शनिवार, 4 अगस्त 2012

नकली एकांउट की नकेल कसेगा फेसबुक


नकली एकांउट की नकेल कसेगा फेसबुक

(अनीष कौशल)

वाशिंगटन (साई)। अगर आप नकली अकाउंट से फेसबुक का उपयोग करते हैं तो इस आदत को बदल डालिये। क्योंकि फेसबुक अब नकली अकाउंट को बंद करने जा रहा है। बढ़ते फरजी यूजर्स को ध्यान में रखते हुए बहुत जल्द फेसबुक सख्त कदम उठायेगी। वाशिंगटन, भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया में फेसबुक का इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 95।5 करोड़ हो गयी है।
इन यूजर्स में से 8.3 करोड़ फरजी अकाउंट वाले लोग हैं। कंपनी इनके अकाउंट को बंद करना चाहती है। फेसबुक ने 30 जून, 2012 तक भारत में अपने मासिक सक्रिय उपयोग करनेवालों की संख्या 5.9 करोड़ बतायी है, जो वर्ष 2011 की इसी अवधि के मुकाबले 84 प्रतिशत अधिक है।
फेसबुक ने अपने ताजा जारी आंकड़ों में कहा है कि भारत, ब्राजील तथा इंडोनेशिया में इसके इस्तेमाल करनेवालों की संख्या में वर्ष 2012 की दूसरी तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कंपनी के अनुसार, दुनिया भर में इसके 95.9 करोड़ सक्रिय यूजर्स में 8.7 प्रतिशत फरजी अकाउंट वाले हैं। वहीं, दो-दो अकाउंट इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 4.8 प्रतिशत (4.58 करोड़) है। करीब 2.4 प्रतिशत (2.29 करोड़) अकाउंट ऐसे हैं, जो कंपनियों, समूहों के नाम पर बनाये गये हैं।
कंपनी ऐसे अकाउंट को सूचना लीक किये बिना स्वीकृत पेज के रूप में परिवर्तित करना चाहती है। कुल सक्रिय इस्तेमाल करनेवालों में करीब 1.5 प्रतिशत ऐसे अकाउंट हैं, जो सबसे ज्यादा परेशानी पैदा करनेवाले हैं। करीब 1.43 करोड़ अकाउंट ऐसे हैं, जिसके बारे में फेसबुक का मानना है कि इन्हें खास तौर पर कंपनी की अवांछनीय ई-मेल से संबंधित शर्तों के उल्लंघन के लिए बनाया गया है। दुनियाभर में फेसबुक को रोजाना इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भी 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह 41.7 करोड़ से बढ़ कर 52.2 करोड़ हो गयी है। फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले बड़े बाजार ब्राजील, अमेरिका तथा भारत हैं।

भूख से मर गए तीन शावक


भूख से मर गए तीन शावक

(आंचल झा)

रायपुर (साई)। नंदनवन में बुधवार को जन्म लेने वाले पांच लायन शावकों में तीन शावकों की शुक्रवार सुबह भूख से मौत हो गई। तीनों अपनी मां की मांद में मृत मिले। ऐसी आशंका है कि इनका जन्म तीसरे, चौथे और पांचवें क्रम में हुआ था। तीनों जन्म से ही कमजोर थे। उन्हें अपनी मां का दूध पीने का मौका ही नहीं मिला। बाकी बचे दो शावक तंदुरुस्त हैं।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार नंदनवन प्रबंधन ने तीनों का अंतिम संस्कार करने के पहले उनका पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही पता चला कि तीनों की मौत भूख से हुई। तीनों के पेट में दूध नहीं मिला।
एक मृत शावक के पेट की हड्डी भी टूटी हुई थी। इससे यह आशंका है कि वह अपनी मां के नीचे दब गया होगा। इस वजह से भी उसकी जान चली गई। वन विभाग और नंदनवन के विशेषज्ञों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कहा कि आमतौर पर एक-दो शावकों के बाद पैदा होने वाले शावक कमजोर होते हैं।
अत्यधिक कमजोरी के कारण वे अपनी मां के दूध तक नहीं पहुंच सके होंगे। इस बात की भी आशंका है कि पहले पैदा होने वाले बच्चों ने उन्हें दूध पीने का मौका नहीं दिया होगा। नंदनवन प्रबंधन को शावकों के मरने के बारे में सुबह 8 बजे पता चला। कर्मचारी उस समय सिंहनी को भोजन देने गए थे। उसके बाद उन्होंने अफसरों को खबर दी। तत्काल नंदनवन के अधीक्षक सहित तमाम अधिकारी वहां पहुंच गए।
वन महकमे के सूत्रों ने सामचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मादा सिंहनी की मांद से मृत शावकों को निकालने में नंदनवन के अधिकारियों को तीन घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। वन्य प्राणियों के विशेषज्ञों को बुलाकर मादा सिंहनी को किसी तरह बच्चों वाली मांद से निकालकर उसके बाजू वाली मांद में भेजा गया। वहां उसे भोजन दिया गया ताकि वह हिंसक होकर खुद को घायल न कर बैठे।
उसी दौरान नंदनवन के कर्मी तुरंत बच्चों वाली मांद में घुसे। उन्होंने तीनों मृत शावकों के शव निकालने के अलावा दोनों तंदरुस्त शावकों को बाहर निकाला और उनकी सफाई की। बाद में उन्हें वापस मांद में छोड़ दिया गया। नंदनवन के अधीक्षक आरसी दुग्गा ने बताया कि दोनों बच्चे और सिंहनी की हालत सामान्य है। देर रात तक मादा व बच्चों की देखभाल में खुद अधिकारी जुटे थे। अफसरों का कहना है कि मौसम साफ होने तक अतिरिक्त देखभाल करनी होगी। गौरतलब है कि नंदनवन की सिंहनी ने बुधवार को अपरान्ह तीन बजे तीन और रात 10 बजे दो शावकों को जन्म दिया था।

आज बंद रहा आरटीओ ऑफिस


आज बंद रहा आरटीओ ऑफिस

(नरेंद्र ठाकुर)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थापित अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का कार्यालय शनिवार को लगभग बंद ही रहा। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के चलते कार्यालय की अनेक शाखाओं में ताले झूलते नजर आए। अपरान्ह एक बजे तक चालक अनुज्ञा शाखा को छोड़कर शेष शाखाएं बंद ही थीं।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के इस प्रतिनिधि ने जब मौके पर जाकर पड़ताल की तो ज्ञात हुआ कि क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी श्री शर्मा खवासा जांच चौकी की ओर कूच कर चुके थे। शेष सारे कर्मचारी अनुपस्थित ही थे। महज एक लाईसेंसिंग ब्रांच में ही कुछ भीड़ भाड़ दिखाई पड़ रही थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भिण्ड जिले में माननीय न्यायालय के आदेश पर आए गए जांच दल को भी दस्तावेज देखने और बयान लेने के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। कार्यालय के मुख्यद्वार पर ही पट्टे वाले कच्छे बनियान सूखते नजर आए। एसा लग रहा था मानो इस कार्यालय का कोई धनी धोरी ही ना रह गया हो।
यह अगस्त माह का पहला शनिवार होने के चलते अवकाश का दिन भी नहीं था। गौरतलब है कि सिवनी जिले में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सीमा पर अवस्थित परिवहन जांच चौकी परिवहन विभाग के लिए टकसाल से कम नहीं है। कहा जाता है कि इस चौकी से प्रतिमाह करोड़ों रूपयों की वसूली कर सरकारी राजस्व में और इससे अधिक अधिकारियों, नेताओं और मीडिया की जेब में भेजा जाता है।

भास्कर को भा गई रजनीगंधा की गंध

भास्कर को भा गई रजनीगंधा की गंध

(तेजवानी गिरधर / विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। इन दिनों देश का एक नामी अखबार दैनिक भास्कर एक और जनहित अभियान पर निकल पड़ा है। पान मसाले पर प्रतिबंध का अभियान। लेकिन दैनिक भास्कर की इस मुहिम के में एक विरोधाभासी और हास्यास्पद तथ्य उभर कर सामने आया है। विरोधाभासी इसलिए कि एक ओर दैनिक भास्कर को मिली केन्द्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान उर्फ सीटीआरआई, राजमुंदरी में बताया गया है कि पान मसाला रजनीगंधा में 2.26 प्रतिशत निकोटिन है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, जबकि दूसरी ओर उसी दैनिक भास्कर में रजनीगंधा ने एक विज्ञापन जारी कर खुलासा किया है कि सेंट्रल टोबेको रिसर्च इंस्टीट्यूट-इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रिकलचर, राजुमंदरी से यह प्रमाणित हो चुका है कि उनके उत्पाद में निकोटिन नहीं है।
हास्यास्पद यह है कि जिन दो संस्थानों का नाम ये दोनों हिन्दी और अंग्रेजी में ले रहे हैं ये संस्थान और इंस्टिट्यूट एक ही हैं, केवल हिंदी और अंग्रेजी में नाम का फर्क है। जिस पान मसाला विरोधी मुहिम के तहत दैनिक भास्कर ने 29 जुलाई के अंक में रजनीगंधा सहित अन्य पान मसालों के बारे में रिपोर्ट छापी है, उसी दैनिक भास्कर के 2 अगस्त के प्रथम पृष्ठ पर रजनीगंधा का विज्ञापन छापा है।
सवाल ये उठता है कि आखिर किसकी रिपोर्ट सही है? दैनिक भास्कर को मिली रिपोर्ट, जिसके आधार पर उसने मुहिम पर और अधिक जोर दिया है या फिर रजनीगंधा की ओर से उल्लेखित रिपोर्ट, जो कि बाकायदा विज्ञापन के जरिए बता रहा है कि उसके उत्पाद में न तम्बाकू है और न ही निकोटिन। इसलिए अपने पसंदीदा रजनीगंधा पान मसाला की शुद्धता का आनंद पूरे विश्वास के साथ लीजिए। एक ही संस्थान भला दो तरह की विरोधाभासी रिपोर्ट कैसे जारी कर सकता है? जरूर कोई घालमेल है। उससे भी अफसोसनाक ये कि जो समाचार पत्र पान मसाला विरोधी मुहिम का श्रेय ले रहा है और उत्पाद विशेष का हवाला दे रहा है, वह भला कैसे उसी पान मसाला का विज्ञापन छाप रहा है। ऐसा करके खुद भास्कर ने अपनी ही खबर का खंडन कर दिया है। मगर इससे पाठक तो भ्रमित हो रहा है। वह भला कहां जाए? उसे असलियत कौन बताएगा?
इतना ही नहीं इससे तो गुटका गोवा 1000, गुटका आरएमडी, खैनी राजा व खैनी चौनी-खैनी के बारे में छपी रिपोर्ट पर भी संदेह होता है, जिसमें बताया गया है कि उनमें क्रमशः 2.04, 1.88, 1.02 व .58 प्रतिशत निकोटिन है। और इस तरह से दैनिक भास्कर की वह मुहिम ही सिरे से खारिज होती नजर आ रही है, जिसके अनुसार सादा पान मसाला में भी निकोटिन मौजूद है, अतरू उस पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।
यहां बता दें कि भास्कर ने अपनी खबर में बताया है कि बाजार में जीरो टोबेको के नाम से बिक रहे मशहूर ब्रांडों के पान मसाला भी गुटखा और तंबाकू जितने ही खतरनाक हैं। इनमें गुटखा और तंबाकू उत्पादों से कहीं ज्यादा मात्रा में निकोटिन पाया गया है, जबकि यह जीरो प्रतिशत होना चाहिए। यह खुलासा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिश पर केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान सीटीआरआई, राजमुंदरी की जांच रिपोर्ट में हुआ। सीटीआरआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिश पर बाजार में मौजूद पान मसाला, तंबाकू और गुटखा उत्पादों के सैंपल लेकर निकोटिन की मात्रा की जांच की थी। रजनीगंधा में 2.26 प्रतिशत निकोटिन पाया गया, जो सभी सैंपलों में सबसे ज्यादा था। सीटीआरआई तंबाकू पर शोध करने वाली केंद्र सरकार की सर्वाेच्च संस्था है। यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर के अधीन काम करता है। इसकी रिपोर्ट विश्वसनीय मानी जाती है।
दैनिक भास्कर के तीन अगस्त की खबर में भी इसी बात पर जोर दिया जा गया है कि राज्य सरकार की ओर से गुटखे पर लगाई गई पाबंदी के आदेशों में हर उस खाद्य पदार्थ पर बैन है, जिसमें निकोटिन मिला है। इसके बावजूद प्रदेश में ऐसे पान मसाले की बिक्री खुले आम की जा रही है, जिनकी जांच में खतरनाक निकोटिन की पुष्टि हो चुकी है।
सरकार अब इसे यह कहकर टाल रही है कि केंद्रीय कानून फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट में संशोधन किए बिना रोक संभव नहीं है, लेकिन सरकार के आदेश में स्पष्ट है कि वे खाद्य पदार्थ, जिनमें निकोटिन है उनके भंडारण, उत्पादन व बिक्री पर रोक रहेगी। लब्बोलुआब, बड़ा सवाल ये है कि जब सादा पान मसालों में निकोटिन होने की रिपोर्ट पर ही सवालिया निशान लग गया है तो दैनिक भास्कर की इस मुहिम के मायने ही क्या रह जाते हैं?

राज्यपाल ने इकबाल अहमद को मूख्य सूचना आयुक्त की शपथ दिलाई


राज्यपाल ने इकबाल अहमद को मूख्य सूचना आयुक्त की शपथ दिलाई

(संतोष पारदसानी)

भोपाल (साई)। राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने आज यहां राजभवन में प्रातः 11 बजे आयोजित एक गरिमामय समारोह में श्री इकबाल अहमद को प्रदेश के नये मुख्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद राज्यपाल श्री यादव ने नये मुख्य सूचना आयुक्त श्री इकबाल अहमद को बधाई और शुभकामनाएं दीं। शपथ ग्रहण की कार्यवाही का संचालन प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्री सुदेश कुमार ने किया।
नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर, वित्त मंत्री श्री राघव जी, वन मंत्री श्री सरताज सिंह, गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, महापौर श्रीमती कृष्णा गौर भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्य सचिव श्री आर. परशुराम भी समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा श्री इकबाल अहमद के परिजन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

स्वच्छ पर्यावरण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ


स्वच्छ पर्यावरण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ

(महेंद्र देशमुख)

बालाघाट (साई)। सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि स्वच्छ पर्यावरण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने स्वयं सेवी संगठनों के साथ-साथ युवाओं की भागीदारी किए जाने पर जोर दिया है। श्री बिसेन पिछले दिनों बालाघाट के डाईट परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बढ़ी संख्या में लोगों के साथ पौधरोपण भी किया। इस मौके पर विधायक श्री रामकिशोर कावरे भी मौजूद थे। सहकारिता मंत्री ने लगाए गए पौधों की सुरक्षा का संकल्प उपस्थित जन समूह को दिलाया। वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन हरियाली महोत्सव के अंतर्गत मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा किया गया था।
सहकारिता मंत्री श्री बिसेन ने बालाघाट में उद्यमिता विकास केन्द्र में प्रशिक्षण ले रही कामकाजी महिलाओं से चर्चा की। श्री बिसेन कहा कि आज के दौर में महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। समन्वयक श्री अजय तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को कौशल विकास के तौर पर विभिन्न विधाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

शिंदे का सेमीफायनल है होम मिनिस्ट्री में


शिंदे का सेमीफायनल है होम मिनिस्ट्री में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। आधे देश को अंधेरे में ढकेलने वाले केंद्रीय उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को उसी दिन पदोन्नत कर देश का सबसे महत्वपूर्ण गृह विभाग सौंप दिया गया है। भारी विरोध के बाद भी शिंदे ने अंततः गृह मंत्री की शपथ ली और अपने गृह सूबे महाराष्ट्र में वे पूणे में एक प्रोग्राम में शिरकत करने जा ही रहे थे कि सीरियल धमाकों से उनका स्वागत भी हो गया। माना जा रहा है कि वज़ीरे आज़म डॉ।मनमोहन सिंह के सक्सेसर के रूप में सुशील कुमार शिंदे को देखा जा रहा है।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (बतौर सांसद श्रीमति सोनिया गांधी को आवंटित सरकारी आवास) के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जल्द ही दलितों को लुभाने के लिए अब दलित नेता सुशील कुमार शिंदे को अहम जिम्मेदारी से नवाजने जा रही है। सूत्रों ने कहा कि ग्रिड फेल होने के अपवाद को छोड़ दिया जाए तो शिंदे का कार्यकाल काफी हद तक निर्विवादित ही रहा है। सूत्रों की मानें तो शिंदे द्वारा अवंथा समूह के मालिक गौतम थापर के साथ उर्जा क्षेत्र में निभाई गई अपनी यारी से कांग्रेस के कुछ नेता खफा हैं जिसकी शिकायत सोनिया और राहुल से की जा चुकी हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शिंदे की ताजपोशी गलत समय में की गई। दरअसल जब उनके नाम की घोषणा हुई उस वक्त आधा देश अंधेरे में डूबा हुआ था। ग्रिड फेल होने की जिम्मेदारी अंत तक शिंदे द्वारा नहीं ली गई। इसके उपरांत उनके गृह मंत्री बनते ही उनके गृह सूबेे में पुणे के सीरियल ब्लास्ट से उनका स्वागत होना भी चर्चित ही रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आला नेताओं के साथ रायशुमारी के बाद यह निष्कर्श सामने आया कि पार्टी का दलित आधार और वोट बैंक बुरी तरह खिसल और रीत गया है। जो राहुल गांधी की ताजपोशी में सबसे बड़ा बाधक बनकर सामने आ रहा है। 80 लोकसभा सीटों को अपने में समेटने वाले यूपी में मायावती ने दलितों को अपने पक्ष में रिझाकर कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचाया है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि संप्रग एक ने मनरेगा, कर्ज माफी, सूचना का अधिकार जैसे बड़े लोकलुभावन फैसलों की बैसाखी पर चुनाव जीता था, किन्तु यूपीए टू की झोली में घपले, घोटाले, भ्रष्टाचार आदि के अलावा और कुछ भी नहीं है। यही कारण है कि आम कांग्रेसी का मनोबल गिरा हुआ है।
आज देश की हालत यह है कि आम आदमी का विश्वास प्रधानमंत्री डॉ।मनमोहन सिंह और उनकी टीम पर से पूरी तरह उठ ही चुका है। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स पर भी आम आदमी द्वारा कांग्रेस का बुरी तरह मजाक उड़ाया जा रहा है। कांग्रेस की गिरती साख और पिटती भद्द के चलते उपजी परिस्थितियों में सोनिया शायद ही राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने का जोखिम उठाएं।
(क्रमशः जारी)

कमजोर मानसून की आशंका ने उड़ाई सरकार की नींद


कमजोर मानसून की आशंका ने उड़ाई सरकार की नींद

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश में इस वर्ष दक्षिण पश्चिमी मॉनसून की बारिश में कमी रहेगी। मौसम विभाग की ओर से कल घोषित मॉनसून के नए पूर्वानुमानों में यह बात कही गयी है। विशेषज्ञों ने इसे तीन साल बाद सूखे जैसे हालात होने का शुरूआती लक्षण बताया है। मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि अगस्त में मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना है लेकिन सितम्बर में मध्य प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने से बारिश में कमी के आसार है।
प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने की स्थिति को अलनीनो कहा जाता है। ज्ञातव्य है कि जून-जुलाई में 19 प्रतिशत कम बारिश हुई। विशेषज्ञ इसकी तुलना 2002 या फिर उससे बदतर 1918 के सूखे से करने लगे हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार 2002 में 19 प्रतिशत जबकि 1918 में 28 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी।
उधर, अहमदाबाद से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से जलपान पटेल ने बताया कि बारिश की कमी का सामना कर रहे चार राज्यों के दौरे के तहत कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में एक केंद्रीय दल गुजरात पहुंच गया है। इस दल में ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश भी शामिल हैं जो राज्य में बारिश की कमी और पानी के अभाव के असर का आंकलन करेंगे।
कल शाम अहमदाबाद पहुंचने के बाद श्री पवार ने कहा कि दल के सदस्य हालात का जायजा लेने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस मंत्री समूह कें सदस्यों में वित्त, खाद्य, जल और ग्रामीण विकास मंत्री शामिल हैं। साई संवाददाता के अनुसार यह दल अतिरिक्त केंद्रीय धन मुहैय्घ्या कराने के राज्यों के अनुरोध पर भी विचार करेगा।
गुजरात पहुंचने के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार ने कहा कि केन्द्र की सबसे बड़ी प्राथमिकता सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और रोजगार की व्यवस्था करना है। कल शाम प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने श्री पवार से मिलकर राज्य को केन्द्रीय सहायता देने की मांग की थी, जबकि आज राज्य सरकार के साथ बैठक में अन्य चीजों के अलावा कृषि बीमा के जल भुगतान पर चर्चा हो सकती है। इस मॉनसून में गुजरात में अब तक सिर्फ बीस प्रतिशत बारिश हुई है, जबकि करीब साठ प्रतिशत क्षेत्र में बुआई हो सकती है। इसमें से भी बीस लाख हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में बुआई विफल रहने की आशंका है।
उधर, मॉनसून के बारे में इस साल अपनी भविष्यवाणियों के कारण चर्चा में आए मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त में अच्छी बारिश होने के आसार हैं, लेकिन सितंबर में अल नीनो प्रभाव के कारण दिक्कत हो सकती है। मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के साथ चर्चा के दौरान कहा कि अब तक के संकेतों से लग रहा है कि अगस्त में अच्छी बारिश होगी।
सूत्रों ने कहा कि इस साल अब तक मॉनसून की बारिश औसत से करीब 20 फीसदी कम हुई है। इसका असर खरीफ की कई फसलों की बुआई पर पड़ा है। राठौर ने कहा कि सितंबर में प्रशांत सागर के पानी का तापमान सामान्य से 0.5 से 0.7 डिसे तक ज्यादा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ तो अल नीनो प्रभाव के सक्रिय होने की आशंका पैदा हो जाएगी। इसका असर भारत में होने वाली बारिश पर पडे़गा। राठौर का कहना था कि इस आशंका के बारे में सरकार को पहले ही बता दिया गया था। मंगलवार को कृषि मंत्री शरद पवार ने इस बात से साफ इनकार किया था कि मौसम विभाग ने ऐसी कोई जानकारी सरकार को दी थी।

टियर टू शहरों में खुलेंगी ग्रामीण बैंकों की शाखाएं


टियर टू शहरों में खुलेंगी ग्रामीण बैंकों की शाखाएं

(महेश रावलानी)

नई दिल्ली (साई)। भारतीय रिजर्व बैंक ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को टियर-टू शहरों में कुछ शर्तों के साथ बिना अनुमति के शाखाएं खोलने की अनुमति दे दी है। २००१ की जनगणना के अनुसार ५० हजार से ९९ हजार नौ सौ ९९ तक की जनसंख्या वाले शहर टियर-टू शहर माने जाते हैं । रिजर्व बैंक के इस फैसले से इन शहरों में बैंकिंग सेवाओं में बढ़ोतरी होगी।
रिजर्व बैंक ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को भी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खोलने, उनका स्थान बदलने, विलय करने और शाखाऐं बदलने के आवेदनों पर फैसला करने का अधिकार दे दिया है। रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय अब ऐसे आवेदनों को संबधित अधिकार प्राप्त समितियों के पास भेजे बगैर फैसला ले सकते हैं।

सरकारी भूमि हस्तांतरण के नियम हुए सरल


सरकारी भूमि हस्तांतरण के नियम हुए सरल

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। प्रधानमंत्री ने सरकारी भूमि हस्तांतरण करने की नीतियों में ढील देने को स्वीकृति दे दी है। इससे निजी-सरकारी-साझेदारी की परियोजनाओं में तेजी आएगी। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इससे सुनिश्चित होगा कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं पर प्रक्रियागत देरी का असर न पड़े। 
सरकारी भूमि के हस्तांतरण पर पिछले साल प्रतिबंध लगा दिया गया था। केवल एक सरकारी विभाग से दूसरे सरकारी विभाग को दी जाने वाली जमीन पर छूट दी गई थी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि मंत्रालयों से वैधानिक प्राधिकरणों या सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को हस्तांतरित की जाने वाली सभी जमीनों पर भी छूट दी गई है।

कहां गए पूर्व संघ प्रमुख!


कहां गए पूर्व संघ प्रमुख!

(श्वेता यादव)

बंग्लुरू (साई)। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन मैसूर में गुरुवार सुबह घर से पांच बजकर 20 मिनट पर सैर के लिए निकले थे और उसके बाद से उनके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। वह यहां अपने भाई से मिलने आए हुए थे। सूत्रों के अनुसार उनके साथ उनका अंगरक्षक भी नहीं था। सुदर्शन अपने साथ मोबाइल नहीं रखते थे, इसलिए उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
कहा जा रहा है कि सुदर्शन को पिछले कुछ अरसे से भूलने की बीमारी है और हो सकता है कि वह रास्ता भूल गए हों या किसी परिचित के पास गए हों। ज्ञातव्य है कि सुदर्शन साल 2000 से 2009 तक आरएसएस के प्रमुख रहे थे।

और, राधे मां को रातोंरात बना दिया गया महामंडलेश्वर


और, राधे मां को रातोंरात बना दिया गया महामंडलेश्वर

(अर्जुन कुमार)

हरिद्वार (साई)। निर्मल बाबा के बाद हाल ही में न्यूज चौनलों की सुर्खियां बटोरनेवाली राधे मां को हरिद्वार के जूना अखाड़े ने गुप्त रूप से रातोंरात महामंडलेश्वर बना दिया है। राधे मां यहां आयीं और समर्थकों के साथ रात में ही हरिद्वार से लौट भी गयीं, लेकिन किसी को पता तक नहीं चला। चर्चा है कि महामंडलेश्वर बनने के लिए राधे मां ने जूना अखाड़े को मोटी रकम दी है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राधे मां गुपचुप तरीके से मंगलवार की शाम मुंबई से हरिद्वार आयीं। उन्हें किसी बड़े होटल में ठहराया गया। रात करीब 10 बजे जूना अखाड़े में उन्हें अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर और प्रसिद्ध संत अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर पद पर आसीन किया गया। इस अवसर पर जूना अखाड़े के सभापति सोहन गिरि, राष्ट्रीय महामंत्री विद्यानंद सरस्वती आदि उपस्थित थे। राधे मां अब प्रयाग कुंभ में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर के रूप में भाग लेंगी।
बुधवार शाम तक जब सबको भनक लगनी शुरू हुई कि राधे मां महामंडलेश्वर बन गयी हैं, तब अखाड़े के संतों ने इसे स्वीकार किया। रात में गुपचुप तरीके से यह कार्य क्यों किया गया, पूछे जाने पर अखाड़े के महंतों ने बताया कि संन्यास परंपरा में रात में दीक्षा देने का विधान है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कुंभ आदि पर ऐसा होता रहा है।

खुलने लगीं कोयला घोटाले की परतें


खुलने लगीं कोयला घोटाले की परतें

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। भारत के महालेखापरीक्षक की ‘परफॉर्मेस ऑडिट ऑफ कोल ब्लॉक एलोकेसंस’ रिपोर्ट के अंश लीक होने के बाद जारी सीबीआइ जांच के दौरान कोयला घोटाले से जुड़ी कई अनकही व अनसुनी बातें सामने आ रही हैं। लीक ड्राफ्ट रिपोर्ट में 2004-2009 के बीच कोल ब्लॉक आवंटन से सरकारी खजाने को 10.67 लाख करोड़ रुपये की चपत लगने की बात कही गयी है।
कोयला मंत्रलय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी आफ इंडिया को बताया कि दस्तावेज बताते हैं कि 2005 से 2010 के बीच सरकार ने 150 कोल ब्लॉक के कैप्टिव यूज के आवेदन मंगाये। करीब 1400 कंपनियों ने आवेदन किया। इनमें 178 कंपनियों को कोल ब्लॉक आंवटित किये गये। कुछ ब्लॉकों को कई कंपनियों की साङोदारी में आवंटित किया गया। इस प्रक्रिया में मूल्य आधारित नीलामी नहीं हुई। आवंटन प्रक्रिया में खामियों का लाभ निजी कंपनियों ने खूब उठाया। दरअसल, कोयला मंत्रलय ने पहले विज्ञापन के जरिये कैप्टिव यूज के लिए कॉल ब्लॉक की उपलब्धता की जानकारी दी।
इसमें कहा गया कि मौजूदा समय में स्टील, सीमेंट, पावर आदि से जुड़ी जो कंपनियां क्षमता बढ़ाना चाहती हैं, वही आवेदन के योग्य होंगी। आवेदक कंपनियों ने तमाम आवश्यक कागजात के साथ आवेदन किये। इसके बाद आवेदनों को संबंधित विभागों और राज्य सरकारों को आवश्यक जांच के लिए भेजा गया। आवंटन के संबंध में फैसला कोयला सचिव की अध्यक्षतावाली स्क्रीनिंग कमेटी ने किया। कमेटी आवेदकों की पूंजी, पिछला रिकॉर्ड, कार्य की गति, तकनीकी अनुभव के अलावा विभागों और राज्य सरकारों की टिप्पणियों पर गौर किया।

मलेरिया के टीके के करीब पहुंचे वैज्ञानिक

मलेरिया के टीके के करीब पहुंचे वैज्ञानिक

(साई इंटरनेशनल डेस्क)

मेलबोर्न (साई)। आस्ट्रेलिया के शोधकर्ता मलेरिया का टीका विकसित करने के काफी नजदीक पहुंच गए हैं। इस बीमारी से लडने में यह बडी कामयाबी होगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि कीनिया में मलेरिया के शिकार वयस्को और बच्चों पर शोध के दौरान मलेरिया की रोकथाम के लिए प्रतिरक्षा तंत्र को विकसित किया गया।
यह मेलबर्न के बर्नेट इंस्टीट्यूट के एक दल ने शोध पाया कि ‘पीएफईएमपी1’ नामक प्रोटीन भविष्य में कारगर टीका विकसित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। ज्ञातव्य है कि दुनिया भर में हर साल मलेरिया से लाखों लोगों की मौत होती है। भारत में भी मलेरिया से मरने वालों की तादाद काफी अधिक है।

जूतों पर भगवान बुद्धसे बौद्ध समुदाय नाराज


जूतों पर भगवान बुद्धसे बौद्ध समुदाय नाराज

(अंकिता रायजादा)

न्यूयार्क (साई)। अमेरिकी में कैलीफोर्निया की एक कंपनी की ओर से जूतों पर भगवान बुद्ध की तस्वीरें दिखाने से यहां विवाद खडा हो गया है। बौद्ध समुदाय के लोगों ने बुद्ध के इस अपमान पर गुस्से का इजहार किया है। यहां रहने वाले तिब्बतियों और भूटानियों ने कंपनी ‘आइकन शूज’ को पत्र लिखकर अपने गुस्से से अवगत कराया है। फेसबुक पर कंपनी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। कंपनी की ओर से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
‘इंटरनेशनल कैंपेन फार तिब्बत’ नामक संगठन के भूचुंग सेरिंग ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है। बुद्ध की बुनियादी परंपरा यही है कि बुद्ध की तस्वीरों को श्रद्धा से देखा जाता है। जूते में बुद्ध की तस्वीर बौद्ध लोगों का अपमान है।’’ तिब्बती नेता ने कंपनी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘क्या आप इस पर विचार करेंगे और इस तस्वीर को हटाने की कृपा करेंगे।’’ तिब्बती संसद के उत्तरी अमेरिकी सदस्य ताशीह नामगयाल ने भी इस मामले को लेकर विरोध जताया है और कंपनी को पत्र लिखा है।

शिक्षक ने किया शिक्षा को कलंकित


शिक्षक ने किया शिक्षा को कलंकित

(विनीता विश्वकर्मा)

पुणे (साई)। गुरू-शिष्य के रिश्घ्ते को हमारे समाज में एक पवित्र रिश्ते के रूप में देखा जाता है। पर आज इस रिश्घ्ते को भी शर्मसार करने वाली घटना महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में देखने को मिली। जयसिंहपुरा तालुका के लक्ष्मीनारायण मालु हाई स्कूल के एक टीचर पर स्कूल की 8वीं क्लास की एक लड़की से गैंग रेप का आरोप लगा है। इस अपराध में उसके साथ स्कूल के 4 पूर्व छात्र भी शामिल थे।
स्कूल टीचर की इस हरकत से पर्दा तब उठा जब पीडित 13 साल की छात्रा ने अपने साथ ज्यादती का जिक्र माता-पिता से किया। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने सोमवार को आरोपी टीचर देवीदास राउत को गिरफ्तार कर लिया है। गैंग रेप के आरोपी अन्य चार पूर्व छात्रों में से भी एक लड़का पुलिस की गिरफ्त में आ गया है।
पीडित लडकी ने यह भी खुलासा किया है कि देवीदास और उसके अन्य छात्रों ने मिलकर उसके साथ कई मौकों पर गैंग रेप किया। इस घटना के बाद कई एनजीओ और राजनीतिक पार्टीयों ने प्रींसिपल के साथ स्कूल प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

फेसबुक पर ममता बनर्जी के एक लाख से ज्यादा फॉलोअर


फेसबुक पर ममता बनर्जी के एक लाख से ज्यादा फॉलोअर

(प्रतुल बनर्जी)

कोलकता (साई)। अलग अलग राजनीतिक दल और उनके नेता इंटरनेट पर अपनी पहुंच बनाने में लगे हुए हैं ऐसे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी को पीछे छोड दिया है और आज फेसबुक पर उनके आधिकारिक पन्ने पर फॉलोअरों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गयी।
करीब डेढ महीने पहले ही ममता बनर्जी ने फेसबुक पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि इससे पहले वह सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अपने उपर की गयी टिप्पणियों और कार्टूनों को लेकर नाराजगी भी जता चुकी हैं। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि संचार के इस युग में हम संचार के सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए लोगों से जुडे रहना चाहते हैं।
इनमें नुक्कड सभाओं से लेकर पोस्टर, आयोजनों से लेकर इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया तक रहे हैं। और अब यह दायरा सोशल नेटवर्किंग मंचों तक पहुंच गया है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी दफ्तर से घर लौटने के बाद हर रोज करीब आधा घंटा सोशल मीडिया वेबसाइटों पर खर्च करती हैं। अन्य नेता भी इंटरनेट पर अपनी पैंठ बनाने के प्रयास में लगे हैं लेकिन फिलहाल वे एक तरह से दीदी से बहुत पीछे हैं।

अंडर एचीवर ने रोके मंत्रियों के विदेश दौरे


अंडर एचीवर ने रोके मंत्रियों के विदेश दौरे

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। सर्वाधिक प्रसारित अमरिका की पत्रिका टाईम द्वारा भारत गणराज्य के वज़ीरे आज़म को अंडर एचीवर का खिताब देने की जानकारी शायद पीएमओ को पहले से ही थी। संभवतः यही कारण है कि पीएमओ ने विदेश यात्रा पर जाने वाले मंत्रियों के प्रस्तावों को अनुमति देने से इंकार कर दिया है।
पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि विदेश दौरों के लिए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इजाजत लेना केंद्रीय मंत्रियों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। साल 2009 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक वे 50 मंत्रियों के विदेश जाने के आवेदन ठुकरा चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो लेकिन मनमोहन सिंह पीएम शुरू में इतने कठोर नहीं थे। दरअसल पहले कुछ महीनों तक तो वे लगभग सभी को इजाजत दे देते थे। विदेश दौरों के लिए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इजाजत लेना केंद्रीय मंत्रियों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। साल 2009 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक वे 50 मंत्रियों के विदेश जाने के आवेदन ठुकरा चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री की मंत्रियों को इजाजत देने में सख्ती बरतने का कारण कटौती है हालांकि वो अनुमति की मांग को खारिज करते हुए इस शब्द का स्पष्ट तरीके से इस्तेमाल कम ही करते हैं। अधिकतर मामलों में वे मंत्री को बस यही लिखते हैं कि प्रधानमंत्री जरूरी नहीं समझते कि मंत्री इस विदेश यात्रा पर जाएं।
कई मामलों में वे मंत्रियों से दौरा रद्द करने को भी कहते हैं। और कई बार तो टेलीफोन पर ही प्रधानमंत्री की अनुमति न देने की बात कह दी जाती है। मिसाल के तौर पर अप्रैल में जब पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री जयंती नटराजन ने स्वीडन जाने की अनुमति मांगी तो उनके यह कहा गया कि प्रधानमंत्री समझते हैं कि मंत्री को यह दौरा नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद इस साल जिनेवा, स्विटजरलैंड जाना चाहते थे लेकिन उनसे कहा गया कि प्रधानमंत्री को लगता है कि दौरा करने की कोई जरूरत नहीं है।
वो मंत्री जिनकी गुजारिश नहीं मानी गई उनमें प्रवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि, श्रम एवं रोजगार मल्लिकार्जुन खड़गे, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री तुषार ए. चौधरी, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल और बिजली मंत्री का कार्यभार संभालकर अभी ही गृह मंत्री बने सुशील कुमार शिंदे शामिल हैं।

टीम अन्ना का सीआईए से रिश्ता खोज रही है सरकार


टीम अन्ना का सीआईए से रिश्ता खोज रही है सरकार

(शेषनारायण सिंह)

नई दिल्ली (साई)।केन्द्र की सरकार इस वक्त टीम अन्ना का सीआईए कनेक्शन तलाश रही है। ऐसा वह अपनी मर्जी से नहीं कर रही है बल्कि 30 मई को दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के जवाब में उसे यह काम करना पड़ रहा है क्योंकि 30 अगस्त तक केन्द्रीय गृहमंत्रालय को अपना जवाब दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपना है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीम अन्ना के तार सीआईए से जुड़े हुए हैं और भारत में भ्रष्टाचार भगाने की सारी मुहिम सीआईए की योजना अनुसार चलाई जा रही है। जनहित याचिका दाखिल करनेवाले वकील ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि भ्रष्टाचार भगाने की यह मुहिम फोर्ड फाउण्डेशन के पैसे से चल रही है जो कि अमेरिकी खुफिया एजंसी सीआईए का फ्रंट आर्गेनाइजेशन है और दुनिया के कुछ देशों से सिविल सोसायटी नाम से मुहिम चला रही है।
इस पेटीशन में वादी ने बहुत सारे आरोप लगाए हैं जिनमें कुछ तो सहसा अविश्वसनीय लगते हैं। इसी पेटीशन में आरोप है कि टीम अन्ना के कुछ सदस्य सीआईए से सम्बंधित हैं। इस केस में केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया गया है। 30 मई 2012 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर सभी आरोपों की जांच पूरी कर ले। उसके बाद ही मनोहर लाल शर्मा के आरोपों पर माननीय हाई कोर्ट विचार करेगा। ३० अगस्त २०१२ तक जांच के नतीजे हाईकोर्ट में दाखिल किये जाने हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ३० मई २०१२ के  दिन एक फैसला सुनाया था जिसमें आदेश दिया गया था कि केंद्र सरकार वादी मनोहर लाल शर्मा की याचिका में पेश किये गए आरोपों की जांच करे। इस केस में केंद्र सरकार को प्रतिवादी नंबर  एक पर रखा गया है। केंद्र सरकार के अलावा जो अन्य लोग प्रतिवादी थे  उनके नाम हैं, फोर्ड फाउंडेशन, अन्ना हजारे, मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, शान्ति भूषण और किरण बेदी। माननीय हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पेटीशन में जो भी प्रार्थना की गयी है, उसकी जांच प्रतिवादी नंबर एक (गृह मंत्रालय), अधिक से अधिक तीन महीने में पूरी करके इस अदालत के सामने हाज़िर हों। उसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा। सरकार को जांच करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
संविधान के अनुच्छेद २२६ के तहत सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा ने पी आई एल दाखिल किया था जिसमें भारत सरकार के अलावा टीम अन्ना के कुछ सदस्यों को पार्टी बनाया था। पेटीशन में आरोप लगाया गया है कि फोर्ड फाउंडेशन एक अमरीकन ट्रस्ट है  जो दुनिया भर में सरकार विरोधी आन्दोलनों को समर्थन देता है, फंड देता है और उनके मारफत उन देशों पर अपना एजेंडा लागू करता है। फोर्ड फाउंडेशन ने रूस, इजरायल, अफ्रीका आदि देशों में सिविल सोसाइटी नाम के ग्रुप बना रखे हैं। इनके ज़रिये वे बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, कलाकारों, उद्योगपतियों और नेताओं को अपनी तरफ खींचते हैं। तरह तरह के आकर्षक नारे देकर लोगों को आकर्षित करते हैं और सरकार के खिलाफ आन्दोलन करवाते हैं।
पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि फोर्ड फाउंडेशन अमरीकी खुफिया एजेंसी सी आई ए का फ्रंट भी है। पेटीशन में लिखा है कि टीम अन्ना के लोग संयुक्त रूप से फोर्ड फाउंडेशन  से धन लेते रहे हैं,आरोप है कि फोर्ड फाउंडेशन के रीजनल डाइरेक्टर ने कुबूल किया है कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल की श्कबीरश् नाम की एनजीओ को फंड दिया था। फोर्ड फाउंडेशन के वेबसाईट से भी पता चलता है कि २०११ में ही फोर्ड फाउंडेशन ने कबीर को दो लाख अमरीकी डालर दिया था। साथ में सबूत भी पेटीशन के साथ नत्थी है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि एफसीआरए एक्ट के तहत विदेशी पूंजी पाने के लिए भारत सरकार की अनुमति लेना जरूरी होता है लेकिन फोर्ड फाउण्डेशन से पैसा लेने के मामले में टीम अन्ना ने किसी नियम का पालन नहीं किया जिसके दोषी पाये जाने पर टीम अन्ना के सदस्यों को अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत के संविधान की धारा 19 (ए) के तहत प्रावधान है कि देश में ऐसी किसी भी गतिविधि को मान्यता नहीं दी जा सकती जो विदेशी पैसे से संचालित होता हो। इसलिए अन्ना का आंदोलन सीधे सीधे संविधान की धारा 19 (ए) का उल्लंघन है क्योंकि खुद अरविन्द केजरीवाल यह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें फोर्ड फाउण्डेशन, डच एम्बेसी और यूएनडीपी से पैसा लिया है। अब सरकार के जवाब के बाद ही तय होगा कि टीम अन्ना का फोर्ड फाउण्डेशन के रास्ते सीआईए से कोई रिश्ता है या नहीं। बहरहाल, सरकार के लिए यह स्थिति कम दुविधापूर्ण नहीं है। क्योंकि अगर वे अन्ना के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सच्चाई स्वीकार कर लेते हैं तो अमेरिका नाराज होता है और अगर वे इंकार कर देते हैं तो निश्चित रूप से अन्ना और उनके साथियों का मनोबल बढ़ जाएगा।

असम के इस्लामीकरण की खतरनाक चेतावनी


असम के इस्लामीकरण की खतरनाक चेतावनी

(नवनीत / विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। भारत के उत्तर-पूर्व का राज्य असम अपने यहां हो रहे हिंसा के वजह से सुर्खियों में है। असम में जो आग जल रही है वह महाविनाश के पहले की चेतावनी की तरह है कि अगर अभी भी हम नहीं सभलें तो एक दिन यह समस्या असम को ले डूबेगी। असम के निचले जिले कोकराझाड़ से जो हिंसा शुरु हुई थी वह फैलकर पास के चिरांग और धुबड़ी जिले में पहुंच गई। असम सरकार की माने तो यह जातीय हिंसा मुस्लिम और बोडो जनजाति के बीच चल रही है। लेकिन असलियत में यह संघर्ष असमी मुस्लिम के साथ नहीं अपितु बोडो जनजाति और असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के बीच चल रही है।
ये बांग्लादेशी घुसपैठिये एक व्यापक साजिश के तहत धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से भारत के विभिन्न हिस्सों विशेषकर उत्तर-पूर्व में अपनी तादात बढाते जा रहे है। हमारे देश का यह दुर्भाग्य है कि राजनीतिक गलियारे में इन्हें वोट बैंक के रुप देखा जाता है। इसके बारे केन्द्र सरकार व राज्य सरकार दोनों ही भलिभाति अवगत है लेकिन वोट बैंक व तुष्टीकरण के राजनीति के कारण वह हमेशा से इस पर परदा डालते आ रहे है लेकिन हालीया संर्घष ने असम में चल रही व्यपाक साजिश का चहेरा सभी के सामने रख दिया है।
दरअसल, बांग्लादेशी घुसपैठिए बड़े पैमाने पर असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, नागालैंड, दिल्ली और जम्मू कश्मीर तक लगातार फैलते जा रहे हैं। जिनके कारण जनसंख्या असंतुलन बढ़ा है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों का इस्तेमाल आतंक की बेल के रूप में हो रहा है, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और कट्टरपंथियों के निर्देश पर बड़े पैमाने पर हुई बांग्लादेशी घुसपैठ का लक्ष्य ग्रेटर बांग्लादेश का निर्माण करना है साथ भारत के अन्य हिस्सों में आतंकी घटनाओ को अंजाम देने के लिए भी इनका प्रयोग किया जा रहा है जिसके लिए भारत के सामाजिक ढांचे का नुकसान व आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है। दैनिक जागरण में छपे खबर के अनुसार सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीआइजी बरोदा शरण शर्मा इन घुसपैठियों को आने वाले समय की बड़ी समस्या मानते हैं। शर्मा सेवाकाल में लंबे समय तक बांग्लादेश सीमा पर तैनात रह चुके हैं।
हिन्दुस्तान सरकार के बोर्डर मैनेजमेण्ट टास्क फोर्स की वर्ष कि 2000 रिपोर्ट के अनुसार 1।5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर चुके हैं और लगभग तीन लाख प्रतिवर्ष घुसपैठ कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हिन्दुस्तान में बांग्लादेशी मुसलमानों घुसपैठीयों की संख्या इस प्रकार है रू पश्चिम बंगाल 54 लाख, असम 40 लाख, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि में 5-5 लाख से ज्यादा दिल्ली में 3 लाख हैं; मगर वर्त्तमान आकलनों के अनुसार हिन्दुस्तान में करीब 3 करोड़ बांग्लादेशी मुसलमानों घुसपैठिए हैं जिसमें से 50 लाख असम में हो सकते है।
असम में जिन तीन जिलों में यह संघर्ष चल रहा है तो अगर उन जिलो के जनगणना विशलेषण पर एक नंजर डाले तो स्थिती अपने आप ही साफ हो जाती है। सबसे पहले कोकड़ाझाड जिले पर नंजर डाले 2001-2011 में यहां जनसंख्या मे वृद्धि दर 5।19ः रही और 2001 के जनगणना के अनुसार इस जिले में  मुस्लिमों की संख्या बढकर लगभग 20ः हो गई है। अगर हम असम मुस्लिम जनंसख्या में वृद्धि दर को देखे तो बंग्लादेश से सटे जिलो में यह सबसे अधिक है जिसके पिछे बंग्लादेशी घुसपैठ मुख्य कारण है। धुबड़ी जिला भी बंग्लादेश के सीमा से सटा हुआ है। 1971 में यहां मुस्लिम जनसंख्या 64।46ः थी जो 1991 में बढकर 70।45ः हो गई, 2001 के जनगणना के अनुसार बढकर लगभग 75ः हो गई। कमोबेश यही हाल 2004 में बने चिरांग जिले का भी है।  जनसंख्या के बढोतरी का अनुपात देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि यह जनसंख्या में सहज हुई वृद्दी नहीं है अपितु यह बंग्लादेश से आये घुसपैठियों  का नतींजा है।
असम इन देश द्रोही तत्वो के लिए के लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योकिं अगर किसी प्रकार से असम पर ये अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेते है बाकि उत्तर-पर्व के राज्यों को भारत से अलग किया जा सकता है, असम ही जो उत्तर-पर्व को शेष भारत से जोड़ता है। यहां जरुत है कि हम इस मुद्दो को वोट बैंक के लिए घर्म का चादर न उढाये। यहां विरोध मुस्लमानो से नहीं है लेकिन वोट बैंक की राजनीती के चलते जब भी इस ओर कोई आवाज उठायी जाती है इसे सांप्रदायिकता के रंग में रंग दिया जाता है। बांग्लादेशी घुसपैठ मुस्लमानों के लिए ज्यादा नुकसान देह है इनसे जो जनसंख्या में भारी असंतुलन हो रहा है उससे  बेरोजगारी की समस्या उत्पन हो रही है इसके अलावा  जो सुविधायें हमारी सरकार हमारे अपल्संख्यों को देती है वह उसमें में भी वह धीरे- धीरे हिस्सेदार बनते जा रहे है।