बुधवार, 8 अगस्त 2012

बाढ़ के तांड़व से निपट रही है सेना


बाढ़ के तांड़व से निपट रही है सेना

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश में कहीं सूखा तो कहीं पानी के कहर का आलम है। अनेक सूबों में बाढ़ ने बुरी तरह तबाही मचाई हुई है। उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बाढ़ का तांड़व चरम पर है। प्रशासनिक मदद उंट के मुंह में जीरा ही साबित हो रही है।
देहरादून से उत्तराखंड समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से दिशा कुमारी ने बताया कि राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जोरों पर है। सेना के हैलीकॉप्टरों ने उत्तरकाशी जिले के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में भोजन के पैकेट गिराये। राज्य में मूसलाधार वर्षा, बाढ़ और बादल फटने से भारी तबाही हुई है और अबतक लगभग २८ लोगों की मौत हो गई है। जिले में राहत कार्यों में अर्धसैनिक बलों के जवान भी हाथ बंटा रहे हैं। सेना के जवान अस्सी गंगा पर अस्थाई पुल बनाने के प्रयास कर रहे हैं।
इस बीच उत्तरकाशी कस्बे और आसपास के गांवों में कई दिनों की भारी वर्षा के अब जनजीवन सामान्य होने लगा है। चार धाम यात्रा को जाने वाले राजमार्गों को फिर से खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कल नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें राज्य की मौजदा स्थिति की जानकारी दी तथा राहत कार्यों के लिए वित्तीय मदद का अनुरोध किया।
विजय बहुगुणा ने कहा कि उन्होंने डॉ.मनमोहन सिंह से बात की है और केंद्र से हर संभव मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि जो यात्री फंसे हैं उन्हें बाहर निकालने के लिए सेना के चौपर की जरूरत है क्योंकि रास्तों को अभी दुरूस्त करने में काफी समय लग सकता है। उधर, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री श्री बहुगुणा को पत्र भेजकर राज्य में बाढ़ में लोगों की मौत पर गहरा दुःख प्रकट किया और मारे गए लोगों के परिवारजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पिछले दिनों पांच गुना फैली भागीरथी ने अपने किनारे के क़रीब 150 मकान मिट्टी में मिला दिए। अब भी सैकड़ों मकान हैं जिनके नीचे की बुनियाद हिल चुकी है और तेज़ बारिश का एक दौर ही उन्हें नदी में मिला सकता है। बारिश से आई इस त्रासदी से इलाके के क़रीब 20 हज़ार लोग प्रभावित हुए हैं। करीब आठ सौ तीर्थयात्री अब भी जगह-जगह फंसे हुए हैं। 20 गांव अब भी मुख्य सड़कों से कटे हुए हैं। बारिश के बाद कई जगह पूरी की पूरी सड़क ही नदी में समा गई।
बीआरओ के जवान अब दिन-रात मेहनत कर सड़कें खोलने या फिर उन्हें नए सिरे से तैयार करने में जुटे हैं ताकि ज़रूरत वाले इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा सके। जिन इलाकों में सड़क संपर्क बहाल होने में वक्त लग रहा है वहां हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री भिजवाई जा रही है।
भगीरथी नदी अब भी कई जगह ख़तरे के निशान से चार मीटर ऊपर बह रही है। स्थानीय स्कूलों को हफ़्तेभर के लिए बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार के मुताबिक इस आपदा में क़रीब छह सौ करोड़ का नुकसान अभी तक हो चुका है जिसके लिए केंद्र सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है।
उत्तर भारत के उत्तराखंड, यूपी और मध्घ्यप्रदेश के कई जिले बाढ़ संकट से जूझ रहे हैं। भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्घ्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। भोपाल से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मध्यप्रदेश ब्यूरो से नंद किशोर ने खबर दी है कि राज्य में नर्मदा नदी के ऊपरी हिस्सों में अतिवृष्टि एवं वहां के विभिन्न बांधों से छोड़े गए पानी की वजह से नर्मदा के निचले हिस्से के इस जिले के महेश्वर, कसरावद एवं बड़वाह तहसीलों के बीस से अधिक गांवों की निचली बस्तियों को प्रशासन ने मंगलवार दोपहर बाद से खाली कराना शुरू कर दिया है।
उधर लखनउ से साई ब्यूरो दीपांकर श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश के बीच अनेक नदियां उफान पर हैं बाढ़ तथा कटान से हजारों लोग प्रभावित हैं। केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, घाघरा, शारदा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती तथा कुन्हरा नदिया उफान पर हैं और अनेक स्थानों पर खतरे के निशान से उपर बह रही हैं। अनेक जगहों पर बाढ़ तथा कटान से प्रभावित हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर गये हैं।
राप्ती नदी का जलस्तर बलरामपुर में खतरे के निशान से काफी उपर उच्चतम बाढ़ स्तर के नजदीक पहुंच गया है। साथ ही भिनगा (श्रावस्ती), बांसी (सिद्धार्थनगर), रिगौली (गोरखपुर) तथा बर्डघाट (गोरखपुर) में यह नदी लाल चिहन के आसपास बह रही है।
कोच्चि से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की ब्यूरो सविता नायर ने बताया कि केरल में मरने वालों की तादाद पांच हो गई है। कोझीकोड जिले में दो और शव बरामद किये जाने के साथ ही भारी वर्षा से जमीन खिसकने और बाढ़ के कारण मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर पांच हो गयी है। सरकार ने राहत कार्यों में नौसेना और राष्ट्रीय आपदा बचाव बल की मदद मांगी है।
अधिकारियों ने बताया कि तीन और लापता लोगों की तलाश जारी है। नौसेना सूत्रों ने बताया कि कोझीकोड़ और कन्नूर जिलों के लिए पहले ही नौसेना कर्मियों के दो दलों को रवाना कर दिया गया है। भारी बारिश के कारण कोझीकोड़ के पुल्लोरामपारा पहाड़ी इलाके में और कन्नूर जिले के इरीट्टी में तबाही का आलम है। नौसेना सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के आग्रह पर यह दल रवाना किए गए हैं। प्रत्येक दल के साथ पांच चालक और एक पेशेवर चिकित्सक है।
उधर, गुवहाटी से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के असम ब्यूरो से जाकिया तस्मिन रहमान ने खबर दी है कि ब्रह्मपुत्र नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश होने के चलते असम में फिर से बाढ़ आ गई है और इससे सात जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के बारे में एक आधिकारिक बुलेटिन के मुताबिक समूचे राज्य में और खासतौर पर ब्रह्मपुत्र नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हुई बारिश से जल स्तर में काफी बढ़ोतरी हुई है।

कोई टिप्पणी नहीं: