सुधा राय को दे सकती है कांग्रेस अपना समर्थन!
निर्धारित रणनीति के तहत चली जा रही चालें
(संजीव प्रताप सिंह)
सिवनी (साई)। जिले की नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में असमंजस का कुहासा अभी हट नहीं पाया है। कांग्रेस के उम्मीदवारों रोशनी मंद्रेला और हेमलता कहार के नामांकन वापस लेने के उपरांत अब मैदान में तीन ही प्रत्याशी बचे हैं जिनमें से दो निर्दलीय हैं। कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने की बात से लगने लगा है कि कांग्रेस का उंट अब निर्दलीय सुधा राय के पक्ष में ही बैठने जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की ओर से रोशनी मंद्रेला और हेमलता कहार ने नामांकन भरे थे। बताया जाता है कि जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हीरा आसवानी कांग्रेस की ओर से बी फार्म लेकर रिटर्निंग आफीसर के पास पहुंचे तब उन्हें भान हुआ कि कांग्रेस का उम्मीदवार तो अपना पर्चा वापस ले चुका है। चर्चाओं के अनुसार यह सब कुछ निर्धारित रणनीति का ही हिस्सा था।
अब नाम वापसी की तिथि समाप्त होने के उपरांत लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवार ही मैदान में बचे हैं। इनमें से भाजपा की कोशल्या उकास और धरतीपकड़ के नाम से मशहूर नूर बी निर्दलीय तौर पर हैं। नूर बी ने पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई जा चुकी है।
इसके अलावा नगर पंचायत लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय की माता जी श्रीमति सुधा राय निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। यहां उल्लेखनीय होगा कि नगर पंचायत लखनादौन के अध्यक्ष रहते हुए दिनेश राय द्वारा सिवनी विधानसभा का चुनाव निर्दलीय के बतौर लड़ा था। उस समय कहा जा रहा था कि दिनेश राय को कांग्रेस का समर्थन परोक्ष तौर पर हासिल था।
जैसे ही नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों की घोषणा हुई और यह महिला के लिए आरक्षित हुआ, तभी श्रीमति सुधा राय की जीत की भविष्यवाणियों के साथ यह कहा जा रहा था कि कांग्रेस और भाजपा मैदान में कमजोर प्रत्याशी ही उतारेगी ताकि सुधा राय की जीत के मार्ग प्रशस्त हो सकें।
जिस नाटकीय तरीके से कांग्रेस के प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस लिया और उसके बाद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया द्वारा निर्दलीय को समर्थन देने की बात कही गई उससे लगने लगा है कि कांग्रेस के आलंबरदारों के इशारे पर सब कुछ निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही हो रहा है।
अब कहा जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा सिवनी विधानसभा के निर्दलीय प्रत्याशी रहे और लखनादौन नगर पंचायत के निर्दलीय अध्यक्ष रहे दिनेश राय के पक्ष में आरंभ से ही कांग्रेस का रूझान रहा है। अगर कांग्रेस को पानी पी पी कर कोसने वाले दिनेश राय की माता श्रीमति सुधा राय के पक्ष में अगर कांग्रेस हथियार डाल दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि इसी तर्ज पर पहले भी कांग्रेस द्वारा वाकओवर दिए जाने की घटनाएं प्रकाश में आईं हैं। विदिशा में लोकसभा चुनाव के दरम्यान कांग्रेस के प्रत्याशी राजकुमार पटेल द्वारा तो नामांकन ही नहीं भरा गया था। जिस तरह डिंपल यादव के लिए कन्नोज की सीट खाली छोड़ दी गई थी उसी तर्ज पर कांग्रेस लखनादौन में एक निर्दलीय प्रत्याशी की रणनीति के सामने अपने आप को बौना ही पा रही है। इस तरह की परिस्थितियां निर्मित होने से कांग्रेस के रसातल में जाने के मार्ग तेजी से प्रशस्त होते जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस इसी तरह कदम ताल करती रही तो आने वाले दिनों में प्रदेश में कांग्रेस का नामलेवा ही नहीं बचेगा।


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