रविवार, 25 दिसंबर 2011

सड़ा दिया गहलोत ने केंद्र का गेंहू!


सड़ा दिया गहलोत ने केंद्र का गेंहू!

गरीबों को नहीं बट पाया छः साल में गेंहूं

(प्रेम चंद मीणा)

चित्तौड़गढ़ (साई)। केंद्र पोषित योजनाओं का राशन अंततः छः सालों बाद सड़ गया और जरूरतमंदों को नहीं बांटा जा सका है। 119 क्विंटल गेंहूं को बीते दिनों सड़ जाने पर जमींदोज़ करना पड़ा। आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि कांग्रेसनीत केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा बिल इसलिए ला रही है, ताकि कोई भूखा न मरे, वहीं सूबे की कांग्रेस की अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गरीबों के मुंह के निवाले को सड़ाकर उसे दफनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में एसजीआरवाय योजना के तहत यह गैंहू आया था। कुछ समय बाद ही यह योजना बंद हो गई। फिर इस गेंहूं को मनरेगा के श्रमिकों के वितरण के लिए प्रस्ताव दिया गया। समय पर कूपन न पहुंचने से यह योजना भी कारगर साबित नहीं हुई। सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका है कि अगर सरकार के पास अनाज के भण्डारण की उचित व्यवस्था नहीं है तो अनाज सड़ने के बजाए उसे गरीबों में बांट देना ही श्रेष्यसकर है।

दस अगस्त 2009 को इस गेंहूं का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। प्रयोगशाला में इसे मानव के उपयोग के लिए उचित नहीं माना गया। सड़े हुए गेंहू से उठने वाली दुर्गंध इतनी भयानक थी कि जीएसएस के बैठक हाल में एक पल भी बैठना दुश्वार हो रहा था। पिछले साल दिसंबर माह में ही तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ.आरूषी मलिक ने इसके निस्तारण के लिए एक कमेटी बना दी थी।

कमेटी भी सरकारी तर्ज पर कार्यवाही कर रही थी। इसी बीच एक साल बीत गया। राज्य के लोक निर्माण मंत्री भरत सिंह जब चित्तौड़गढ़ पहुंचे और उन्हें इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने सड़े हुए गैंहूं के बारे में उचित कार्यवाही का निर्देश दिया। जिला कलेक्टर ने छः साल पुराना 119 क्विंटल गेंहूं अंततः गड्ढ़ा खुदवाकर जमीन में गड़वा दिया।

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