सोमवार, 15 अप्रैल 2013

सोनिया थीं, विदेशी खरीद में मध्यस्थ!


ये है दिल्ली मेरी जान


(लिमटी खरे)

सोनिया थीं, विदेशी खरीद में मध्यस्थ!
सनसनीखेज खुलासों के लिए मशहूर विकीलीक्स द्वारा एक जबर्दस्त खुलासे से कांग्रेस की चूलें हिलती नजर आ रही हैं। इंदिरा गांधी के दरबार में अमरीकी जासूस, फिर राजीव गांधी को दलाल निरूपित करने के बाद अब विकीलीक्स ने कांग्रेस और संप्रग अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को भी लपेट लिया है। हाल ही में एक केबल में अमेरिकी राजनयिको को मारुति हेवी व्हीकल लिमिटेड कंपनी के प्रबंध निदेशक के. एल. जालान ने बताया था कि इस कंपनी के मालिकों में संजय गांधी, सोनिया गांधी तथा जेके जालान शामिल है। जालान के अनुसार मारुति कंपनी इटली, स्वीडन और र्जमनी में कार्यरत वाहन कंपनी इंटरनेशनल हार्वेस्टर के साथ भी जुड़ी है। इस मारुति कंपनी ने अमेरिकी राजनयिको से एक अमेरिकी कंपनी के विमानों की खरीद के बारे मे सहयोग करने की पेशकश की थी। अब लगता है कांग्रेस को इन आरोपों का जवाब देने में कठिनाई महसूस हो रही है।

राहुल के बस की नहीं राजनीति!
कांग्रेस की नजर में भले ही राहुल गांधी भविष्य के प्रधानमंत्री हों, पर हकीकत यह है कि उनके बस की राजनीति नहीं है। राजनीति में जिस तरह की चालाकी, चपलता और धूर्तता चाहिए वह उनके अंदर नहीं है। राहुल गांधी के राजनैतिक गुरू एक के बाद एक बदल रहे हैं और वे अपने अपने तौर तरीकों से युवराज को सियासी पाठ पढ़ा रहे हैं। कभी राजा दिग्विजय सिंह उन्हें सियासत की सीढियां चढ़वाने की कवायद करते हैं तो कभी उनके नए गुरू सैम पित्रोदा उन्हें दुनिया के चौधरी अमरीका की स्टाईल में सियासी पाठ पढ़वाते हैं। कभी जनार्दन द्विवेदी राहुल को गरीब हरिजन दलित के घर पर रात्रि विश्राम का मशविरा देते हैं तो कभी कोई कुछ बता देता है। राहुल बुरी तरह कन्फयूज ही नजर आ रहे हैं। हालात देखकर लगने लगा है मानो सियासत उनके बस की नहीं उन्हें तो अपना रास्ता बदल ही लेना चाहिए।

मूल काम से भटके काटजू!
भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू एक बार फिर चर्चाओं में हैं। उनका मूल काम मीडिया से संबंधित शिकायतों का निष्पादन ही माना जाता है। पिछले काफी समय से काटजू अपने बयानों के चलते विवादों में हैं। एक बार उन्होंने फिल्म अभिनेता संजय दत्त की माफी के लिए पत्र लिख दिया। काटजू ने अब 1993 दिल्ली ब्लास्ट केस में फांसी की सजा पाए खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को माफ करने की अपील की है। काटजू ने भुल्लर की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले को आधार बनाते हुए प्रेजिडेंट प्रणव मुखर्जी को छह पेज की चिट्ठी लिखी है। इसमें प्रेजिडेंट से संविधान के आर्टिकल 72 के तहत भुल्लर की फांसी की सजा माफी करने की अपील की गई है। काटजू साहेब को चाहिए कि वे मीडिया की शिकायतों का निष्पादन करें। हाल ही में मध्य प्रदेश के सिवनी में कर्फ्यू के दौरान अखबार ना बटने और मीडिया को घरों में कैद किए जाने की शिकायत उनके पास पहुंची पर वह लंबित ही है।

कौन है वह कांग्रेस का क्षत्रप!
भाजपा के निर्वतमान निजाम नितिन गड़करी ने एक बड़ा अजीब सा खुलासा किया है, उन्होने कहा है कि कांग्रेस के एक सीनियर लीडर ने उन्हें संपर्क कर वर्तमान संप्रग सरकार को गिराने की चाहत रखी थी। गड़करी का यह खुलासा वाकई कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। भले ही गड़करी अपने आप को मर्द का बच्चा बताकर सामने से वार करने की बात कह रहे हों पर उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के एक व्यवसाई सीनियर लीडर जिनसे सोनिया और राहुल गांधी बुरी तरह खफा हैं, ने भाजपा के व्यवसाई अध्यक्ष गड़करी से संपर्क कर अपनी मंशा का इजहार किया था। जिस समय यह बात की गई थी उस समय देश में घपले घोटालों की गूंज थी और अगर तब चुनाव हो जाते तो कांग्रेस की लुटिया डूबना तय था। अब भाजपा के अंदर भी यह बात उठ रही है कि आखिर गड़करी कांग्रेस के हिमायती हैं या भाजपा के!

क्या कानून हम से उपर है!
देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद का काम देश में कानून बनाने का है। कानून बनाने के बाद इस पंचायत के पंच ही उस कानून की धज्जियां उड़ाते दिख जाते हैं। सूचना के अधिकार कानून में सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा एकत्र की गई जानकारी के अनुसार आठ सांसदों ने बार बार मांगे जाने के बाद भी अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से पांच सदस्य उच्च सदन यानी राज्य सभा और तीन लोकसभा के हैं। आश्चर्य तो इस बात पर है कि इसमें झारखण्ड के नेता मधु कोड़ा का नाम भी शामिल है। पता चला है कि इन सांसदों ने अपनी संपत्ति को सार्वजनिक ना किए जाने का लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यक्ष प्रश्न तो फिर खड़ा ही है ना कि देश की सबसे बड़ी पंचायत के आठ सदस्य आखिर अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने से हिचक क्यों रहे हैं।

हेमा का नाम लेना भारी पड़ा पांडे को!
क्या ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का नाम लेना अपराध है! जी नहीं शायद नहीं। जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा 1997 में केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के खिलाफ भाजपा से उपचुनाव में उतरे थे, तब वे कमल नाथ की रिहाईश शिकारपुर की सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गालों से किया करते थे। अब उत्तर प्रदेश के खादी और ग्रामोद्योग मंत्री राजा राम पांडे को सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गालों से करना भारी पड़ गया है। इस बयान ने उनकी कुर्सी छीन ली है। पांडेय को देर रात बर्खास्त कर दिया गया। पांडे की जुबान दूसरी बार फिसली है इसके पहले उन्होंने सुल्तानपुर की डीएम की तारीफ करते हुए अशोभनीय टिप्पणी कर दी थी। पाण्डे की कुर्सी जाने से अब कम से कम हेमा मालिनी को तो शांति मिलेगी कि उनके गालों की तुलना सड़क से तो कम से कम नहीं होगी।

पवार की उलटबंसी!
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में सहयोगी दल राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार ने अचानक ही उलट बंसी बजाना आरंभ कर दिया है। उन्होने ठाणे में कहा कि डीएमके के समर्थन वापस लेने के उपरंात यूपीए कमजोर हो चुका है, और उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए कि चुनाव किसी भी वक्त हो सकते हैं अतः चुनाव की तैयारी में जुट जाना चाहिए। वैसे भी डीएमके के बाहर होने के बाद अब समाजवादी पार्टी के 22 और बहुजन समाजवादी पार्टी के 21 सांसदों की बैसाखी पर यूपीए टिकी हुई है। मुलायम सिंह यादव भी सीबीआई के दुरूपयोग के आरोप लगा चुके हैं तो मायावती भी ताज कारीडोर से परेशान हैं। उधर मुलायम सिंह यादव इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि चुनाव इस साल नवंबर में हो सकते हैं। अगर एसा हुआ तो यूपीए टू का यह अंतिम खेल हो सकता है।

नमो फोबिया से ग्रसित है कांग्रेस!
कांग्रेस के अंदर अब संगठित राजग के बजाए एक मात्र फेक्टर ही डराने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है वह है नमो यानी नरेंद्र मोदी का फेक्टर। कांग्रेस के सारे के सारे थिंक टेंक नमो के फेक्टर से निपटने की रणनीति में जुट चुके हैं। नमो ने अपनी सारी ताकत सोशल मीडिया में झोंक दी है। उनके करीबी सूत्रों का दावा है कि नमो ने लगभग दो सौ करोड़ रूपए का दांव सोशल मीडिया में लगाया है। सोशल मीडिया में अनेक लोगों को नमो के तरह तरह के कार्टून, फोटो, केप्शन आदि के साथ सुसज्जित कर शेयर करवाया जा रहा है ताकि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया में नमो की तूती बोले। आज आलम यह है कि घपले घोटाले अनाचार और विशेषकर भ्रष्टाचार पर सोनिया राहुल की चुप्पी ने युवाओं को कांग्रेस से दूर कर दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी का जादू सर चढ़कर ही बोल रहा है।

टेक्सी की तरह घूम रहा है हेलीकाप्टर!
देश के कांग्रेस के एक उद्योगपति नेता जब चुनाव में उतरते हैं तो वे अपनी पारिवारिक कंपनी के हेलीकाप्टर को अपने संसदीय क्षेत्र में बैलगाड़ी के मानिंद घुमा देते हैं। हेलीकाप्टर को देखने जुटने वाली भीड़ ही उनकी सभा को सुनती है। इसी तर्ज पर अब मां, माटी, मानुष वाली त्रणमूल कांग्रेस पार्टी ने भी पश्चिम बंगाल से निकलकर अपना प्रभाव अन्य राज्यों में बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हरियाणा में त्रणमूल कांग्रेस द्वारा अपने राज्य सभा सांसद और उद्योगपति के.डी.सिंह को हेलीकाप्टर मुहैया करवाया गया है। सिंह हरियाणा में हर कस्बे में अपने हेलीकाप्टर से पहुंच रहे हैं। गांव के लोगों के लिए आज भी हेलीकाप्टर कौतुहल का ही विषय है सो बच्चों से लेकर बड़े बूढ़ेे जवान सभी वर्ग के लोग हेलीकाप्टर के आसपास जुट जाते हैं। इसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर सिंह द्वारा ममता की नजरों में अपने नंबर बढ़वाने में कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

मोईली ने साध लिया भाजपा को!
सदन में क्या सत्ता पक्ष क्या विपक्ष! सदन के अंदर सभी एक बराबर हैं। सभी हाड़ मांस के पुतले हैं जिनके निहित स्वार्थ एक दूसरे से अटके हैं। कार्पोरेट मामलों के मंत्री रहे वीरप्पा मोईली के खिलाफ भाजपा के हाथ कुछ सबूत लगे जिनमें मोईली द्वारा अपने पुत्र के ट्रस्ट के लिए चंदा उगाहा था। कुछ अखबारों की कतरने और एक ईमेल की प्रति भी भाजपा नेताओं को मुहैया करवाई गईं। मोईली के खिलाफ सबूत इतने जबर्दस्त थे कि उनकी कुर्सी जाना तय था। कहा जा रहा है कि इसके पीछे दक्षिण भारत की ही एक महिला मंत्री का हाथ था। पर यह क्या, भाजपा ने जब शून्य काल में इसे उठाने का मन बनाया उसके पहले ही मोईली ने भाजपा के नेताओं से संपर्क साधा और सब कुछ सध गया। ना मामला शून्यकाल में उठा और ना ही मोईली को किसी तरह की परेशानी का ही सामना करना पड़ा। जय भारत जय जवान, हो रहा भारत निर्माण।

यदुवंशियों के भरोसे यूपी!
उत्तर प्रदेश में यदुवंशी एण्ड सन्स यानी मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव ने अपने इर्दगिर्द स्वजातीय बंधुओं की खासी फौज खड़ी कर रखी है। अखिलेश यादव ने अपने सचिवालय में भी तीन यादव अफसर तैनात हैं। शंभू नाथ यादव को सेवा विस्तार दिया गया है। पंधरी यादव और जगदेव यादव भी अखिलेश यादव की टीम में शामिल हैं। यदुवंशियों के हाथों में है उत्तर प्रदेश की सत्ता की बागड़ोर, एसा मंत्रालय में कमोबेश हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। कहते हैं यदुवंशियों के बढ़ते वर्चस्व को देखकर राज्य के मुख्य सचिव राकेश गर्ग ने अघोषित तौर पर कलम बंद हड़ताल कर दी है। अब तो गर्ग किसी भी कागज पर दस्तखत ही नहीं कर रहे हैं। राज्य में उनका काम काज अनीता सिंह देख रही हैं। गर्ग केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की जुगत लगाते देखे गए हें।

पुच्छल तारा
बरसात आते ही मेंढ़क सक्रिय हो जाते हैं। चुनाव की आहट पाते ही अब सियासी हल्कों में भी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के दौर से लगने लगा है कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर इनकी धूम है। भाजपा कांग्रेस पर दिशाहीन होकर राजनीति करने का आरोप लगाती है तो कांग्रेस भाजपा को कोसती है। सवाल यह उठता है कि इस सबके लिए सबसे सही मंच लोकसभा और राज्य सभा के साथ ही साथ राज्यों में विधानसभाएं और विधानपरिषद है। इन सभी मंचों पर किसी भी सियासी दल ने किसी भी सियासी दल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता है, जाहिर है जो भी सदन के बाहर होता है वह सिर्फ जनता को भरमाने के लिए ही होता है।

रविवार, 14 अप्रैल 2013

चिदंबरम विदेश यात्रा पर रवाना


चिदंबरम विदेश यात्रा पर रवाना

(प्रदीप चौहान)

नई दिल्ली (साई)। वित्त मंत्री पी० चिदम्बरम कनाडा और अमरीका की एक सप्ताह की यात्रा पर आज रवाना हुए। वे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की बैठकों में हिस्सा लेंगे और विदेशी निवेशकों को भारत के विकास में योगदान के लिए आकर्षित करने का प्रयास करेंगे। अपनी यात्रा के पहले चरण में वित्तमंत्री कल टोरन्टो में कनाडा- भारत व्यापार परिषद को संबोधित करेंगे। वे कनाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की परिषद के साथ बैठक भी करेंगे।
वित्त मंत्री के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि श्री चिदम्बरम टोरन्टो, ओटावा, बोस्टन और न्यूयार्क में इंडिया रोड शो कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। यहां उल्लेखनीय होगा कि श्री चिदम्बरम ऐसे समय जापान, जर्मनी, हांगकांग और सिंगापुर जैसे विश्व के बड़े वित्तीय केन्द्रों की यात्रा कर रहे हैं, जब भारत को चालू खाते में भारी घाटे का सामना कर पड़ रहा है। उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत को निवेश के एक आकर्षक लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना है।
इसके साथ ही साथ उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ताजिकिस्तान की तीन दिन की यात्रा पर आज नई दिल्ली से रवाना हुए। उनके साथ कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री तारिक अनवर और चार सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी गया है। श्री अंसारी आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, वहां के प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री तथा आर्थिक विकास और व्यापारमंत्री से बातचीत करेंगे।

सीबीआई करेगी सरकार को नंगा


सीबीआई करेगी सरकार को नंगा

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। सरकार के इशारों पर कत्थक करने वाली सीबीआई अब सरकार को ही आंखें दिखाती नजर आ रही है। कोलगेट मामले में यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। मामले की जांच कर रही सीबीआई के डायरेक्टर रंजीत कुमार सिन्हा ने सरकार के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। सिन्हा को 26 तारीख को कोर्ट में यह हलफनामा देना था कि जांच रिपोर्ट में कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कोई बदलाव नहीं करवाया है, लेकिन उन्होंने झूठा ऐफिडेविट देने से इनकार कर दिया है। इस मामले में सरकार के साथ-साथ सीबीआई भी बुरी तरह फंसती नजर आ रही है।
सीबीआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सीबीआई चीफ झूठी गवाही नहीं देंगे। वह कोर्ट में इस बात का खंडन नहीं करेंगे कि लॉ मिनिस्ट्री ने उन्हें कोलगेट स्कैम की स्टेटस रिपोर्ट डिसकस करने के लिए बुलाया था। 12 मार्च को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूछने पर सरकार ने दावा किया था कि सीबीआई ने इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट को पॉलिटिकल लीडरशिप के साथ शेयर नहीं किया था। कोर्ट का मानना था कि इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट को सिर्फ जजों के सामने पेश किया जाना चाहिए। कोर्ट की साफ हिदायत थी कि इस रिपोर्ट को नेताओं के साथ शेयर नहीं किया जाए।
मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने सीबीआई डायरेक्टर को इस बारे में ऐफिडेविट दाखिल करने को कहा था कि उन्होंने इस रिपोर्ट को न तो किसी के साथ शेयर किया है और न ही ऐसा भविष्य में करेंगे। अब 26 अप्रैल को सीबीआई डायरेक्टर को हलफनामा दाखिल करके कोर्ट को यह बताना होगा कि उन्होंने इस रिपोर्ट को नेताओं के साथ शेयर किया है या नहीं। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने सीबीआई चीफ को झूठा हलफनामा देने के लिए मनाने की खूब कोशिशें कीं, लेकिन सिन्हा झूठ बोलकर अपनी मुश्किलें नहीं बढ़ाना चाहते।
गौरतलब है कि 12 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान रिपोर्ट के कुछ पैराग्राफ पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करना चाहता था कि जांच रिपोर्ट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। ऐसे में कोर्ट ने इनडायरेक्ट तरीका अपनाते हुए सीबीआई डायरेक्टर को इस मामले में ऐफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया। जाहिर है, अगर सीबीआई डायरेक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के दावे के उलट कोई ऐफिडेविट फाइल किया तो यूपीए सरकार की बड़ी फजीहत होगी। विपक्ष ने पहले से ही इस मामले को लेकर हमले करना शुरू कर दिया है।

गोवा में बाहरी राज्यों के वाहनों पर कर


गोवा में बाहरी राज्यों के वाहनों पर कर

(सुनील सोनी)

पणजिम (साई)। गोवा सरकार ने कल से राज्य के बाहर पंजीकृत वाहनों पर प्रवेश कर लगाने का फैसला लिया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार दुपहिया वाहनों और सरकारी तथा वीआईपी वाहनों को यह कर नहीं देना पड़ेगा। नए कर के लागू हो जाने से सरकार को लगभग ५० करोड़ रूपए की वार्षिक आय होगी।
राज्य के परिवहन विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसके लिए गोवा में प्रवेश स्थलों पर कंप्यूटीकृत चौकियां बना दी गई हैं और कर्नाटक की सीमा से लगे पोलम , मोलम, करीम और महाराष्ट्र सीमा से लगे धरगल, केरनपानी और डोडामार्ग के निकट प्रवेश कर संबंधित सूचियां प्रदर्शित कर दी गई हैं।
वहीं दूसरी ओर गोवा में प्रवेश करने वाले वाहनों पर प्रवेश कर लगाने के राज्य सरकार के निर्णय का राज्य में तथा राज्य के बाहर विरोध किया जा रहा है। इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए गोवा की यूजीडीपी अर्थात यूनाइटेड ग्लोबल्स डेमोक्रेटिव पार्टी ने कहा कि यह निर्णय भारतीय संविधान के खिलाफ है। कर्नाटक स्थित बेलगाम चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडिस्टीज ने धमकी दी है कि अगर सरकार प्रवेश कर को समाप्त करने में असफल रहती है, तो गोवा के लिए माल और सब्जियों की ढुलाई रोक दी जाएगी। 

यादव तीसरी बार जदयू अध्यक्ष बने


यादव तीसरी बार जदयू अध्यक्ष बने

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। जनता दल यूनाईटेड की राष्ट्रीय कार्यकारणी की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन शनिवार को शरद यादव को लगातार तीसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी गई। जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि शनिवार को बैठक के पहले दिन शरद यादव को लगातार तीसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी गई।
ज्ञातव्य है कि पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले शरद यादव अकेले उम्मीदवार थे। जेडीयू के संविधान में पांच मार्च को संशोधन किया गया था जिसके जरिए शरद के तीसरी बार अध्यक्ष बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। शरद यादव 2006 में जॉर्ज फर्नांडिस के स्थान पर पार्टी के अध्यक्ष बनाए गए थे।
त्यागी ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दूसरे दिन कल कुछ प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इन प्रस्तावों में राजनैतिक, विदेश नीति, कश्मीर के मुद्दे और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की विदेशी नीति काफी ढुलमुल है और विदेशों में भारत की स्थिति काफी खराब हो गई है। विदेश नीति संबंधी प्रस्ताव में इसका स्पष्ट उल्लेख होगा। कश्मीर के बारे में प्रस्ताव में यह बताया जाएगा कि इस विषय पर जेडीयू की नीति किस प्रकार से बीजेपी से अलग है। जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रदेश के लोगों का मौलिक अधिकार है और इस बारे में कोई सौदेबाजी नहीं हो सकती है।

पूजा की थाली पर महंगाई का ग्रहण


पूजा की थाली पर महंगाई का ग्रहण

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। इस साल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं और अगले साल आम चुनाव होने की उम्मीद है। इसके बाद भी इस साल मंहगाई का जो ग्राफ सामने आया है वह वाकई हैरत अंगेज है। किसी भी राजनैतिक दल को मंहगाई की जरा भी चिंता नहीं सता रही है। लगता है मानो गरीबों का कोई धनी धोरी नहीं रह गया है।
नवरात्र में अपने आराध्य की पूजा में लगने वाली पूजा सामग्री भी महंगाई से अछूती नहीं है। महंगाई इस कदर है कि दूध, दही समेत फल भी महंगे हो गए हैं। पिछले नवरात्रों से तुलना करें तो इस बार पूजा के प्रयोग में आने वाली हर सामग्री चाहे वह दूध है या फिर रौली, सब पर महंगाई का असर साफ दिख रहा है। वहीं फलों सहित नारियल के दाम भी बढ़ गए हैं।
इससे पूजा की थाली सजा पाना आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है। नवरात्र शुरू होते ही 30 से 40 रुपये दर्जन मिलने वाले केले के दाम 50 रुपये पहुंच गए। जबकि 15 से 20 रुपये में मिलने वाला नारियल 25 रुपये में बेचा जा रहा है। सलकनपुर मंदिर में एक थाली जिसमें नारियल, धूप, रौल्ली, मोली शामिल है यह 51 और 101 रुपये में मिल रही है। यहीं नहीं, पिछले नवरात्रों से लेकर अब तक दूध के दामों में भी दो रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
इसके अलावा जोत के लिए प्रयोग होने वाले तिल के तेल के दाम भी दस रुपये, जबकि प्रभु के माथे पर लगाई जाने वाली रौली के दाम में 40 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। सूखा पंच मेवा 180 रुपये किलो मिल रहा है। इधर, फल विक्रेता रामलाल का कहना है कि पिछले नवरात्रों की तुलना में फलों के दामों में बढ़ोतरी हुई है। नवनीत अग्रवाल का कहना है कि पूजा की सामग्री के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रौल्ली के दाम चालीस रुपये प्रति किलो बढ़े हैं।
एक किराना व्यापारी जगदीश रावलानी ने बताया कि इस बार पूजन सामग्री व फलाहार लगभग 20 प्रतिशत महंगा हो गया है। इसके बावजूद मां की आराधना के लिए लोगों के उत्साह कम नहीं है और जमकर खरीदारी हो रही हैं। घी, धूप, बताशा, नारियल, चुनरी, कपूर, लौंग, पान, मेवे की सजावट, रुई, सिंघाड़े का आटा व माला, कलावा आदि महंगी हुई है। व्यापारी बताते हैं कि नवरात्र आते ही लोग माता के सजावट व पूजन की सामग्री रखने लगते थे, लेकिन अब सिर्फ काम चलाने भर का लेकर रस्म अदायगी करते हैं।

अब भी बिक रहे गुटखा पाऊच


अब भी बिक रहे गुटखा पाऊच

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जहां एक ओर गुटखे पर पाबंदी के मामले में सुको ने रिपोर्ट मांगी है और पान- मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध पर अमल के बारे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों से रिपोर्ट तलब की है वहीं नगर में गुटखे धड़ल्ले से बिक रहे हैं। वहीं इन बातों से अनजान औषधि विभाग कार्यवाही करने में सुस्त नजर आ रहा है। क्योंकि नगर में बड़े आसानी से गुटखा तिगनी कीमतों में लोगों को उपलब्ध हो रहा है। औषधि विभाग के इंस्पेक्टर अभी फिलहाल चालानी कार्यवाही में व्यस्त है। इतना ही नहीं गत दिवस पकड़ाया गुटखा पर भी अभी तक कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।  वहीं प्रतिबंधित गुटखा पाऊच राजश्री का भी निजाम जोरों से चल रहा है। इसे खाने वाले लोगों का कहना है कि हमें तो दो और तीन गुना दामों में यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस बात से यह साबित होता है कि नगर का औषधि विभाग कोर्ट के आदेशों को धता बताते नजर आ रहा है। 

सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है: रणदीप सुरजेवाला


सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है: रणदीप सुरजेवाला

(राजकुमार अग्रवाल)

कैथल (साई)। हरियाणा के लोक निर्माण एवं संसदीय कार्य मंत्री  रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है। सरकार द्वारा सभी वर्गों के कल्याण हेतू अनेक कल्याणकारी योजनाएं क्रियांवित की जा रही हैं। प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण प्रदेश की तरक्की एवं विकास है। हरियाण प्रदेश हिन्दुस्तान का प्रथम राज्य है, जहां पर गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले साढे 9 लाख परिवारों को इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत टंकियां एवं पानी के कनैक्शन मुफ्त उपलब्ध करवाए गए हैं। प्रति वर्ष प्रदेश के 8 लाख अनुसुचित जाति के विद्यार्थियों को छात्रवृति दी जा रही है। सुरजेवाला आज स्थानीय किसान भवन में लोगों की शिकायतें सुनने के पश्चात पार्टी कार्यक्रताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हर सिर को छत उपलब्ध करवाने के लिए प्रियदर्शनी आवास योजना की शुरुआत गई है तथा आगामी दो वर्षों में 2 लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध करवाए जाएंगे। सुरजेवाला ने कहा कि कैथल शहर व नगरपालिका क्षेत्रों के ठोस कचरे के निपटारे के लिए स्थानीय खुराणा रोड पर 5 एकड़ भूमि में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा नगर परिषद को 5 एकड़ भूमि निशुल्क हस्तांत्रित कर दी है। यह संयंत्र नगर परिषद द्वारा लगभग एक वर्ष में पूर्ण कर लिया जाएगा तथा इसकी स्थापना पर लगभग 10 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। इस ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र से एक तरफ जहां गंदगी से छुटकारा मिलेगा वहीं दूसरी तरफ इससे जैविक खाद के साथ-साथ कम मात्रा में ऊर्जा भी प्राप्त होगी। इस जैविक खाद को कृषि कार्यों के लिए प्रयोग किया जा सकेगा। कैथल जिला के सभी शहरी क्षेत्रों कैथल, कलायत, पूंडरी व गुहला के कूड़ा कर्कट के निपटारे के लिए यह संयंत्र प्रयाप्त होगा। इस संयंत्र के स्थापित होने पर जिला में ठोस कचरे का अच्छा प्रबंधन होगा तथा जिला वासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।  जिला के बच्चों को खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए खानपुर में खेल स्टेडियम स्थापित किया गया है तथा स्थानीय 21 सैक्टर में चौधरी छोटूराम इंडोर स्पोर्टस स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। इस अवसर पर दिलबाग मोर, नाजर सिंह दयौरा, रामनिवास मित्तल, सुदीप सुरजेवाला, डा. श्याम साहनी, मंगलेश शर्मा, धर्मपाल ठेकेदार, बलविंद्र मलिक, कपिल बंसल, नरेश सिरटा, सुरेंद्र अरोड़ा, बृजलाल मित्तल, सतपाल गुप्ता, भीम सिंह फौजी सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।  

गुरूद्वारों में मना बैसाखी पर्व


गुरूद्वारों में मना बैसाखी पर्व

(सचिन धीमान)

मुजफ्फरनगर (साई)। बैसाखी और खालसा पंथ के सृजना दिवस पर नगर के विभिन्न गुरूद्वारों में विशेष दीवान सजाये गये और रागी जत्थों ने खालसा पंथ के संस्थापक गुरू गोविन्द सिंह के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि खालसा पंथ की स्थापना अन्याय के विरूद्ध संघर्ष के लिए की गई थी। इस पंथ ने मानव जाति में एकता और भाईचारे का संदेश फैलाया।
बैसाखी पर्व पर खालसा पंथ की स्थापना की गई थी। नगर के विभिन्न गुरूद्वारों में इस मौके पर विशेष आयोजन किये गये। गांधी कालोनी स्थित गुरूद्वारा श्री गुरू सिंह सभा में चल रहे अखंड पाठ का आज समापन हुआ। इसके बाद वहां विशेष दीवान सजाया गया। इसमें ज्ञानी शोभा सिंह ने अरदास करायी। आयोजन में ढाड़ी जत्थे भाई हरनेक सिंह व उनके साथियों ने खालसा पंथ की महिमा का बखान करने वाले शबद प्रस्तुत किये। इनमें गुरू गोविन्द सिंह के मकान व्यक्तित्व के विषय में चर्चा की गई। आयोजन में गुरू सिंह सभा के महामंत्री इन्द्रजीत सिंह छाबड़ा, अमरजीत सिंह सिडाना, इन्द्रजीत सिंह सेखों, त्रिलोचन सिंह, देवेन्द्र सिंह नागपाल, राय सिंह, सुखदर्शन सिंह बेदी, धनप्रीत चन्नी बेदी, मंजीत सिंह हैप्पी, रतनागर कोहली मौजूद रहे। वहीं घास मंडी स्थित गुरूद्वारे में भी दीवान सजाया गया। शबद कीर्तन के माध्यम से खालसा पंथ तथा गुरू गोविन्द सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला। आयोजन में सरदार सतनाम सिंह, प्रतिपाल सिंह कथूरिया का सहयोग रहा।

मौनीदादा की 20वी पुण्यतिथि 16को


मौनीदादा की 20वी पुण्यतिथि 16को

(गौरव कुमार जैन)

सिवनी (साई)। परमहंसी मौनीदादा की 20वी पुण्यतिथि परमहंसी आश्रम मझगवॉ (कुडारी) में 16 अपै्रल को मनाई जा रही है। मौनीदादा की पुण्यतिथि पर आश्रम में विभिन्न अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें शाम 6बजे से महिमा स्मरण दिवस एवं रात्रि 7.30बजे से जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी के शिष्य ज्ञानयोगी स्वामी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज का प्रबोधन होगा इसके पश्चात एक काव्यगोष्ठी का आयोजन भी रखा गया है जिसमें प्रदेश के प्रसिद्व कवि राजसागरी(जबलपुर) एवं राकेश राठौर (जबलपुर) मुख्य आकर्षण होगें।कार्यक्रम के अंत में भंडारे का प्रबंध किया गया है।  

शनिवार, 13 अप्रैल 2013

खौफ का पर्याय बन गए थे प्राण


खौफ का पर्याय बन गए थे प्राण

(लिमटी खरे)

रूपहले पर्दे के अदाकार प्राण का नाम आते ही घरों की स्त्रीयों में एक दहशत छा जाती थी। सिनेमाघरों में प्राण को देखकर महिलाएं अपने बच्चों को अपने आंचल में छिपा लेती थीं। उस दौर में महिलाओं को लगता था कि पर्दे पर जो हो रहा है वह हकीकत में हो रहा है। प्राण इतना जीवंत अभिनय करते थे थे कि उनका विलेन का स्वरूप जी उठता था, इसलिए महिलाओ में उनके इमेज बेहद खराब बनी हुई थी। वास्तव में प्राण बेहद जिंदादिल इंसान थे। समय के साथ उन्होंने केरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में अपने आप को स्थापित किया। पहले वे विलेन के रूप में जबर्दस्त तरीके से स्थापित हो चुके थे।

बालीवुड के प्रसिद्ध विलेन और चरित्र अभिनेता प्राण सिकंद को फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के के नाम पर दिया जाता है। प्राण को तीन मई को विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में सम्मान दिया जायेगा. अपने छह दशक के कैरियर में 400 से अधिक फिल्में कर चुके प्राण ने 1998 में अभिनय को अलविदा कह दिया था। प्राण की हालत नाजुक है इसलिए वे शायद ही पुरूस्कार लेने जा पाएं।
12 फरवरी 1920 को दिल्ली में जन्म लेने वाले प्राण आज 93 वर्ष के हैं। प्राण का वास्तविक नाम प्राण किशन सिकन्द है। प्राण के पिता लाला केवल कृष्ण सिकंद एक सरकारी ठेकेदार थे, जो आम तौर पर सड़क और पुल का निर्माण करते थे। देहरादून के पास कलसी पुल उनका ही बनाया हुआ है। अपने काम के सिलसिले में इधर-उधर रहने वाले लाला केवल कृष्ण सिकंद के बेटे प्राण की शिक्षा कपूरथला, उन्नाव, मेरठ, देहरादून और रामपुर में हुई।
प्राण ने अपना कैरियर फोटोग्राफर के बतौर लाहौर में आरंभ किया था। प्राण एक्टर नहीं फोटोग्राफर बनना चाहते थे। प्राण ने आरंभ में महिलाओं का किरदार भी निभाया। उन्होंने सबसे पहले अपने शहर की रामलीला में सीता का किरदार निभाया था। प्राण को 1940 में ‘यमला जट’ नामक फिल्म में पहली बार काम करने का अवसर मिला।
जब मुंबई आए प्राण तब उन्होनें फिल्मों में काम करना आरंभ किया ओर प्राण की पहली सबसे बड़ी हिट फिल्म थी बीआर चोपड़ा की अफसाना (1951) रही। एक अनुमान के अनुसार प्राण ने आधी सदी तक रूपहले पर्दे पर अपनी जानदार शानदार अदाकारी का जलवा दिखाया और चार सौ से अधिक फिल्मों में काम किया।
प्राण ने अपनी अधिकांश फिल्मों में बरखुरदार शब्द का इस्तेमाल किया। उनकी लटकती जुल्फें और बरखुरदार उनकी पहचान बन गई थी। आजादी के उपरांत सन 1948 में रिलीज जिद्दी और बड़ी बहन से उनकी पहचान खलनायक के रूप में बननी शुरू हुई और यही से शुरू हुआ प्राण का नया सफर। जिसमे राम और श्याम में उनकी भूमिका दमदार रही। प्राण विलेन ही नहीं रहे उन्होंने उपकार में मंगल चाचा का किरदार निभाकर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।
जिस तरह पचहत्तर में आई अमिताभ बच्चन धर्मेंद्र अभिनीत शोले में गब्बर सिंह का किरदार अमजद खान ने निभाकर महिलाओं के दिल में दहशत पैदा कर दी थी, उसी तरह सत्तर के दशक के पहले प्राण को देखकर ही महिलाओं के मन से उन्हें बद्दुआ देना आरंभ कर देती थीं। प्राण की अदाकारी में इतना दम था कि वे महिलाओं और बच्चों के खासे दुश्मन बन बैठे थे।
निजी जिंदगी में प्राण अपनी इस इमेज से हटकर ही हैं। उनको खेलों का बड़ा शौक है। खिलाड़ियों की मदद को तो वह हरदम तैयार रहते हैं। बताया जाता है कि उन्होंने एक बार क्रिकेट अधिकारियों से कहा था कि वह कपिल देव की ऑस्ट्रेलिया में ट्रेनिंग का पूरा खर्चा उठाने के लिए तैयार हैं। प्राण चौरिटी के लिए क्रिकेट मैच भी खूब कराते थे। प्राण ने फुटबॉल टीम बॉम्बे डायनमॉस को भी मदद की थी।
माना जाता है कि इंडियन सोसायटी में प्राण का नाम इतना बदनाम था कि साठ से सत्तर के दशक के बीच किसी ने भी अपने बच्चे का नाम प्राण नहीं रखा। एक्टिंग प्राण की पूजा थी। उनके करीबी बताते हैं कि फिल्म जंजीर में यारी है ईमान मेरा की शूटिंग के दौरान उनकी पीठ में जबर्दस्त दर्द था, पर उन्होंने इस दर्द के बाद भी जमकर नाचा।
वैसे प्राण का पूरा नाम प्राण किशन सिकंद है। उनकी शादी 1945 में शुक्ला अहलूवालिया से हुई। उनसे उनके दो बेटे अरविंद, सुनील व एक बेटी पिंकी है। प्राण को कुत्ते बहुत पसंद हैं। साथ ही उन्हें पाइप कलेक्ट करने का भी बड़ा शौक है। उन्होंने कई देशों के पाइप इकट्ठे किए हुए हैं। एसे अदाकार को उम्र के इस पड़ाव में दादा साहेब फाल्के अवार्ड से नवाजना फक्र की बात है पर अगर यह सम्मान उन्हें दस बीस साल पहले मिल जाता तो वे अपनी खुशी का इजहार बेहतर तरीके से कर सकते थे। (साई फीचर्स)

पीएम लौटे स्वदेश


पीएम लौटे स्वदेश

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जर्मनी की तीन दिन की सफल यात्रा के बाद कल रात नई दिल्ली लौट आए हैं। इससे पहले बर्लिन में जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाने और आपसी हित के लिए अंतरसरकारी वार्ता की सफल व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया। दोनों देशों ने एक दूसरे के यहां कारोबारियों की आवाजाही आसान बनाने का फैसला किया है ताकि दोनों देशों में निवेश को प्रोत्साहन मिल सके। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दस समझौतों तथा सहमति ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भारत और जर्मनी ने व्यापार और द्विपक्षीय निवेश ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण, संस्कृति शिक्षा और शिक्षण, शोध और तकनीकी सहित कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए पहल की है। दोनों देशों का मानना है कि सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग से द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने उच्चस्तरीय अंतर सरकारी बातचीत की वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय लिया है साथ ही शिक्षा ग्रीन ऊर्जा और विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में आपसी संबंध और बढ़ाने के प्रति उत्साह दिखाया है।
पीएमओ के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि दोनों देशों ने साइबर अपराध, आंतकवाद से निपटने और सुरक्षा के बारे में एक दूसरे के अनुभव और कौशल के आदान प्रदान का भी ब्यौरा लिया है। भारत और जर्मनी ने ईरान से अपील की है कि वे परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के बारे में अंतरराष्ट्रीय विश्वास को बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मनकों को पूरा करें।
वहीं, संयुक्त बयान में भारत और जर्मनी ने ईरान से कहा है कि अपना अंतर्राष्ट्रीय दायित्व पूरा करे और अपने परमाणु कार्यक्रम के केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होने के बारे में दुनिया का विश्वास बहाल कराए। दोनों देशों ने परमाणु मुद्दे पर उत्तर कोरिया की भी निंदा की है।
उन्होंने परमाणु हथियार और विकिरण आधारित आतंकवाद के खतरे कम करने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने रासायनिक, जैविक तथा विषैले हथियारों से संबंधित समझौतों को पूरी तरह और असरदार ढंग से लागू करने का संकल्प दोहराया।

पंजाब की सभी पंचायतें भंग


पंजाब की सभी पंचायतें भंग

(ए.के.शर्मा)

चंडीगढ़ (साई)। पंजाब राज्य में पंचायत चुनावों की आहट सुनी जा रही है। पंजाब सरकार ने राज्य में सभी बारह हजार सात सौ पचहत्तर पंचायतें भंग कर दी हैं। इससे पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री सुरजीत सिंह राखरा ने सभी पंचायतों को भंग किये जाने की घोषणा करते हुए बताया कि चुनाव प्रक्रिया इस साल ३१ मई से पहले पूरी कर ली जाएगी।
चंडीगढ़ के निकट मोहाली में कल एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा कि चुनाव अधिसूचना एक सप्ताह के भीतर जारी की जा सकती है। उन्होंने पंजाब सरकार का यह संकल्प दोहराया कि पूरी पारदर्शिता बरतते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएँगे। 

ट्राई ने जारी किया टेरिफ आदेश का मसौदा


ट्राई ने जारी किया टेरिफ आदेश का मसौदा

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने कल टैरिफ आदेश का मसौदा जारी किया। इसमें डिजीटल केबल टी वी सिस्टम के लिए सेट टॉप बॉक्स के वास्ते मानक टैरिफ पैकेज का सुझाव दिया गया है और सभी सम्बद्ध पक्षों से राय मांगी गई है। नई दिल्ली में एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्राधिकरण ने मानक टैरिफ पैकेज का सुझाव दिया है जो डीटीएच, केबल ऑपरेटरों और सेवा उपलब्ध कराने वाली अन्य कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा।
इस महीने ३८ शहरों में केबल टीवी डिजिटीकरण के पहले चरण में ८५ प्रतिशत से अधिक काम पूरा हुआ है, जबकि अन्य शहरों में लगभग सौ प्रतिशत काम हो चुका है। बाकी शहरों में डिजिटीकरण जोरों पर चल रहा है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार ३८ शहरों में मल्टी सिस्टम ऑपरेटर और डायरेक्ट टू होम ऑपरेटर १३६ लाख सैटटॉप बॉक्स लगा चुके हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय केबल टीवी एनालॉग सिग्नल को डिजिटल मोड में बदलने के दूसरे चरण पर लगातार नजर रखे हुए है, जिसकी समयसीमा ३१ मार्च को समाप्त हो चुकी है। सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी उपभोक्ताओं की रूचि को ध्यान में रखते हुए लगातार इसकी प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।

नारायणन ने मांगी मांफी


नारायणन ने मांगी मांफी

(प्रतुल बनर्जी)

कोलकता (साई)। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम. के. नारायणन ने तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से हिंसक कार्रवाई के लिए प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों से कल माफी मांगी। विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नारायणन ने कहा कि वे कुलाधिपति के रूप में छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में हुई हिंसा को एक बदनुमा दाग बताते हुए कहा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ दुबारा नहीं होनी चाहिए।
राजभवन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस बीच पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग ने इस घटना की जाँच पुलिस के साथ-साथ प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व प्राचार्य अमोल मुखोपाध्याय से कराने के आदेश दिये हैं। कोलकाता पुलिस ने प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ की घटना के सिलसिले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता सहित पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारात ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा पर नई दिल्ली में हुए हमले के मुद्दे पर राज्यपाल एम. के. नारायणन की टिप्पणी के बारे में शिकायत की है।

मनीष तिवारी की राह में शूल बोता डीडी


मनीष तिवारी की राह में शूल बोता डीडी

(प्रदीप चौहान)

नई दिल्ली (साई)। सरकारी मीडिया दूरदर्शन द्वारा सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और कांग्रेस की फजीहत करना आरंभ कर दिया है। डीडी पर मुसलमानों के लिए प्रसारित होने वाले प्रोग्राम में सुअर के मांस से सूप बनाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। इस मामले में अल्पसंख्यक अब कांग्रेस को गरियाते नजर आ रहे हैं।
दूरदर्शन के उर्दू चौनल पर प्रसारित होने वाले एक प्रोग्राम से विवाद खड़ा हो गया है। डीडी उर्दू पर एक कूकिंग शो प्रोग्राम श्टेस्ट की बात हैश् नाम से प्रसारित होता है। 9 अप्रैल को इस प्रोग्राम का एक एपिसोड सूअर की रेसिपी पर फोकस था। इसमें खास करके सूअर के सूप बनाने और उसके टेस्ट को लेकर नुस्खे बाताए जा रहे थे। लेकिन, इस प्रोग्राम में खास करके सूअर की रेसिपी को शामिल करने की बात मुस्लिम दर्शकों के गले नहीं उतर रही है।
अब इस प्रोग्राम की मुस्लिम समुदाय के कई सेक्शन की तरफ तीखी आलोचना हो रही है। इस समुदाय के नेता और विद्वान प्रोगाम को प्रसारित करने के फैसले से हैरान हैं। इनका कहना है कि यह पूरी तरह से साफ है कि उर्दू चौनल देखने वालों में सबसे ज्यादा मुस्लिम दर्शक हैं, लेकिन चौनल ने इस एपिसोड को प्रसारित कर अपनी असंवेदनशीलता का ही परिचय दिया है। क्या इन्हें पता नहीं है कि इस्लाम में सूअर हराम है।
जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में इस्लामिक स्टडिज के प्रफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि उर्दू चौनल सिर्फ मुस्लिम खान-पान पर ही बात नहीं करता है। इसके बावजूद वैसे प्रोग्राम को प्रसारित करने से पहले सतर्क रहना चाहिए जिससे मजहबी सेंटिमेंट आहत होता है। इससे बचा जा सकता था।
इस विवाद पर डीडी उर्दू के प्रोग्रामिंग एग्जेक्युटिव एम. सेनगुप्ता ने कहा कि कूकिंग सीरीज श्टेस्ट की बात हैश्अलग-अलग पाक शैली, लाइफ स्टाइल पर एपिसोड प्रसारित करता है। इसमें कोइ खास समुदाय पर फोकस नहीं किया जाता है, लेकिन हम इस खास एपिसोड की तहकीकात करेंगे कि इसे क्यों प्रसारित किया गया।
इस्लामिक विद्वानों का कहना है कि मीडिया में छपने वाले आर्टिकल या प्रसारित होने वाले प्रोग्रामों को मजहबी प्रिज्म में नहीं देखा जा सकता है, लेकिन मीडिया को ऐसे मसले पर खुद ही संवेदनशील होकर सोचना चाहिए कि मजहबी सद्भावना को कैसे कायम रखा जाए। इस्लामिक स्कॉलर जीन्नत शौकत अली ने कहा कि हम लोगों के टेस्ट पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं। हालांकि, यह बात सच है कि डीडी उर्दू के ज्यादातर दर्शक मुस्लिम हैं। पवित्र कुरान में सूअर का मांस हराम है। ऐसे में कोई मुस्लिम इस प्रोग्राम को सराह नहीं सकता है।
कुछ लोगों ने इस एपिसोड को बिना छानबीन और सोचे समझे प्रसारित करने पर हैरानी जतायी है। उर्दू कॉलमिस्ट फिरोज बख्त अहमद ने कहा कि डीडी उर्दू एक खास समुदाय में बेहद लोकप्रिय है। मैं तो चकित हूं कि किसी ने सोचा तक नहीं कि इस एपिसोड से एक समुदाय की भावनाएं आहत होंगी।