शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

चार कोल ब्लाक निरस्त


चार कोल ब्लाक निरस्त

(प्रियंका)

नई दिल्ली (साई)। सरकार ने चार कोयला खंडों का आवंटन रद्द करने और तीन अन्य निजी कंपनियों की बैंक गारंटी भुनाने की अंतरमंत्रालय समूह की सिफारिशें मंजूर कर ली है। ये कंपनियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर उत्पादन और कोयला खानों को विकसित करने में विफल रही। इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि उनके मंत्रालय को अंतरमंत्रालय समूह की सिफारिशों पर फैसला लेने का अधिकार है।
श्री प्रकाश जायस्वाल ने कहा कि चार लोगों के डिलोकेट करने के लिए, तीन लोगों की गांरटी कट करने के लिए मैैं यह मानता हूँ जिन्होंने नोट्स का पालन नहीं किया है। जो गवरमेंट्स की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं ब्लॉक होल्डर्स, उनको जो सजा मिलनी चाहिए वो मिनिस्ट्री दे।
कोयला मंत्रालय के वक्तव्य में कहा गया है कि अंतरमंत्रालय समूह ने जिन चार कोयला खंडों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की है वे हैं-मैसर्स कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेट को आवंटित ब्रहमाडीह खंड, मैसर्स-फील्डमाइनिंग एण्ड इस्पात लिमिटेड को आवंटित चिनोरा और वरोरा दक्षिण खंड और मैसर्स-डोमको स्मोकलैस फ्घ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड को आंवटित लालगढ़ उत्तर खंड। इसके अलावा मैसर्स-श्री वीरांगना स्टील्स लिमिटेड को आवंटित मर्की मंगली दो, तीन और चार खंड के मामले में आवंटन रद्द करने और बैंक गारंटी में से राशि काटने की सिफारिश भी की गई है।

सुलग रहा है लखनादौन प्रकरण!


सुलग रहा है लखनादौन प्रकरण!

भूरिया हरिप्रसाद को नहीं नेहरू गांधी परिवार की इज्जत की चिंता!

(नन्द किशोर)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश में एक समय में कांग्रेस के गढ़ रहे सिवनी जिले में कांग्रेस के किले के ढहने को लेकर तरह तरह की अफवाहों अटकलों का बाजार गर्मा गया है। पिछले दिनों हुए नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में कांग्रेस द्वारा तलवारें रेत में गड़ाने के मामले को कांग्रेस के आला नेता विदिशा के राज कुमार पटेल के प्रकरण की संज्ञा दे रहे हैं। इस संबंध में प्रदेश प्रभारी बी.के.हरिप्रसाद का चेहरा अभी भी तमतमाया हुआ ही है। मामले में सूबाई स्तर के नेताओं को नापने की कवायद तेज हो गई है।
देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले में लखन कुंवर की नगरी लखनादौन में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनावों में कांग्रेस की ओर से अधिकृत की गई रोशनी मंद्रेला ने नामांकन वापसी के अंतिम दिन अपना नामांकन वापस ले लिया था। हद तो उस वक्त हो गई थी जब जिला कंाग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मंद्रेला का बी फार्म लेकर लखनादौन गए तब उन्हें रिटर्निंग आफीसर द्वारा इस बात की सूचना दी गई कि कांग्रेस की उक्त उम्मीदवार ने तो अपना नामांकन ही वापस ले लिया।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि नगर पंचायत लखनादौन में प्रत्याशी बड़ी ही मुश्किल से मिलने की बात कही जाकर दो बिना नामों वाले बी फार्म लिए गए थे। इन दोनों बी फार्म में भरे गए नामों वाले प्रत्याशियों ने कांग्रेस को ठेंगा दिखाते हुए अपने नाम वापस ले लिए थे।
उधर, लखनादौन ब्लाक कांग्रेस कमेटी के सूत्रों का कहना है कि अगर आला नेता चाहते तो लखनादौन में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के लिए कतार लगी हुई थी। और जिसे भी टिकिट दी जाती वह निश्चित तौर पर विजयश्री का ही वरण करता। ब्लाक कांग्रेस कमेटी के एक पदाधिकारी ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि इस प्रकरण से समूची जिला कांग्रेस शर्मसार है क्योंकि यह बस नाटक सिर्फ और सिर्फ दिनेश राय को फायदा पहुंचाने के लिए रचा गया था।
उक्त नेता ने कहा कि इसके पहले दिनेश राय द्वारा केवलारी से चुनाव लड़ने की हुंकार भरी गई थी। गौरतलब है कि केवलारी में हैहय कलचुरी समाज के मतदाताओं की तादाद बेहद ज्यादा है और इसके पहले पानी को लेकर हुए आंदोलन में भी कांग्रेस के शासनकाल में हैहय कलचुरी समाज की रीढ़ माने जाने वाले एक युवा की गोली लगने से हुई मौत (पलारी गोलीकाण्ड) के कारण समाज के लोग कांग्रेस से खफा भी थे।
इसके बाद नाटकीय घटनाक्रम आरंभ हुए। पर्यावेक्षकों की कथित रिपोर्ट के अधार पर एमपीसीसी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के साथ चर्चा के दौरान कहा था कि कांग्रेस के प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने से कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है। कांग्रेस जल्द ही एक शक्तिशाली निर्दलीय को अपना समर्थन दे देगी। इस संबंध में जब भूरिया के संज्ञान में यह बात लाई गई कि निर्दलीय का पुत्र दिनेश राय ही पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सिवनी के प्रत्याशी प्रसन्न मालू की जमानत जप्त कराने का कारक बना था, तब वे अचंभित रह गए।
इसी दौरान मध्य प्रदेश के प्रभारी महासचिव बी.के.हरिप्रसाद ने भी उस समय समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कांतिलाल भूरिया की ही तरह निर्दलीय को समर्थन देने की बात कही थी। इसके उपरांत जब उनके संज्ञान में दिनेश राय वाली बात लाई गई तो वे भी हत्प्रभ ही रह गए। हरिप्रसाद के करीबी सूत्रों का कहना है कि फील्डिंग कुछ इस तरह की गई थी कि दिनेश राय की माता श्रीमति सुधा राय को कांग्रेस का समर्थन दिलवाकर दिनेश राय के कांग्रेस में प्रवेश के मार्ग प्रशस्त कर दिए जाएं। बाद में दिनेश राय को कांग्रेस की टिकिट पर सिवनी विधानसभा से मैदान में उतार दिया जाए। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि वर्तमान में दिनेश राय द्वारा कथित तौर पर स्वप्रायोजित कार्यक्रम सिवनी विधानसभा क्षेत्र में रखकर अपनी तैयारियों तो आरंभ कर ही दी गईं हैं।
कहा जाता है कि जागरूक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की दूरंदेशी के चलते कांग्रेस के कुछ आला नेताओं की इस कवायद पर पानी फिर गया। फिर क्या था कांग्रेस ने लखन कुंवर की नगरी में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए वोट ही नहीं मांगे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सूत्रों का कहना है कि नगर पंचायत के लिए कांग्रेस की ओर से रोशनी मंद्रेला को टिकिट दिए जाने का निर्णय वाकई चौंकाने वाला ही था। सूत्रों की मानें तो रोशनी मंद्रेला कांग्रेस की सदस्य ही नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि आदिवासी बाहुल्य लखनादौन विधानसभा क्षेत्र आजादी के उपरांत कांग्रेस का गढ़ रहा है। पिछले दो बारों से यहां विधानसभा में कांग्रेस मुंह की खाती आई है, किन्तु इस बार नगर पंचायत में कांग्रेस की मजबूती का अधार इस बात से मिलता है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने लखनादौन विधानसभा में बढ़त हासिल की थी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक पदाधिकारी ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि संपूर्ण महाकौशल में कांग्रेस के दो नेताओं ने कांग्रेस का नास कर दिया है। सिवनी जिले से कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह चौथी बार विधायक बने हैं। उनके कद को देखकर यही कहा जा सकता है कि कम से कम सिवनी जिले में तो वे कांग्रेस को विजयी बनवा सकते हैं। बावजूद इसके पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से जिले में वे ही चुनाव जीत रहे हैं और बाकी सारी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ रही है।
बहरहाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव बी.के.हरिप्रसाद के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस मामले की गूंज कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी के दरबार तक हो चुकी है। कांग्रेस प्रत्याशी के रणछोड़दास बनने से कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्रों के कड़े तेवर हरीप्रसाद को परेशान किए हुए हैं। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि हरीप्रसाद ने इस मामले को राजकुमार पटेल और सुषमा स्वराज के विदिशा लोकसभा चुनाव की संज्ञा दी है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि दरअसल, राहुल और सोनिया गांधी को यह बताया गया है कि लखनादौन से पूर्व प्रधानमंत्री प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का बड़ा ही अनुराग रहा है। इसके अलावा सोनिया भी लखनादौन को तवज्जो देती आई हैं। रही राहुल गांधी की बात तो राहुल गांधी भी लखनादौन की यात्रा कर चुके हैं। इस सारी बातों पर पानी फेरते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने लखनादौन में टिकिट बटवारा सही नहीं किया है। जाहिर है मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और प्रदेश प्रभारी महासचिव बी.के.हरिप्रसाद को नेहरू गांधी परिवार की इज्जत की कोई चिंता ही नहीं है।
पीसीसी सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में अब खुर्दबीनी आरंभ हो गई है कि आखिर लखनादौन नगर पंचायत अध्यक्ष पद की टिकिट किसके कोटे से जारी की गई थी? क्या लखनादौन में कांग्रेस के पास इस गुमनाम चेहरे के अलावा और कोई चेहरा नहीं था? क्या कारण है कि कांग्रेस की जमानत जप्त करवाने वाले प्रत्याशी की मां के खिलाफ कोई दमदार प्रत्याशी नहीं उतारा गया, जबकि चुनावों के आरंभ से ही कांग्रेस की जमानत जप्त करवाने वाले उक्त प्रत्याशी ने अपने आकर्षक फोटो के साथ मीडिया में विज्ञापन और लखनादौन शहर में पोस्टर्स भर दिए थे।
पीसीसी सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अब आलाकमान ने कठोर कार्यवाही का मन बना लिया है। इस मसले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया का ढुलमुल रवैया ही भूरिया के लिए घातक साबित हो सकता है। इससे भूरिया ही संदेह के दायरे में आ चुके हैं। लखनादौन नगर पंचायत चुनावों के दौरान मीडिया से गलत बयानी और अंतिम समय तक कांग्रेस की रणछोड़दास प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेस द्वारा काई अनुशासनात्मक कदम तक ना उठाए जाने से अब पूरे मामले में निर्दलीय प्रत्याशी से सांठगांठ की सुई भी जाकर कांतिलाल भूरिया पर ही जाकर टिक गई है।

गिर रही है राहुल की टीआरपी


गिर रही है राहुल की टीआरपी

(महेश रावलानी)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस की नजर में देश के भावी प्रधानमंत्री राहुल गांधी की लोकप्रियता का ग्राफ दिनों दिन गिरता ही जा रहा है, जिससे सोनिया गांधी और प्रियंका वढ़ेरा चिंतित नजर आ रहे हैं। इंग्लैंड की मशहूर पत्रिका द इकोनॉमिस्टमें राहुल गांधी पर छपी एक टिप्पणी से कांग्रेस सकते में है। पार्टी ने लेख को सिरे से खारिज करते हुए राहुल के प्रति अपनी आस्था दोहराई है।
वहीं, दूसरी ओर विपक्ष को राहुल पर हमले का एक और मौका मिल गया है। सपा ने राहुल को पीएम पद के अयोग्य बताया तो बीजेपी ने ब्रांड राहुल अस्तित्व में न होने की बात कही। दरअसल, ‘डिकोडिंग राहुल गांधी, नाम की किताब के आधार पर द इकोनॉमिस्टमें छपा है कि राहुल बड़ी जिम्मेदारी से बचते हैं, क्योंकि उनमें जिम्मेदारी निभाने की भूख ही नहीं है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर नकारात्मक टिप्पणी के बाद विदेशी मीडिया के निशाने पर अब हैं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी। एक भारतीय लेखिका की किताब श्डिकोडिंग राहुल गांधीश् के आधार पर श्द इकोनॉमिस्टश् के एक ब्लॉग में लिखा गया है कि राहुल बड़ी जिम्मेदारी से बचते हैं, क्योंकि उनमें जिम्मेदारी निभाने की भूख ही नहीं है।
अपने युवराज पर हुए इस हमले से कांग्रेस तिलमिला गई है। पार्टी ने विदेशी मीडिया की टिप्पणियों को तूल देने की पद्धति को मानसिक गुलामी बता डाला। द इकोनॉमिस्ट के ब्लॉग को सिरे से खारिज करते हुए पार्टी ने ऐलान किया कि गुजरात चुनाव में राहुल ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे।
कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक मंच से चुनावों पर ज़ोर इसलिए दिया गया क्योंकि द इकोनॉमिस्ट ने लिखा है कि राहुल को 2014 के चुनावों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। राहुल गांधी के साथ बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने न तो अभी तक एक नेता के तौर पर अपनी योग्यता दिखाई है, और न ही बड़ी जिम्मेदारी के लिए उनके भीतर कोई तत्परता दिखती है। वो शर्मीले हैं। पत्रिका के अनुसार राहुल गांधी संसद में भी अपनी आवाज़ नहीं बुलंद करना चाहते, और कोई नहीं जानता है कि वो कितने काबिल हैं या फिर सत्ता और जिम्मेदारी मिलने के बाद वो आखिर क्या करेंगे।
भाजपा के साथ ही साथ शिवसेना भी राहुल के खिलाफ तलवार पजाती नजर आ रही है। उधर, विदेशी मीडिया में सवाल उठे तो समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी पर हमला बोला। पार्टी नेता मोहन सिंह ने कहा कि पिछले डेढ़ दो सालों में राहुल गांधी का ऐसा कोई बयान सुनने में नहीं आया जिससे पता चले कि वो किसी मसले पर गंभीर राय रखते हैं।

हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी की सुध ली सरकार ने


हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी की सुध ली सरकार ने

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। कार्मिक विभाग ने हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी की सुध लेना आरंभ किया है।  हिंदी दिवस के मौके पर सरकार ने अपने अधिकारियों से पूछा है कि जब हिंदी सॉफ्टवेयर की सुविधा तमाम दफ्तरों में कर दी गई है तो अब हिंदी से परहेज क्यों किया जा रहा है।
डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने सभी अधिकारियों को भेजे संदेश में कहा कि उन्हें अब कोई भी सरकारी निदेर्श हिंदी में ही निकालनी चाहिए और ऐसा महज अनुवाद तक सीमित नहीं हो। अभी अधिकतर आदेश अंग्रेजी में निकलते हैं और बाद में इसका हिंदी अनुवाद किया जाता है। डीओपीटी ने अगले एक साल में सभी आदेश हर हाल में हिंदी में ही देने को कहा है।
डीओपीटी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पहले हिंदी सॉफ्टवेयर की परेशानी होती थी। पिछले छह महीने के दौरान अभियान चलाकर इसे ठीक किया गया। डीओपीटी से मिली जानकारी के अनुसार महज एक साल में एक हजार से अधिक ऐसी शिकायतें मिली थी जिसमें हिंदी में काम करने में तकनीकी परेशानी आ रही थी।
हिंदी दिवस से ठीक पहले एक बार फिर अधिकारियों को हिदायत दी गई कि वे बहुत कठिन हिंदी का इस्तेमाल नहीं करें। ऐसी भाषा का उपयोग करने की हिदायत दी गई है जो आम लोगों को आसानी से समझ में आ सके। इस तरह का निदेर्श पिछले साल भी दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय के नियमों की परवाह नहीं एचएम को भी

सर्वोच्च न्यायालय के नियमों की परवाह नहीं एचएम को भी

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। कार के कांच पर किसी भी प्रकार की फिल्म लगाना प्रतिबंधित है- ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के हैं। इसी का हवाला देकर ट्रैफिक पुलिस नौ दिन से चार पहिया वाहन चालकों को पकड़कर चालान बना रही है लेकिन मामला एमपी के होम मिनिस्टर का हो तब क्या कहा जाएगा? एमपी के होम मिनिस्टर उमा शंकर गुप्त की भारी भरकम सरकारी गाड़ी में काले शीशे लगे हुए हैं।
उधर, इंदौर से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने बताया कि इंदौर संभाग की पुलिस महानिरीक्षक की कार में भी काले शीशे लगेए हैं। फिल्म लगी होने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने नियम का पालन करने के बजाय जुर्माना भरने के नियम को ही शिथिल करवा दिया।
आईजी अनुराधा शंकर पुलिस कंट्रोल रूम में मातहतों की बैठक लेने आई थीं। काली फिल्म चढ़ी उनकी कार जीरो टॉलरेंस जोन से गुजरी लेकिन उसे रोकने की हिम्मत किसी जवान या अधिकारी में नहीं हुई जबकि ट्रैफिक पुलिस ने एएसपी क्राइम व विधायक का चालान बनाया था। मीडिया ने आईजी से काली फिल्म को लेकर सवाल किए तो वे बोलीं कि कार पुलिस मुख्यालय से आई है। उस पर नियमानुसार फिल्म चढ़ी है। इस पर मीडियाकर्मियों ने उन्हें बताया ट्रैफिक पुलिस पिछले दिनों से जो कारों के चालान बना रही है उसमें तो सभी प्रकार की फिल्में उतरवाई जा रही हैं।
आईजी से मीडियाकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा ऐसा नहीं है। पारदर्शिता का प्रतिशत तय है। उसके हिसाब से ही चालान बनाए जा सकते हैं। इस पर मीडिया ने पूछा पुलिस कैसे नापेगी कि किसका प्रतिशत सही है या गलत तो उन्होंने एसपी ट्रैफिक डॉ. आशीष को निर्देश दिए हैं कि पुलिस पारदर्शिता मापने वाले यंत्र के साथ ही कार्रवाई करे।
एसपी डॉ. आशीष ने बताया पुलिस पारदर्शिता मापने वाले यंत्र बुलवाए जा रहे हैं। तब तक सिर्फ उन कारों पर कार्रवाई होगी जिनमें बिलकुल काली फिल्म लगी है और आर-पार देखना मुश्किल है। डीएसपी ट्रैफिक से जब लोगों ने कहा उनकी कारों में आरटीओ से अनुमति प्राप्त पारदर्शिता की फिल्में चढ़ी हैं तो किसी की नहीं सुनी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का निर्देश वाहन चालकों को पढ़वाया जिसमें लिखा था कि कार पर कोई भी फिल्म चिपकाने की अनुमति नहीं है। सिर्फ कंपनी फिटेड टिंटेड ग्लास (वो ग्लास जिसे कार निर्माता कंपनी लगाकर देती है) की अनुमति है।

मनमोहन मथ रहे अपने मंत्रिमण्डल को


मनमोहन मथ रहे अपने मंत्रिमण्डल को

(विपिन सिंह राजपूत)

नई दिल्ली (साई)। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह अपनी और कांग्रेस की छवि को चमकाने के लिए अब जल्द ही सत्ता का चेहरा मोहरा बदलने की जुगत में दिख रहे हैं। घोटालों और कुशासन के आरोपों से परेशान यूपीए-2 सरकार चेहरा बदल कर छवि चमकाने में जुट गयी है. इसी कवायद के तहत कुछ मंत्रियों की छुट्टी होने और कुछ नये चेहरों को सरकार में शामिल किये जाने की संभावना है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विदेश से लौट आयी हैं और उम्मीद जतायी जा रही है कि इस महीने के अंत में पितृपक्ष शुरू होने से पहले मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल होगा. सरकार से कुछ दागी मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है. वहीं, प्रणब मुखर्जी, वीरभद्र सिंह और विलासराव देशमुख की जगह भी भरी जानी है.
प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम बंगाल से कांग्रेस का कोई मंत्री नहीं है. दीपादास मुंशी या अधीर चौधरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य और बेनजीर मौसम नूर का नाम भी सामने आ रहा है. पंचायत चुनाव के पहले कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राज्य के कांग्रेस नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाये, ताकि वे तृणमूल कांग्रेस का सामना कर सकें. फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में तृणमूल के एक कैबिनेट मंत्री व छह राज्य मंत्री शामिल हैं.
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि आला कमान मंत्रिमंडल में उन नेताओं को शामिल करने को प्राथमिकता देगा जो पहले मंत्री नहीं बने हों यानी नया चेहरा हो. अधीर रंजन चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने की चर्चा पहले से ही है, क्योंकि मुर्शिदाबाद जिले की बहरमपुर लोकसभा सीट को उन्होंने वाम मोरचे के कब्जे से छीनकर कांग्रेस की झोली में डाल दिया था.
वह भी उस वक्त जब राज्य में वाम मोरचा की सरकार थी. इलाके में कांग्रेस का वर्चस्व बढ़ाने में चौधरी की अहम भूमिका रही है. दूसरी ओर दीपा दासमुंशी की पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत है. मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने की संभावना को लेकर पूछने पर चौधरी ने कहा कि यह फैसला कांग्रेस आला कमान को करना है. वैसे उनका लक्ष्य तो विकास ही है. मंत्रिमंडल में शामिल होने का यदि मौका मिला तो आम लोगों से जुड़ने व विकास कार्य करने का ज्यादा मौका मिल पायेगा. इधर सांसद व कांग्रेस प्रमुख नेता दीपा दासमुंशी का इस बारे में कहना है कि आला कमान जो भी फैसला लेगा उन्हें मंजूर होगा. बंगाल से मंत्रिमंडल में यदि किसी सांसद को शामिल किया जायेगा तो यह राज्य के लिए अच्छा और गौरव की बात होगी.
उधर, शशि थरूर फिर मंत्री बनने की कोशिश में हैं. आइपीएल में अनियमितता के मामले को लेकर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था. वह विदेश राज्य मंत्री थे. कहा जा रहा है कि मनीष तिवारी, मीनाक्षी नटराजन, ज्योति मिर्धा और मनिका टैगोर को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी को कैबिनेट मंत्री का पद मिल सकता है. कैबिनेट में चिरंजीवी का आना भी लगभग तय माना जा रहा है और रेणुका चौधरी को भी मंत्री बनाये जाने की अटकलें हैं. वहीं, राज्य मंत्री ऑस्कर फर्नांडीस और के रहमान खान प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री बनाये जा सकते हैं.
सलमान खुर्शीद और कपिल सिब्बल से एक-एक मंत्रालय का कार्यभार वापस लिया जा सकता है. खुर्शीद के पास फिलहाल अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय और कानून मंत्रालय हैं, जबकि सिब्बल के पास टेलिकॉम और मानव संसाधन विकास मंत्रालय हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खुर्शीद से अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय और सिब्बल से मानव संसाधन विकास मंत्रालय वापस लिये जा सकते हैं.
कैबिनेट में फिलहाल कम से कम आठ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं और कई मंत्री तो ऐसे हैं जिनके पास पार्टी में भी पद हैं. खुर्शीद और सिब्बल के अलावा वायलर रवि (लघु उद्योग मंत्रालय, साइंस ऐंड टेक्नॉलजी, अर्थ साइंस और प्रवासी भारतीयों का मंत्रालय), वीरप्पा मोइली (पावर और कॉर्पाेरेट अफेयर्स), आनंद शर्मा (कॉमर्स के साथ-साथ इंडस्ट्री एंड टेक्सटाइल), पवन कुमार बंसल (संसदीय कार्य और जल संसाधन) और कुमारी शैलजा (हाउसिंग ऐंड अर्बन पॉवर्टी एलिवेशन और कल्चर) इनमें प्रमुख हैं.

केबीसी में हारे एक लाख!


केबीसी में हारे एक लाख!

(दीपक अग्रवाल)

मुंबई (साई)। कौन बनेगा करोडपति को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट किया जा रहा है. अब तक के सारे केबीसी शो में किसी भी प्रत्याशी ने रकम भले ही ना जीती हो पर हारी भी नहीं है। यह पहला मौका था जब केबीसी के नाम पर एक महिला ने एक लाख रूपए गंवा दिए.
केबीसी में चयन और मुंबई में शूटिंग का झांसा देकर यहां एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी की गयी. पुलिस ने बताया कि ठगी का शिकार शास्त्रीनगर सेक्टर छह निवासी महिला बबीता गुप्ता की तहरीर में आज बताया कि 11 से 16 जून तक प्रतिभागियों के लिए लाइन खुली थी. इसमें बबीता ने भी प्रयास किया. 21 जून को उनके पास फोन आया कि उसका चयन केबीसी के लिए हो गया है और फोटो वेबसाइट पर भेज दो.
यह बताने पर कि उसके परिवार के चार सदस्य आयेंगे, तो फोन आया कि केबीसी में पहुंचने के लिए 25 हजार रुपये प्रति सदस्य के हिसाब से एक लाख रुपये जमानत राशि जमा कराने होंगे. यह रकम बैंक खाता नंबर देकर जमा करा ली गई. रुपया जमा होने के बाद फोन आया कि आपकी 19 जुलाई को फ्लाइट है और 20 जुलाई को शूटिंग है, लेकिन टिकट नहीं भेजा गया. ठगी की शिकार महिला के अनुसार उसने जब पता किया तो उसका नाम केबीसी में शामिल ही नहीं था.

एआईसीसी बनाम आल इंडिया कोल कांग्रेस: मोदी


एआईसीसी बनाम आल इंडिया कोल कांग्रेस: मोदी

(जलपन पटेल)

अहमदाबाद (साई)। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले महीने भर की अपनी यात्रा के दूसरे दिन गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा और एआईसीसी को ऑल इंडिया कोल कांग्रेसकह डाला. किसानों की खुदकुशी के मामले में कदम नहीं उठाने के आरोपों के बीच मोदी ने सूखे की मार झेलने वाले किसानों के लिए कृषि ऋण पर 300 करोड़ रुपये के ब्याज की छूट और बिजली बिल पर राहत देने की लुभावनी घोषणाएं भी कीं.
गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी और नीतीश के बीच टकराव का नया मैदान बनने की संभावनाओं के बीच मोदी ने राजग के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर अपने नाम से आपत्ति रखने वाले नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा कि जब बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दल ओसामा बिन लादेन जैसे लगने वाले लोगों का इस्तेमाल करते हैं तो कोई शिकायत नहीं करता लेकिन अगर वह रैली निकालते हैं तो दिक्कत हो जाती है.
अपनी स्वामी विवेकानंद युवा विकास यात्राके दूसरे दिन मोदी ने कहा, ‘पार्टियों ने बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान ओसामा बिन लादेन के एक डुप्लीकेट का इस्तेमाल किया और सब चुप रहे. अब जब मैं विवेकानंद के नाम पर रैली निकाल रहा हूं तो क्या समस्या है?’ कांग्रेस (एआईसीसी) को ऑल इंडिया कोल कांग्रेसकहते हुए मोदी बोले, ‘आपने हीरा, सोना, चांदी की चोरी सुनी होगी लेकिन क्या कभी कोयला चोरी होने के बारे में सुना है? कांग्रेस के लोगों ने 2 लाख करोड़ रुपये का कोयला चंपत कर दिया.
मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में गांधी परिवार पर भी निशाना साधा और कांग्रेस के दशा बदलने के लिए दिशा बदलोनारे की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस की दिशा वंशवाद के शासनकी है. उन्होंने कहा, ‘केवल एक परिवार को तवज्जो मिलती है. अगर वे किसी को प्रधानमंत्री बनाते हैं तो उसे कोई निर्णय लेने से पहले परिवार के पास जाना पड़ता है.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘कांग्रेस की दिशा भाई-भतीजावाद की, सांप्रदायिकता फैलाने की, विभाजन की राजनीति की और वादों को पूरा नहीं करने की है.मोदी ने कहा, ‘हम गुजरात में यह सब नहीं चाहते.किसानों के लिए घोषणाएं करते हुए मोदी ने कहा, ‘यह निर्णय लिया गया है कि सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित किसानों के कृषि ऋण पर ब्याज के रूप में 300 करोड़ रुपये की धनराशि का भार राज्य सरकार वहन करेगी.

संदिग्ध नक्सली धराया


संदिग्ध नक्सली धराया

(प्रतिभा सिंह)

पटना (साई)। बिहार के रोहतास जिले के चुटिया थाना क्षेत्र से पुलिस ने गुरूवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक संदिग्ध नक्सली को गिरफ्तार किया है. इस नक्सली पर 30 से अधिक मामलों में शामिल होने का आरोप है.
रोहतास जिले के पुलिस अधीक्षक मनु महराज ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने चुटिया क्षेत्र से खतरनाक नक्सली सीताराम नुनिया उर्फ गब्बर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न थाने में इस नक्सली के खिलाफ 30 से ज्यादा मामले दर्ज हैं.
गब्बर से पुलिस से लूट की एक राइफल और कई गोलियां बरामद की गई हैं. महाराज ने कहा कि नक्सली से पूछताछ की जा रही है तथा नक्सलियों के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है.

भाषा सिर्फ शब्दकोष नहीं


भाषा सिर्फ शब्दकोष नहीं

(दिव्या शर्मा)

नई दिल्ली (साई)। कोई भी भाषा सिर्फ शब्दकोष नहीं है. भाषा हमारी भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे मज़बूत जरिया होता है. हिंदी को सवैधानिक  तौर पर भारत की राजभाषा घोषित किया गया है, जिसे देश की जनता राष्ट्रभाषा का सम्मान देती है. भारत सहित पुरे विश्व में करीब ६०  करोड़ लोग हिंदी बोलते और लिखते है, जिनमे फिजी, मोरिशियस, गयाना, नेपाल जैसे देश शामिल है. भाषा विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में अन्तराष्ट्रीय महत्व मिलने वाली चाँद भाषाओँ में हिंदी प्रमुख रहेगी. पौराणिक भाषा संस्कृत से निकले शब्द हिंदी को १८ वीं शताब्दी में साहित्यिक भाषा का गौरव भी प्राप्त हो चूका है. सबसे सरल, लचीली और व्यवस्थित भाषा मानी जाने वाली हिंदी भाषा को हमारी न सिर्फ राष्ट्रभाषा बल्कि संपर्क भाषा भी बनाया गया. इसके बावजूद यह विडम्बना ही है की आज हमारी राष्ट्रभाषा का अस्तित्व खतरे में है. दिमागी तौर पर हम आज भी गुलाम ही है, शायद इसीलिए हिंदी भाषी राष्ट्र में  अंग्रेजी बोलने वालों को ज्यादा सम्मान प्राप्त है. औपचारिक तौर पर संपर्क भाषा कहे जाने वाली हिंदी में संपर्क करने पर आज हमारे ही देश में हीन द्रष्टि का सामना करना पड़ता है. अपना महत्व और काबिलियत साबित करने के लिए भी आज  अंग्रेजी का सहारा लेने को लोग मजबूर है.
जितनी हिंदी उपयोग की जा रही है, वह भी अशुद्ध या फिर अंग्रेजी आदि का मिश्रण ही होती है. पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव हमेशा से ही हमारे दिमाग पर हावी रहा है, जिसकी आग को मनोरंजक चौनलों और फिल्मों ने और हवा देने का काम किया है. फिल्मों में लगातार बढती  पाश्चात्य संस्कृति और हिंदी का घटता स्तर इसके लिए सबसे ज़यादा जवाबदार है.
भारत में हिंदी पत्रकारिता का आरम्भ आज़ादी से पहले कोलकत्ता और लाहोरे जैसे शहरों में हुआ था जो हिंदी भाषी शेत्र नहीं है, लेकिन तब भी हिंदी का निरादर नहीं हुआ करता था, जो आज की  औद्योगिक पत्रकारिता के दौर में हो रहा है. खुद को बेहतरीन हिंदी न्यूज़ चौनल कहने वाले भी आज राष्ट्रभाषा की दुर्गति करने में अग्रसर है. अशुद्ध व्याकरण, गलत शब्दों का चयन, यहाँ तक की स्त्रीलिंग और पुरलिंग का अंतर भी कुछ चौनल भुला चुके है.
 पत्रकारिता में हिंदी के लगातार घटते स्तर पर खेद व्यक्त करते हुए आई. बी. इन. 7 के पुनीत शुक्ला का  मानना है कि पढने में रुझान बढाने  के अलावा सबसे पहले हमे अपनी मानसिकता बदलने की ज़रुरत है.  टी.आर.पी. में अव्वल आने और खबर सबसे पहले दिखने की होड़ में भाषा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. पुनीत का कहना है की हर खबर को सनसनी बनाकर पेश करने का चलन खत्म करना होगा. हर चौनल एक ही कतार में दौड़ कर टी.आर.पी. बटोरने में लगा रहता है. उन्होंने कहा की आज देखे तो हर शब्द के आगे महा जोड़कर दिखाया  जा रहा है, जैसे महा-आन्दोलन, महा-बहस, महा-चर्चा आदि, जिनका कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि हम हिंदी के महत्व को बढाने के लिए कई प्रयास कर रहे है, जैसे दिग्गज कवियों ओर साहित्यकारों के द्वारा लिखी पंक्तियों का उपयोग कर रहे है, ताकि देश के युवा वर्ग को हमारा साहित्य स्मरण करवा सकें, जो आज पूरी तरह अंग्रेजी के गुलाम हो चुके है. उन्होंने बताया कि हालहि में प्रदर्शित फिल्म श्ज़िन्दगी न मिलेगी दोबाराश् में सिर्फ  अंग्रेजी,  क्लबों ओर शराब में डूबे युवाओं के जो संस्कार दिखाये है, वह केवल  फिल्म नहीं है. यह हमारे उभरते समाज की तस्वीर बन चुकी है.
 राष्ट्रभाषा का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है, जिसे एक आशा की किरण की ज़रुरत है. अगर प्रयास किये जाए तो यह किरण समाज को हिंदी पत्रकारिता के ज़रिये मिल सकती है. हमे समाज को राष्ट्रभाषा की गुणवत्ता और क्षमता याद दिलानी होगी. दस हजार मूल शब्दों वाली अंग्रेजी भाषा के सामने अपने आप में ढाई लाख शब्दों को समेटे हुए हमारी  राष्ट्रभाषा हिंदी की भव्यता देश भूलता जा रहा है, जो हमारी संस्कृति के लिए भी खतरे की ओर एक इशारा है.

औषधि से कम नहीं हल्दी


औषधि से कम नहीं हल्दी

(दीपाली सिन्हा)

नई दिल्ली (साई)। हल्दी शरीर या त्वचा पर पड़े पिगमेंटेशन को दूर करने में लाभप्रद है. थोड़ी-सी हल्दी को पीस कर उसमें नींबू की कुछ बूंदे मिलाइए. आप चाहें तो इसे खीरे के साथ भी मिक्सी में पीस कर लगा सकती हैं. चेहरे पर पिंपल आ गये हों तो हल्दी पाउडर और उसमें चंदन तथा पानी मिला कर पेस्ट तैयार करें और चेहरे पर लगाएं. इससे पिंपल जल्दी ही ठीक हो जायेंगे.
यह बॉडी स्क्रब का भी काम करती है. बस नहाने से पहले हल्दी पाउडर, पानी और आटे का पेस्ट बनाइए और इस हल्के हाथों से शरीर पर रगड़िए. ऐसा कई बार लगातार करने से आपका शरीर चमक उठेगा. अगर गर्भावस्था के दौरान आपके पेट पर स्ट्रेच मार्क्स आ गये हैं और अब जा नहीं रहे हैं तो, हल्दी को दही में मिला कर बनाये गये पेस्ट को रोज अपने पेट पर 6 मिनट तक लगाएं. धीरे-धीरे स्ट्रेच मार्क्स चले जायेंगे.
यदि आप मुंह पर अनचाहे बाल से परेशान हैं, तो चेहरे पर हल्दी लगाना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके प्रयोग से बालों की रंगत हल्की हो जाती है. अगर आपने अपने हाथों को किचन में खाना बनाते वक्त जला लिया है तो उस पर हल्दी और एलोवेरा जेल लगा लें. इससे जलन कम होगी और हाथों में दाग भी नहीं पड़ेगा.
हल्दी से दांत संबंधी बीमारी भी ठीक हो जाती है. दांतों में किसी प्रकार का संक्रमण होने पर हल्दी, सेंधा नमक और सरसों के तेल का पेस्ट बनाएं और इसको दिन में तीन बार अपने संक्रमण वाली जगह पर रखें. इसके बाद गुनगुने पानी से अपने मुंह को धो लें.
सुस्ती और थकान होने पर हल्दी और शहद को मिला कर पीने से राहत मिलती है. अगर आपके अंदर खून की कमी है तो भी यह मिश्रण आपके लिए रामबाण से कम नहीं होगा.

चला मुलायम पीएम बनने


चला मुलायम पीएम बनने

(विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। 2014 के आम चुनावों में अभी कुछ वक्त है, लेकिन सभी पार्टियों ने अभी से अपनी राजनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। मुलायम सिंह यादव भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं। कोलकत्ता में अपने तीन दिन के सम्मेलन में उन्होंने इस बात के संकेत दिए हैं कि जरूरी नहीं है कि चुनाव 2014 में ही हो। चुनाव उससे पहले भी हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है कि उनकी पार्टी बड़े दल के रूप में ऊभरकर सामने आएगी। वे प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल हैं या नहीं इस सवाल का जवाब उन्होंने एक राजनीतिज्ञ की ही तरह दिया। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं है, लेकिन मैं कोई साधु भी नहीं हूं।
इसका सीधा मतलब है कि उन्होंने इशारों ही इशारों में यह बात कह दी की भले ही वे प्रधानमंत्री की रेस में न हो लेकिन अगर समीकरण ऐसे बनते हैं या कोई उनसे कहे तो वे प्रधानमंत्री का पद संभालने को तैयार है।
उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का प्रदर्शन देखकर उन्होंने सीधे ही कहा कि वे अकेले चुनाव लड़ेंगे। जहां तक तीसरे मोर्चे की बात है उसका फैसला चुनावों के बाद लिया जाएगा। कल ही मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अगले आम चुनावों में समाजवादी पार्टी के बगैर कोई भी सरकार नहीं बना सकता। जहां तक तीसरे मोर्चे की बात है पिछले चुनावों में उन्होंने लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा चुनावों के पहले ही बनाया था। जिसके सफल होने पर मुलायम के प्रधानमंत्री बनने की बात कही जा रही था। उनके मोर्चे की हालत ऐसी हुई की उनको किसी ने मान ही नहीं दिया। लगता है मुलायम सिंह यादव इसी वजह से चुनावों के बाद तीसरे मोर्चे के समीकरण पर विचार करने की बात कर रहे हैं।
मुलायम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलने से परहेज करते हुए कहा कि हम सभी पार्टियों से अच्छे रिश्ते बना कर चल रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से हुई अपनी बातचीत के बारे में कहा कि हमारी बातचीत काफी अच्छी रही। इस दोनों ही दलों ने अपने राज्यों के विधानसभा चुनावों में काफी अच्छा किया है। इस बात से भी सभी अवगत है कि भले ही ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ हो लेकिन ममता और कांग्रेस का हर दूसरे मुद्दे पर छत्तीस का आंकड़ा रहा है। इसके साथ ही इन राष्ट्रपति चुनावों में भी दोनों की नजदीकियां सभी को देखने को मिली थी। इसके बाद अगर यह दोनों ही दल एक साथ आते हैं तो चुनावी समीकरण बदलने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। आडवाणी ने भी अपने ब्लाग में कहा था कि अगले आम चुनावों में प्रधानमंत्री गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई होगा। भले ही उनका इशारा मुलायम की ओर न हो, लेकिन इससे मुलायम सिंह यादव की थोड़ी राहत जरूरत मिल सकती है।
कांग्रेस को समर्थन देने पर मुलायम कड़े दिखे। उन्होंने सीथे कहा की वे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को समर्थन नहीं करेंगे। उनकी पार्टी सांप्रदायिकता के खिलाफ है। कांग्रेस को कभी भी सांप्रदायिकता के खिलाफ उनके समर्थन की जरूरत पड़ेगी। वे समर्थन देने के लिए तैयार है। उन्होंने महंगाई के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार महंगाई रोकने में अक्षम है। महंगाई को रोकने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के राजनीतिक हालात इस समय चल रहे हैं उससे 2014 से पहले ही आम चुनाव होने की संभावना दिख रही है।
यह सभी जानते हैं कि अगर 2014 से पहले चुनाव हुए तो निश्चित ही फायदा किसी को भी हो सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा। जिस तरह भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर सरकार इस समय घिरी है। उससे अगर अगले कुछ महीनों में चुनाव होते हैं तो कांग्रेस को नुकसान होना तय है। भाजपा भी यही चाहती है कि 2014 से पहले चुनाव हो। जिससे जनता जिसको भूलने की आदत है उसे कांग्रेस के भ्रष्टाचार और नाकामी को भूलने का समय न मिले और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो जाए। बहरहाल सभी ने धीरे-धीरे अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। कांग्रेस इन सभी मसलों पर चुप है। देखनेवाली बात होगी की कांग्रेस इस बार जनता को क्या जड़ी-बूटी सुंघाती है, जिससे वे अपनी इज्जत बचा सके।

नेटीजन और नेताजन


नेटीजन और नेताजन

संजय तिवारी

असीम असीमानन्द होने से बच गये। महाराष्ट्र सरकार ने उनके ऊपर जो देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था, वह इतना कमजोर था कि वहां के गृहमंत्री को कहना पड़ा कि सरकार आरोप वापस लेने पर विचार कर रही है। ठीक उसी वक्त हाईकोर्ट ने भी मुंबई पुलिस को तलब कर लिया और पहले ही खाली हाथ खड़ी मुंबई पुलिस ने हाथ झाड़कर रिमाण्ड लेने से मना कर दिया। असीम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया और अब वे जिस तरह हाथ हिलाते हुए आर्थर रोड जेल गये थे उसी तरह हाथ हिलाते हुए आर्थर रोड जेल से बाहर आ गये हैं। असीम त्रिवेदी प्रकरण का पटाक्षेप हो गया।
असीम त्रिवेदी के कार्टून भले ही अब देशद्रोही न रहे हों लेकिन क्या सचमुच अब मुक्त अभिव्यक्ति पर कभी कोई सवाल नहीं उठेगा? क्या अब कभी कोई सरकार, कभी कोई पुलिस, कभी कोई अदालत इंसान की मूल प्रवृत्ति के राह में रोड़ा नहीं अटकायेगी? सवाल जितना मुश्किल है, उतना ही पेंचीदा भी।
असीम त्रिवेदी को आपसे थोड़ा ज्यादा जानने का श्रेय इसलिए ले सकता हूं क्योंकि वे मेरे फेसबुक फ्रेण्ड हैं। कब से हैं, पता नहीं। लेकिन इंटरनेट के फेसबुक साम्राज्य में कहीं तो हमारा आमना सामना हुआ और फ्रेंड रिक्वेस्ट का आदान प्रदान हो गया होगा। आनलाइन दुनिया की इस भेंट मुलाकात के लिए बिल्कुल जरूरी नहीं होता है कि आप एक दूसरे को जानते हैं इसलिए ऐसी जान पहचान दोस्ती में बदल जाया करती हैं। यहां नियम कायदे उलटे हैं। यहां पहले दोस्ती है फिर जान पहचान का सिलसिला शुरू होता है। देश में नटखट नेट का इतिहास कोई बहुत पुराना नहीं हैं। कायदे से एक पीढ़ी का भी नहीं। कुल जमा दस सालों की सक्रियता। उसमें भी ब्लाग और सोशल नेटवर्किंग जैसी साइटों का अभ्युदय और उत्थान भी कोई चार पांच साल का खेल तमाशा है। कुल गुणा गणित और सरकारी जोड़ घटाने के बाद भी भारत में 12 करोड़ के आसपास इंटरनेट उपभोक्ता हैं जिसमें सिर्फ 14 करोड़ ब्राडबैण्ड उपभोक्ता हैं। बारह करोड़ का यह आंकड़ा भी इसलिेए दिखाई दे रहा है क्योंकि 59 फीसदी ऐसे उपभोक्ता हैं जो इंटरनेट के लिए मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।
हम एक मोटा अनुमान लगा सकते हैं कि देश में करीब 15 करोड़ लोग इंटरनेट उपभोक्ता हो चले हैं। हम अपनी आबादी देखते हैं तो भले ही ये पंद्रह करोड़ लोग पिद्दी दिखाई पड़ते हों लेकिन इंटरनेट उपभोग और सोशल साइट्स के इस्तेमाल दोनों ही मामलों में देश दुनिया के तीसरे पायदान पर आ खड़ा हुआ है। जिस सोशल नेटवर्किंग के कारण किसी असीम त्रिवेदी से फेसबुक पर फ्रेण्डशिप होती है उस फेसबुक पर भारतीयों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इसी तरह एक अनुमान है कि माइक्रोब्लागिंग साइट ट्टिटर पर भारतीयों की संख्या दो करोड़ के पार चली गई है। सोशल साइटों पर विकास की यह पहुंच कोई दशकों में नहीं हुई है। 2006 से पहले न तो फेसबुक का कोई साम्राज्य था और न ही ट्विटर की चिड़िया का कोई घोंसला था। लेकिन पांच छह सालों के अपने विस्तार काल में इन सोशल साइट्स ने इतना विकराल स्वरूप अख्तियार कर लिया कि सरकारों के सुरक्षित किले हिलने लगे।
एक तरफ हमारी सरकार सिर्फ कहती भर नहीं बल्कि उसके लिए प्रयास भी कर रही है कि देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हो तो दूसरी तरफ पिछले एक साल में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं जो सीधे सीधे उन्हीं नेटीजनों पर हमला बोला गया है जो इस संभावित संचार क्रांति के आखिरी उद्येश्य हैं। नेताजनों से नेटीजनों का पहला टकराव हुआ अन्ना आंदोलन के उफान के दौरान। जिस वक्त अन्ना का आंदोलन उफान पर था, सोशल साइटों पर भी नेताओं के खिलाफ गुस्सा तूफान की तरह तबाही मचा रहा था। नेटीजन शोसल नेटवर्किंग साइट को तहरीर स्क्वायर बना देना चाहते थे लेकिन सरकार ने उसे थियामन चौक बना देने का निश्चय कर लिया। इस टकराव का पहला स्वर सुनाई दिया तब जब संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने फेसबुक, ट्विटर और गूगल को बुलावा भेज दिया और फोटोशॉप जनित कुछ ऐसे चित्रों पर आपत्ति दर्ज की जिसमें उनके और उनके नेता सोनिया गांधी का बहुत भद्दे तरीके से मजाक उड़ाया गया था।
असीम के कार्टून भी उसी समय उभरे थे। वे और उनके मित्र आलोक मिलकर एक वेबसाइट चलाते थे जिस पर डाले गये अपने कार्टून को फेसबुक पर भी शेयर करते थे। असीम टीम अन्ना में तशरीफ लाना चाहते थे लेकिन यही अरविन्द केजरीवाल ऐसे ष्चरमपंथियोंष् को टीम अन्ना का सदस्य बनाकर अपनी उर्जा को आग के हवाले करने के लिए तैयार नहीं थे। फिर भी, महज 25 साल के असीम त्रिवेदी क्रांति से कम किसी समझौते के लिए तैयार नहीं थे इसलिए अन्ना के आंदोलनों और अनशनों के सक्रिय भागीदार बने रहे। उनकी क्रांति भावना कितनी पवित्र है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी इसी अगस्त में जब अरविन्द केजरीवाल की पहल पर जंतर पर राजनीतिक दल बनाने का ऐलान किया गया तो विरोध में असीम त्रिवेदी धरने पर बैठ गये। हालांकि उनकी तरफ किसी ने बहुत ध्यान नहीं दिया लेकिन हमारे फेसबुक फ्रेण्ड असीम और उनके फ्रेण्ड आलोक ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कार्टून वाली लड़ाई को आगे जारी रखने का निर्णय लिया।
असीम त्रिवेदी पर जो केस दर्ज हुआ है वह पिछले साल दिसंबर का है। खुद असीम ने अपने लिखे लेख में यह आरोप लगाया था कि मुंबई के एक कांग्रेसी नेता के इशारे पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। सच्चाई भी यही थी। कांग्रेस के बड़भैय्ये नेता से लेकर छुटभैय्ये तक सभी नेटीजनों के खिलाफ लड़ाई में शूरवीरों वाली लिस्ट में अपना नाम लिखा लेना चाहते थे। क्या कपिल सिब्बल और क्या मुंबई के पांडेय जी। अन्ना आंदोलन से विरोध की जो आग पैदा हुई थी उसपर पानी डालने से लेकर रेत मिट्टी डालने और लात मारकर आग का मुंह कुचल देने तक का सब काम किया गया। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर अब मुंबई हाईकोर्ट तक हर जगह कांग्रेसी कोशिशों को बड़ा झटका लगा।
लेकिन असीम के मामले में हुई कार्रवाई सिर्फ कांग्रेस के मुंह पर ही तमाचा नहीं है। यह उन सभी राजनीतिक दलों के नेताजनों को साफ साफ संदेश है कि नेटीजनों के साथ घालमेल करने की बजाय तालमेल करें। इक्कीसवीं सदी में जो नया मीडिया आकार ले रहा है उसमें बहुत कुछ आपत्तिजनक भी हो सकता है लेकिन हर आपत्ति का जवाब जेल ही नहीं होना चाहिए। असीम त्रिवेदी तो सिर्फ आहट और सुगबुगाहट है। अभी ये जो पांच करोड़ लोग किसी सोशल नेटवर्किंग साइट का सदस्य बन रहे हैं, असल में उस व्यवस्था की कब्र खोदने की सदस्यता भी ले रहे हैं जिन्होंने अब तक उनकी आवाज को कारपोरेट मीडिया के अंदाज से दबा रखा था। ये फेसबुक फ्रेण्ड भले ही एक दूसरे को उतना ही जानते हों जितना एक नेता अपने भाषण सुननेवाले को जानता है, लेकिन नेटलैण्ड के इन नये नेटीजनों का प्रभुत्व और प्रभाव उनसे भी कहीं ज्यादा हो चला है। नेताजनों के हक और हित में यही होगा कि वे इन नेटीजनों से टकराने की बजाय इन्हें आगे बढ़ जाने का सुरक्षित रास्ता दे दें।
(लेखक विस्फोट डॉट काम के संपादक हैं)