़बड़ी में सरकार और नेता बैकफुट में आए। जल्दबाजी में सरकार और नेताओं को यह बात नहीं सूझी वरना वे सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स पर पड़े इन चित्रों की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिन्ह लगाकर इसकी फोरहंसिक जांच की मांग ही कर बैठते।

खबरों की सैंसरशिप और सोशल मीडिया
देश में कांग्रेस के खिलाफ इस घटना को लेकर जमकर माहौल बनना आरंभ हो गया है। इसका कारण दिल्ली और केंद्र दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकार का होना है। दिल्ली के मीडिया से ही देश को हांका जा सकता है, संभवतः यही सोच है देश के हुक्मरानों की। दिल्ली में बैठे देश के विभिन्न मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ ही समाचार एजेंसियों को भी सरकार ने साधना आरंभ किया। खबरों को नए एंगिल से परोसना आरंभ हुआ। मीडिया का यह रोल सकारात्मक था या नकारात्मक इसका फैसला तो मीडिया ही करे किन्तु सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट्स ने इस बात की कलई खोल दी कि वास्तविकता क्या है और मीडिया क्या परोसा रहा है। हर तरफ मीडिया को कोसा जाने लगा। दरअसल, जबसे घराना पत्रकारिता ने देश के मीडिया को अपने कब्जे में लिया है तबसे देश का मीडिया बिक गया है। जो एक लाईन ना लिख पाए वह मीडिया का मालिक या प्रधान संपादक की भूमिका में है। इससे मीडिया की दिशा और दशा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्या पीडिता का शव ले जाया गया था सिंगापुर!
नेहरू गांधी परिवार की छोटी बहू एवं सांसद मेनका गांधी का सनसनीखेज आरोप दहला देने वाला है कि पीडिता की मौत तो उसे सिंगापुर ले जाने के पहले ही हो गई थी। मेनका के आरोप का आधार क्या है इस बारे में तो वे ही बेहतर बता सकती हैं पर सालों से सांसद और जिम्मेदार महिला मानी जाने वाली मेनका गांधी का आरोप सिरे से खारिज करने लायक नहीं लगता है। एक निजी समाचार चेनल के साथ चर्चा के दौरान मेनका गांधी ने कहा कि पीडिता को सिंगापुर भेजने की बात वाकई हैरान करने वाली है। देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद से देश पूछ रहा है कि आखिर कौन से चिकित्सकों की टीम ने पीडिता के परीक्षण के उपरांत उसे सिंगापुर भेजने की सिफारिश की? अगर की है तो सिफारिश को दिखाया जाए और नहीं की है तो आखिर किस आधार पर उसे बोरे की तरह भारत से सिंगापुर भेजा गया और वापस बुलाया गया? अगर उसमें प्राण शेष नहीं थे तो उसे भारत से सिंगापुर भेजने और वापस बुलाने पर हुए खर्च का वहन क्या सोनिया गांधी निजी तौर पर करने वाली हैं?

जनता को मामा बना रही कांग्रेस!
उमर दराज लोग अब कांग्रेस से नफरत करने लगे हैं। लोग बताते हैं कि कांग्रेस ने सदा ही जनता को मामा बनाया है। जब सैद्धांतिक राजनीति होती थी उस समय भी जनता को लूटा जाता था और अब जब मूल्य आधारित राजनीति नहीं है तब भी जनता लुट ही रही है। मीडिया ने तो इस मामले में हाथ नहीं लगाया पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट ने एक नई बहस खडी कर दी है कि क्या सुशील कुमार शिंदे ने जनता से झूट बोला? पीडिता के सिंगापुर भेजने पर मेदांता हस्पताल के डॉ.नरेश त्रेहन की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगे तो डॉ.त्रेहन से ट्वीट किया कि पीडिता उनकी पेशेंट ही नहीं थी, सरकार ने उनसे एयर एंबूलेंस और अन्य मेडीकल सहायता मांगी थी, अतः पीडिता के सिंगापुर भेजने के बारे में वे फैसला कैसे करते? इसी बीच एक अन्य ट्वीट आया कि शिंदे तो साफ साफ कह रहे हैं कि पीडिता को डॉ.त्रेहान की सलाह पर सिंगापुर भेजा जा रहा है, इस पर डॉ.त्रेहान ने कहा कि नेताओं को बली का बकरा चाहिए होता है।

यह है नेताजी का असली चेहरा!
नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के बारे में दुनिया के चौधरी अमरीका की राय बेहद खराब है। नेताजी मौकापरस्त व्यक्तित्व के स्वामी हैं एसा माना जाता है। कभी कांग्रेस के खिलाफ तो कभी कांग्रेस की गोदी में। दिल्ली में गैंगरेप की शिकार पीडिता के जीने मरने की आशंकाओं कुशंकाओं के बारहवें दिन देश गमगीन था। सरकार मन ही मन युवाओं के आक्रोश से निपटने के तरीके खोज रही थी। सरकार के मंत्री, सांसद इयर एण्ड में अपनी मस्ती में खलल नहीं पड़ने देना चाहते सो वे निकल पड़े न्यू इयर सेलीब्रेट करने। कुछ नेता मंत्री जो मजबूर हैं कि उन्हें मीडिया के सामने आकर मोर्चा संभालना ही है वे दिल्ली में बुझे हुए मन से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते दिखे। इसी बीच नेताजी 28 दिसंबर को रात में पीडिता को उसके हाल पर ही छोड़कर अपने संगी साथियों के साथ सैफई में मलईका अरोड़ा, विपाशा बसु, ईशा कोप्पिकर के साथ ऋतिक रोशन आदि के ठुमकों पर झूम रहे थे। कहते हैं लगभग दस करोड़ रूपए एक रात में पानी में बहाकर नेताजी ने पीडिता को श्रृद्धांजली दी है।

राहुल की चुप्पी टूटी, बनी बड़ी खबर!
देश के मीडिया को पता नहीं क्या हो गया है? राहुल गांधी ने बलात्कार की पीडित युवती की तेरह दिन बाद हुई मौत के उपरांत राहुल गांधी की चुप्पी टूटने को बड़ी खबर में तब्दील कर दिया। स्वार्थी मीडिया ने 13 दिन तक गायब और मौन रहे राहुल गांधी से यह पूछने की हिमाकत नहीं की कि आखिर क्या वजह थी कि एक दो नहीं 13 दिन तक वे मुंह सिए बैठे रहे। क्या वे बोलने के लिए किसी पंडित से महूर्त निकलवा रहे थे या फिर उनके सलाहकार कहीं अवकाश पर गए थे। अगर कोई चेनल का रिपोर्टर यह पूछने की हिमाकत धोखे से कर बैठता और न्यूज एडीटर उसे दिखा देता तो अगले ही पल उसकी बिदाई हो जाती। अरे साहेब एक गरीब की सरेराह इज्जत लुटी है, उसने अपनी जान गंवाई है, समूचा देश उबला है इस घटना पर, जेड प्लस सिक्यूरिटी वाले राहुल गांधी से सवाल पूछने से डर क्यों रहा है मीडिया? क्या विज्ञापन अथवा अन्य बिजनिस प्रोजेक्ट पर राहुल से प्रश्न पूछने पर खतरा मंडराने लगेगा?

पुच्छल तारा
दिल्ली में हुए सामूहिक बालात्कार के मामले ने देश दुनिया को हिला दिया है। देश के हुक्मरान अंदर ही अंदर सहमे हैं पर बाहर से सामान्य होने का दिखावा अवश्य ही कर रहे हैं। घराना पत्रकारिता का पोषक मीडिया भले ही सरकार को बचाता नजर आए पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स अपना काम बखूबी कर रही हैं। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर एक पोस्ट ने बरबस ही ध्यान खींचा जिसमें लिखा था -‘‘अगर पीडिता को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया है तो दोषियों को सजा के लिए भारत में क्यों रखा गया है? दोषियों को सजा के लिए साउदी अरब भेज दो, साउदी वाले उन्हें इस कुकर्म की माकूल और वाजिब सजा महज दो मिनिट में दे देंगे।‘‘

सरकारी नुमाईंदे सो रहे, देशवासी रो रहे


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

सरकारी नुमाईंदे सो रहे, देशवासी रो रहे

16 दिसंबर की रात देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में जो कुछ हुआ वह भयावह ही था। अनाम पीडिता के साथ हैवानों ने जो कुछ किया वह निश्चित तौर पर रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है पर उसके उपरांत लगातार तेरह दिन तक जिस तरह देश के युवाओं के मन में आक्रोश दिखा और सरकार का दमन चक्र चला उससे लगने लगा कि निश्चित तौर पर इससे अच्छा तो गोरे ब्रितानियों का ही राज था। कांग्रेस सत्ता में रहकर लोगों पर जुल्म कर रही है तो विपक्ष में रहकर भाजपा द्वारा कांग्रेस का पूरा पूरा साथ दिया जा रहा है। कुल मिलाकर कांग्रेस और भाजपा मिलकर देश को लूटने में लगी हुईं हैं। बाकी के राजनैतिक दल भी इस लूट में अपना अपना हिस्सा लेकर शांत हैं। विरोध दिखावटी ही लगता है। मीडिया भी ध्यान भटकाने के लिए नए नए शिगूफे छोड़ने से पीछे नहीं रहता। कुल मिलाकर नेताओं सहित सरकारी नुमाईंदे सो रहे और देशवासी रो रहे की कहावत ही देश में चरितार्थ होती दिख रही है।

मनमोहन और रेपिस्ट में क्या अंतर है?
दिल्ली में हुए गैंग रेप ने देश ही नहीं समूची दुनिया को हिलाकर रख दिया है। नहीं हिले तो भारत के हुक्मरान! सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर एक अन्य विदेशी पीडिता ने भारत गणराज्य के वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह और उनकी सरकार की तुलना बलात्कारियों से ही कर दी है। खूंखार तालिबानियों से लोहा लेने वाली 15 वर्षीय मलाला यूसुफजाई भी दिल्ली में सामूहिक दुराचार से बुरी तरह आहत नजर आ रही है। दिल्ली गैंग रेप पीडिता को सिंगापुर भेजने पर मलाला ने भारत सरकार को आड़े हाथों लिया है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट पर मलाला का कहना है कि भारत सरकार और रेपिस्ट में अंतर ही क्या है? बालात्कारियों ने पीडिता को सड़क पर फेंक दिया और भारत सरकार ने उसे सिंगापुर ले जाकर पटक दिया। दोनों ही की हरकत एक समान है, दोनों ही में अंतर क्या रह जाता है?

नपुंसक, निर्लज्ज, निर्मम, संवेदनहीन नेतृत्व में सांसे ले रहा भारत गणराज्य
देश को जगाकर एक दामिनी मौत की नींद सो गई! इस तरह के ट्वीट और फेसबुक अपडेट से अटी पड़ी हैं सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स। कहीं जया बच्चन देश से माफी मांग रहीं हैं तो कही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। सोनिया कह रहीं कि उसकी मौत जाया नहीं जाएगी! मीडिया भी इन नेताओं की ताल और ठुमरी गान पर अपनी कमर मटका रहा है। किसी भी समाचार चेनल, प्रिंट मीडिया आदि ने इतना नैतिक साहस नहीं दिखाया कि वे सीधे सीधे, प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी, लोस नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, रास के अरूण जेतली आदि को सीधे कटघरे में खड़ा करें। कहां हैं कांग्रेस के तीखे बाण चलाने वाले सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी। आधे से ज्यादा नेता तो साल के अंत में छुट्टियां मनाने दिल्ली से बाहर हैं, सो मीडिया उन पर सवालिया निशान लगाने से रहा।

क्या किया गृह राज्य मंत्री ने!
16 दिसंबर की घटना के बाद एक दिन कुछ पत्रकारों के साथ गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने जिस रूट पर यह बलात्कार कांड हुआ था उसका दौरा किया। जोश में मंत्री जी ने सरकारी बस की सवारी गांठी, ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिल सके। बस से जब वे छतरपुर मेट्रो स्टेशन वाले स्टेंड तक गए तो उन्हें रास्ते में एक भी पुलिस की पीसीआर नहीं मिली। उल्टे बस स्टेंड पर रात में खड़ी बस को उन्होंने अपनी नंगी आंखों से मयखाना बना देखा। पुलिस के बारे में मीडिया के पूछने पर बस के अंदर सुरा सेवन करने वाले चालक परिचालकों ने कहा कि पुलिस आती ही होगी और वह भी छककर पिएगी उनके साथ। सकुचाए शर्माए भारत गणराज्य के जिम्मेदार गृह राज्य मंत्री महोदय ने कहा पुलिस अगर इस रूट पर नहीं तो कहीं ना कहीं तो होगी ही! मंत्री जी को पब्लिसिटी तो नहीं मिली पर यह खबर आम होते ही विपक्षी दलों ने भी केंद्र की कांग्रेस सरकार से इस बारे में प्रश्न ना पूछकर उसे क्लीन चिट दे दी। पर मंत्री महोदय से समूचा देश पूछना चाह रहा है कि उस बस यात्रा के बाद उन्होने क्या कार्यवाही की?

हिटलर बन गए मनमोहन
भारत गणराज्य के वजीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह को देश के निवासी कमोबेश मौन मोहन सिंह की उपाधि देते रहे हैं। किसी भी मामले में वे मौन रहना ही पसंद करते हैं। अनाम बाला के साथ जब सामूहिक दुराचार हुआ उसके बाद देश उबल पड़ा। यह उबला सिर्फ दुराचार के खिलाफ नहीं था। देश की जनता बुरी तरह आहत हो चुकी है। कांग्रेस भाजपा के द्वारा देश को लूटने से आजिज आ चुकी जनता ने हुक्मरानों को अपना गुस्सा दिखाया। निर्मम मनमोहन सिंह ने इस गुस्से से भड़ककर बजरिया पुलिस देश की जनता को कुचलना आरंभ कर दिया। वातानुकूलित घर आफिस, कार के आदी हो चुके मनमोहन सिंह सहित सारे नेताओं को इस बात का भान भी नहीं होगा कि दिल्ली की हाड़ गलाने वाली सर्दी में अगर पुलिस आंदोलनकारियों पर ठण्डा पानी फेंक रही है तो वे किस स्थिति से गुजरे होंगे। अबोध बालाओं को पुलिस ने इस तरह पीटा मानो कपड़े धोए जा रहे हों। पुलिस की इस हरकत से साफ हो गया कि मनमोहन सिंह अब हिटलर की भूमिका में आ चुके हैं।

आरक्षक की मौत से भी नहीं पसीजी दिल्ली!
दिल्ली अर्थात देश के हुक्मरान अपने ही एक आरक्षक की मौत से भी नहीं हिले। उसमें भी षणयंत्र का तानाबाना बुना जाने लगा। पुलिस और नेताओं ने कभी भीड़ तो कभी आम आदमी की पार्टी पर इसकी हत्या का आरोप मढ़ने का कुत्सित प्रयास किया। मीडिया ने भी हवा का रूख भांपकर सरकार की ताल पर ठुमके लगाना आरंभ कर दिया। बाद में जब दो पत्रकारों ने कुछ चित्रों के माध्यम से यह बात सार्वजनिक की कि उनके साथ जनता ने उस कांस्टेबल को बचाने का प्रयास किया था, तब जाकर सरकार, नेताओं और मीडिया के चेहरे पर कालिख लगना आरंभ हुआ। हड़बड़ी में सरकार और नेता बैकफुट में आए। जल्दबाजी में सरकार और नेताओं को यह बात नहीं सूझी वरना वे सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स पर पड़े इन चित्रों की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिन्ह लगाकर इसकी फोरहंसिक जांच की मांग ही कर बैठते।

खबरों की सैंसरशिप और सोशल मीडिया
देश में कांग्रेस के खिलाफ इस घटना को लेकर जमकर माहौल बनना आरंभ हो गया है। इसका कारण दिल्ली और केंद्र दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकार का होना है। दिल्ली के मीडिया से ही देश को हांका जा सकता है, संभवतः यही सोच है देश के हुक्मरानों की। दिल्ली में बैठे देश के विभिन्न मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ ही समाचार एजेंसियों को भी सरकार ने साधना आरंभ किया। खबरों को नए एंगिल से परोसना आरंभ हुआ। मीडिया का यह रोल सकारात्मक था या नकारात्मक इसका फैसला तो मीडिया ही करे किन्तु सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट्स ने इस बात की कलई खोल दी कि वास्तविकता क्या है और मीडिया क्या परोसा रहा है। हर तरफ मीडिया को कोसा जाने लगा। दरअसल, जबसे घराना पत्रकारिता ने देश के मीडिया को अपने कब्जे में लिया है तबसे देश का मीडिया बिक गया है। जो एक लाईन ना लिख पाए वह मीडिया का मालिक या प्रधान संपादक की भूमिका में है। इससे मीडिया की दिशा और दशा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्या पीडिता का शव ले जाया गया था सिंगापुर!
नेहरू गांधी परिवार की छोटी बहू एवं सांसद मेनका गांधी का सनसनीखेज आरोप दहला देने वाला है कि पीडिता की मौत तो उसे सिंगापुर ले जाने के पहले ही हो गई थी। मेनका के आरोप का आधार क्या है इस बारे में तो वे ही बेहतर बता सकती हैं पर सालों से सांसद और जिम्मेदार महिला मानी जाने वाली मेनका गांधी का आरोप सिरे से खारिज करने लायक नहीं लगता है। एक निजी समाचार चेनल के साथ चर्चा के दौरान मेनका गांधी ने कहा कि पीडिता को सिंगापुर भेजने की बात वाकई हैरान करने वाली है। देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद से देश पूछ रहा है कि आखिर कौन से चिकित्सकों की टीम ने पीडिता के परीक्षण के उपरांत उसे सिंगापुर भेजने की सिफारिश की? अगर की है तो सिफारिश को दिखाया जाए और नहीं की है तो आखिर किस आधार पर उसे बोरे की तरह भारत से सिंगापुर भेजा गया और वापस बुलाया गया? अगर उसमें प्राण शेष नहीं थे तो उसे भारत से सिंगापुर भेजने और वापस बुलाने पर हुए खर्च का वहन क्या सोनिया गांधी निजी तौर पर करने वाली हैं?

जनता को मामा बना रही कांग्रेस!
उमर दराज लोग अब कांग्रेस से नफरत करने लगे हैं। लोग बताते हैं कि कांग्रेस ने सदा ही जनता को मामा बनाया है। जब सैद्धांतिक राजनीति होती थी उस समय भी जनता को लूटा जाता था और अब जब मूल्य आधारित राजनीति नहीं है तब भी जनता लुट ही रही है। मीडिया ने तो इस मामले में हाथ नहीं लगाया पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट ने एक नई बहस खडी कर दी है कि क्या सुशील कुमार शिंदे ने जनता से झूट बोला? पीडिता के सिंगापुर भेजने पर मेदांता हस्पताल के डॉ.नरेश त्रेहन की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगे तो डॉ.त्रेहन से ट्वीट किया कि पीडिता उनकी पेशेंट ही नहीं थी, सरकार ने उनसे एयर एंबूलेंस और अन्य मेडीकल सहायता मांगी थी, अतः पीडिता के सिंगापुर भेजने के बारे में वे फैसला कैसे करते? इसी बीच एक अन्य ट्वीट आया कि शिंदे तो साफ साफ कह रहे हैं कि पीडिता को डॉ.त्रेहान की सलाह पर सिंगापुर भेजा जा रहा है, इस पर डॉ.त्रेहान ने कहा कि नेताओं को बली का बकरा चाहिए होता है।

यह है नेताजी का असली चेहरा!
नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के बारे में दुनिया के चौधरी अमरीका की राय बेहद खराब है। नेताजी मौकापरस्त व्यक्तित्व के स्वामी हैं एसा माना जाता है। कभी कांग्रेस के खिलाफ तो कभी कांग्रेस की गोदी में। दिल्ली में गैंगरेप की शिकार पीडिता के जीने मरने की आशंकाओं कुशंकाओं के बारहवें दिन देश गमगीन था। सरकार मन ही मन युवाओं के आक्रोश से निपटने के तरीके खोज रही थी। सरकार के मंत्री, सांसद इयर एण्ड में अपनी मस्ती में खलल नहीं पड़ने देना चाहते सो वे निकल पड़े न्यू इयर सेलीब्रेट करने। कुछ नेता मंत्री जो मजबूर हैं कि उन्हें मीडिया के सामने आकर मोर्चा संभालना ही है वे दिल्ली में बुझे हुए मन से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते दिखे। इसी बीच नेताजी 28 दिसंबर को रात में पीडिता को उसके हाल पर ही छोड़कर अपने संगी साथियों के साथ सैफई में मलईका अरोड़ा, विपाशा बसु, ईशा कोप्पिकर के साथ ऋतिक रोशन आदि के ठुमकों पर झूम रहे थे। कहते हैं लगभग दस करोड़ रूपए एक रात में पानी में बहाकर नेताजी ने पीडिता को श्रृद्धांजली दी है।

राहुल की चुप्पी टूटी, बनी बड़ी खबर!
देश के मीडिया को पता नहीं क्या हो गया है? राहुल गांधी ने बलात्कार की पीडित युवती की तेरह दिन बाद हुई मौत के उपरांत राहुल गांधी की चुप्पी टूटने को बड़ी खबर में तब्दील कर दिया। स्वार्थी मीडिया ने 13 दिन तक गायब और मौन रहे राहुल गांधी से यह पूछने की हिमाकत नहीं की कि आखिर क्या वजह थी कि एक दो नहीं 13 दिन तक वे मुंह सिए बैठे रहे। क्या वे बोलने के लिए किसी पंडित से महूर्त निकलवा रहे थे या फिर उनके सलाहकार कहीं अवकाश पर गए थे। अगर कोई चेनल का रिपोर्टर यह पूछने की हिमाकत धोखे से कर बैठता और न्यूज एडीटर उसे दिखा देता तो अगले ही पल उसकी बिदाई हो जाती। अरे साहेब एक गरीब की सरेराह इज्जत लुटी है, उसने अपनी जान गंवाई है, समूचा देश उबला है इस घटना पर, जेड प्लस सिक्यूरिटी वाले राहुल गांधी से सवाल पूछने से डर क्यों रहा है मीडिया? क्या विज्ञापन अथवा अन्य बिजनिस प्रोजेक्ट पर राहुल से प्रश्न पूछने पर खतरा मंडराने लगेगा?

पुच्छल तारा
दिल्ली में हुए सामूहिक बालात्कार के मामले ने देश दुनिया को हिला दिया है। देश के हुक्मरान अंदर ही अंदर सहमे हैं पर बाहर से सामान्य होने का दिखावा अवश्य ही कर रहे हैं। घराना पत्रकारिता का पोषक मीडिया भले ही सरकार को बचाता नजर आए पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स अपना काम बखूबी कर रही हैं। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर एक पोस्ट ने बरबस ही ध्यान खींचा जिसमें लिखा था -‘‘अगर पीडिता को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया है तो दोषियों को सजा के लिए भारत में क्यों रखा गया है? दोषियों को सजा के लिए साउदी अरब भेज दो, साउदी वाले उन्हें इस कुकर्म की माकूल और वाजिब सजा महज दो मिनिट में दे देंगे।‘‘

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

विधायक कार्यालय में छात्रा से रेप!


विधायक कार्यालय में छात्रा से रेप!

(एम.के.देशमुख)

बालाघाट (साई)। जिला मुख्यालय से लगभग 90 कि,मी, दूर परसवाडा में एक पैरामेडिमकल छात्रा के साथ परसवाडा विधान सभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामकिशोर कावरे के सूने कार्यालय में ले जाकर बलात्कार किये जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि परसवाडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भोरवाही लिम्का निवासी यह छात्रा द्वारा कल करायी गयी रिपोर्ट पर परसवाडा निवासी शिरीष अवधिया के विरुद्ध बलात्कार की शिकायत दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि बताया कि छात्रा ने जबलपुर से पेरामेडिकल का कोर्स किया था तथा प्रैक्टिकल के लिये वह परसवाडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आयी हुई थी। वह विगत एक नवंबर से यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षण ले रही थी। इस दौरान उसका परिचय स्वास्थ्य केंद्र में प्रयोगशाला सहायक के तौर पर काम कर रहे शिरीष अवधिया से हुई। छात्रा ने पुलिस को बताया कि शिरीष 17 नवंबर को उसे नौकरी के संबंध में जानकारी देने के नाम पर स्वास्थ्य केंद्र के पीछे स्थित एक कार्यालय में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

6 जनवरी को होगा पंजाबी परिवार मिलन समारोह


6  जनवरी को होगा पंजाबी परिवार मिलन समारोह

(राज कुमार अग्रवाल)

कैथल (साई)। जिला पंजाबी वेल्फेयर सभा अपना दसवां पंजाबी परिवार समारोह 6 जनवरी को गीताभवन मन्दिर में आयोजित करेगी । समारोह की तैयारीयों को लेकर सभा की एक बैठक सभा के कार्यालय में आयोजित हुई।  बैठक की अध्यक्षता प्रधान प्रदर्शन परूथी ने की । इस बार पंजाबी परिवार मिलन समारोह में पंजाब व राजस्थान के अलावा दिल्ली से आये कलाकार अपनी कला के जलवे समारोह में बिखेरेंगे । बैठक में समारोह की तैयारीयों के लिए कमेटी का गठन भी किया गया । सभा के प्रधान पद्रर्शन परूथी ने बताया कि जिला पंजाबी वेल्फेयर सभा द्वारा इस बार का आयोजन भी पारम्परिक तरीके से किया जायेगा  इस बार इस समारोह में मंच के माध्यम से जहा आपसी भाईचारा व समाज हित का संदेश दिया जायेगा वहीं कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया जायेगा ताकि बेटंो की चाहत में कोख मे हो रही बेटीयों की हत्याओं को रोका जा सके । परूथी ने बताया कि सभा द्वारा इस बार पंजाबी परिवार मिलन समारोह को  यादगार बनाने के लिए कई तरह के सांस्कृति कार्यक्रम जिसमें भंागडा , लोकगीत , हास्य  से भरपूर  कई तरह केआयोजन होगें। कार्यक्रम में बच्चों के मनोंरंजन के लिए राजस्थान से आये कलाकार कठपुतली का शानदार कला प्रदर्शन करेगें । उन्होने बताया कि जिला पंजाबी वेल्फेयर सभा हर वर्ष जनवरी माह में परिवार मिलन समारोह आयोजित करती है इसका उदेश्य समाज के लोगों में आपसी भाईचारा और प्यार बनाये रखना है ताकि समाज में मजबूती व एकता बनी रहे।  परूथी ने बताया कि इस समारोह को सफल बनाने के लिए चार कमेटीयों का गठन किया गया है  जो कि अलग अलग व्वयस्था समारोह के लिए कर रही हैं और एक जनसम्पर्क कमेटी का गठन भी किया गया है जो कि शहर में लोगों से सम्पर्क कर समारोह के लिए न्यौता दे रही है।  परूथी ने बताया कि समारोह में जहंा हमारे  प्राचीन रीति रिवाज अपनाने पर बल दिया जायेगा।  समारोह में समाज के  लोगो को यह अपील कीजायेगी कि वो अपने विवाद घर या पंचायत मे बैठ कर सुलझााये ना कि थानो और कोर्ट कचहरीयो में । उन्होने यह भी जानकारी दी कि पंजाबी समाज के युवक युवतियों के वैवाहीक रिश्ते करवाने के लिए सभा द्वारा संजोग  विवाह सैल  गठन किया गया है  उसके भी सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस मौके पर इंद्रजीत सरदाना, डा0 कश्मीरी लाल, संदीप मलिक, अशोक आर्य, सुषम कपूर, राजकुमार मुखिजा, राजेन्द्र कुकरेजा, सतीश राजपाल मौजूद रहे ।

फाँसी या नपुंसक बनाने से कम न हो बलात्कार की सजा-रविन्द्र द्विवेदी


फाँसी या नपुंसक बनाने से कम न हो बलात्कार की सजा-रविन्द्र द्विवेदी

(रचना)

नई दिल्ली (साई)। अखिल भारत हिन्दू महासभा दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष रविन्द्र द्विवेदी ने बलात्कार की सजा पर मौजूदा कानून को बदलकर कठोर कानून बनाने के लिये जस्टिस वर्मा समिति के गठन का स्वागत किया है। नागरिकों से सुझाव आमंत्रित करना भी एक अच्छी पहल है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे।
रविन्द्र द्विवेदी ने कहा कि बलात्कार किसी भी नारी के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी होती है। यह पीड़ा उसे ताउम्र सहनी पड़ती है, जिससे पीड़िता को अपनी ही जिंदगी एक बोझ महसूस होने लगती है। बलात्कारी को कठोर से कठोर सजा देकर ही नारी समाज के लिये नासूर बन चुकी बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। रविन्द्र द्विवेदी ने जस्टिस वर्मा समिति के पास ईमेल से आज अपने सुझाव भेजे। सुझाव में कहा गया है कि बलात्कारी को फाँसी या नपुंसक बनाने से कम सजा नही होनी चाहिये।  उन्होने कहा कि नपुंसक बनाने से बलात्कार करने वाले अपराधी को सारी जिंदगी अपनी गलती का अहसास होगा।
नपुंसक के रूप में बलात्कारी को देखकर समाज में भय पैदा होगा और बलात्कार के मामलों पर अंकुश लगेगा। रविन्द्र द्विवेदी ने बलात्कारी को नपुंसक बनाने के साथ बीस साल के सश्रम कारावास की सजा दिये जाने का सुझाव भी जस्टिस वर्मा समिति को दिया है।
नाबालिग लड़की से बलात्कार और बालिग लड़की अथवा महिला से सामूहिक बलात्कार के साथ हत्या अथवा हत्या के प्रयास का आरोप होने पर बलात्कारी को फाँसी पर लटकाने का सुझाव भी वर्मा समिति को दिया है। इसके अलावा रेप की एफआईआर दर्ज होने के एक सप्ताह में अदालत में पुलिस द्वारा चार्जशीट पेश करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई कर 60 दिन में निर्णय सुनाने का परामर्श भी दिया गया है।
रविन्द्र द्विवेदी ने चलती बस में सामूहिक बलात्कार की पीड़िता दामिनी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुये पुलिस द्वारा निहत्थे आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं का दमन करने की तौर-तरीकों की आलोचना की। उन्होने कहा कि पुरूष पुलिसकर्मियों द्वारा आंदोलनकारी छात्राओं से बदसलूकी और लाठीचार्ज दिल्ली पुलिस का भयानक चेहरा उजागर करता है। 
सुभाष तोमर नामक पुलिसकर्मी की मौत का कारण आंदोलनकारियों की पिटाई बताना छात्रओें के साथ बदसलूकी और लाठीचार्ज की घटना से ध्यान हटाने का पुलिस आयुक्त नीरज कुमार का षडयंत्र है। इस प्रकरण में निर्दोष आठ लोगों की गिरफ्तारी कानून की शक्तियों का खुला दुरूपयोग है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सुभाष तोमर अपने आप गिरा था और उसके शरीर पर कोई चोट का निशान नही था। नीरज कुमार का षडयंत्र सफेद झूठ है जिसे हिन्दू महासभा किसी भी कीमत पर सहन नही करेगी। रविन्द्र द्विवेदी ने पुलिस आयुक्त से इस्तीफे की मांग  करते हुये मांग के समर्थन में पुलिस मुख्यालय पर आंदोलन की चेतावनी दी है।