सोमवार को एफडीआई
पर सर्वदलीय बैठक
(महेश रावलानी)
नई दिल्ली (साई)।
संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी
निवेश एफ डी आई के मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को सभी राजनीतिक दलों की बैठक
बुलाई है। उन्होंने यह कदम इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों के
कड़े रूख को देखते हुए उठाया है।
भाजपा और वामदल मत
विभाजन वाले नियम के तहत इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं।
श्री कमलनाथ ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर बातचीत से कोई परहेज नहीं है।
उन्होंने कहा कि सराकर नियमों के तहत इस बारे में चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष
जब चाहेगा तब चर्चा हो जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी
के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार मत विभाजन वाले नियम के
तहत चर्चा कराने से कतरा रही है, क्योंकि उसके पास लोकसभा में बहुमत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि एनडीए के साथ जो विपक्षी दल एफडीआई रिटेल
सेक्टर में नहीं आए इसको लेकर जो बयान बाहर दे रहे हैं, वो सब पार्लियामेंट
में वोट करेंगे और इसलिए सरकार डर रही है और वो इस पर वोटिंग के प्रावधान से भाग
रही है।
मार्क्सवादी
कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री को लोकसभा
में सभी दलों के नेताओं के साथ अलग से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वामदल मत
विभाजन के साथ चर्चा के अपने रूख से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि हमें लगता
है कि ये देश की जनता के लिए यह एक गंभीर मुद्दा है। भारत की आबादी का एक तिहाई
हिस्सा जीवन यापन के लिए खुदरा व्यापार क्षेत्र पर निर्भर है। इस क्षेत्र से उनको
हटाकर विदेशी निवेश के लिए इसे खोलने से उन लोगों पर बोझ बढ़ेगा जो पहले से ही
महंगाई से परेशान हैं।
जनता दल युनाईटेड
के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि चाहे नियम-१८४ हो या नियम-१९३, लेकिन इस मुद्दे पर
चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी सहित सभी
राजनीतिक दलों से संसद का कामकाज चलने देने की अपील की।
एफडीआई के मसले पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष
मायावती ने कहा कि पहले सरकार तय करे, उसके बाद उनकी पार्टी संसद के भीतर अपना रूख
स्पष्ट करेगी। ये केन्द्र की सरकार को डिसीजन लेना है कि वो किस नियम के तहत
पार्लियामेंट में चर्चा कराते हैं। जिस भी नियम के तहत पार्लियामेंट के अंदर चर्चा
होगी, हमारे
पार्टी का एफडीआई के ऊपर क्या स्ट्रेंड होगा, उसी समय पार्लियामेंट के अंदर स्पष्ट करें।


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