मंगलवार, 21 मई 2013

साई बाबा के नाम का व्यवसाईकरण बर्दाश्त नहीं: मण्डल


साई बाबा के नाम का व्यवसाईकरण बर्दाश्त नहीं: मण्डल

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। शिरडी के फकीर साई बाबा के नाम पर धर्म की दुकानें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। देश भर में साई बाबा के नाम के मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का ना तो कोई हिसाब किताब रखा जा रहा है ना ही उसका क्या उपयोग किया जा रहा है यह ही बताया जाता है। मंदिरों में रखी दान पेटियां कब और किसके सामने खोली जाती हैं इसका भी कोई अता पता नहीं होता है।
उक्ताशय की बात हिन्दु महासभा के प्रदेशाध्यक्ष संजय मण्डल ने आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि सिवनी में भी साई बाबा के नाम का व्यवसाईकरण आरंभ हो गया है, जो निंदनीय है। शिरडी के फकीर साई बाबा की जीवनी या साई सच्चरित्र का अध्ययन करने पर साफ हो जाता है कि वे माया मोह से कोसों दूर थे।
साई बाबा के नाम पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर अश्लील टिप्पणियां निश्चित तौर पर निंदनीय है। जनता का यह आक्रोश साई बाबा के लिए नहीं है। यह आक्रोश बाबा के मंदिर बनाकर उनका व्यवसाईकरण करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सिवनी में साईपुरम में साई मंदिर के साई उत्सव मेला बंद कराने की बात आज एक समाचार पत्र में मंदिर के सचिव प्रसन्न मालू के हवाले से प्रकाशित किया गया है।
श्री मण्डल ने कहा कि साई उत्सव मेला किसकी जमीन पर लगता है यह बात मंदिर प्रबंधन बताए। मंदिर में निर्माण से अब तक कितनी राशि किस मद में किसकी अनुमति से खर्च हुई है इसका ब्योरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता है। क्या कारण है कि असली साई भक्त एक एक करके इस मंदिर से दूर हो गए हैं।
हिन्दु महासभा के प्रदेशाध्यक्ष संजय मण्डल ने कहा है कि उन्होंने साई मंदिर ट्रस्ट की प्रस्तावित सूची समाचार पत्र में देखी है, जिसमें मुख्य कर्ताधर्ता मालू परिवार के चार सदस्यों के नाम हैं! इसमें से कुछ लोग भोपाल जाकर सैटिल हो गए हैं, सालों से रोज जाकर मंदिर में प्रसाद चढ़ा रहा है उन्हें आखिर इस ट्रस्ट से दूर क्यों रखा गया है?
श्री मण्डल ने कहा कि उन्होंने समाचार पत्र में पढ़ा कि इस ट्रस्ट की कुल चल संपत्ति एक लाख 54 हजार 220 रूपए है। उन्होंने सिवनी के साई भक्तों से यह पूछा है कि क्या दस सालों में साई मंदिर में भक्तों द्वारा महज डेढ़ लाख रूपए ही चढ़ाए गए हैं। वैसे देखा जाए तो 21 से 24 जनवरी तक चलने वाले साई पटोत्सव मेले जिसे कुछ कारणवश 19 से आरंभ कर दिया गया है में ही एक से डेढ़ लाख रूपए का चढ़ावा आ जाता होगा। इस मेले में दुकानें यहां तक कि साईकल स्टेंड तक किराए से दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में इस बात को भी लाया गया है कि सांसद विधायक निधि से यहां बनाया गया पहुंच मार्ग और मंदिर की पीछे वाली सीढ़ी मंदिर के बजाए निजी जमीन में बनाई गई है। इस पहुंच मार्ग के लिए सांसद या विधायक ने राशि कैसे दी इस बात की जांच भी आवश्यक है।
साई मंदिर को अघोषित पार्किंग बना दिया गया है। यहां भारी वाहन रात को पार्क होते हैं, एवं इनके चालक परिचालक मंदिर के अंदर कूलर पंखों का आनंद भी लेते हैं। पिछले दिनों यहां चोरी हो गई थी जिसमें परिस्थितियां इस बात की ओर इशारा कर रही थीं कि दीवार को बाहर के बजाए अंदर से तोड़ा गया था। मंदिर के गर्भ गृह में पैरों के निशान थे पर पुलिस को वहां तक नहीं जाने दिया गया।
समाचार पत्र में श्री प्रसन्न मालू के हवाले से यह भी कहा गया है कि मंदिर से लगे भूखण्ड को कुछ भू माफिया मंहगे दामों पर बेचना चाह रहे हैं। अगर कोई अपनी जमीन बेचना चाह रहा है तो इसमें मंदिर प्रबंधन के पेट में आखिर दर्द क्यों हो रहा है? वह उसकी निजी जमीन है उसका जो उपयोग उसे करना हो करने के लिए स्वतंत्र है। इस जमीन को सिर्फ 35 लाख रूपए में खरीदने की चर्चा भी शहर में हो रही है।
श्री मण्डल ने कहा कि यह सारी बातें वे कहना नहीं चाह रहे थे, किन्तु जब पानी सर के उपर आ जाए तो क्या किया जा सकता है। अब तो मंदिर प्रबंधन जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी पर ही प्रत्यक्ष परोक्ष तौर पर आरोप प्रत्यारोप पर उतर आया है तब मजबूरी में उन्हें भी इस तरह का कदम उठाना पड़ रहा है।

सिवनी में कांग्रेस की हकीकत


सिवनी में कांग्रेस की हकीकत

(लिमटी खरे)

कांग्रेस की नजरों में भविष्य के वजीरे आज़म राहुल गांधी मध्य प्रदेश दौरे के दरमियान कांग्रेस के सिपाहियों से रूबरू हुए। मध्य प्रदेश कांग्रेस में व्याप्त गुटबाजी पर राहुल गांधी ने दो टूक राय व्यक्त की है। राहुल ने गुटबाजी करने वाले नेताओं को जमकर नसीहत दी है। बाहरी उम्मीदवारों को कांग्रेस मौका नहीं देगी और दो से अधिक बार चुनाव हारे नेता टिकिट की उम्मीद ना करें। राहुल ने नेताओं को आईना दिखा दिया कि पहले स्थानीय निकाय के चुनावों में परचम लहराओ फिर सांसद विधायक की टिकिट की दावेदारी करो। राहुल ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में छरू या सात क्षत्रप टिकिट का फैसला नहीं करेंगे। कांतिलाल भूरिया, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमल नाथ, सुरेश पचौरी, अरूण यादव का बाकायदा नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी की बपौती नहीं है। इस दरमियान राहुल गांधी के समक्ष सिवनी के कांग्रेस के नेताओं ने अपनी पीड़ा का जमकर इजहार किया।
राहुल के इन तेवरों के उपरांत इसी परिपेक्ष्य में सिवनी जिला कांग्रेस में अगर झांक कर देखा जाए तो अन्य दलों या निर्दलीय के बतौर अच्छा परफारमेंस दिखाने वाले युवा नेताओं को घोर निराशा का ही सामना करना पड़ेगा क्योंकि जोड़ तोड़ की राजनीति के चलते कांग्रेस के नेताओं को पिछले दरवाजे से सहयोग कर अपना सिक्का जमाकर कांग्रेस के खाते से विधानसभा टिकिट की जुगत में लगे नेताओं की आशाओं पर राहुल गांधी का यह फैसला तुषारापात ही करेगा। भले ही कांग्रेस के जिला स्तर के आला नेता अब इन नेताओं को वक्त का इंतजार करो, हम रास्ता निकालेंगे, कहकर दिलासा दिलवाएं, पर यह बात भी सत्य है कि अगर किसी बाहरी उम्मीदवार को कांग्रेस द्वारा मैदान में उतारने का मन बनाया जाता है तो राहुल गांधी की इस घोषणा को ढाल बना दिया जाएगा।
जहां तक रही दो से अधिक बार चुनाव हारने वाले नेताओं को टिकिट ना देने की बात तो सिवनी में एक भी नेता ऐसा नहीं है जो दो से ज्यादा बार चुनाव हारा हो। इस लिहाज से अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना और प्रसन्न चंद मालू स्वाभाविक तौर पर सिवनी विधानसभा से एक बार फिर अपनी सशक्त उम्मीदवारी जता सकते हैं। यह बात भी सत्य है कि इन तीनों ही नेताओं को चुनाव जनता ने नहीं हरवाया है, कांग्रेस के भीतराघात से इन्हें पराजय झेलनी पड़ी है। सिवनी विधानसभा में शहरी मतदाताओं की तादाद बेहद ज्यादा है, शहरी क्षेत्र में पढ़े लिखे प्रबुद्ध वर्ग के बीच इन तीनों की छवि अच्छी है, फिर इनकी हार के कारणों को तीनों ने खोजा होगा और पाया होगा कि कांग्रेस ने ही उन्हें हरवाया है।
मध्य प्रदेश में चंद नेताओं की गणेश परिक्रमा कर नेता अपनी टिकिट पुख्ता कर लेते हैं। राहुल गांधी के सामने यह जमीनी हकीकत गई यह एक अच्छा संकेत है कि उन्होंने साफ कह दिया कि कांग्रेस किसी की बपौती नहीं है। यह बोलते हुए उन्होंने कांतिलाल भूरिया, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमल नाथ, सुरेश पचौरी, अरूण यादव का नाम लिया। इससे लगता है कि राहुल गांधी की खुफिया टीम ने उन्हें मध्य प्रदेश के जमीनी हालातों से रूबरू करवा दिया है। सभी क्षत्रपों ने अपना अपना क्षेत्र बांटा हुआ है। सभी को अपनी चिंता है, कांग्रेस के बारे में कोई सोच भी नहीं रहा है। होना यह चाहिए कि हर क्षत्रप को उसके क्षेत्र की जवाबदेही सौंप दी जाए। अगर वह अपने क्षेत्र में कांग्रेस को जिताकर लाता है तब ही उसे केंद्र या प्रदेश में संगठन अथवा सत्ता में पद दिया जाए। इससे कांग्रेस का जमीनी आधार तैयार होगा।
वर्तमान में नेताओं की सोच बन चुकी है कि सिर्फ और सिर्फ खुद को विजयी बनवाया जाए, अगर दूसरा विधायक या सांसद उनके क्षेत्र में जीत गया तो उनके पास केंद्रित पावर सेंटर बंटकर कमजोर हो जाएगा। यही कारण है कि कांग्रेस के क्षत्रप खुद तो चुनाव जीत जाते हैं पर उनके प्रभाव वाले क्षेत्र में कांग्रेस औंधे मुंह गिरी नजर आती है। मध्य प्रदेश कोटे से वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमल नाथ केंद्र में मंत्री हैं। 2004 से ये दोनों लगातार मंत्री हैं। राहुल गांधी को चाहिए कि इनसे पूछे कि इन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के अलावा प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए कितने दौरे किए, कितनी जनसभाएं की, कितने कार्यकर्ताओं से जाकर प्रदेश में कांग्रेस की जानकारी ली। निश्चित तौर पर राहुल अगर ऐसा करते हैं तो उनके सामने निराशाजनक परिणाम ही सामने आने की उम्मीद है, क्योंकि सभी जानते हैं कि प्रदेश कोटे से केंद्र में मंत्री बने नेताओं ने प्रदेश से पूरी तरह बेरूखी वाला रवैया ही अख्तियार किया हुआ है।
सिवनी जिला जो कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, अब वहां कांग्रेस का नामलेवा भी नहीं बचा है। अस्सी के दशक की समाप्ति पर सिवनी की झोली में आया संसदीय क्षेत्र भी परिसीमन में षडय़ंत्र के तहत छीन लिया गया और सिवनी के कांग्रेस के नेताओं ने मौन ही साधा हुआ है। सिवनी में पांच से चार विधानसभा क्षेत्र बचे हैं, जिनमें एक पर ही कांग्रेस का परचम लहरा रहा है। आखिर क्या कारण है कि कांग्रेस एक विधानसभा सीट तक ही सिमटकर रह गई है। आखिर क्या कारण है कि लखनादौन नगर पंचायत के चुनाव में कांग्रेस ने एक निर्दलीय को वाकोवर दे दिया था? क्या कारण है कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार और सिवनी मण्डला संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम के सांसद रहने के बाद भी बड़ी रेल लाईन के बारे में उन्होंने कोई पहल नहीं की? क्या कारण है कि 2008 से रूका फोरलेन का काम आरंभ करवाने सांसद ने लोकसभा में कोई प्रश्न नहीं किया। क्या कारण है कि सिवनी जिले में भाजपा के विधायको के अनेक मामले उछलने के बाद भी विधानसभा में एक भी मामला नहीं गूंजा? कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस और भाजपा के सांसद विधायक मिलकर जनता के सामने नूरा कुश्ती खेल रहे हों? जनता अगर जागी तो निश्चित तौर पर इस साल के अंत में वह इन नेताओं को हकीकत से दो चार करवा सकती है।

सोमवार, 20 मई 2013

अवैध पैथालाजी लेब्स के मामले में प्रशासन मौन!


अवैध पैथालाजी लेब्स के मामले में प्रशासन मौन!

(शरद खरे)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय में अवैध रूप से खून का करोबार जमकर चल रहा है। सिवनी में गैर कानूनी तरीके से संचालित होने वाले पैथॉलाजी लेब्स के मामले में जिला प्रशासन का मौन संदेहों को जन्म दे रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाश इलाके बारापत्थर में डीसीएच और एमडी चिकित्सक डॉ.ए.के.तिवारी के निवास पर, कृष्णा अस्पताल, थायरो केयर बसस्टेंड, दुर्गा चौक में डॉ.साहू, छिंदवाड़ा चौक में राजेंद्र चौधरी, लाईफ पैथोलाजी, बारापत्थर में रेड क्रास की दुकानों में पैथॉलॉजी लेब संचालित हो रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सालों से पैथॉलॉजी लेब्स के दस्तावेजों की जांच नहीं की गई है। यही कारण है कि शहर भर में कुकुरमुत्ते की तरह पैथॉलॉजी लेब खुल गए हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि इन लेब्स का काम सिर्फ और सिर्फ सैंपल एकत्र कर उसे मुंबई जांच के लिए भेजना है। बजाए इसके ये स्थानीय स्तर पर भी जांच कर रहे हैं जो अवैध ही है।

कांग्रेस, भाजपा के दरवाजे दिनेश राय के लिए बन्द


कांग्रेस, भाजपा के दरवाजे दिनेश राय के लिए बन्द!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रसन्न चंद मालू की जमानत जप्त करवाकर दूसरी पायदान पर रहने वाले दिनेश राय उर्फ मुनमुन के लिए प्रमुख राजनैतिक दल कांग्र्रेस और भाजपा के दरवाजे पूरी तरह बंद होते दिख रहे हैं। दोनों ही पार्टियों के अंदर दिनेश के प्रवेश की खबर ने तूफान खड़ा कर दिया था।
दिनेश राय उर्फ मुनमुन के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उनके हित चिंतकों ने उन्हें मशविरा दिया है कि अगर सिवनी से विधानसभा चुनाव जीतना है तो किसी पार्टी से टिकिट लेना आवश्यक है। सूत्रों ने आगे बताया कि दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने स्व.हरवंश सिंह के माध्यम से कांग्रेस के आला नेताओं को साधने का प्रयास किया था।
सूत्रों की मानें तो दिनेश राय उर्फ मुनमुन चाहते थे कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के सिवनी दौरे के दौरान वे कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर लें। वहीं दूसरी और जिला कांग्रेस कमेटी में जब इस संभावना के बारे में पतासाजी की गई तो कांग्रेस के अंदर दिनेश राय उर्फ मुनमुन की स्वीकार्यता नहीं के बराबर ही मिली।
कांग्रेस के अनेक सदस्यों ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर एक ही बात जोर देकर कही कि सिवनी को अगर बिहार बनाना हो तो दिनेश राय उर्फ मुनमुन को कांग्रेस में प्रवेश दिया जाए। वहीं अनेक कांग्रेसी दिनेश राय उर्फ मुनमुन के पूर्ववर्ती शराब के कथित कारोबार से नाराज बताए जा रहे हैं।
अचानक ही दिनेश राय उर्फ मुनमुन के भाजपा में जाने की बात सियासी फिजां में उभरी। जैसे ही यह बात सार्वजनिक हुई वैसे ही भाजपा का एक धड़ा दिनेश राय उर्फ मुनमुन की छवि को उकेरते हुए आला नेताओं के सामने इसका विरोध दर्ज करवाने लगा। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला भाजपा के नेताओं ने संगठन मंत्री के सामने दिनेश राय उर्फ मुनमुन के भाजपा में प्रवेश होने की स्थिति में अपना आक्रेाश जताया।
सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि भाजपा के संगठन मंत्री के समक्ष जब दिनेश राय उर्फ मुनमुन के भाजपा में प्रवेश की खबरों की बात रखी गई तो उन्होंने मौन रहकर इस बात का समर्थन किया। जिससे स्पष्ट हो रहा था कि भाजपा के आला नेताओं को भी इन्होंने सैट कर लिया था।
सूत्रों के अनुसार जब संगठन मंत्री मौन रहे तब जिला भाजपा के नेताओं ने अपना अपना विरोध दर्ज करवाना आरंभ किया। एक के बाद एक पदाधिकारियों द्वारा दिनेश राय उर्फ मुनमुन के खिलाफ जिस तरह से जहर उगला गया तब जाकर संगठन मंत्री के समक्ष यह बात स्पष्ट हो सकी कि वास्तव में दिनेश राय उर्फ मुनमुन की छवि क्या है?
 सिवनी में चल रही चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह के आकस्मिक निधन से अब समीकरण एकदम उलट पुलट गए हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस और भाजपा के दरवाजे अब दिनेश राय उर्फ मुनमुन के लिए पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।
दिनेश राय उर्फ मुनमुन के करीबी सूत्रों ने आगे कहा कि अब इन परिस्थितियों में दिनेश राय को यह मशविरा दिया गया है कि वे सार्वजनिक रूप से यह बयान देना आरंभ करें कि वे अपने प्रति समर्पित मतदाताओं (संभवतः उनके पास कार्यकर्ता नहीं हैं अतः कार्यकर्ताओं से पूछकर नहीं) की इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी इच्छा के बिना किसी भी राजनैतिक दल में नहीं जाएंगे।

0 साई बाबा को विवादित करने का कुत्सित प्रयास


0 साई बाबा को विवादित करने का कुत्सित प्रयास

साई उत्सव मेला बंद कराने का षणयंत्र बर्दाश्त नहीं: मालू

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के द्वारा बस स्टेंड स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान निर्मल बाबा पर की गई टिप्पणी और साई बाबा के हर गुरूवार होने वाले भण्डारों की आलोचना करने पर अब सोशल मीडिया में एक बहस आरंभ हो गई है। सोशल मीडिया में साई बाबा के बारे में अनर्गल टिप्पणियों से साई भक्तों में रोष व्याप्त है।
‘‘साई मंदिर ट्रस्ट को लेकर शहर के कुछ व्यापारी वर्ग के भूमाफियाओं द्वारा अनर्गल प्रचार किया जा रहा है, ताकि वे लोग मंदिर से लगी अपनी जमीन को उंची कीमतों पर बेच सकें। यह पूरा काम साई उत्सव मेलाको बंद कराने का कुत्सित षणयंत्र है।‘‘ उक्ताश की बात आज ऊॅ शिरडी साई मंदिर, नगझर के सचिव प्रसन्न चंद मालू ने आज दैनिक हिन्द गजट के कार्यालय में चर्चा के दौरान कही।
श्री मालू ने कहा कि विगत कुछ माहों से देखा जा रहा है कि कतिपय विध्न संतोषी तत्वों द्वारा हम सभी साई भक्तों के ईष्ट सच्चिदानंद सदगुरू साई नाथ महाराज से संबंधित विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां सोशल नेटवर्किंग वेब साईट फेसबुकपर की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि साई भक्त तो बाबा के सिद्धांत सबका मालिक एकपर चलकर सभी जाति, धर्म एवं वर्ग के लोगों पर एक सा भाव रखते हैं।
उन्होंने कहा कि साई भक्तों के धेर्य को उनकी श्रृद्धा को एसे तत्वों द्वारा गलत अंदाज में देखा जा रहा है। श्री मालू ने कहा कि साई भक्त कायर कतई नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा उनके ईष्ट देवता के संबंध में अनर्गल टिप्पणी की जाएंगी तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा।
श्री मालू ने कहा कि इस और अन्य मुद्दों को लेकर जल्द ही सिवनी जिले के साई भक्तों की एक बैठक का आयोजन साई मंदिर, नगझर में किया जाएगा जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। साई मंदिर समिति के सचिव प्रसन्न मालू ने कहा कि फेसबुक पर साई बाबा के नाम पर होने वाली अनर्गल टिप्पणी के बारे में आज सर्वधर्म के लगभग चालीस पचास लोगों ने कोतवाली जाकर नगर निरीक्षक को एक शिकायत पत्र भी सौंपा है।
उन्होंने बताया कि नगर निरीक्षक हरिओम शर्मा ने कहा कि वे इस मामले को पूरी गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे। श्री मालू ने आगे बताया कि इस संबंध में साई भक्त जल्द ही जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।
उन्होंने हिन्द गजट को फेसबुक पर शिरडी वाले साई बाबा के बारे में की गई अश्लील और अनर्गल टिप्पणियों के बारे में प्रिंट आउट भी उपलब्ध करवाए हैं जो वाकई आपत्तिजनक कहे जा सकते हैं। इसमें साई बाबा के बारे में अनेक विध्न संतोषियों ने तरह तरह की गलत टिप्पणियों की हैं। इसमें आचार्य पंडित के के शंखधार ने बाबा के बारे में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है।
ज्ञातव्य है कि बस स्टेंड लक्ष्मी नारायण मंदिर में जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा साई बाबा के भण्डारों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया था।

कुशल कुम्हार के अभाव में दम तोड़ती कच्ची मिट्टी!


कुशल कुम्हार के अभाव में दम तोड़ती कच्ची मिट्टी!

(लिमटी खरे)

‘‘माटी कहे कुम्हार से तू क्या रोंदे मोहे! इक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूंगी तोहे!! कबीर का यह दोहा बचपन में कोर्स की किताब में ना जाने कितने लोागें ने पढ़ा होगा। कबीर एवं अन्य कवियों के दोहों में कम शब्दों में बहुत ज्यादा सारांश और शिक्षा होती थी। दोहों के माध्मय से ना जाने कितनी शिक्षाएं इन प्राचीन लोगों द्वारा दी गई है। प्राचीन काल से इन हिदायतों शिक्षाओं को लोग अपने जीवन में उतारते आए हैं।
कच्ची मिट्टी को एक कुम्हार बहुत ही बारीकी और जतन के साथ सुराही, घड़ा, मर्तबान, गमला, गुल्लक ना जाने क्या क्या आकार देता है। कुम्हार के द्वारा मिट्टी को गढ़ने की कला वाकई में तारीफे काबिल ही मानी जाती रही है। कहा जाता है कि मिट्टी को गूंथकर, रोंदकर उसे चिकना बनाने के उपरांत कुम्हार उसे चाक‘ (बैलगाड़ी के पहिए के आकार का चका) पर रखकर मन माफिक शक्ल देता है।
कमोबेश सिवनी में शिक्षा के क्षेत्र में कुशल कुम्हारों की कमी साफ दिखाई पड़ती है। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट नई दिल्ली की प्रवेश परीक्षा में 48वां स्थान पाने वाली सिवनी की बेटी अपर्णा त्रिपाठी ने हिन्द गजट को दिए साक्षात्कार में इस बात को रेखांकित किया है कि सिवनी में बारहवीं तक तो बच्चा जैसे तैसे पढ़ाई कर लेता है, पर इसके उपरांत वह क्या करे कैरियर गाईडेंस के मामले में चहुंओर उसे अंधकार ही दिखाई देता है।
अपर्णा का सोचना शत प्रतिशत सच है। विदेशों में पांचवीं कक्षा से ही बच्चे की रूचि के हिसाब से उसे कैरियर चुनने में शिक्षक प्रशिक्षक मदद करते हैं। सिवनी में ना तो इंजीनियरिंग, ना ही मेडीकल, ना ही चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे प्रोफेशनल कोर्स के मामलों में कोई गाईड करने वाला है।
सिवनी में पालकों की मजबूरी यह है कि वे प्रोफेशनल कोर्सेस के लिए वरिष्ठ और कार्यरत लोगों के पास जाकर ही सलाह मशविरे के लिए मजबूर हैं। डाक्टर, इंजीनियर, सीए, सीएस, वकील, पत्रकार आदि काफी हद तक व्यस्त होते हैं इन परिस्थितियों में नए विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन हेतु उनके लिए समय निकालना कठिन होता है।
सिवनी में निजी और सरकारी तौर पर ना जाने कितनी शिक्षण संस्थाएं कार्यरत हैं। इन शिक्षण संस्थाओं में भी बच्चों के लिए कैरियर का गाईडेंस नहीं दिया जाता है। शालाओं में पढ़ाई का अभाव साफ दिखाई देता है, यही कारण है कि कोचिंग क्लासेस, ट्यूशन आदि में विद्यार्थियों की भीड़ देखते ही बनती है। इन कोचिंग या ट्यूशन में पालकों की जेब जमकर ढीली होती है।
पालकों की मरण से ना तो प्रशासन को लेना देना है और ना ही शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को। जब शाला में चाहे वह सरकारी हो अथवा निजी, में विद्यार्थी से एक बार शिक्षण शुल्क जिसे अंग्रेजी भाषा में ट्यूशन फीस कहा जाता है ले ली जाती है तो फिर क्या कारण है कि बच्चे को ट्यूशन या कोचिंग क्लास में भेजना पड़ता है जहां वह एक बार फिर ट्यूशन फीस देने को मजबूर होता है।
सैकड़ों की तादाद में कोचिंग क्लासेस में बच्चे पढ़ रहे हैं एवं एक एक बच्चे से पांच से पंद्रह हजार रूपए सालाना तक की ट्यूशन फीस ली जा रही है। क्या आयकर विभाग को इन कोचिंग क्लासेस के संचालकों की मोटी कमाई दिखाई नहीं दे रही है। निश्चित तौर पर आयकर विभाग और इन संस्थाओं के संचालकों के बीच सांठगांठ है तभी इन पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
बहरहाल, कैरियर गाईडेंस के लिए कुछ कोचिंग इंस्टीट्यूट्स ने एक दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया है, वे बधाई की पात्र हैं। बच्चों को किस दिशा में जाना चाहिए, उसकी क्या मंशा है इस बारे में उससे चर्चा कर उसे मार्गदर्शन अगर दिया जाए तो वह काफी हद तक अपना रास्ता चुन सकता है। वस्तुतः सिवनी में ऐसा होता नहीं दिखता।
आज पालक और बच्चे दसवीं के उपरांत अपना कैरियर चुनने के लिए समाचार पत्रों के साप्ताहिक पुल आउट, के साथ ही साथ इंटरनेट पर ही भविष्य खंगालने पर मजबूर हैं। जिनके परिचित इन क्षेत्रों में हैं वे तो अपनी अपनी उत्सुक्ता की शांति इन सीनियर्स से पूछकर कर लेते हैं पर गांव के बेचारे बच्चे क्या करें, जिनके मन में कुछ करने की अभिलाषाएं होती हैं, पर सहयोग के अभाव में वे दम ही तोड़ देती हैं।
कुछ साल पहले तक आरक्षित वर्गों के बच्चों के लिए कैरियर मार्गदर्शन का काम किया जाता था, पर अब वह भी बंद हो चुका है। गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ के मुंह में भी खून लग चुका है। एनजीओ भी अब बिना पैसे का काम करने में हिचकिचाहट ही महसूस करते हैं।
होना यह चाहिए कि सरकारी स्तर पर कुछ इस तरह के प्रयास हों कि आठवीं कक्षा के उपरांत ही बच्चों को कैरियर बनाने के लिए समय समय पर मार्गदर्शन मिले। इसके साथ ही साथ मोटा पैसा काट रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालकों को भी पाबंद किया जाए कि वे हर दो तीन माह में कैरियर गाईडेंस शिविर का आयोजन कर कच्ची मिट्टी को स्वरूप देने की कवायद करें।
समय रहते इस तरह के प्रयास आवश्यक हैं। सिवनी में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, स्वामी प्रज्ञनानंद, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा, भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत अधिकारी शील कांत शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत अधिकारी ऋषभ कुमार दिवाकर आदि ना जाने कितने उदहारण हैं जो सिवनी के भाल पर तिलक के रूप में कहे जा सकते हैं। जरूरत है तो कच्ची मिट्टी को गढ़कर स्वरूप देने की।

शनिवार, 18 मई 2013

साईं मंदिर ट्रस्ट पंजीयन की कार्यवाही जारी


साईं मंदिर ट्रस्ट पंजीयन की कार्यवाही जारी

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जबलपुर रोड़ पर नगझर स्थित शिरडी साई मंदिर के ट्रस्ट बनाने की कार्यवाही जारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश राजपत्र में विज्ञापन का प्रकाशन भी एक मार्च को कराया जा चुका है।
एक मात्र के राजपत्र में प्रकाशित विज्ञापन के अनुसार प्रारूप तृतीय (नियम 5 (1) देखिये) (मध्यप्रदेश सार्वजनिक लोक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा-4 के अन्तर्गत) में प्रकाशित किया गया है कि एतदद्वारा सर्व-साधारण को सूचित किया जाता है कि आवेदकगण उधवदास आसवानी पिता श्री हरगुनदास आसवानी निवासी सिंधी कॉलोनी सिवनी व अन्य 10 द्वारा धार्मिक उद्देश्यों की पूर्ति, शिर्डी सॉंई बाबा के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं साम्प्रदायिकता का नाश कर, सर्वधर्म समभाव की भावना का विकास करना है एवं गौ-रक्षा आदि के सहायतार्थ सार्वजनिक पुण्यार्थ चेरिटेबल ट्रस्ट के पंजीयन लिए आवेदन-पत्र मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951 की धारा-4 के अन्तर्गत ‘‘ऊॅं श्री शिरडी साईं मंदिर ट्रस्ट‘‘ साईं पुरम जबलपुर रोड, सिवनी तहसील व जिला सिवनी का लोक न्यास अधिनियम, 1951 (1951 का 30) की धारा-4 के अधीन अनुसूची में विनिर्दिष्ट सम्पत्ति के लिए लोक न्यास के रूप में पंजीकृत किये जाने के लिये आवेदन किया है, एतदद्वारा सूचना-पत्र दिया जाता है कि कथित आवेदन दिनांक 19 फरवरी 2013 को मेरे न्यायालय में विचार में लिया जायेगा।
किसी आपत्ति या सुझााव को करने का आशय रखते हुए कथित न्यास या संपत्ति में हितबद्ध कोई व्यक्ति को इस सूचना के प्रकाशन की तारीख से एक माह के भीतर दो प्रतियों में लिखित कथन प्रस्तुत करना चाहिए और मेरे समक्ष उपरोक्त तारीख पर या तो व्यक्तिशः अथवा पलीडर या अभिकर्ता के माध्यम से उपस्थित होना चाहिए, उपरोक्त अवधि के अवसान के उपरान्त प्राप्त आपत्तियों को विचार में नहीं लिया जायेगा।
अनुसूची
1. लोक न्यास का नाम: ‘‘ऊॅं श्री साईं मंदिर ट्रस्ट सिवनी‘‘
2. चल संपत्ति: 1, 54, 220.00 (रूपये एक लाख चौवन हजार दो सौ बीस रूपये)
3. अचल संपत्ति: ग्राम सिमरिया, , , नं. 99, रा. नि. मं. सिवनी-2, तहसील व जिला सिवनी स्थित भूमि खसरा नम्बर 113/3, रकबा 0.40 हे.।
सी.एस.शुक्ला,
अनुविभागीय अधिकारी एवं पंजीयक.

वे इंतजार करते रहे और सीधे उड़ गए सीएम!


वे इंतजार करते रहे और सीधे उड़ गए सीएम!

(शरद खरे)

सिवनी (साई)। आज सीएम ने एक बार फिर सिवनी को गच्चा दे दिया। शाम को उनका सुखतरा की अभी तक लोकार्पित नहीं हुई हवाई पट्टी पर जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि उनका इंतजार करते रहे और वे बालाघाट से सीधे हेलीकाप्टर से ही भोपाल के लिए उड़ गए।
कुरई पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मुख्यमंत्री आज बालाघाट प्रवास पर थे। उन्हें आज सिवनी भी आना था किन्तु उनका कार्यक्रम विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के निधन के चलते निरस्त कर दिया गया है।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि आज सूचना मिली कि संभवतः मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बालाघाट के अपने निर्धारित कार्यक्रम में लेट हो जाएं तो वे हेलीकाप्टर से सिवनी आएंगे फिर राज्य शासन के विमान से वे भोपाल के लिए उड़ जाएंगे। इस सूचना पर जिला कलेक्टर भरत यादव, जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इस मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष और महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर, सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया भी वहां उपस्थित थीं।
वहीं दूसरी ओर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से सोनल सूर्यवंशी ने विमानन विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया िकि चूंकि सीएम का कार्यक्रम जल्दी हो गया था, अतः उन्होंने चौपर से ही सीधे भोपाल जाने का निर्णय लिया। यही कारण था कि प्रदेश शासन का विमान सुखतरा नहीं पहुंचा। इन परिस्थिियों में जिला प्रशासन के आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनका वहां इंतजार करते ही रह गए।

हिन्द गजट में दिनेश राय के विरूद्ध टिप्पणी की गई है: चौधरी


हिन्द गजट में दिनेश राय के विरूद्ध टिप्पणी की गई है: चौधरी

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। ‘‘विकास पुरूश की छत्रछाया में राशन कार्ड को भटकते गरीब‘‘ शीर्षक समाचार आपके समाचार पत्र में प्रकाशि हुआ है जिसमें दिनेश राय जी के खिलाफ टिप्पणी की गई है। उक्ताशय का एक ईमेल सीएमओ लखनादौन की मेल आईडी से गत दिवस भेजा गया है।
ज्ञातव्य है कि 15 मई को अपरान्ह बारह बजे लखनादौन नगर पंचायत के पार्षद प्रमोद झारिया ने हिन्द गजट के कार्यालय मोबाईल से फोन करके दिनेश राय उर्फ मुनमुन के खिलाफ समाचार छापे जाने पर अपनी तल्ख आपत्ति दर्ज करते हुए सीधे सीधे दबंगई दिखाते हुए धमकाया था।
इस पूरे घटनाक्रम को आज के अंक में ‘‘दिनेश के खिलाफ समाचार छापने की जुर्रत कैसे की: झारिया‘‘ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। ज्ञातव्य है कि प्रमोद झारिया ने कहा था कि दरबारके पास आओ एवं अन्य पत्रकारों की तरह विज्ञापन लो और शांत हो जाओ।
इसके उपरांत एक ईमेल सीएमओ लखनादौन की मेल आई डी सीएमओ डॉट एलएकेएच एट द रेट जीमेल डॉट काम से अपरान्ह 3 बजकर 47 मिनिट पर आया। जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया था कि मेरे द्वारा वार्ड की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री ऑनलाईन एवं कलेक्टर को षिकायत की गई थी, जिसमें पटवारी एवं राजस्व अधिकारियों द्वारा वार्ड में गरीबी रेखा के कार्ड बनाये जाने में पटवारियों द्वारा की जा रही लापरवाही किये जाने की षिकायत की गई थी, आपके अखबार में इस संबंध में एक समाचार विकास पुरूष की छत्रछाया में राषन कार्ड को भटकते गरीब शीर्षक से समाचार प्रकाषित किया गया है। जिसमें दिनेष राय जी के विरूद्ध टिप्पणी की गई है। मेरे द्वारा नगर परिषद के अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं किसी भी कर्मचारी के विरूद्ध कोई षिकायत नही की गई है। गरीबी रेखा के कार्ड ना बनने से वार्डवासियों में रोष है। पटवारियों द्वारा गरीबी रेखा का सर्वे कार्य ठीक से नही किया जा रहा है । कृपया तत्संबंध में मेरे पक्ष को अपने समाचार पत्र में स्थान देने की कृपा करें।
इस ईमेल में किसी का नाम या हस्ताक्षर नहीं हैं। इस लिहाज से यह माना जा सकता है कि इस ईमेल को लखनादौन नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी द्वारा ही भेजा गया है। आश्चर्य तो इस बात का है कि राधेश्याम चौधरी जैसे मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चौधरी आखिर इस नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय की तरफदारी क्यों करने लगे।
सीएमओ श्री चौधरी के इस कृत्य से उन आशंकाओं को बल मिलता है जिसमें यह कहा जा रहा है कि नगर पंचायत लखनादौन की चाभी आज भी पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन के ही हाथों में है। कहा जा रहा है कि संभवतः यही कारण है कि नगर पंचायत लखनादौन के अंदर होने वाली हर गतिविधि में वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमति सुधा राय के स्थान पर पूर्व अध्यक्ष और सिवनी विधानसभा के निर्दलीय प्रत्याशी रहे दिनेश राय की तस्वीर चस्पा होती है।
(क्रमशः जारी)     

सरेआम बिजली चोरी! विद्युत मण्डल ने रफा दफा किया मामला!


सरेआम बिजली चोरी! विद्युत मण्डल ने रफा दफा कि
या मामला!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। आज अपरान्ह लगभग दो बजे यातायात पुलिस द्वारा अत्याधुनिक स्पीड ब्रकर्स को सड़कों पर ठोकने की कवायद में सर्किट हाउस के मेन के गेट के सामने मुख्य मार्ग पर ही तार बिछाकर की जा रही बिजली चोरी की शिकायत मध्य प्रदेश विद्युत मण्डल के विजलेंस और टाउन के कार्यपालन यंत्री को करने के बाद मौके पर पहुंचे सहायक यंत्री शहर श्री राउत ने मामले को रफा दफा कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि आज सर्किट हाउस चौराहे से कलेक्टर निवास को जाने वाले मार्ग पर यातायात पुलिस द्वारा प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर ठोंकने का काम चल रहा था। इस काम में सड़क में गड्ढा करने की गरज से ड्रिल मशीन को सीधे सीधे चौराहे के खंबों से होकर गुजरने वाले बिजली  के तारों से जोड़कर बिजली चोरी की जा रही थी।
इस संबंध में जब दैनिक हिन्द गजट ने कार्यपालन यंत्री शहर श्री शिववंशी से संपर्क किया गया तो उन्होंने तत्काल सहायक यंत्री को मौके पर भेजने और सहायक यंत्री के मौके पर पहुंचने की बात कही। उन्होंने कहा कि सहायक यंत्री ने उन्हें बताया कि दस पांच मिनिट के लिए लाईन से तार जोड़ दिए गए हैं, कोई खास बात नहीं है।
जब उनसे यह प्रश्न किया गया कि क्या आम नागरिक भी दस पांच मिनिट को सीधे लाईन से तार जोड़ ले तो क्या एमपीईबी इसी तरह का रवैया अपनाएगी,? के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि वे सहायक यंत्री से इस मामले का प्रकरण कायम करने का निर्देश दे रहे हैं।
इसके उपरांत जब इस संबंध में विजलेंस के कार्यपालन यंत्री श्री नागवंशी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वे अभी फील्ड में हैं और इस मामले में वे अपना स्टाफ तत्काल भेज रहे हैं। जब उनसे श्री शिववंशी के साथ हुए वार्तालाप के बारे में बताकर पूछा गया कि क्या यह नियमानुसार है? इसके जवाब में श्री नागवंशी ने कहा कि पता नहीं कैसे अधिकारी कोई खास बात नहीं है? बता रहे हैं? इन  पंक्तियों के लिखे जाने तक विजलेंस विभाग ने भी इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की है।
इस संबंध में जब सहायक यंत्री श्री राउत से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे जब मौके पर पहुंचे तब तक वहां काम करने वाले लोगों ने तार बिजली के खंबे से निकाल लिए थे। उस समय काम सर्किट हाउस से लाईन लेकर चल रहा था। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सर्किट हाउस से लाईन लेकर काम करना विधि संगत है? इसके जवाब में उनका कहना था कि जो बिजली की खपत होगी वह मीटर में आएगी? हम बिल वसूल लेंगे?
जब श्री राउत से यह पूछा गया कि अगर हम अपने घर या व्यवसायिक प्रतिष्ठान से किसी अन्य को व्यवसायिक या निजी प्रयोजन के लिए बिजली प्रदाय करेंगे तो यह वैध है या अवैध? इस पर उनका जवाब था यह अवैध होगा? जब श्री राउत से पूछा गया कि यह अवैध है तो सर्किट हाउस से बिजली लेने पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई? इस पर श्री राउत ने कहा कि सरकारी विभाग है सब चलता है?

साथ छोड़ती पुण्य सलिला


साथ छोड़ती पुण्य सलिला

(लिमटी खरे)

जिला मुख्यालय सिवनी से दक्षिण दिशा में गोपालगंज के समीप मुंडारा के एक कुण्ड से निकलकर पतली सी धारा के रूप में प्रवाहित होने वाली पुण्य सलिला बैनगंगा अपने हजारों किलोमीटर के सफर में ना जाने कितने कंठों और जमीन की प्यास बुझाती है। बैनगंगा के इस प्रवाह में अनेक छोटे बड़े बांध भी बने हुए हैं। सिवनी जिले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता सुश्री विमला वर्मा के सद्प्रयासों से बने एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध संजय सरोवर परियोजना जिसे भीमगढ़ बांध के नाम से जाना जाता है में इस छोटी सी धारा का प्रताप अलग ही प्रतीत होता है।
आज अगर भीमगढ़ बांध को जाकर देखा जाए तो इसका जलस्तर बहुत नीचे पहुंच चुका है। स्थिति अगर यही रही और मानसून थोड़ा सा भी विलंब से आया तो सिवनी जिले विशेषकर जिला मुख्यालय में पानी की त्राही त्राही मच जाएगी, उस वक्त प्रशासन को स्थिति संभालना बहुत ही दुष्कर हो सकता है।
सालों पहले जब भीमगढ़ बांध के निर्माण का काम चल रहा था, उस समय सिवनी से पश्चिम दिशा में छिंदवाड़ा रोड़ पर अवस्थित लखनवाड़ा के स्टाप डेम में इस पुण्य सलिला को बड़ा सा स्टाप डेम बनाकर रोका गया था। यह स्टाप डेम सिवनी के नागरिकों की काफी हद तक प्यास बुझाने में सक्षम था। आज लखनवाड़ा में बैनगंगा की स्थिति दयनीय है। किसी को भी इसकी दुर्दशा से कोई सरोकार नहीं है।
बारिश के दिनों में जब बैनगंगा नदी उफनाती थी तब इसके रोद्र रूप से लोग सिहर उठते थे। लखनवाड़ा, मुगवानी रोड़ आदि पर इसका आवेग देखने भीड़ लगी होती थी। लोग अपना काम धंधा छोड़कर पुल के उपर से बहते पानी को देखने जाते लगता मानो मेला लगा हो। कई रेहड़ी वाले ठेले वाले तो बाकायदा अपनी दुकाने वहां लगा लेते हैं बारिश के दिनों में।
बैनगंगा नदी के उद्गम स्थल की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। जब तक संत आबू वाले बाबा का डेरा बैनगंगा के उद्गम मंुडारा में रहा तब तक यहां रौनक हुआ करती थी। अब मुंडारा का नाम लोगों की जुबान से विस्मृत होता दिख रहा है। घर के जोगी जोगड़ा, आन गांव के सिद्ध‘‘ की तर्ज पर सिवनी में मुंडारा का महत्व काफी घटता जा रहा है वहीं अन्य जिलों में जहां से होकर पुण्य सलिला गुजरती है, वहां मुंडारा को बहुत ही सम्मान की नजर से देखा जाता है।
अगर मुंडारा को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जाए तो निश्चित रूप से यहां इसकी अनेकानेक संभावनाएं हैं। वैसे भी सिवनी जिले के पर्यटन स्थल बुरी तरह दुर्दशा के शिकार हो चुके हैं। फोरलेन मार्ग से महज चार पांच किलोमीटर की दूरी होने पर यह लोगो के आकर्षण का केंद्र बन सकता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
बैनगंगा नदी सिवनी जिले में लगभग साठ किलोमीटर का सफर तय करती है। एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध भीमगढ़ से जिला मुख्यालय सिवनी सहित अनेक गांवों को जलापूर्ति के साथ ही साथ दाई और बाईं तट नहर योजना के द्वारा किसानों को भी खेती के लिए विपुल मात्रा में पानी प्रदाय किया जाता है।
कितने आश्चर्य की बात है कि सिवनी जिले में भीमगढ़ बांध को अगर छोड़ दिया जाए तो इन साठ किलोमीटर के मार्ग में पुण्य सलिला को रोकने स्टाप डेम जैसी व्यवस्था तक नहीं की गई है। अगर जगह जगह इसका पानी रोक दिया जाता तो रूके पानी से आसपास के जल स्त्रोत रिचार्ज हो सकते थे। वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं है।
इसका सीधा कारण सिवनी जिले के सांसद विधायकों और उनके लग्गू भग्गुओं की अदूरदर्शी सोच है। किसी ने भी किसानों के बारे में सोचने की जहमत नहीं उठाई है। यही कारण है कि जिले के किसानों की रीढ़ टूटी हुई है। केवलारी पलारी क्षेत्र में सुश्री विमला वर्मा ने दूर की सोच को रखते हुए नहरों का जाल बिछाने का काम आरंभ किया था, क्योंकि वे केवलारी से विधायक थीं। उन्ही की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज केवलारी और पलारी के कुछ हिस्सों को उपज के मामले में पंजाब माना जाता है।
जिला प्रशासन के मुलाजिम भी जिला कलेक्टर के उस आदेश को जिसमें पानी का उपयोग घरेलू के अलावा अन्य किसी भी तरह का नहीं किया जाए, का खुला माखोल उड़ाते दिख रहे हैं। जिले भर में ना जाने कितने स्थानों पर पानी का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। ना जाने कितनी मोटर, लगाकर सार्वजनिक जल स्त्रोतों से पानी खींचा जा रहा है, पर सरकारी अमला शांत ही दिख रहा है।
आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि सिवनी शहर में ही बबरिया, दलसागर, बुधवारी, मठ के साथ ही साथ रेल्वे स्टेशन के पास दो तालाब होने के बाद भी रियाया पानी को सदा ही तरसती रहती है। बैनगंगा नदी से सभी को बहुत ज्यादा उम्मीदें होना स्वाभाविक ही है। इस नदी का इस तरह समय के पहले ही साथ छोड़ देना शुभ संकेत तो कतई  नहीं माना जा सकता है।
भीमगढ़ बांध में जो हिस्सा अभी सूखा हुआ है उस हिस्से में मशीनों के माध्यम से खुदाई करवाई जा सकती है। इससे निकलने वाली मिट्टी भी बहुत उपजाउ होगी और किसानों के लिए वह वरदान से कम नहीं होगी। इससे भीमगढ़ बांध में जल भराव क्षेत्र में बढोत्तरी हो सकती है।
सांसद विधायकों से उम्मीद करना तो बेमानी ही होगा। जिला प्रशासन से ही अपेक्षा की जा सकती है कि समय रहते बैनगंगा नदी के गहरीकरण का काम प्राथमिकता पर करवाया जाए, साथ ही जिले में बैनगंगा के मार्ग में छोटे छोटे स्टापडेम अवश्य बनवाए जाएं। लखनवाड़ा के स्टाप डेम को दूरूस्त करवाया जाए, ताकि भविष्य में गर्मियों के मौसम में पुण्य सलिला भरी पूरी रहे।